🛕 बाबा की समाधि | 🕐 5 AM – 9 PM | 🎪 भाद्रपद मेला | 📍 पोकरण, जैसलमेर | 🚉 Ramdevra (RDRA) — 2 km | 🚕 खाटू से ~430 km
Ramdevra Temple (रामदेवरा मंदिर) राजस्थान के जैसलमेर जिले में पोकरण के पास स्थित बाबा रामदेव जी (रामसा पीर) का समाधि धाम है — भारत का वह अनोखा तीर्थ जहां हिंदू और मुसलमान दोनों समान श्रद्धा से शीश झुकाते हैं। हिंदू उन्हें भगवान द्वारकाधीश (कृष्ण) का अवतार मानते हैं, तो मुसलमान उन्हें रामशाह पीर / रामापीर कहकर पूजते हैं।
थार के रेगिस्तान में बसा यह धाम सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है — बाबा रामदेव ने 14वीं शताब्दी में छुआछूत के विरुद्ध आवाज उठाई, दलितों-वंचितों को गले लगाया और “सबका मालिक एक” का संदेश दिया। आज भी हर वर्ष भाद्रपद मेले में लाखों भक्त सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर बाबा के दरबार पहुंचते हैं — राजस्थान की सबसे बड़ी पदयात्राओं में से एक। खाटू श्याम जी की तरह रामदेवरा भी राजस्थान की लोक-आस्था का महाधाम है, और दोनों बाबा कलियुग के अवतारी माने जाते हैं।
बाबा रामदेव जी की कथा — Legend of Baba Ramdev Pir
बाबा रामदेव जी का जन्म विक्रम संवत 1409 (लगभग 1352 ईस्वी) में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को उंडूकासमेर (बाड़मेर) के तंवर राजपूत राजा अजमल जी और माता मैणादे के घर हुआ। कथा है कि निःसंतान अजमल जी द्वारका जाकर भगवान द्वारकाधीश से संतान की प्रार्थना की — भगवान ने वचन दिया कि वे स्वयं उनके पुत्र रूप में अवतार लेंगे। बालक रामदेव के जन्म के समय अनेक चमत्कार हुए — पालने में ही उन्होंने अपनी दिव्यता के संकेत दे दिए थे।
बाबा के चौबीस परचे (चमत्कार) लोक-साहित्य में अमर हैं — भैरव राक्षस का वध कर क्षेत्र को भयमुक्त करना, मृत को जीवनदान, कोढ़ियों को स्वस्थ करना, और डूबते व्यापारी के जहाज को उबारना। सबसे प्रसिद्ध कथा है मक्का के पांच पीरों की — बाबा की ख्याति सुनकर पांच पीर उनकी परीक्षा लेने आए। भोजन के समय पीरों ने कहा, “हम तो अपने कटोरे में ही भोजन करते हैं, जो मक्का में रह गए।” बाबा मुस्कुराए — और उसी क्षण पांचों कटोरे मक्का से उड़कर रामदेवरा आ गए। चमत्कार देख पीरों ने बाबा को “रामशाह पीर” की उपाधि दी और वचन दिया कि मुस्लिम समाज भी सदा उन्हें पूजेगा — यह वचन आज तक निभाया जा रहा है।
बाबा ने समाज के सबसे वंचित वर्गों को अपनाया — उनकी परम शिष्या डाली बाई मेघवाल समाज की कन्या थीं, जिन्हें बाबा ने बहन का दर्जा दिया। विक्रम संवत 1442 (1385 ईस्वी) में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को मात्र 33 वर्ष की आयु में बाबा ने रामदेवरा में जीवित समाधि ले ली। समाधि से पूर्व उन्होंने वचन दिया — “जो भक्त सच्चे मन से मेरी समाधि पर आएगा, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होगी।” डाली बाई ने बाबा से दो दिन पूर्व ही समाधि ली थी — उनकी समाधि भी परिसर में बाबा के निकट है।
इतिहास — History of Ramdevra Temple
बाबा की समाधि पर प्रारंभ में साधारण स्मारक था, जहां सदियों तक भक्त आते रहे। वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण 1931 ईस्वी में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी ने करवाया — सफेद पत्थर का सुंदर मंदिर, जिसके शिखर पर स्वर्ण कलश और नेजा (पंचरंगा ध्वज) लहराता है। मंदिर परिसर में बाबा की समाधि के साथ डाली बाई की समाधि, डाली बाई का कंगन (जिससे निकलना पुण्यदायी माना जाता है), और बाबा के परिवार की समाधियां हैं।
रामदेवरा गांव का मूल नाम रूणिचा था — बाबा ने ही इसे बसाया था, इसीलिए इसे रूणिचा धाम भी कहते हैं। बाबा के जीवनकाल में ही उन्होंने यहां राम सरोवर तालाब खुदवाया था — 150 एकड़ में फैला यह सरोवर आज भी भक्तों के स्नान का पवित्र स्थल है। मान्यता है कि सरोवर की मिट्टी घर ले जाने से सुख-समृद्धि आती है। पास ही परचा बावड़ी है — वह प्राचीन बावड़ी जहां बाबा ने परचा (चमत्कार) दिखाकर खारे पानी को मीठा कर दिया था।
मंदिर परिसर — Temple Complex
| स्थान / Place | विशेषता / Description |
|---|---|
| 🛕 मुख्य समाधि मंदिर | बाबा रामदेव जी की जीवित समाधि — 1931 में महाराजा गंगा सिंह द्वारा निर्मित |
| 🙏 डाली बाई की समाधि | बाबा की परम शिष्या — बाबा से दो दिन पूर्व समाधि |
| ⭕ डाली बाई का कंगन | पत्थर का वलय — इससे निकलना पुण्य और पापमुक्ति का प्रतीक |
| 💧 राम सरोवर | बाबा द्वारा खुदवाया 150 एकड़ का पवित्र सरोवर — स्नान का महत्व |
| 🏛️ परचा बावड़ी | जहां बाबा ने खारा पानी मीठा किया — प्राचीन बावड़ी |
| 🚩 नेजा (ध्वज) | पंचरंगा ध्वज — भक्त पदयात्रा में नेजा लेकर चलते हैं |
| 🐴 लीला घोड़ा | बाबा का प्रिय अश्व — कपड़े के घोड़े चढ़ाने की परंपरा |
| 👣 पगलिया | बाबा के चरण चिह्न — घरों और मंदिरों में पूजे जाते हैं |
बाबा को कपड़े का घोड़ा (लीला घोड़ा) चढ़ाने की अनोखी परंपरा है — कथा है कि बालक रामदेव के लिए दर्जी ने कपड़े का घोड़ा बनाया था, जिस पर बैठकर बाबा आकाश में उड़ गए थे। तभी से मनोकामना पूर्ति पर भक्त कपड़े के घोड़े अर्पित करते हैं। बाबा के प्रतीक पगलिया (चरण चिह्न) राजस्थान, गुजरात, MP के लाखों घरों में पूजे जाते हैं।
भाद्रपद मेला — The Great Ramdevra Fair
रामदेवरा का भाद्रपद मेला (अगस्त-सितंबर) राजस्थान के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है — बाबा की समाधि तिथि (भाद्रपद शुक्ल एकादशी) के आसपास दस दिनों तक चलता है। इस दौरान 20-25 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं। मेले की सबसे भावुक परंपरा है पदयात्रा — जोधपुर (185 km), बीकानेर, जयपुर, गुजरात तक से भक्त नेजा उठाए, “जय बाबे री” के जयकारों के साथ सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर आते हैं। रास्ते भर सेवा शिविर, भंडारे और चिकित्सा शिविर लगते हैं — ठीक वैसे ही जैसे खाटू श्याम जी के फाल्गुन मेले की निशान यात्राओं में होता है।
भाद्रपद शुक्ल दूज (बाबा का जन्मदिवस) और एकादशी (समाधि दिवस) मेले के सबसे बड़े दिन होते हैं। मेले के अलावा माघ महीने में छोटा मेला भी लगता है। मेले के दिनों में दर्शन के लिए 4-8 घंटे की कतार सामान्य है — प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं।
दर्शन समय — Timings & Aarti
| विवरण | समय |
|---|---|
| मंदिर खुलने का समय | प्रातः 5:00 AM |
| मंगला आरती | प्रातः 5:00 – 5:30 AM |
| भोग आरती | दोपहर के समय |
| संध्या आरती | सायं 7:00 PM के आसपास |
| मंदिर बंद | रात्रि 9:00 PM |
| विशेष दिन | दूज और एकादशी (हर माह), भाद्रपद मेला |
हर महीने की शुक्ल द्वितीया (दूज) को बाबा का विशेष दिन माना जाता है — इस दिन भीड़ अधिक रहती है। सामान्य दिनों में दर्शन 30-60 मिनट में आराम से हो जाते हैं। मेले के समय रात्रि में भी दर्शन व्यवस्था चलती है। प्रवेश निःशुल्क है।
आध्यात्मिक महत्व — Spiritual Significance
बाबा रामदेव कलियुग के अवतारी लोकदेवता हैं — राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा और सिंध (पाकिस्तान) तक उनके करोड़ों भक्त हैं। उनका सबसे बड़ा संदेश है समानता — छुआछूत का विरोध, वंचितों का सम्मान, और हिंदू-मुस्लिम एकता। शायद ही भारत में कोई दूसरा ऐसा धाम हो जहां मंदिर में हिंदू पुजारी पूजा करते हैं और मुस्लिम भक्त भी उसी श्रद्धा से मजार की तरह चादर और प्रसाद चढ़ाते हैं।
खाटू श्याम जी और बाबा रामदेव — दोनों “हारे के सहारे” हैं। दोनों धामों की संयुक्त यात्रा राजस्थान की लोक-आस्था का सम्पूर्ण अनुभव देती है — श्याम बाबा शीश के दानी हैं, तो रामसा पीर वचन के धनी। दोनों जगह भक्त वही लेकर आता है — टूटी उम्मीद, और वही लेकर लौटता है — नया विश्वास।
कैसे पहुंचें — How to Reach Ramdevra
🚆 ट्रेन से
रामदेवरा का अपना रेलवे स्टेशन Ramdevra (RDRA) है — मंदिर से केवल 2 km, जोधपुर-जैसलमेर लाइन पर। जोधपुर, जयपुर और दिल्ली से जैसलमेर जाने वाली ट्रेनें यहां रुकती हैं। Pokhran स्टेशन (12 km) दूसरा विकल्प है। मेले के समय रेलवे विशेष ट्रेनें चलाता है।
🚗 सड़क मार्ग से
रामदेवरा जोधपुर-जैसलमेर हाईवे (NH-125) पर पोकरण से 12 km दूर है। जोधपुर से 185 km (3.5 घंटे), जैसलमेर से 120 km (2 घंटे), बीकानेर से 230 km। RSRTC और प्राइवेट बसें नियमित चलती हैं।
✈️ हवाई मार्ग से
निकटतम एयरपोर्ट Jodhpur — 185 km है; जैसलमेर एयरपोर्ट (120 km) सीमित उड़ानों के साथ दूसरा विकल्प है।
🚕 खाटू श्याम जी से
खाटू श्याम जी से रामदेवरा की दूरी लगभग 430 km है — सीकर, नागौर, फलोदी होते हुए सड़क मार्ग से करीब 7.5-8 घंटे। ट्रेन से रींगस/जयपुर से जोधपुर होकर रामदेवरा स्टेशन पहुंचा जा सकता है। पूरी यात्रा योजना के लिए हमारा रूट गाइड देखें:
ठहरने और भोजन की व्यवस्था — Stay & Food
रामदेवरा में मंदिर के आसपास अनेक धर्मशालाएं, भक्त निवास और बजट होटल हैं — सामान्य दिनों में ₹300-800 में अच्छे कमरे मिल जाते हैं। भोजन के लिए शुद्ध शाकाहारी ढाबे और भोजनालय उपलब्ध हैं — राजस्थानी दाल-बाटी यहां की विशेषता है। भाद्रपद मेले के समय पूरा रामदेवरा और पोकरण फुल हो जाता है — मेले में जाना हो तो ठहरने की व्यवस्था हफ्तों पहले करें या पोकरण/फलोदी में विकल्प देखें। मेले में सैकड़ों निःशुल्क भंडारे चलते हैं — कोई भूखा नहीं रहता।
आसपास के दर्शनीय स्थल — Nearby Attractions
| स्थल | दूरी | विशेषता |
|---|---|---|
| पोकरण किला | 12 km | 14वीं सदी का लाल पत्थर किला और संग्रहालय |
| पोकरण (परमाणु स्थल क्षेत्र) | 12 km | भारत के परमाणु परीक्षणों की ऐतिहासिक भूमि |
| जैसलमेर | 120 km | स्वर्ण नगरी — सोनार किला, सम के धोरे |
| जोधपुर | 185 km | सूर्य नगरी — मेहरानगढ़ किला |
| खींवसर | 140 km | रेत के धोरे और किला |
खाटू श्याम जी यात्रा के लिए जरूरी लिंक
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सांवरिया सेठ
खाटू श्याम जी
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Ramdevra Temple — FAQ
Q: What are Ramdevra temple timings? रामदेवरा मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
The temple opens at 5:00 AM with Mangla Aarti and closes around 9:00 PM daily; entry is free and normal-day darshan takes 30–60 minutes. मंदिर प्रातः 5 बजे मंगला आरती के साथ खुलता है और रात्रि 9 बजे बंद होता है — सामान्य दिनों में दर्शन 30-60 मिनट में हो जाते हैं।
Q: Who was Baba Ramdev Pir? बाबा रामदेव जी कौन थे?
Baba Ramdev (1352–1385 CE) was a Tanwar Rajput folk deity of Rajasthan, believed by Hindus to be an incarnation of Lord Dwarkadhish (Krishna) and revered by Muslims as Ramshah Pir — he preached equality and fought untouchability. बाबा रामदेव तंवर राजपूत लोकदेवता थे — हिंदू उन्हें द्वारकाधीश का अवतार और मुसलमान रामशाह पीर मानते हैं।
Q: What is the story of the five Pirs from Mecca? मक्का के पांच पीरों की कथा क्या है?
Five Pirs came from Mecca to test Baba; at mealtime they insisted on eating only from their bowls left in Mecca — Baba miraculously summoned the bowls flying to Ramdevra, and the Pirs honored him with the title “Ramshah Pir.” पांच पीरों की परीक्षा में बाबा ने मक्का से उनके कटोरे उड़ाकर मंगवा दिए — तभी उन्हें “रामशाह पीर” की उपाधि मिली।
Q: When did Baba Ramdev take samadhi? बाबा ने समाधि कब ली?
Baba took living samadhi (jeevit samadhi) at Ramdevra in 1385 CE on Bhadrapada Shukla Ekadashi at the age of 33, promising that every sincere devotee’s wish at his samadhi would be fulfilled. बाबा ने 1385 ईस्वी में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को 33 वर्ष की आयु में जीवित समाधि ली — वचन के साथ कि सच्चे भक्त की हर मनोकामना पूर्ण होगी।
Q: Who was Dali Bai? डाली बाई कौन थीं?
Dali Bai was Baba’s foremost disciple from the Meghwal community whom he honored as his sister — she took samadhi two days before Baba, and her samadhi and the sacred Dali Bai ka Kangan are inside the complex. डाली बाई मेघवाल समाज की बाबा की परम शिष्या थीं — उनकी समाधि और प्रसिद्ध कंगन मंदिर परिसर में हैं।
Q: When is the Ramdevra mela held? रामदेवरा मेला कब लगता है?
The great Bhadrapada Mela is held in August–September around Baba’s samadhi date (Bhadrapada Shukla Ekadashi), lasting about ten days with 20–25 lakh pilgrims, many arriving on foot carrying nej flags. भाद्रपद मेला अगस्त-सितंबर में दस दिनों तक चलता है — 20-25 लाख भक्त आते हैं, अनेक सैकड़ों km पदयात्रा करके।
Q: Why do devotees offer cloth horses at Ramdevra? कपड़े का घोड़ा क्यों चढ़ाते हैं?
Legend says a tailor made young Ramdev a cloth horse on which Baba flew into the sky — since then, devotees offer cloth horses (Leela Ghoda) on wish fulfillment. कथा है कि बालक रामदेव कपड़े के घोड़े पर बैठकर आकाश में उड़े थे — तभी से मनोकामना पूर्ति पर लीला घोड़ा चढ़ाने की परंपरा है।
Q: How far is Ramdevra from Khatu Shyam Ji? खाटू श्याम जी से रामदेवरा कितनी दूर है?
Ramdevra is approximately 430 km from Khatu Shyam Ji — around 7.5–8 hours by road via Sikar, Nagaur and Phalodi, or by train via Jodhpur to Ramdevra station. See our travel guide →. खाटू श्याम जी से रामदेवरा लगभग 430 km है — सड़क से 7.5-8 घंटे।
Q: Which railway station is nearest to Ramdevra temple? निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?
Ramdevra (RDRA) station on the Jodhpur–Jaisalmer line is just 2 km from the temple; Pokhran (12 km) is the alternative, and special trains run during the mela. रामदेवरा (RDRA) स्टेशन मंदिर से केवल 2 km दूर है; मेले में विशेष ट्रेनें भी चलती हैं।
Q: What is the significance of Ram Sarovar? राम सरोवर का क्या महत्व है?
Ram Sarovar is the 150-acre holy lake dug by Baba himself — bathing here is considered purifying, and devotees carry its sacred soil home for prosperity. राम सरोवर बाबा द्वारा खुदवाया 150 एकड़ का पवित्र सरोवर है — यहां स्नान पुण्यदायी और मिट्टी समृद्धिदायक मानी जाती है।
सन्दर्भ: Wikipedia — Ramdevra | Wikipedia — Ramdev Pir | Updated July 2026