शाकम्भरी देवी मंदिर (Shakambhari Devi Temple Sikar ) राजस्थान के सीकर जिले में उदयपुरवाटी (Udaipurwati) के पास स्थित है — जिसे सकराय धाम (Sakrai Dham) भी कहते हैं। यह भारत की सबसे प्राचीन Shakti Peethaओं में से एक है — लगभग 2,500 वर्ष पुरानी। माँ शाकम्भरी माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं।
इस मंदिर की विशेषता है कि यहाँ गर्भगृह में दो देवियाँ स्थापित हैं — माँ ब्राह्माणी और माँ रुद्राणी। दोनों अष्टभुजी (eight-armed) हैं, सिंह पर आरूढ़ हैं और महिषासुर का वध करती दिख रही हैं। यह Chauhan dynasty की Kuldevi हैं — और हर्षनाथ मंदिर से इनका गहरा ऐतिहासिक सम्बन्ध है।
माँ शाकम्भरी देवी के तीन प्रमुख Shakti Peetha पूरे भारत में हैं — Sikar (Rajasthan), Sambhar (Rajasthan) और Saharanpur (Uttar Pradesh)। Sikar का सकराय धाम इनमें से एक है और Rajasthan का सबसे प्रमुख शाकम्भरी तीर्थ है।
📋 इस Page में क्या है
माँ शाकम्भरी कौन हैं — Who is Shakambhari Devi
शाकम्भरी देवी (Shakambhari Devi) माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं — जिन्हें पोषण और प्रकृति की देवी माना जाता है। शाकम्भरी शब्द दो Sanskrit शब्दों से बना है: शाक (शाकाहारी भोजन/सब्जियाँ) + भरी (धारण करने वाली) — अर्थात् वे जो शाक (vegetables) धारण करती हैं और जगत का पालन करती हैं।
माँ शाकम्भरी को Shatakshi (शताक्षी) भी कहते हैं — अर्थात् सौ नेत्रों वाली। पौराणिक कथा के अनुसार उनकी सौ आँखों से निरंतर अश्रुधारा बही और उससे पृथ्वी पर वर्षा हुई — सूखे का अंत हुआ। वे Devi Bhagavata Purana, Durga Saptashati और Skanda Purana में वर्णित हैं।
माँ शाकम्भरी की विशेष कृपा Chauhan dynasty पर सदा रही। Prithviraj Chauhan सहित Chauhan राजाओं ने उनकी पूजा की। माँ शाकम्भरी Chauhan और Pundir clan की Kuldevi हैं। Harshnath temple inscription में भी Shakambhari के नमक व्यापारियों का उल्लेख है — जो इस region की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाता है।
पौराणिक कथा — दुर्गमासुर और माँ शाकम्भरी
Devi Bhagavata Purana और Durga Saptashati में माँ शाकम्भरी की उत्पत्ति की कथा है। एक समय दुर्गमासुर (Durgamasura) नामक असुर ने वेदों को चुरा लिया — जिससे देवता अपनी यज्ञ-पूजा नहीं कर सके। इससे पूरी पृथ्वी पर 100 वर्षों का भयंकर सूखा पड़ गया — वर्षा नहीं हुई, अन्न नहीं उगा, नदियाँ सूख गईं।
देवताओं और ऋषियों की प्रार्थना पर आदिशक्ति प्रकट हुईं। उनकी सौ आँखों (शताक्षी) से निरंतर अश्रु की धाराएं बहने लगीं — जो वर्षा बन गईं। पृथ्वी हरी-भरी हो गई — जड़ी-बूटियाँ, सब्जियाँ और अन्न उग आए। देवी ने सबको पोषण दिया — इसी कारण वे शाकम्भरी कहलाईं।
इसके बाद देवी ने दुर्गमासुर का वध किया और वेद वापस देवताओं को लौटाए। इस कथा के कारण माँ शाकम्भरी को प्रकृति, पोषण, जल और शाकाहार की देवी माना जाता है।
मंदिर का इतिहास — 2500 Year Old Shakti Peetha
सकराय धाम (Sakrai Dham) का इतिहास 2,500 वर्ष से भी अधिक पुराना है। मंदिर में 8वीं शताब्दी BCE का एक-मुखी Shivalinga मिला है जो इसकी प्राचीनता की गवाही देता है। ऐतिहासिक records में Acharya Chanakya और Chandragupta Maurya के इस पीठ से सम्बन्ध का उल्लेख मिलता है।
माँ शाकम्भरी का यह स्थान महाभारत काल में घने वनों में खो गया था। बाद में फिर से प्रकट हुआ। Adi Shankaracharya के यहाँ आने का विवरण भी historical records में मिलता है। उन्होंने यहाँ Bhima Devi, Bhramari Devi और Shatakshi Devi की प्रतिमाएं स्थापित कीं।
मंदिर का नाम पहले शंकरादेवी था जो बाद में सकरायमाता और फिर शाकम्भरी के रूप में प्रसिद्ध हुआ। Chauhan dynasty ने इसे अपनी Kuldevi के रूप में विशेष सम्मान दिया — और Harshnath temple के साथ मिलकर यह पूरे Shekhawati का spiritual centre बन गया।
देवी प्रतिमाएं — Brahmani & Rudrani Idols
सकराय धाम के गर्भगृह में चाँदी के सिंहासन पर दो देवियाँ विराजमान हैं:
माँ ब्राह्माणी (Brahmani Mata)
- White marble से निर्मित
- 8 भुजाएं — अष्टभुजी
- सिंह पर आरूढ़
- महिषासुरमर्दिनी रूप
- हाथों में अस्त्र-शस्त्र
माँ रुद्राणी (Rudrani Mata)
- Local mud stone से निर्मित — Swayambhu
- 8 भुजाएं — अष्टभुजी
- सिंह पर आरूढ़
- महिषासुरमर्दिनी रूप
- हाथों में अस्त्र-शस्त्र
दोनों देवियों की प्रतिमाएं एक जैसी हैं — अंतर केवल material का है। माँ रुद्राणी की मूर्ति Swayambhu (स्वयम्भू) मानी जाती है — अर्थात् स्वयं प्रकट हुई। मंदिर परिसर में Adi Shankaracharya द्वारा स्थापित Bhima Devi, Bhramari Devi और Shatakshi Devi की प्रतिमाएं भी हैं।
माँ शाकम्भरी के तीन Shakti Peetha
माँ शाकम्भरी के पूरे भारत में तीन प्रमुख Shakti Peetha हैं जो एक sacred circuit बनाते हैं:
| Peetha | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| सकराय माता / सकराय धाम | उदयपुरवाटी, सीकर, Rajasthan | Brahmani + Rudrani idols | Chauhan Kuldevi |
| शाकम्भरी माता, सांभर | Sambhar Lake, Jaipur, Rajasthan | ~1300 वर्ष पुरानी | Sambhar salt lake के पास |
| Siddhpeeth शाकम्भरी देवी | Saharanpur, Uttar Pradesh | Shivalik Hills में | सबसे बड़ी तीर्थ — लाखों devotees |
इन तीनों Peetha की संयुक्त यात्रा को शाकम्भरी परिक्रमा कहते हैं। भक्त Navratri में इन तीनों धामों के दर्शन करते हैं।
त्योहार और मेले — Festivals & Special Events
नवरात्रि (Navratri) सकराय धाम का सबसे बड़ा festival है। वर्ष में दो बार — Chaitra Navratri (March/April) और Ashwin Navratri (Sept/Oct) — यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है। Rajasthan और Haryana से लाखों भक्त आते हैं।
- 🌸 Chaitra Navratri (March/April) — 9 दिन विशेष पूजा, हवन, भजन
- 🍂 Ashwin Navratri (Sept/Oct) — सबसे बड़ा mela, लाखों devotees
- 🌙 Bhadwa Sudi Ashtami — विशेष Pujanutsav — annual fair
- 🔱 Mahashivratri — Shivalinga puja
- 📅 प्रत्येक Amavasya — विशेष दर्शन
दर्शन समय — Darshan Timings
⏰ Normal Days: Sunrise से Sunset (लगभग 6 AM – 8 PM)
🌸 Navratri: Extended hours — लगभग 4 AM – 10 PM
📞 Contact: +91-9784497001 | +91-9799646773
📍 Address: Shakambhari Mata Mandir, Sakrai Dham, P.O. Sakarai, Via Gurara, Dist. Sikar, Rajasthan — 332721
💰 Entry: Free
कैसे पहुँचें — How to Reach Shakambhari Devi Temple
By Air
Nearest: Jaipur Airport (~100 km)। Jaipur से taxi ₹1,500–2,000।
By Train
Nearest: Udaipurwati Station या Neem Ka Thana। Sikar Junction भी option। Station से taxi/auto।
By Car / Taxi
Khatu से: ~50 km, 1 hr। Jaipur से: ~100 km, 2 hrs। Sikar से: ~35 km, 45 min। Taxi starts from ₹800 (Sikar)।
पास के दर्शनीय स्थल — Nearby Attractions
| स्थल | दूरी | विशेष |
|---|---|---|
| Khatu Shyam Ji Temple | ~50 km | बाबा श्याम — Sikar district |
| Jeen Mata Temple | ~35 km | Ancient Shakti Peetha — Aravalli Hills |
| Harshnath Temple | ~35 km | 10th century Shiva temple — Harsh Parvat |
| Neem Ka Thana | ~20 km | Ganeshwar hot springs (~35 km from here) |
| Salasar Balaji | ~120 km | Unique Hanuman temple — Churu |
🌿 Shekhawati Shakti Circuit
FAQ — शाकम्भरी देवी मंदिर
Q: शाकम्भरी देवी मंदिर (Sakrai Dham) कहाँ है?
सकराय धाम राजस्थान के सीकर जिले में उदयपुरवाटी (Udaipurwati) के पास स्थित है। Khatu Shyam Ji से ~50 km, Jaipur से ~100 km, Sikar से ~35 km। Address: Sakrai Dham, P.O. Sakarai, Via Gurara, Sikar — 332721।
Q: Shakambhari Devi कौन हैं?
माँ शाकम्भरी माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं — पोषण और प्रकृति की देवी। जब दुर्गमासुर ने वेद चुराए और 100 वर्ष सूखा पड़ा, तब देवी ने अपनी 100 आँखों (शताक्षी) से अश्रु बहाए जो वर्षा बनी। उन्होंने शाक (vegetables) से जगत का पोषण किया इसलिए शाकम्भरी कहलाईं।
Q: Sakrai Dham में कौन सी देवी की पूजा होती है?
गर्भगृह में माँ ब्राह्माणी (White Marble) और माँ रुद्राणी (Local Stone — Swayambhu) — दोनों अष्टभुजी महिषासुरमर्दिनी रूप में। साथ में Adi Shankaracharya द्वारा स्थापित Bhima Devi, Bhramari Devi, Shatakshi Devi की प्रतिमाएं भी हैं।
Q: Shakambhari Devi के कितने Shakti Peetha हैं?
माँ शाकम्भरी के तीन प्रमुख Shakti Peetha हैं: 1) सकराय धाम, उदयपुरवाटी, सीकर (Rajasthan) 2) शाकम्भरी माता मंदिर, सांभर (Rajasthan) 3) Siddhpeeth शाकम्भरी देवी, Saharanpur (Uttar Pradesh)।
Q: Shakambhari Devi मंदिर का major festival कौन सा है?
Navratri — Chaitra (March/April) और Ashwin (Sept/Oct) — दोनों Navratri पर विशाल मेला। Bhadwa Sudi Ashtami पर विशेष Pujanutsav। Rajasthan और Haryana से लाखों भक्त आते हैं।
Q: Shakambhari और Jeen Mata का क्या सम्बन्ध है?
दोनों Shakti Peetha Sikar जिले में हैं और Chauhan dynasty की Kuldevi हैं। जीण माता मंदिर Sikar-Jaipur road पर है (~35 km) जबकि सकराय धाम उदयपुरवाटी के पास। दोनों को एक ही trip में visit किया जा सकता है।
सन्दर्भ: Wikipedia — Shakambhari | Shakambhari Mata Official | Rajasthan Tourism | Last Updated: June 2026
॥ जय माँ शाकम्भरी ॥