🛕 इस दिन खाटू आ रहे हैं?
हर शुक्ल एकादशी–द्वादशी को खाटू में मासिक मेला भरता है और भीड़ सामान्य दिनों से कई गुना होती है। ठहरने, टैक्सी और दर्शन की जानकारी एक जगह:
एकादशी कब है? अगली एकादशी, तिथि समय, पारण और 2026-27 एकादशी सूची
अगली एकादशी — जयपुर/राजस्थान संदर्भ में पापांकुशा एकादशी गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को है। एकादशी हर हिंदू मास में दो बार आती है — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में इसे “ग्यारस” भी कहते हैं, और खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए यह सबसे प्रमुख तिथि मानी जाती है।
सीधा जवाब
अगली एकादशी कब है?
📅 गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 — पापांकुशा एकादशी ⏳
- 🕉️ अश्विन शुक्ल एकादशी — प्रारंभ: 21 अक्टूबर, 2:11 PM · समाप्त: 22 अक्टूबर, 2:47 PM
- 🌅 पारण: 23 अक्टूबर (शुक्रवार) सुबह, सूर्योदय के बाद — सटीक पारण समय अपने शहर के पंचांग से देखें
📌 21 या 22 अक्टूबर? एकादशी तिथि 21 अक्टूबर की दोपहर शुरू होती है, पर व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो — इसलिए जयपुर पंचांग के अनुसार पापांकुशा एकादशी का व्रत गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को है।
समय जयपुर (IST) के अनुसार; तिथि का समय खगोलीय गणना से। आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
अन्य नाम: एकादशी को राजस्थान और मध्य प्रदेश में ग्यारस भी कहते हैं — जैसे देवउठनी ग्यारस, निर्जला ग्यारस। हर महीने दो एकादशी आती हैं (शुक्ल और कृष्ण पक्ष)।
🛕 एकादशी पर खाटू श्याम दर्शन की योजना?
हर शुक्ल एकादशी और द्वादशी पर खाटू में सबसे अधिक भीड़ रहती है। एक दिन पहले पहुँचकर रुकें, सुबह जल्दी दर्शन करें और दोपहर 2–4 बजे की बंदी का ध्यान रखें।
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एकादशी कब है?
एकादशी चंद्र मास की ग्यारहवीं तिथि है, जो हर मास में दो बार आती है। इसलिए एक वर्ष में सामान्यतः 24 एकादशियाँ होती हैं, और अधिक मास वाले वर्ष में 26। अगली एकादशी 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को पापांकुशा एकादशी (अश्विन शुक्ल) है। इसके बाद 5 नवंबर को रमा एकादशी और 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी है — इसी दिन खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
एकादशी का व्रत प्रायः उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि हो, और अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय के भीतर पारण (व्रत खोलना) किया जाता है। यदि किसी दूसरी सूची में तारीख एक दिन अलग दिखे, तो पहले देखें कि वहाँ कौन-सा शहर और कौन-सी परंपरा (स्मार्त या वैष्णव) चुनी गई है।
एकादशी सूची — सितंबर 2026 से मार्च 2027
| तारीख | दिन | एकादशी | पक्ष / मास | तिथि (जयपुर) |
|---|---|---|---|---|
| 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | परिवर्तिनी (पार्श्व) एकादशी | भाद्रपद शुक्ल | 21 सित. 8:00 PM – 22 सित. 9:43 PM |
| 6 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | इंदिरा एकादशी | अश्विन कृष्ण | 6 अक्टू. 2:07 AM – 7 अक्टू. 12:34 AM |
| 22 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | पापांकुशा एकादशी | अश्विन शुक्ल | 21 अक्टू. 2:11 PM – 22 अक्टू. 2:47 PM |
| 5 नवंबर 2026 | गुरुवार | रमा एकादशी | कार्तिक कृष्ण | 4 नव. 11:03 AM – 5 नव. 10:35 AM |
| 20 नवंबर 2026 | शुक्रवार | देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी — वैष्णव/गौण: 21 नवंबर | कार्तिक शुक्ल | 20 नव. 7:15 AM – 21 नव. 6:31 AM |
| 4 दिसंबर 2026 | शुक्रवार | उत्पन्ना एकादशी | मार्गशीर्ष कृष्ण | 3 दिस. 11:03 PM – 4 दिस. 11:44 PM |
| 20 दिसंबर 2026 | रविवार | मोक्षदा (वैकुंठ) एकादशी — गीता जयंती | मार्गशीर्ष शुक्ल | 19 दिस. 10:09 PM – 20 दिस. 8:14 PM |
| 3 जनवरी 2027 | रविवार | सफला एकादशी | पौष कृष्ण | 2 जन. 2:24 PM – 3 जन. 4:08 PM |
| 18 जनवरी 2027 | सोमवार | पौष पुत्रदा एकादशी — वैष्णव/गौण: 19 जनवरी | पौष शुक्ल | 18 जन. 10:26 AM – 19 जन. 7:49 AM |
| 2 फरवरी 2027 | मंगलवार | षटतिला एकादशी | माघ कृष्ण | 1 फर. 8:41 AM – 2 फर. 11:10 AM |
| 17 फरवरी 2027 | बुधवार | जया एकादशी | माघ शुक्ल | 16 फर. 8:19 PM – 17 फर. 5:31 PM |
| 4 मार्च 2027 | गुरुवार | विजया एकादशी | फाल्गुन कृष्ण | 3 मार्च 4:44 AM – 4 मार्च 7:24 AM |
| 18 मार्च 2027 | गुरुवार | आमलकी एकादशी — खाटू फाल्गुन मेले का मुख्य दिन | फाल्गुन शुक्ल | 18 मार्च 4:21 AM – 19 मार्च 1:51 AM |
सारी तारीखें और तिथि-समय जयपुर पंचांग के अनुसार हैं। दूसरे शहर में तिथि का आरंभ-समाप्ति समय कुछ मिनट अलग हो सकता है।
स्मार्त और वैष्णव एकादशी — दो तारीखें क्यों?
कुछ एकादशियाँ पंचांग में दो दिनों में दिखाई देती हैं, जैसे 2026 की देवउठनी एकादशी (20 और 21 नवंबर) और 2027 की पौष पुत्रदा एकादशी (18 और 19 जनवरी)। यह गलती नहीं है:
- स्मार्त एकादशी: गृहस्थ परिवार प्रायः यही रखते हैं; तिथि सूर्योदय के समय एकादशी की उपस्थिति से तय होती है।
- वैष्णव / गौण एकादशी: कई वैष्णव संप्रदाय, संन्यासी और ISKCON परंपरा इसे मानते हैं। यदि एकादशी के सूर्योदय पर दशमी का अंश हो (दशमी-वेध), तो व्रत अगले दिन रखा जाता है।
खाटू श्याम जी के भक्त सामान्यतः स्मार्त एकादशी का पालन करते हैं, पर अंतिम निर्णय आपके परिवार की परंपरा या गुरु के मार्गदर्शन पर निर्भर करता है।
एकादशी व्रत की सरल विधि
- दशमी की शाम हल्का सात्त्विक भोजन करें; परंपरा के अनुसार चावल से परहेज़ करें।
- एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु / श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत का संकल्प लें।
- दिन में अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या एक समय सात्त्विक भोजन का व्रत रखें — अन्न और दालें सामान्यतः वर्जित मानी जाती हैं।
- भजन, नाम-स्मरण, विष्णु सहस्रनाम या श्री श्याम आरती का पाठ करें।
- अगले दिन द्वादशी में निर्धारित पारण समय के भीतर व्रत खोलें — पारण का समय हर एकादशी पर अलग होता है।
एकादशी और खाटू श्याम जी
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में “श्याम” नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था — देखें खाटू श्याम जी कौन हैं। एकादशी विष्णु और कृष्ण भक्ति की तिथि है, इसलिए खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए हर ग्यारस विशेष होती है और इस दिन खाटू में सामान्य दिनों से कहीं अधिक भीड़ रहती है। बहुत-से भक्त निशान यात्रा लेकर रिंगस से पैदल खाटू पहुँचते हैं।
फाल्गुन शुक्ल एकादशी (आमलकी एकादशी) खाटू के लिए वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी है। 2027 में यह 18 मार्च को है, जो फाल्गुन मेला 2027 (15–21 मार्च, मुख्य दिन 18–20 मार्च) के मुख्य दिनों में आती है।
सामान्य दिनों में खाटू श्याम जी मंदिर सुबह 4:30 बजे खुलता है, दोपहर 2 से 4 बजे बंद रहता है और रात 10 बजे बंद होता है (श्री श्याम मंदिर कमेटी का बोर्ड, सितंबर 2026)। एकादशी और मेले के दिनों में दर्शन व्यवस्था अलग हो सकती है — यात्रा से पहले दर्शन समय गाइड ज़रूर देखें।
यात्रा, पूजा और तिथि से जुड़ी जरूरी बातें
- एकादशी पर खाटू में भारी भीड़ रहती है — ठहरने की व्यवस्था पहले करें: होटल, धर्मशाला।
- पारण का समय शहर-विशिष्ट होता है; दूसरे शहर का समय सीधे उपयोग न करें।
- धार्मिक मान्यता और लोकपरंपरा को निश्चित भौतिक परिणाम की गारंटी के रूप में न लें।
- व्रत या उपवास में स्वास्थ्य, आयु और चिकित्सकीय आवश्यकता को प्राथमिकता दें।
संबंधित उपयोगी जानकारी
एकादशी — सामान्य प्रश्न
अगली एकादशी कब है?
जयपुर/राजस्थान संदर्भ में अगली एकादशी 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को पापांकुशा एकादशी है। तिथि 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे शुरू होकर 22 अक्टूबर दोपहर 2:47 बजे तक है; पारण 23 अक्टूबर की सुबह है।
एकादशी का व्रत कब तक रखा जाता है?
व्रत एकादशी की सुबह से शुरू होकर अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय पर खोला जाता है। पारण का समय हर एकादशी पर अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
एकादशी के दिन क्या नहीं खाना चाहिए?
परंपरा के अनुसार एकादशी पर चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़, लहसुन और मांसाहार वर्जित माने जाते हैं। फल, दूध, मेवा, आलू, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा फलाहार में लिया जाता है।
स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?
स्मार्त एकादशी गृहस्थ परिवार रखते हैं और यह सूर्योदय के समय की तिथि से तय होती है। वैष्णव (गौण) एकादशी दशमी-वेध होने पर अगले दिन पड़ती है और कई वैष्णव संप्रदाय व ISKCON इसे मानते हैं।
देवउठनी एकादशी 2026 कब है?
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है; वैष्णव/गौण परंपरा में यह 21 नवंबर को मानी जाती है। तिथि 20 नवंबर सुबह 7:15 बजे से 21 नवंबर सुबह 6:31 बजे तक है।
फाल्गुन मेले की आमलकी एकादशी 2027 कब है?
आमलकी एकादशी 18 मार्च 2027, गुरुवार को है। यह खाटू फाल्गुन मेले (15–21 मार्च) के मुख्य दिनों में आती है।
क्या गर्भवती महिलाएँ या बीमार व्यक्ति एकादशी व्रत रख सकते हैं?
गर्भावस्था, बीमारी, बुज़ुर्ग आयु या नियमित दवाइयों की स्थिति में निर्जल व्रत न रखें। हल्का फलाहार या केवल पूजा-स्मरण भी किया जा सकता है; चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।