✅ फाल्गुन मेला 2026 सफलतापूर्वक सम्पन्न हो चुका है।
अगले मेले की जानकारी — फाल्गुन मेला 2027 — 26-28 फरवरी 2027 →
फाल्गुन मेला 2026 — खाटू श्याम जी
खाटू श्याम जी का फाल्गुन मेला 2026 फाल्गुन शुक्ल एकादशी से त्रयोदशी — 10 मार्च से 12 मार्च 2026 — तक अत्यंत भव्यता और अपार श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। इस वर्ष फाल्गुन मेला होली के ठीक एक सप्ताह पहले पड़ा — जिससे उत्सव का माहौल दोगुना हो गया। फाल्गुन की हवाओं में गुलाल की खुशबू थी, और खाटू की गलियों में “जय श्री श्याम” के जयकारे।
इस वर्ष 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने तीन दिनों में बाबा के दर्शन किए। देश के 25 से अधिक राज्यों से भक्त आए — कोई पैदल, कोई बस से, कोई ट्रेन से। लेकिन सबका गंतव्य एक — खाटू धाम।
फाल्गुन मेला 2026 — मुख्य तिथियाँ और कार्यक्रम
✅ 10 मार्च 2026 — मंगलवार (फाल्गुन शुक्ल एकादशी)
प्रातः 4:30 AM — मंगला आरती से भव्य शुभारंभ। देशभर से निशान यात्राओं का आगमन। मंदिर परिसर में 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था। संध्या भजन संध्या प्रारंभ।
✅ 11 मार्च 2026 — बुधवार (फाल्गुन शुक्ल द्वादशी)
मुख्य दर्शन दिवस — सर्वाधिक भीड़। दोपहर भव्य शोभायात्रा, हाथी-ऊँट-बैंड-बाजे-झाँकियाँ। विशाल भंडारा। रात्रि भजन कार्यक्रम।
✅ 12 मार्च 2026 — गुरुवार (फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी)
समापन महाआरती। विदाई दर्शन। लाखों भक्तों की भावपूर्ण विदाई।
मेला 2026 — आँकड़ों में
👥 10 लाख+ श्रद्धालु — तीन दिनों में कुल दर्शन।
🚩 6,000+ निशान यात्राएं — देश के 25+ राज्यों से।
🍽️ 500+ भंडारे — 24 घंटे निःशुल्क भोजन वितरण।
🎵 150+ भजन मंडलियाँ — तीनों रात निरंतर कीर्तन।
📺 3 करोड़+ Live दर्शन — ऑनलाइन दर्शकों की संख्या।
🏥 60+ चिकित्सा शिविर — निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा।
🌸 50 लाख+ फूल — मंदिर और नगर की सजावट में उपयोग।
फाल्गुन मेला 2026 — एक अविस्मरणीय कहानी
मार्च 2026। होली आने वाली थी, हवा में फूलों की महक थी और खाटू में लाखों कदमों की आहट। फाल्गुन मेला — जो हर वर्ष आता है — इस बार होली के उत्सव के साथ मिलकर कुछ अनोखा बन गया।
अलवर के महेश जी अपने पूरे परिवार के साथ आए थे। उनकी बेटी की शादी पिछले वर्ष हुई थी — बाबा से मनोकामना माँगी थी, पूरी हुई थी। निशान चढ़ाने का वचन था।
“बाबा ने सुनी। हमने वचन दिया था कि मेले में आकर निशान चढ़ाएंगे। आज पूरा परिवार यहाँ है — मेरी बेटी, दामाद और मेरे नवजात पोते के साथ। यह पल जीवन भर याद रहेगा।”
यही है खाटू की महिमा। यहाँ आने वाला कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता — चाहे वह माँगे कुछ भी या न माँगे। बाबा का दर्शन ही सबसे बड़ा प्रसाद है।
वह भोर जब खाटू जागी
10 मार्च 2026 — फाल्गुन एकादशी की भोर। रात के 3 बजे से ही खाटू की गलियों में भक्तों का रेला था। जब मंदिर में मंगला आरती की घंटियाँ बजीं तो लाखों कंठों से एक साथ जयकारा उठा —
हारे का सहारा — बाबा श्याम हमारा।
जय श्री श्याम। जय श्री श्याम॥
मंदिर के पट खुलते ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। कोई अपनी माँ की बीमारी की दुआ लेकर आया था। कोई नौकरी की चाहत लेकर। कोई केवल बाबा के दर्शन के लिए — बिना किसी माँग के। खाटू में हर तरह के भक्त आते हैं। बाबा सबकी सुनते हैं।
खाटू की गलियों में इस दिन एक अजीब सुकून होता है। हजारों अजनबी एक साथ चल रहे हैं — लेकिन कोई अजनबी नहीं लगता। सब एक ही धागे से बंधे हैं — श्याम भक्ति के धागे से।
निशान यात्रा 2026 — आस्था के कदम
फाल्गुन मेले की सबसे पवित्र परंपरा है निशान यात्रा। भक्त अपने शहर से खाटू तक पैदल चलकर आते हैं — बाबा का ध्वज (निशान) उठाए। यह महज एक यात्रा नहीं — यह भक्ति की परीक्षा है, शरीर की नहीं, मन की।
🚩 दिल्ली से खाटू — 300 km: 47 भक्तों का जत्था 14 दिन पहले चला। रास्ते में गाँव वालों ने भोजन-पानी दिया। खाटू नज़र आते ही सबकी आँखें भर आईं।
🚩 जयपुर से खाटू — 80 km: 200 लोगों की यात्रा रात को चली और सुबह खाटू पहुँची। पूरे रास्ते भजन चलते रहे।
🚩 गुजरात से: सूरत के एक जत्थे ने रींगस से 17 km पैदल चला। उनके जयकारों की आवाज़ दूर तक सुनाई दी।
“पैर थक जाते हैं लेकिन मन नहीं। जब बाबा का मंदिर दिखता है तो सारी थकान उड़ जाती है।” — रामप्रसाद, सूरत
शोभायात्रा — फाल्गुन द्वादशी 2026
11 मार्च 2026 को निकली शोभायात्रा खाटू मेले का सबसे रंगीन और भावपूर्ण दृश्य था।
आगे-आगे दो सजे हुए हाथी — जिनकी पीठ पर बाबा के निशान लहरा रहे थे। पीछे सजे हुए ऊँट। फिर बैंड-बाजे — मारवाड़ी धुनें। फिर एक के बाद एक झाँकियाँ।
पहली झाँकी में बर्बरीक का श्री कृष्ण को शीश दान — इतना जीवंत कि देखने वाले रो पड़े। दूसरी झाँकी में खाटू की भूमि में शीश का प्रकटीकरण।
जब शोभायात्रा मंदिर परिसर में पहुँची तो लाखों भक्तों ने एक साथ जयकारा लगाया। उस क्षण खाटू की हवा, आसमान और धरती — सब “जय श्री श्याम” से गूँज उठे।
भंडारे की महक — सेवा का उत्सव
खाटू में भंडारा केवल भोजन नहीं — यह सेवा का संस्कार है।
2026 में पूरे खाटू में 500 से अधिक भंडारे लगे। झुंझुनू के एक व्यापारी ने 50,000 लोगों को भोजन कराया — बाबा की कृपा का शुक्रगुजार।
एक छोटी दुकान चलाने वाले भिखूलाल जी ने कहा — “मेरे पास ज़्यादा नहीं है। लेकिन जो है वह बाबा का ही दिया है। आज 500 लोगों को खिला रहा हूँ — यही मेरी पूजा है।”
यहाँ अमीर-गरीब का भेद नहीं। एक ही पंक्ति में सब खाते हैं। यही खाटू की असली महिमा है।
रात का जागरण — जब भजनों में डूबी खाटू
तीनों रात भजन संध्या। रात 9 बजे से सूर्योदय तक।
11 मार्च की रात सबसे यादगार रही। प्रसिद्ध भजन गायिका रेखा त्रिपाठी जी ने जब “श्याम मेरे दिल में बस जा” गाया तो पूरे पंडाल में वह सन्नाटा छा गया जो भक्ति की गहराई में होता है।
व्हीलचेयर पर बैठीं एक 75 वर्षीया माताजी भी हाथ उठाकर ताल दे रही थीं। उनकी आँखों में आँसू थे — भक्ति के आँसू।
फाल्गुन मेले का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
स्कंद पुराण के मरुस्थल खंड में वर्णित है कि इसी फाल्गुन शुक्ल एकादशी को बाबा श्याम का दिव्य शीश खाटू की पावन भूमि में प्रकट हुआ था। राजा को स्वप्न आया और भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।
इसीलिए इस तिथि पर खाटू दर्शन का फल सौ यज्ञों के बराबर माना जाता है। यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से निरंतर चली आ रही है — और हर वर्ष और भव्य होती जा रही है।
खाटू कैसे पहुँचें
🚂 ट्रेन से: रींगस जंक्शन (17 km) — दिल्ली, जयपुर, अजमेर से सीधी ट्रेनें। Train Schedule →
🚌 बस से: सीकर, जयपुर, दिल्ली से RSRTC बसें।
🚗 कार से: दिल्ली से 300 km, जयपुर से 80 km। Delhi → Khatu Route →
🚕 टैक्सी: रींगस या जयपुर से — Taxi बुक करें →
अगला मेला — फाल्गुन 2027
📅 फाल्गुन मेला 2027: 26-28 फरवरी 2027 (शुक्र-शनि-रवि)
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फाल्गुन 2026 में लाखों ने, बाबा के दर्शन पाए।
आँखों में श्रद्धा थी, दिल में जयकारे गाए॥
अगले वर्ष फिर आएंगे, यह मन में ठान लिया।
हारे का सहारा बाबा, हमने पहचान लिया॥