खाटू श्याम जी के 11 नाम

श्री खाटू श्याम जी के 11 प्रमुख नाम — इनका प्रतिदिन जप करने से विशेष आशीर्वाद मिलता है।

🗣️ हिंदी 🗓️ अद्यतन: 15 September 2026

॥ श्री खाटू श्याम जी के 11 नाम ॥

ये 11 नाम बाबा श्याम की कथा और भक्तों में प्रचलित संबोधन हैं — किसी शास्त्र की निश्चित सूची नहीं।

इन ग्यारह नामों को जो नित्य जपे श्रद्धा से।
उसके सभी कष्ट दूर हों, बाबा की कृपा से॥

1. श्याम — नीले रंग के समान कांतिमान। कृष्ण द्वारा दिया गया नाम।

2. बर्बरीक — मूल नाम। भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र।

3. खाटू नाथ — खाटू ग्राम के स्वामी।

4. हारे का सहारा — जो हार चुके उनका सहारा।

5. शीश के दानी — जिन्होंने शीश का दान किया।

6. तीन बाण वाले — तीन बाण धारण करने वाले महावीर।

7. कलियुग के देवता — कलियुग में पूजे जाने वाले।

8. भक्त वत्सल — भक्तों से प्रेम करने वाले।

9. दीन दयाल — दीनों पर दया करने वाले।

10. मनोकामना पूरक — मन की इच्छाएं पूर्ण करने वाले।

11. करुणा सागर — करुणा के असीम सागर।

11 नाम जप मंत्र

ॐ श्याम — ॐ बर्बरीक — ॐ खाटू नाथ
ॐ हारे के सहारे — ॐ शीश दानी — ॐ त्रिबाण
ॐ कलियुग देव — ॐ भक्त वत्सल — ॐ दीन दयाल
ॐ मनोकामना पूरक — ॐ करुणा सागर
ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

💡 इन 11 नामों को सुबह उठकर 11 बार जपने से दिन शुभ होता है।

💡 एकादशी के दिन 108 बार जपने से विशेष फल मिलता है।

॥ ग्यारह नाम श्याम के — जपो हर दिन प्रेम से ॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाटू श्याम जी के 11 नाम कौन-से हैं?

भक्तों में प्रचलित 11 नाम — श्याम, बर्बरीक, खाटू नाथ, हारे का सहारा, शीश के दानी, तीन बाण वाले, कलियुग के देवता, भक्त वत्सल, दीन दयाल, मनोकामना पूरक और करुणा सागर। यह किसी शास्त्र की निश्चित सूची नहीं, प्रचलित संबोधन हैं।

खाटू श्याम जी को "हारे का सहारा" क्यों कहते हैं?

लोककथा के अनुसार बर्बरीक ने माता को वचन दिया था कि युद्ध में वे हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। इसी से भक्त उन्हें हारे का सहारा कहते हैं।

खाटू श्याम जी का असली नाम क्या है?

मूल नाम बर्बरीक — भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र। श्रीकृष्ण के वरदान से वे "श्याम" नाम से पूजे जाते हैं।

11 नामों का जप कब और कैसे करें?

सुबह स्नान के बाद इन नामों को श्रद्धा से 11 बार पढ़ें; माला आवश्यक नहीं। एकादशी पर अधिक जप कर सकते हैं।

खाटू श्याम जी को "कलियुग के देवता" क्यों कहा जाता है?

श्याम भक्ति परंपरा की मान्यता है कि शीश-दान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में "श्याम" नाम से पूजे जाने का वरदान दिया।

11 नाम और 108 नाम में क्या अंतर है?

11 नाम रोज़ के छोटे नाम-स्मरण के लिए हैं; 108 नामों की संकलित नामावली विशेष पूजा के समय पढ़ी जा सकती है।

खाटू श्याम जी को "शीश के दानी" क्यों कहते हैं?

महाभारत युद्ध से पहले श्रीकृष्ण के माँगने पर बर्बरीक ने अपना शीश दान कर दिया — इसी महादान के कारण वे शीश के दानी कहलाते हैं।

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