गुरु पूर्णिमा 2026
Guru Purnima 2026 — तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, गुरु मंत्र, व्यास पूर्णिमा और गुरु दक्षिणा की परंपरा
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
गुरु पूर्णिमा 2026 बुधवार, 29 जुलाई 2026 को है। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई शाम 6:18 बजे शुरू होकर 29 जुलाई शाम 8:05 बजे समाप्त होती है। इस दिन कोई एक संकीर्ण मुहूर्त नहीं होता — पूरे दिन गुरु पूजा की जा सकती है, और ब्रह्म मुहूर्त तथा सुबह का समय सबसे शुभ माना जाता है।
📅 29 जुलाई 2026 | 🗓️ बुधवार | 🌕 आषाढ़ पूर्णिमा | 📖 व्यास पूर्णिमा | 🕉️ अगले दिन सावन शुरू
गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?
गुरु पूर्णिमा 2026 बुधवार, 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। यह पर्व हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा को आता है। 2026 में पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 6:18 बजे शुरू होती है और 29 जुलाई की शाम 8:05 बजे समाप्त होती है। उदया तिथि के नियम के अनुसार — यानी सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो — पर्व 29 जुलाई को ही मनाया जाएगा।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| गुरु पूर्णिमा 2026 | बुधवार, 29 जुलाई 2026 |
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 28 जुलाई 2026, शाम 6:18 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 29 जुलाई 2026, शाम 8:05 बजे |
| पूजा का समय | 29 जुलाई का पूरा दिन — ब्रह्म मुहूर्त और सुबह सर्वोत्तम |
| अन्य नाम | व्यास पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा |
| अगले दिन | 30 जुलाई से सावन मास प्रारंभ |
गुरु पूर्णिमा की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
गुरु पूर्णिमा पर कोई एक निश्चित संकीर्ण मुहूर्त नहीं होता — 29 जुलाई का पूरा दिन गुरु पूजा के लिए शुभ है। इसका कारण यह है कि पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के समय से लेकर शाम 8:05 बजे तक चलती रहती है। परंपरा में ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले) और सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
जो भक्त पूर्णिमा व्रत चंद्रमा से जोड़कर रखते हैं, वे 28 जुलाई की रात को भी व्रत रख सकते हैं — पर गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को ही मनाया जाएगा। सूर्योदय-आधारित समय शहर के हिसाब से 10–25 मिनट आगे-पीछे होता है।
गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?
गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। हिंदू परंपरा में यह उन गिने-चुने अवसरों में से एक है जो किसी देवता को नहीं, बल्कि शिक्षक और मार्गदर्शक को समर्पित है। इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ माना जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
“गुरु” शब्द स्वयं इस दिन का अर्थ समझा देता है — “गु” का अर्थ है अंधकार और “रु” का अर्थ है उसे हटाने वाला। यानी गुरु वह है जो अज्ञान के अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश देता है। भारतीय परंपरा में गुरु-शिष्य परंपरा सदियों से ज्ञान के हस्तांतरण का मूल आधार रही है — वेद, शास्त्र, संगीत, आयुर्वेद और शिल्प, सब कुछ इसी परंपरा से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचा।
आज यह पर्व केवल आध्यात्मिक गुरु तक सीमित नहीं है। विद्यार्थी अपने शिक्षकों को, कलाकार अपने उस्ताद को, और बहुत से लोग अपने माता-पिता को — जो जीवन के पहले गुरु होते हैं — इस दिन धन्यवाद देते हैं।
महर्षि वेद व्यास कौन थे?
महर्षि वेद व्यास को आदि गुरु माना जाता है। उन्होंने वेदों का संकलन और विभाजन किया — इसी कारण उन्हें “वेद व्यास” कहा गया। उन्होंने महाभारत की रचना की, जिसमें भगवद्गीता सम्मिलित है, और अठारह पुराणों की भी रचना का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है।
मान्यता है कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही उनका जन्म हुआ था, और इसी दिन उन्होंने अपने शिष्यों को पहली बार ब्रह्मसूत्र का उपदेश दिया था। इसी कारण यह दिन गुरु-तत्व का प्रतीक बन गया और व्यास पूर्णिमा कहलाया।
गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि क्या है?
गुरु पूर्णिमा की पूजा में गुरु के चित्र या चरणों की पूजा करके गुरु मंत्र का जाप किया जाता है। भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं, गुरु या महर्षि वेद व्यास का चित्र स्थापित करते हैं, पुष्प-फल अर्पित करते हैं, दीप जलाते हैं और गुरु दक्षिणा अर्पित करके आशीर्वाद लेते हैं।
- स्नान और संकल्प — ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा स्नान के जल में गंगाजल मिला लें।
- स्थापना — स्वच्छ चौकी पर सफेद या पीला वस्त्र बिछाकर अपने गुरु का चित्र, या महर्षि वेद व्यास अथवा इष्ट देव की प्रतिमा स्थापित करें।
- पूजन — रोली, अक्षत, पुष्प, फल, मिठाई और नारियल अर्पित करें। पीले फूल और पीली मिठाई विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
- दीप और धूप — घी का दीपक और धूप जलाएं।
- गुरु मंत्र — गुरु मंत्र का जाप करें। यदि गुरु ने कोई विशेष मंत्र दिया हो तो उसी का जाप करें।
- गुरु दक्षिणा — गुरु के चरण स्पर्श करके श्रद्धा अनुसार दक्षिणा, वस्त्र या फल अर्पित करें।
- दान — अन्न, वस्त्र, पुस्तक या धन का दान करें। पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व माना गया है।
- पाठ — गुरु गीता, गुरु चालीसा या भगवद्गीता का पाठ करें।
गुरु पूर्णिमा का मंत्र क्या है?
गुरु पूर्णिमा पर यह सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक गुरु मंत्र बोला जाता है:
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर हैं। गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं — उन श्री गुरु को मेरा नमस्कार।
गुरु दक्षिणा क्या है और क्या देनी चाहिए?
गुरु दक्षिणा गुरु के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है — यह कोई निश्चित राशि नहीं है। परंपरा में दक्षिणा श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दी जाती है। यह धन हो सकता है, वस्त्र, फल, पुस्तक, या केवल सेवा और गुरु की शिक्षा को जीवन में उतारने का संकल्प।
भारतीय परंपरा में सबसे बड़ी दक्षिणा वही मानी गई है जिसमें शिष्य गुरु के दिए ज्ञान को आगे बढ़ाए। यदि आप किसी शिक्षक को धन्यवाद देना चाहते हैं तो एक हस्तलिखित पत्र, फूल या मिठाई भी उतनी ही स्वीकार्य है।
अगर कोई दीक्षा गुरु न हो तो गुरु पूर्णिमा कैसे मनाएं?
यदि आपका कोई दीक्षा गुरु नहीं है तो आप महर्षि वेद व्यास, अपने इष्ट देव या अपने माता-पिता की पूजा कर सकते हैं। परंपरा में माता-पिता को जीवन का पहला गुरु माना गया है। बहुत से लोग इस दिन अपने स्कूल-कॉलेज के शिक्षकों, कार्यक्षेत्र के मार्गदर्शक या जिस किसी ने जीवन में सही राह दिखाई हो, उन्हें फोन करके या मिलकर धन्यवाद देते हैं।
बौद्ध और जैन परंपरा में गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा केवल हिंदू परंपरा तक सीमित नहीं है। बौद्ध परंपरा में मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपने पहले पाँच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था — जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। इसी कारण बौद्ध अनुयायी इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं।
जैन परंपरा में इस दिन को त्रिनोक गुहा पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है — मान्यता है कि इसी दिन भगवान महावीर ने इंद्रभूति गौतम को अपना पहला शिष्य स्वीकार किया था और स्वयं गुरु बने।
गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास का आरंभ
आषाढ़ पूर्णिमा से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। चातुर्मास वे चार महीने हैं जब परंपरा के अनुसार भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। साधु-संत इस काल में एक ही स्थान पर रुककर तप, अध्ययन और उपदेश करते हैं — इसी कारण गुरु पूर्णिमा को चातुर्मास के द्वार के रूप में देखा जाता है।
2026 में गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) के अगले ही दिन, 30 जुलाई से सावन मास शुरू हो रहा है — यानी साल के सबसे पवित्र माने जाने वाले महीने की शुरुआत। इस लिहाज़ से गुरु पूर्णिमा इस पूरे त्योहार-काल का प्रवेश द्वार है। सावन सोमवार व्रत 2026 की सभी तिथियाँ →
गुरु पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें?
✅ करें
सुबह स्नान और गुरु पूजा, गुरु मंत्र जाप, गुरु या शिक्षक से आशीर्वाद, अन्न-वस्त्र-पुस्तक का दान, गुरु गीता या भगवद्गीता का पाठ, सात्विक आहार।
❌ न करें
गुरु या किसी शिक्षक का अनादर, मांस-मदिरा का सेवन, वाद-विवाद और क्रोध, तामसिक भोजन, और दिए गए वचन या संकल्प को तोड़ना।
गुरु पूर्णिमा पर खाटू श्याम जी दर्शन
29 जुलाई 2026 पूर्णिमा का दिन है, और पूर्णिमा पर खाटू श्याम जी में स्नान, दान और दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। दर्शन का समय सामान्य दिनों में 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।
श्याम भक्ति की परंपरा में भजन मंडलियों और निशान यात्रा के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक भक्ति पहुँचती रही है — इस अर्थ में गुरु-शिष्य परंपरा श्याम बाबा के दरबार से भी जुड़ी है। ध्यान रहे कि इसके अगले ही दिन से सावन शुरू हो रहा है, इसलिए 29 जुलाई से खाटू और सीकर क्षेत्र में त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
नज़दीकी रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km। रींगस से खाटू: ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल → | टैक्सी बुक करें →
पूर्णिमा पर खाटू यात्रा की तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — गुरु पूर्णिमा 2026 / Guru Purnima 2026
Q: गुरु पूर्णिमा 2026 में कब है?
गुरु पूर्णिमा बुधवार, 29 जुलाई 2026 को है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा का दिन है।
Q: When is Guru Purnima 2026?
Guru Purnima 2026 falls on Wednesday, 29 July 2026, on Ashadha Purnima. The purnima tithi runs from 6:18 PM on 28 July to 8:05 PM on 29 July (IST).
Q: गुरु पूर्णिमा की पूजा किस समय करें?
29 जुलाई का पूरा दिन शुभ है, क्योंकि पूर्णिमा तिथि शाम 8:05 बजे तक चलती है। सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त और सुबह का है।
Q: गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा क्यों कहते हैं?
क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत तथा अठारह पुराणों की रचना की, इसलिए उन्हें आदि गुरु माना जाता है।
Q: “गुरु” शब्द का अर्थ क्या है?
“गु” का अर्थ है अंधकार और “रु” का अर्थ है उसे दूर करने वाला। यानी गुरु वह है जो अज्ञान का अंधकार हटाकर ज्ञान का प्रकाश देता है।
Q: अगर मेरा कोई गुरु नहीं है तो क्या करूँ?
आप महर्षि वेद व्यास, अपने इष्ट देव या अपने माता-पिता की पूजा कर सकते हैं — परंपरा में माता-पिता को पहला गुरु माना गया है। अपने शिक्षकों को धन्यवाद देना भी इस दिन का सही भाव है।
Q: What is Guru Dakshina and how much should be given?
Guru Dakshina is an offering of gratitude, not a fixed amount. It can be money, cloth, fruit, a book, or simply service. Tradition holds that the greatest dakshina is carrying the guru’s teaching forward and living by it.
Q: क्या गुरु पूर्णिमा सिर्फ हिंदू त्योहार है?
नहीं। बौद्ध परंपरा में मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में पहला उपदेश दिया था, और जैन परंपरा में इसी दिन भगवान महावीर ने अपना पहला शिष्य स्वीकार किया था।
Q: गुरु पूर्णिमा के बाद कौन सा महीना शुरू होता है?
आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से सावन (श्रावण) मास शुरू होता है — 2026 में 30 जुलाई, गुरुवार से। सावन सोमवार व्रत 2026 →
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Guru Purnima / Vyasa Purnima date and time
- Prokerala — Hindu Calendar with daily panchang
- Astroyogi — Guru Purnima 2026 tithi timings
- Shri Shyam Mandir — official temple site
सभी तिथियाँ भारत (IST) के अनुसार, एक से अधिक पंचांग स्रोतों से cross-verified. सूर्योदय-आधारित समय शहर के हिसाब से 10–25 मिनट बदल सकता है। Updated July 2026.