दिवाली 2026
Diwali 2026 — तिथि, Lakshmi Puja Muhurat, अमावस्या, पाँच दिन का कैलेंडर, पूजा विधि और संपूर्ण जानकारी
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। New Delhi के अनुसार Lakshmi Puja Muhurat शाम 5:54 PM से 7:50 PM तक है। अमावस्या तिथि 8 नवंबर 11:27 AM से शुरू होकर 9 नवंबर 12:31 PM तक रहेगी। धनतेरस 6 नवंबर, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर और भाई दूज 11 नवंबर को है।
📅 8 नवंबर 2026 | 🗓️ रविवार | 🪔 Lakshmi Puja 5:54–7:50 PM | 🌑 कार्तिक अमावस्या

इस Guide में क्या मिलेगा?
तिथि व समय
पाँच दिन का कैलेंडर
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
शहर अनुसार मुहूर्त
पूजा सामग्री
पूजा विधि
दीपक व दीपदान
प्रमुख परंपराएँ
सुरक्षित दिवाली
सामान्य प्रश्न
दिवाली 2026 कब है?
Diwali 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। उत्तर भारतीय परंपरा में यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या का प्रमुख पर्व है। इसी शाम माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है, घरों में दीपक जलाए जाते हैं और परिवार मिलकर दीपोत्सव मनाते हैं।
दिवाली को दीपावली भी कहा जाता है। “दीपावली” का अर्थ है दीपों की पंक्ति—अर्थात ऐसा पर्व जिसमें घर, मंदिर, आंगन और द्वार दीपों से प्रकाशित किए जाते हैं। यह प्रकाश, शुभता, ज्ञान, समृद्धि और परिवार के मिलन का व्यापक सांस्कृतिक पर्व है।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| Diwali 2026 Date | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 8 नवंबर 2026, 11:27 AM |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 9 नवंबर 2026, 12:31 PM |
| New Delhi Lakshmi Puja Muhurat | 5:54 PM से 7:50 PM |
| प्रदोष काल | लगभग 5:33 PM से 8:12 PM |
| वृषभ काल | लगभग 5:55 PM से 7:49 PM |
| मुख्य पूजा | माता लक्ष्मी और भगवान गणेश |
दिवाली 2026 के पाँच दिन — पूरा कैलेंडर
सामान्य उत्तर भारतीय परंपरा में दिवाली उत्सव धनतेरस से भाई दूज तक चलता है। 2026 में तिथियों की संरचना सामान्य वर्ष से थोड़ी अलग दिखाई देती है क्योंकि अमावस्या तिथि 9 नवंबर दोपहर तक चलती है।
| चरण | तारीख | पर्व | मुख्य महत्व |
|---|---|---|---|
| पहला दिन | 6 नवंबर, शुक्रवार | धनतेरस | धन्वंतरि, लक्ष्मी-कुबेर पूजा, यम दीपदान |
| दूसरा दिन | 7 नवंबर, शनिवार | काली चौदस | चतुर्दशी की क्षेत्रीय परंपराएँ |
| मुख्य दीपावली दिवस | 8 नवंबर, रविवार | नरक चतुर्दशी + दिवाली | प्रातः अभ्यंग स्नान; संध्या लक्ष्मी-गणेश पूजा |
| अगला पर्व | 10 नवंबर, मंगलवार | गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा |
| समापन | 11 नवंबर, बुधवार | भाई दूज | भाई-बहन का पर्व, यम द्वितीया |
धनतेरस 2026
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। New Delhi में Dhanteras Puja Muhurat लगभग 6:02 PM से 7:57 PM है। इसी दिन यम दीपदान की परंपरा भी होती है।
नरक चतुर्दशी 2026
2026 में नरक चतुर्दशी रविवार, 8 नवंबर को है। प्रातः अभ्यंग स्नान की परंपरा विशेष रूप से पश्चिमी और दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। उसी दिन संध्या में दिवाली की मुख्य लक्ष्मी पूजा होगी।
गोवर्धन पूजा 2026
गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है। New Delhi में प्रातःकालीन पूजा का समय लगभग 6:34 AM से 8:45 AM है। कई स्थानों पर इसे अन्नकूट के रूप में भी मनाया जाता है।
भाई दूज 2026
भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है। New Delhi में भाई दूज तिलक का Aparahna समय लगभग 1:13 PM से 3:28 PM है।
दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
New Delhi में Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat शाम 5:54 PM से 7:50 PM है। यह समय प्रदोष काल और वृषभ स्थिर लग्न के साथ पड़ता है, इसलिए पारंपरिक गृहस्थ लक्ष्मी पूजा के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।
5:54 PM–7:50 PM
लगभग 5:33 PM–8:12 PM
लगभग 5:55 PM–7:49 PM
8 Nov 11:27 AM–9 Nov 12:31 PM
प्रदोष काल क्या है?
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का प्रारंभिक संध्या समय है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के लिए अमावस्या तिथि के दौरान प्रदोष काल को प्रमुख माना जाता है।
वृषभ स्थिर लग्न क्यों देखा जाता है?
परंपरागत मुहूर्त गणना में स्थिर लग्न को स्थायित्व से जोड़ा जाता है। इसी कारण अनेक Panchang लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल के भीतर आने वाले वृषभ लग्न को विशेष महत्व देते हैं।
Diwali 2026 City-wise Lakshmi Puja Muhurat
“Diwali Lakshmi Puja time today” या “Diwali Puja Muhurat in my city” खोजने वालों के लिए स्थान-विशिष्ट समय अधिक उपयोगी है। 2026 में कुछ प्रमुख शहरों के Panchang timings:
| शहर | Lakshmi Puja Muhurat |
|---|---|
| New Delhi | 5:54 PM–7:50 PM |
| Jaipur | 6:03 PM–7:59 PM |
| Chennai | 6:07 PM–8:09 PM |
| Hyderabad | 6:07 PM–8:08 PM |
| Mumbai | 6:27 PM–8:27 PM |
| Pune | लगभग 6:24 PM–8:24 PM |
नोट: शहर के भीतर भी precise location के अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव है। अंतिम पूजा से पहले स्थानीय Panchang से पुष्टि करें।
दिवाली क्यों मनाई जाती है?
दिवाली भारत का बहु-परंपरागत पर्व है और अलग-अलग क्षेत्रों तथा धार्मिक समुदायों में इसके साथ अलग कथाएँ जुड़ी हैं। उत्तर भारत में सबसे प्रसिद्ध परंपरा भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने से जुड़ी है। अयोध्यावासियों द्वारा दीप जलाकर स्वागत करने की कथा दीपोत्सव के लोकप्रिय धार्मिक आधारों में से एक है।
कुछ वैष्णव परंपराएँ इसे माता लक्ष्मी से जोड़ती हैं, जबकि कृष्ण परंपरा में नरकासुर वध का महत्व मिलता है। जैन धर्म में यह भगवान महावीर के निर्वाण से और सिख परंपरा में बंदी छोड़ दिवस से जुड़ा हुआ है। भारत के विभिन्न हिस्सों में काली पूजा, बलि प्रतिपदा, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, नया वर्ष और अन्य क्षेत्रीय परंपराएँ भी दिवाली पर्व समूह का हिस्सा हैं।
दिवाली लक्ष्मी-गणेश पूजा सामग्री — पूरी सूची
पूजा सामग्री परिवार और परंपरा के अनुसार थोड़ी बदल सकती है। सामान्य गृह पूजा के लिए नीचे दी गई सामग्री पहले से तैयार रखना सुविधाजनक है। “Diwali Lakshmi Puja Samagri” खोजने वाले पाठकों के लिए यह practical checklist भी है।
स्वच्छ चौकी पर स्थापित करने के लिए
पूजा चौकी के लिए
जल, सुपारी, सिक्का, अक्षत, पत्ते और नारियल
रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, मौली
मिट्टी के दीप, घी/तेल और रुई की बाती
कमल उपलब्ध हो तो विशेष रूप से लोकप्रिय; अन्य ताजे फूल भी
फल, मिठाई, खील, बताशे और घर की परंपरा का भोग
धूप, अगरबत्ती, कपूर
व्यापारियों के लिए बही-खाता या accounting records
परिवार की इच्छा अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा कैसे करें?
- घर और पूजा स्थान की सफाई — पूजा से पहले घर, मुख्य द्वार और पूजा स्थल को साफ करें।
- द्वार सजाएँ — रंगोली, तोरण और दीपक से प्रवेश स्थान सजाया जा सकता है।
- पूजा चौकी तैयार करें — चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- कलश स्थापना — परिवार की परंपरा अनुसार जल, अक्षत, सुपारी और नारियल सहित कलश स्थापित करें।
- प्रथम गणेश पूजन — हर शुभ कार्य की तरह भगवान गणेश का स्मरण करके पूजा आरंभ करें।
- माता लक्ष्मी का आवाहन — रोली, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
- नैवेद्य अर्पित करें — मिठाई, फल, खील-बताशे या परिवार में प्रचलित प्रसाद चढ़ाएँ।
- लेखा और कार्य-साधन पूजन — व्यापारी बही-खाता, दुकान या व्यवसाय से जुड़े उपकरणों का पूजन कर सकते हैं।
- मंत्र और आरती — लक्ष्मी और गणेश मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें और आरती करें।
- दीपदान — पूजा के बाद सुरक्षित स्थानों पर दीप रखें; मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थान पर दीप जलाने की परंपरा व्यापक है।
- प्रसाद व परिवार — पूजा के बाद प्रसाद बाँटें और परिवार के साथ भोजन करें।
माता लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
भगवान गणेश मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
लक्ष्मी पूजा में गणेश जी की पूजा क्यों होती है?
दिवाली की गृह पूजा में माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा व्यापक परंपरा है। माता लक्ष्मी को समृद्धि से और गणेश जी को शुभारंभ, बुद्धि और विघ्न-निवारण से जोड़ा जाता है। पूजा का उद्देश्य केवल धन प्राप्ति नहीं बल्कि विवेकपूर्ण, शुभ और संतुलित समृद्धि की प्रार्थना करना माना जाता है।
दिवाली पर दीपक कहाँ और कैसे जलाएँ?
दिवाली का मूल प्रतीक दीप है। परंपरा और घर की सुरक्षा के अनुसार पूजा स्थान, मुख्य द्वार, आंगन, बालकनी और तुलसी के पास दीपक रखे जा सकते हैं। किसी निश्चित संख्या को पूरे भारत का अनिवार्य धार्मिक नियम मानना उचित नहीं है; परिवार और क्षेत्र की परंपराएँ अलग होती हैं।
धनतेरस का यम दीपदान क्या है?
धनतेरस की संध्या को यम दीपदान की परंपरा अनेक परिवारों में निभाई जाती है। 2026 में New Delhi के अनुसार यम दीपदान का संध्या समय लगभग 5:33 PM से 6:51 PM है। घर की परंपरा के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर या प्रवेश के बाहर दीप रखने की रीति हो सकती है।
भारत में दिवाली की प्रमुख परंपराएँ
उत्तर भारत
लक्ष्मी-गणेश पूजा, घर की सजावट, रंगोली, दीपक, मिठाई और भगवान राम के अयोध्या लौटने की कथा प्रमुख हैं। अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का विशेष महत्व है।
गुजरात
दिवाली व्यापारिक वर्ष के समापन और नए वर्ष की शुरुआत से गहराई से जुड़ी है। चोपड़ा पूजन और नए accounting books का आरंभ प्रसिद्ध परंपराओं में है।
बंगाल और पूर्वी भारत
कई बंगाली परंपराओं में दिवाली की अमावस्या पर माता काली की पूजा विशेष महत्व रखती है। काली पूजा का समय और विधि लक्ष्मी पूजा से अलग हो सकती है।
महाराष्ट्र
वसुबारस से शुरू होने वाला विस्तृत दीपावली पर्व, अभ्यंग स्नान, फराळ और बलि प्रतिपदा जैसी परंपराएँ प्रमुख हैं।
दक्षिण भारत
कई दक्षिण भारतीय परंपराओं में नरक चतुर्दशी की सुबह अभ्यंग स्नान, नए वस्त्र और प्रारंभिक प्रातःकालीन दीपावली उत्सव अधिक प्रमुख होता है।
दिवाली पर रंगोली क्यों बनाई जाती है?
रंगोली घर के प्रवेश को सजाने की प्राचीन भारतीय लोककला है। दिवाली पर रंगोली को स्वागत, शुभता और उत्सव से जोड़ा जाता है। क्षेत्र के अनुसार चावल के आटे, प्राकृतिक रंग, फूलों की पंखुड़ियों या बाजार में उपलब्ध रंगों से अलग-अलग designs बनाए जाते हैं।
दिवाली पर घर की सफाई का क्या महत्व है?
दिवाली से पहले घर की सफाई का धार्मिक और व्यावहारिक दोनों महत्व है। परंपरा में स्वच्छता को शुभता और माता लक्ष्मी के स्वागत से जोड़ा जाता है। व्यवहारिक रूप से यह साल में एक बार घर के अनावश्यक सामान, धूल और अव्यवस्था को हटाने का अवसर भी बन जाता है।
दिवाली पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस और दिवाली के आसपास धातु के बर्तन, सोना-चाँदी, पूजा सामग्री, दीपक, घर के उपयोगी सामान और व्यवसाय के उपकरण खरीदना लोकप्रिय है। इसे सार्वभौमिक धार्मिक अनिवार्यता न मानें—खरीदारी बजट और वास्तविक आवश्यकता के अनुसार करना बेहतर है।
दिवाली पर नया बही-खाता क्यों शुरू किया जाता है?
विशेष रूप से व्यापारिक समुदायों में दिवाली और गुजराती नववर्ष के आसपास पुराने लेखे बंद करके नए बही-खाते शुरू करने की परंपरा है। आज physical बही के साथ accounting software, laptop या business systems का सांकेतिक पूजन भी कई परिवारों और संस्थानों में किया जाता है।
क्या दिवाली पर जुआ खेलना धार्मिक परंपरा है?
कुछ लोकपरंपराओं में ताश या द्यूत से जुड़ी कथाएँ मिलती हैं, लेकिन इससे वास्तविक धन के साथ gambling को धार्मिक आवश्यकता नहीं माना जा सकता। आर्थिक हानि, लत और कानूनी जोखिम वाले जुए से बचना उचित है। परिवार के साथ बिना पैसे वाले games या मनोरंजन अधिक सुरक्षित विकल्प हैं।
सुरक्षित और जिम्मेदार दिवाली कैसे मनाएँ?
दिवाली की सुंदरता दीप, परिवार, पूजा, सजावट और मिलन में है। यदि पटाखे उपयोग किए जाएँ तो local laws और समय-सीमा का पालन आवश्यक है क्योंकि नियम शहर और वर्ष के अनुसार बदल सकते हैं।
- पटाखों से जुड़े स्थानीय नियम त्योहार के नजदीक आधिकारिक स्रोत से देखें।
- बच्चों को बिना वयस्क देखरेख के fireworks न दें।
- ढीले synthetic कपड़ों से बचें; आग के स्रोत से दूरी रखें।
- पानी या प्राथमिक fire-safety व्यवस्था पास रखें।
- धुएँ से संवेदनशील लोगों, वृद्धों, बच्चों और पालतू जानवरों का ध्यान रखें।
- दीपक ऐसी जगह रखें जहाँ गिरने या पर्दे से टकराने का खतरा न हो।
- कचरा, जली हुई सामग्री और सजावट अगले दिन सुरक्षित तरीके से साफ करें।
दिवाली पर पालतू जानवरों का ध्यान कैसे रखें?
तेज़ आवाज और धुआँ कुत्तों, बिल्लियों और अन्य पालतू जानवरों में तनाव पैदा कर सकते हैं। उन्हें सुरक्षित indoor room, पानी और परिचित bedding दें। तेज आवाज वाले क्षेत्र से दूर रखें और घबराहट बहुत अधिक हो तो veterinarian से सलाह लें।
बच्चों के साथ दिवाली कैसे मनाएँ?
बच्चों के साथ मिट्टी के दीप सजाना, सुरक्षित रंगोली बनाना, रामायण या स्थानीय दिवाली कथा सुनना, मिठाई बनाना, बुजुर्गों से परंपराएँ सीखना और जरूरतमंदों को उपयोगी सामग्री देना त्योहार को अधिक meaningful बना सकता है।
दिवाली पर दान का महत्व
दिवाली केवल सजावट और खरीदारी का पर्व नहीं है। अन्न, वस्त्र, शिक्षा सामग्री या उपयोगी वस्तुओं का दान परिवार की क्षमता और इच्छा अनुसार किया जा सकता है। जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक सहायता देना त्योहार के प्रकाश और साझेदारी के भाव को मजबूत करता है।
दिवाली के आसपास अन्य प्रमुख व्रत और त्योहार
| तिथि | पर्व |
|---|---|
| 29 अक्टूबर | करवा चौथ 2026 |
| 1 नवंबर | अहोई अष्टमी |
| 5 नवंबर | रमा एकादशी |
| 6 नवंबर | धनतेरस 2026 |
| 8 नवंबर | दिवाली 2026 |
| 10 नवंबर | गोवर्धन पूजा 2026 |
| 11 नवंबर | भाई दूज 2026 |
| 15 नवंबर | छठ पूजा |
| 20 नवंबर | देवउठनी एकादशी |
दिवाली पर खाटू श्याम जी दर्शन
दिवाली के आसपास खाटू श्याम जी की यात्रा करने वाले भक्त यात्रा से पहले मंदिर के Darshan Timings, भीड़ की स्थिति और स्थानीय व्यवस्थाएँ जरूर देखें। Festival period में समय या crowd-management व्यवस्था बदल सकती है, इसलिए यात्रा वाले दिन current update देखना अधिक सुरक्षित है।
खाटू श्याम जी पहुँचने के लिए रींगस जंक्शन (RGS) प्रमुख नजदीकी railway station है। यात्रा की विस्तृत जानकारी के लिए Train Schedule, Hotels, Dharamshala और Parking pages देखें।
दिवाली पर खाटू यात्रा की तैयारी
Darshan, stay और travel information एक जगह देखें।
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
दिवाली 2026 — सामान्य प्रश्न
Q: दिवाली 2026 कब है?
दिवाली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।
Q: When is Diwali 2026?
Diwali 2026 falls on Sunday, 8 November 2026. In New Delhi, the Lakshmi Puja Muhurat is approximately 5:54 PM to 7:50 PM.
Q: दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा कितने बजे है?
New Delhi में Lakshmi Puja Muhurat 5:54 PM से 7:50 PM है। दूसरे शहरों में समय अलग होगा।
Q: दिवाली 2026 की अमावस्या कब शुरू होगी?
अमावस्या तिथि 8 नवंबर को 11:27 AM से शुरू होकर 9 नवंबर को 12:31 PM तक रहेगी।
Q: दिवाली के पाँच दिन कौन-से हैं?
मुख्य पर्व समूह में धनतेरस, नरक/काली चतुर्दशी, दिवाली-लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा/अन्नकूट और भाई दूज शामिल हैं। 2026 में इनके मुख्य dates 6, 7–8, 8, 10 और 11 नवंबर हैं।
Q: गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है।
Q: भाई दूज 2026 कब है?
भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है।
Q: धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है।
Q: क्या नरक चतुर्दशी और दिवाली 2026 में एक ही दिन हैं?
New Delhi Panchang के अनुसार नरक चतुर्दशी रविवार, 8 नवंबर 2026 को है और उसी शाम अमावस्या में दिवाली लक्ष्मी पूजा होगी।
Q: 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा क्यों नहीं है?
अमावस्या 9 नवंबर दोपहर तक रहती है। प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर से शुरू होकर 10 नवंबर तक चलती है, और Govardhan Puja 10 नवंबर की प्रातःकालीन प्रतिपदा में मनाई जाएगी।
Q: दिवाली पर किसकी पूजा होती है?
गृह परंपरा में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा सबसे व्यापक है। कई परिवार माता सरस्वती, कुबेर, कुलदेवता या व्यवसाय से जुड़े पूजन भी करते हैं।
Q: दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
दीपों की कोई एक संख्या पूरे भारत के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। परिवार की परंपरा, स्थान और सुरक्षा के अनुसार दीपक जलाएँ।
Q: क्या दिवाली पर नया बही-खाता शुरू किया जाता है?
हाँ, विशेष रूप से कई व्यापारिक समुदायों में दिवाली और गुजराती नववर्ष के आसपास नया लेखा-वर्ष और बही-खाता शुरू करने की परंपरा है।
Q: Mumbai में Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat क्या है?
Mumbai में Panchang calculation के अनुसार Lakshmi Puja Muhurat लगभग 6:27 PM से 8:27 PM है।
Q: Jaipur में Diwali Puja का समय क्या है?
Jaipur में 2026 का Lakshmi Puja Muhurat लगभग 6:03 PM से 7:59 PM है।
Q: पटाखों के नियम क्या होंगे?
Fireworks rules शहर, राज्य और वर्ष के अनुसार बदल सकते हैं। Diwali 2026 के नजदीक local administration की latest advisory देखना आवश्यक है।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Diwali 2026 Lakshmi Puja timings, New Delhi
- Drik Panchang — Diwali 2026 festival calendar
- Drik Panchang — Yama Deepam 2026, New Delhi
- Drik Panchang — Dhanteras 2026, Delhi
- Drik Panchang — Govardhan Puja 2026, Delhi
- Drik Panchang — Bhai Dooj 2026, New Delhi
- Incredible India — Diwali, Festival of Lights
मुख्य तिथियाँ और मुहूर्त New Delhi Panchang के अनुसार दिए गए हैं। Puja Muhurat स्थान के अनुसार बदलता है। Fireworks से संबंधित rules समय और स्थान के अनुसार बदल सकते हैं; त्योहार के नजदीक official local advisory देखें। Updated August 2026.