अमावस्या
Amavasya — कब आती है, पितृ तर्पण, स्नान-दान विधि, सोमवती और शनि अमावस्या तथा साल की बड़ी अमावस्याएँ
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
अमावस्या हर महीने एक बार आती है — कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं और अंतिम तिथि, जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता। यह दिन मुख्य रूप से पितरों के तर्पण, स्नान और दान के लिए है। पूर्णिमा की तरह इसमें चंद्र दर्शन का नियम नहीं होता।
🌑 चंद्रमा अदृश्य | 📅 महीने में एक बार | 🙏 पितृ तर्पण | 💧 स्नान-दान
अमावस्या कब आती है?
अमावस्या हर चांद्र मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है — वह दिन जब चंद्रमा और सूर्य एक ही राशि में होते हैं और चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता। साल में बारह अमावस्या आती हैं, और अधिक मास वाले वर्ष में तेरह।
गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की अमांत प्रणाली में महीना अमावस्या पर ही समाप्त होता है, इसलिए वहाँ यह महीने का अंतिम दिन होता है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत प्रणाली में यह महीने के बीच में पड़ती है।
अमावस्या के प्रकार कौन-से हैं?
अमावस्या जिस वार को पड़े, उसी के अनुसार उसका नाम और महत्व बदल जाता है। इनमें सोमवती और शनि अमावस्या को विशेष माना जाता है।
| नाम | कब | महत्व |
|---|---|---|
| सोमवती अमावस्या | सोमवार को | सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत और पीपल परिक्रमा करती हैं |
| शनि अमावस्या | शनिवार को | शनि दोष, साढ़े साती और ढैया की शांति के लिए |
| भौमवती अमावस्या | मंगलवार को | ऋण-मुक्ति और मंगल दोष शांति |
| मौनी अमावस्या | माघ मास | मौन व्रत और संगम स्नान — माघ मेले का प्रमुख स्नान |
| हरियाली अमावस्या | श्रावण मास | वृक्षारोपण, शिव पूजा और तर्पण |
| सर्व पितृ अमावस्या | आश्विन मास | पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण श्राद्ध दिवस |
| दिवाली अमावस्या | कार्तिक मास | लक्ष्मी-गणेश पूजन — दीपावली |
अमावस्या पर पितृ तर्पण क्यों किया जाता है?
मान्यता है कि अमावस्या पर पितर पृथ्वी के निकट आते हैं, इसलिए यह दिन उनके स्मरण और तर्पण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। तर्पण का अर्थ है जल और तिल अर्पित करके पूर्वजों को तृप्त करना। परंपरा में इससे पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-शांति आती है।
सबसे महत्वपूर्ण तर्पण सर्व पितृ अमावस्या पर होता है, जो आश्विन मास में पितृ पक्ष के अंतिम दिन आती है। जिन पूर्वजों की तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है।
अमावस्या की पूजा और तर्पण विधि क्या है?
अमावस्या पर सूर्योदय से पहले स्नान करके सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, फिर पितरों का तर्पण और दान किया जाता है। संध्या को पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने की परंपरा है।
- स्नान — सूर्योदय से पहले स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी में, अन्यथा स्नान के जल में गंगाजल मिला लें।
- सूर्य अर्घ्य — तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें।
- पितृ तर्पण — दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, जनेऊ को दाएँ कंधे से बाएँ करके, काले तिल और जल से पितरों को तर्पण दें।
- पिंडदान — जौ या चावल के आटे से पिंड बनाकर अर्पित करने की परंपरा है, विशेषकर सर्व पितृ अमावस्या पर।
- ब्राह्मण भोज और दान — ज़रूरतमंदों को भोजन कराएं। अन्न, वस्त्र, तिल और काली वस्तुओं का दान करें।
- पंचबलि — परंपरा में गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और देवताओं के लिए भोजन का अंश निकाला जाता है।
- पीपल पूजा — पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करें और संध्या को उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
सोमवती अमावस्या का क्या महत्व है?
जब अमावस्या सोमवार को पड़े तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह अपेक्षाकृत कम आती है, इसलिए इसे विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा करके उसमें कच्चा सूत लपेटती हैं।
सोमवार शिवजी का दिन होने के कारण इस दिन शिवलिंग का अभिषेक भी किया जाता है — यानी पितृ तर्पण और शिव आराधना दोनों एक साथ।
अमावस्या के नियम
✅ करें
सूर्योदय से पहले स्नान, सूर्य अर्घ्य, पितृ तर्पण, ज़रूरतमंदों को भोजन, अन्न-वस्त्र का दान, पीपल को जल, संध्या दीपदान, सात्विक आहार।
❌ न करें
माँस-मदिरा, लहसुन-प्याज, वाद-विवाद और क्रोध। परंपरा में इस दिन नए शुभ कार्य, गृह प्रवेश या विवाह आरंभ नहीं किए जाते।
अमावस्या पर खाटू श्याम जी दर्शन
अमावस्या पर खाटू श्याम जी में दर्शन का समय सामान्य रहता है — 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद)। बहुत से भक्त इस दिन पितरों की शांति की कामना से दर्शन और दान करते हैं।
कुछ अमावस्याओं पर क्षेत्र में विशेष आयोजन होते हैं — जैसे हरियाली अमावस्या पर राजस्थान में मेले और सामूहिक वृक्षारोपण। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
खाटू यात्रा की पूरी तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — अमावस्या / Amavasya
Q: अमावस्या कब आती है?
अमावस्या हर महीने कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को आती है — साल में बारह बार। इस महीने की तारीख हिंदू त्योहार कैलेंडर पर देखें।
Q: When is Amavasya observed?
Amavasya is the last tithi of Krishna Paksha every month — the new moon day, when the moon is not visible. It is primarily observed for pitru tarpan, snan and daan.
Q: अमावस्या पर पितृ तर्पण कैसे करें?
स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल और जल से तर्पण दें। इसके बाद ज़रूरतमंदों को भोजन कराना और अन्न-वस्त्र का दान करना परंपरा है।
Q: सोमवती अमावस्या क्या है?
जब अमावस्या सोमवार को पड़े तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं और पीपल की 108 परिक्रमा करती हैं।
Q: क्या अमावस्या अशुभ दिन होता है?
परंपरा में यह अशुभ नहीं, बल्कि पितरों के स्मरण और आत्म-चिंतन का दिन है। हाँ, नए शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश या विवाह इस दिन आरंभ नहीं किए जाते।
Q: अमावस्या और पूर्णिमा में क्या अंतर है?
अमावस्या कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता — मुख्य कर्म पितृ तर्पण है। पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि है जब चंद्रमा पूर्ण होता है — मुख्य कर्म सत्यनारायण पूजा और चंद्र अर्घ्य है।
Q: सर्व पितृ अमावस्या कब आती है?
सर्व पितृ अमावस्या आश्विन मास में पितृ पक्ष के अंतिम दिन आती है। जिन पूर्वजों की तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Amavasya dates and tithi timings
- Drik Panchang — Pitru Paksha and Shraddha dates
- Shri Shyam Mandir — official temple site
तिथि का आरंभ-समाप्ति समय शहर के अनुसार बदल सकता है — स्थानीय पंचांग देखें। मासिक तिथियाँ महीने वाले पेज पर दी गई हैं। Updated July 2026.