देवउठनी एकादशी 2026 कब है? Dev Uthani Ekadashi (Devuthani Gyaras) 2026 Date, मुहूर्त व पूजा विधि

✍️ लेखक: Team Khatuwalebaba.in📅 प्रकाशित: 16 अगस्त 2026🔄 अपडेट: 22 अक्टूबर 2026पंचांग स्रोतों से सत्यापित

सीधा जवाब

देवउठनी एकादशी 2026 कब है?

📅 शुक्रवार, 20 नवंबर 2026   ⏳

  • 🕉️ कार्तिक शुक्ल एकादशी — प्रारंभ: 20 नवंबर, 7:16 AM · समाप्त: 21 नवंबर, 6:32 AM
  • 🌅 सूर्योदय 6:50 AM · सूर्यास्त 5:34 PM
  • 🍃 व्रत पारण: 21 नवंबर, 1:17 PM – 3:26 PM (जयपुर) · हरि वासर 12:07 PM पर समाप्त · गौण एकादशी पारण 22 नवंबर, 6:52 – 9:00 AM

📌 20 नवंबर या 21 नवंबर? एकादशी तिथि 20 नवंबर, 7:16 AM से 21 नवंबर, 6:32 AM तक रहेगी, इसलिए दोनों तारीखों को लेकर भ्रम रहता है। पंचांग के अनुसार देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।< वैष्णव / गौण परंपरा (जैसे ISKCON) में यह एकादशी शनिवार, 21 नवंबर को रखी जाएगी।/p>

समय जयपुर (IST) के अनुसार; तिथि का समय खगोलीय गणना से। आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

कार्तिक शुक्ल एकादशी

🛕 इस दिन खाटू आ रहे हैं?

देवउठनी एकादशी पर खाटू में श्याम जन्मोत्सव मनाया जाता है — फाल्गुन मेले के बाद साल की सबसे बड़ी भीड़। ठहरने की बुकिंग पहले कर लें और एक दिन पहले पहुँचें।

देवउठनी एकादशी 2026 कब है? Dev Uthani Ekadashi (Devuthani Gyaras) 2026 Date, मुहूर्त व पूजा विधि

देवउठनी एकादशी 2026 (Dev Uthani Ekadashi 2026) 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कार्तिक शुक्ल एकादशी है और विष्णु-उपासना तथा चातुर्मास-समापन की प्रचलित परंपराओं से जुड़ी है।

अन्य नाम: देवउठनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी, देवठान, देवउठनी ग्यारस और कई क्षेत्रों में जेठान भी कहते हैं।

📿 घर पर पूजा कैसे करें: देवउठनी एकादशी पूजा विधि → · तुलसी पूजा विधि →

देवउठनी एकादशी 2026 | Dev Uthani Ekadashi 2026
तुलसी पूजा का सांकेतिक दृश्य। फोटो: Prathvi Acharya / Wikimedia Commons, Wikimedia Commons license. चित्र सांकेतिक है।
पर्वदेवउठनी एकादशी
तारीख20 नवंबर 2026
पंचांग आधारकार्तिक शुक्ल एकादशी
स्थान referenceJaipur / Rajasthan

📅 अगले वर्ष

देवउठनी एकादशी 2027 कब है? — बुधवार, 10 नवंबर 2027

  • 🙏 एकादशी तिथि: 9 नवंबर सुबह 7:34 से 10 नवंबर सुबह 9:11 बजे तक
  • 🎉 इसी दिन खाटू में श्याम जन्मोत्सव मनाया जाता है

स्रोत: Drik Panchang, जयपुर (2027)। समय जयपुर (IST) के अनुसार।

🛕 देवउठनी एकादशी पर खाटू श्याम दर्शन की योजना?

इसी दिन खाटू में श्याम जन्मोत्सव मनाया जाता है — फाल्गुन मेले के बाद यह साल की सबसे बड़ी भीड़ वाले दिनों में है। ठहरने की बुकिंग पहले कर लें, एक दिन पहले पहुँचें और सुबह जल्दी दर्शन करें।

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देवउठनी एकादशी 2026 कब है? तारीख और पंचांग आधार

देवउठनी एकादशी 2026 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। इसका पंचांग आधार कार्तिक शुक्ल एकादशी है।

हिंदू पर्वों की तारीख और पूजा-काल में स्थानीय सूर्योदय, चंद्रोदय, तिथि-प्रवेश, प्रदोष या पर्व-विशेष नियमों के कारण शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए Jaipur/Rajasthan reference स्पष्ट रूप से अलग रखा गया है।

विवरण जानकारी ध्यान रखें
देवउठनी एकादशी 2026 20 नवंबर 2026, शुक्रवार Jaipur/Rajasthan reference
पंचांग आधार कार्तिक शुक्ल एकादशी क्षेत्रानुसार पालन बदल सकता है
पूजा समय अपने शहर के Panchang से देखें जयपुर के अनुसार

देवउठनी एकादशी क्या है? परंपरा को सही संदर्भ में समझें

एकादशी-व्रत वैष्णव परंपराओं में महत्वपूर्ण है, लेकिन उपवास की कठोरता, पारण और पूजा-विधि परिवार/संप्रदाय के अनुसार बदल सकती है।

देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कार्तिक शुक्ल एकादशी है और विष्णु-उपासना तथा चातुर्मास-समापन की प्रचलित परंपराओं से जुड़ी है। इस पेज का उद्देश्य किसी स्थानीय रीति को पूरे भारत के लिए अनिवार्य बताना नहीं है। शास्त्रीय उल्लेख, मंदिर-परंपरा, पारिवारिक विधि और लोक-परंपरा को एक-दूसरे के स्थान पर नहीं रखा गया है।

पंचांग से क्या तय होता है?

तिथि, वार और जहाँ आवश्यक हो वहाँ पूजा-काल। ये गणनाएँ स्थान-आधारित हो सकती हैं, इसलिए सटीक समय के लिए सही शहर चुनना महत्वपूर्ण है।

परिवार की परंपरा क्या तय करती है?

मंत्र, कथा, नैवेद्य, व्रत की कठोरता, दान और विस्तृत पूजा क्रम परिवार, क्षेत्र या संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकता है।

देवउठनी एकादशी पूजा विधि / पालन — सरल और प्रचलित क्रम

परंपरा संबंधी नोट: नीचे दिया गया क्रम सामान्य गृह-पालन के लिए सरल रूपरेखा है। इसे किसी एक शास्त्रीय संप्रदाय की सार्वभौमिक अनिवार्य विधि न मानें।
  1. एकादशी तिथि और अगले दिन पारण समय स्थानीय पंचांग में देखें।
  2. विष्णु/कृष्ण की सामान्य गृह-पूजा करें।
  3. दीप, पुष्प और परिवार में प्रचलित नैवेद्य अर्पित करें।
  4. व्रत की कठोरता स्वास्थ्य और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार चुनें।
  5. पारण स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार करें।

विस्तृत पूजा-विधियों के लिए पूजा विधि संग्रह देखें। यदि आपके परिवार में पुरोहित, गुरु या परंपरागत विधि है तो उसी को प्राथमिकता देना उचित है।

देवउठनी एकादशी पूजा सामग्री — सामान्य सूची

इस पर्व के लिए पूरे भारत में एक जैसी अनिवार्य सामग्री-सूची मानना उचित नहीं है। नीचे सामान्य और उपयोगी सामग्री दी गई है; परिवार की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।

सामान्य सामग्री

  • दीपक
  • पुष्प
  • स्वच्छ जल
  • तुलसी-पत्र जहाँ परंपरा में उपयोग हो
  • फल/सात्त्विक नैवेद्य

क्या अनिवार्य नहीं मानना चाहिए?

  • किसी निश्चित संख्या में वस्तु रखना, जब तक आपकी परंपरा में स्पष्ट नियम न हो
  • महँगी सामग्री खरीदना
  • किसी वस्तु को निश्चित धन-लाभ या इच्छा-पूर्ति से जोड़ना
  • दूसरे क्षेत्र की सामग्री-सूची को अपने परिवार पर अनिवार्य रूप से लागू करना

देवउठनी एकादशी की परंपराएँ — क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर

भारत में एक ही पर्व का पालन अलग-अलग भाषाई, क्षेत्रीय और संप्रदायिक परंपराओं में अलग रूप से हो सकता है। देवउठनी एकादशी के मामले में भी भोजन, व्रत, पूजा-सामग्री, कथा और मंदिर-आयोजन में अंतर मिल सकता है।

“यही एक सही विधि है” जैसी भाषा से बचना बेहतर है। यदि किसी विशेष क्षेत्र की परंपरा बताई जाए तो उस region का नाम स्पष्ट करना चाहिए।

स्वास्थ्य संबंधी सावधानी: लंबा, निर्जला या कठोर उपवास हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। दवा लेने वाले, गर्भवती महिलाएँ, बच्चे, वृद्ध या किसी स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति चिकित्सकीय सलाह और अपनी क्षमता को प्राथमिकता दें।

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देव कैसे उठाए जाते हैं — विधि, मंत्र और गन्ने का मंडप

मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) से भगवान विष्णु चार महीने योगनिद्रा में रहते हैं — इसे चातुर्मास कहते हैं। कार्तिक शुक्ल एकादशी को वे जागते हैं, इसलिए इसे देवउठनी, प्रबोधिनी एकादशी और राजस्थान-मध्य प्रदेश में देवउठनी ग्यारस कहा जाता है। 2026 में यह शुक्रवार, 20 नवंबर को है।

घरों में देव उठाने का सबसे प्रचलित क्रम इस प्रकार है (परिवार की परंपरा के अनुसार इसमें अंतर हो सकता है):

  1. सुबह स्नान और संकल्प — एकादशी व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  2. चौक और चरण-चिह्न — आँगन या पूजा-स्थान पर गेरू, खड़िया या आटे से चौक बनाएँ; कई घरों में भगवान के चरण-चिह्न भी बनाए जाते हैं।
  3. गन्ने का मंडप — गन्नों से छोटा मंडप बनाकर उसके नीचे भगवान विष्णु या शालिग्राम को विराजमान करें।
  4. ऋतुफल का भोग — इस मौसम में आने वाले सिंघाड़ा, शकरकंद, बेर, गन्ना और मौसमी फल अर्पित करने की परंपरा है।
  5. शाम को दीपदान — संध्या के समय दीप जलाएँ; कई जगह थाली या सूप बजाकर देवों को जगाया जाता है।
  6. प्रबोधन मंत्र — भगवान को जगाते हुए यह पारंपरिक श्लोक पढ़ा जाता है।
  7. अगले दिन पारण — 21 नवंबर को दोपहर 1:17 से 3:26 बजे (जयपुर) के बीच व्रत खोलें; हरि वासर दोपहर 12:07 बजे तक रहने से सुबह पारण नहीं होता।

देव उठाने का पारंपरिक मंत्र

उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते।
त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥
उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव।

भाव: हे गोविंद, हे जगत्पति, निद्रा त्याग कर उठिए। आपके सोने से यह संसार सोया रहता है और आपके जागने से सब कुछ फिर से चलने लगता है — हे माधव, उठिए।

पूरी विधि और सामग्री सूची: देवउठनी एकादशी पूजा विधि

तुलसी विवाह 2026 — शनिवार, 21 नवंबर

देव उठने के साथ ही तुलसी विवाह की तैयारी होती है — इसमें माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु) या श्रीकृष्ण से किया जाता है। Drik Panchang (जयपुर) के अनुसार 2026 में तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को है — द्वादशी तिथि 21 नवंबर सुबह 6:31 बजे से 22 नवंबर सुबह 4:56 बजे तक है।

कई परिवार देवउठनी एकादशी की शाम को ही तुलसी विवाह कर लेते हैं, जबकि कई द्वादशी को करते हैं। पद्म पुराण में तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल नवमी को बताया गया है, और प्रबोधिनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक के पाँच दिन भी इसके लिए शुभ माने जाते हैं — इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दिन चुनें।

पूरी जानकारी: तुलसी विवाह 2026 · तुलसी पूजा विधि

चातुर्मास का समापन — मांगलिक कार्य फिर शुरू

देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक के चातुर्मास में परंपरागत रूप से विवाह, गृह-प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। देवउठनी एकादशी (20 नवंबर 2026) के बाद ये शुभ कार्य फिर से शुरू होते हैं — इसलिए इस दिन को “अबूझ” शुभ दिन मानकर कई जगह विवाह भी होते हैं। विवाह या गृह-प्रवेश का सटीक मुहूर्त अपने पंडित या स्थानीय पंचांग से ही तय करें।

अगले वर्ष देवउठनी एकादशी बुधवार, 10 नवंबर 2027 को होगी — पूरी सूची: एकादशी कैलेंडर 2026–27।

देवउठनी ग्यारस 2026 कब है?

देवउठनी ग्यारस (देवउठनी एकादशी) 2026 में शुक्रवार, 20 नवंबर को है। एकादशी तिथि 20 नवंबर सुबह 7:16 बजे से 21 नवंबर सुबह 6:32 बजे तक (जयपुर) है और व्रत का पारण 21 नवंबर को दोपहर 1:17 से 3:26 बजे के बीच होगा।

तुलसी विवाह 2026 कब है?

Drik Panchang (जयपुर) के अनुसार तुलसी विवाह 2026 में शनिवार, 21 नवंबर को है। कई परिवार देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) की शाम को ही तुलसी विवाह करते हैं।

देव उठाने का मंत्र क्या है?

पारंपरिक प्रबोधन मंत्र है — “उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥ उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव।”

देवउठनी एकादशी और खाटू श्याम जन्मोत्सव — 20 नवंबर 2026

कार्तिक शुक्ल एकादशी को खाटू में खाटू श्याम जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, इसलिए खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए देवउठनी एकादशी वर्ष की सबसे प्रमुख तिथियों में से एक है। 2026 में यह शुक्रवार, 20 नवंबर को है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में “श्याम” नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था — देखें खाटू श्याम जी कौन हैं।

जन्मोत्सव और एकादशी पर खाटू में सामान्य दिनों से कहीं अधिक भीड़ रहती है और बहुत-से भक्त निशान यात्रा लेकर रिंगस से पैदल खाटू पहुँचते हैं। इस दिन की यात्रा की योजना हो तो ठहरने की व्यवस्था पहले से करें — होटल, धर्मशाला — और पार्किंग जानकारी देख लें।

खाटू श्याम जी मंदिर का समय: मंदिर सुबह 4:30 बजे खुलता है और रात 10 बजे बंद होता है, पर दोपहर 2 से 4 बजे बंद रहता है। मंगला आरती 4:45 AM, श्रृंगार आरती 7:15 AM, भोग आरती 12:30 PM, संध्या आरती 7:15 PM और शयन आरती 9:45 PM (श्री श्याम मंदिर कमेटी का बोर्ड, सितंबर 2026)। जन्मोत्सव और एकादशी पर दर्शन व्यवस्था बदल सकती है — यात्रा से पहले दर्शन समय गाइड ज़रूर देखें।

देवउठनी एकादशी के आसपास की तिथियाँ (2026)

देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है, और इसी के साथ चातुर्मास का समापन माना जाता है। इसके आसपास की प्रमुख तिथियाँ:

तिथि / पर्व तारीख संदर्भ
छठ पूजा (संध्या अर्घ्य) 15 नवंबर, रविवार पाँच दिन पहले
देवउठनी एकादशी / खाटू श्याम जन्मोत्सव 20 नवंबर, शुक्रवार स्मार्त परंपरा; तिथि 20 नव. 7:16 AM – 21 नव. 6:32 AM
वैष्णव / गौण देवउठनी एकादशी 21 नवंबर, शनिवार वैष्णव परंपरा
तुलसी विवाह 21 नवंबर, शनिवार पंचांग के अनुसार; कई परिवार एकादशी के दिन ही करते हैं
कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर, मंगलवार देव दीपावली, गुरु नानक जयंती

पारण: स्मार्त व्रत रखने वाले 21 नवंबर की सुबह सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि में पारण करते हैं। पारण का सटीक समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें। पूरी सूची: एकादशी कैलेंडर।

Dev Uthani Ekadashi 2026 — Date & Panchang Summary

Dev Uthani Ekadashi 2026 falls on November 20, 2026 for the Jaipur/Rajasthan reference used on this page. The traditional calendar basis is कार्तिक शुक्ल एकादशी. Rituals, fasting practices and exact timings may vary by location and family tradition.

Location-specific timings should be checked for the city where the पालन is taking place. This page avoids using an unverified muhurta from another city.

🪔 त्योहारों का मौसम 2026 — क्रम से

  1. नवरात्रि 2026 कब है? (Navratri) — 11 अक्टूबर से
  2. दशहरा 2026 कब है? (Dussehra / Dashara) — 20 अक्टूबर
  3. करवा चौथ 2026 कब है? (Karwa / Karva Chauth) — 29 अक्टूबर
  4. दीपावली 2026 कब है? (Diwali / Deepawali) — 8 नवंबर
  5. देवउठनी एकादशी 2026 कब है? (Dev Uthani Gyaras) — 20 नवंबर (यह पेज)

सभी तारीखें जयपुर पंचांग के अनुसार · 2026–27 के सभी व्रत-त्योहार · अक्टूबर 2026 कैलेंडर · नवंबर 2026 कैलेंडर

🙏 देवउठनी एकादशी पर खाटू में बाबा श्याम का जन्मोत्सव मनाया जाता है — दर्शन की यात्रा पहले से प्लान करें।

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देवउठनी एकादशी 2026 — सामान्य प्रश्न

देवउठनी एकादशी 2026 कब है?

देवउठनी एकादशी 2026 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। इस page में Jaipur/Rajasthan reference को प्राथमिक रखा गया है।

देवउठनी एकादशी किस तिथि से जुड़ा है?

यह कार्तिक शुक्ल एकादशी से जुड़ा पालन है। स्थान और परंपरा के अनुसार पूजा समय या पालन में अंतर हो सकता है।

क्या देवउठनी एकादशी की पूजा-विधि पूरे भारत में एक जैसी है?

नहीं। परिवार, क्षेत्र, मंदिर और संप्रदाय के अनुसार पूजा-विधि, नैवेद्य और व्रत की पद्धति बदल सकती है।

क्या Jaipur का मुहूर्त दूसरे शहर में उपयोग किया जा सकता है?

स्थान-आधारित पंचांग समय सीधे दूसरे शहर पर लागू नहीं करना चाहिए। सूर्योदय, चंद्रोदय और अन्य गणनाएँ शहर के अनुसार बदल सकती हैं।

देवउठनी एकादशी से जुड़े अन्य पेज कहाँ देखें?

इस page के संबंधित उपयोगी पेज section में मासिक कैलेंडर, पूजा-विधि और संबंधित festival pages के links दिए गए हैं।

क्या देवउठनी एकादशी को ही खाटू श्याम जन्मोत्सव है?

हाँ। कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को खाटू में खाटू श्याम जन्मोत्सव मनाया जाता है। 2026 में यह शुक्रवार, 20 नवंबर को है।

वैष्णव देवउठनी एकादशी 2026 कब है?

वैष्णव / गौण परंपरा में देवउठनी एकादशी शनिवार, 21 नवंबर 2026 को रखी जाएगी। स्मार्त (गृहस्थ) परंपरा में यह 20 नवंबर को है।

पंचांग स्रोत और सत्यापन

  1. Drik Panchang — Jaipur Hindu Calendar 2026 — Jaipur/Rajasthan date cross-check के लिए।
  2. Prokerala — संबंधित मासिक Hindu Calendar — festival-date cross-check के लिए। Exact timings default location के हो सकते हैं, इसलिए Jaipur मुहूर्त के रूप में सीधे उपयोग नहीं किए गए।

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