सीधा जवाब — अगला कजरी तीज
कजरी तीज 2027 कब है?
📅 शुक्रवार, 20 अगस्त 2027 ⏳ 339 दिन बाकी
- 🕉️ भाद्रपद कृष्ण तृतीया — प्रारंभ: 19 अगस्त, 5:16 PM · समाप्त: 20 अगस्त, 6:54 PM
2026 में कजरी तीज 31 अगस्त 2026 को था — नीचे की विस्तृत जानकारी (पूजा विधि, कथा) हर वर्ष उपयोगी है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से।
कजरी तीज 2026
Kajari Teej 2026 — तिथि, निर्जला व्रत, पूजा विधि, नीम पूजा, सत्तू परंपरा और बूंदी की कजली तीज सवारी
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
कजरी तीज 2026 सोमवार, 31 अगस्त 2026 को है। यह भाद्रपद कृष्ण तृतीया का दिन है। तृतीया तिथि 30 अगस्त सुबह 9:35 बजे शुरू होकर 31 अगस्त सुबह 8:50 बजे समाप्त होती है। व्रत निर्जला रखा जाता है और चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है।
📅 31 अगस्त 2026 | 🗓️ सोमवार | 🌙 चंद्र अर्घ्य के बाद पारण | 🌿 भाद्रपद कृष्ण तृतीया | 🐄 बहुला चतुर्थी भी
कजरी तीज 2026 कब है?
कजरी तीज 2026 सोमवार, 31 अगस्त 2026 को है। यह पर्व हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को आता है — यानी रक्षाबंधन के तीन दिन बाद और कृष्ण जन्माष्टमी से कुछ दिन पहले। 2026 में तृतीया तिथि 30 अगस्त की सुबह 9:35 बजे शुरू होकर 31 अगस्त की सुबह 8:50 बजे समाप्त होती है।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| कजरी तीज 2026 | सोमवार, 31 अगस्त 2026 |
| तृतीया तिथि प्रारंभ | 30 अगस्त 2026, सुबह 9:35 बजे |
| तृतीया तिथि समाप्त | 31 अगस्त 2026, सुबह 8:50 बजे |
| पूजा का समय | संध्या काल, चंद्रोदय के बाद अर्घ्य |
| अन्य नाम | बड़ी तीज, सातूड़ी तीज, कजली तीज, बूंदी तीज |
| साथ में | बहुला चतुर्थी, हेरंब संकष्टी चतुर्थी |
कजरी तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर है?
हरियाली तीज को छोटी तीज और कजरी तीज को बड़ी तीज कहा जाता है। हरियाली तीज सावन के शुक्ल पक्ष में आती है और उत्सव-प्रधान होती है — झूला, मेहंदी, लोकगीत। कजरी तीज भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में, लगभग 15 दिन बाद आती है और इसका स्वरूप अधिक व्रत-प्रधान है — कठोर निर्जला उपवास और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण।
| तीज | 2026 तिथि | पहचान |
|---|---|---|
| हरियाली तीज | 15 अगस्त 2026 | छोटी तीज — उत्सव, झूला, मेहंदी |
| कजरी तीज | 31 अगस्त 2026 | बड़ी तीज — निर्जला व्रत, चंद्र अर्घ्य |
| हरतालिका तीज | 14 सितंबर 2026 | सबसे कठिन निर्जला व्रत |
कजरी तीज क्यों मनाई जाती है?
कजरी तीज भी शिव-पार्वती के मिलन और सुखी दांपत्य जीवन का पर्व है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए और कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं। इसका नाम “कजरी” लोकगीत की उस विधा से आया है जो उत्तर प्रदेश, बिहार और भोजपुरी क्षेत्र में वर्षा ऋतु में गाई जाती है।
कजरी गीतों का भाव विरह का है — वर्षा के मौसम में पति से दूर रह रही स्त्री की व्याकुलता। मानसून में जब पुरुष काम के लिए परदेस जाते थे, तब स्त्रियाँ मिलकर ये गीत गाती थीं। यही लोक-परंपरा इस पर्व की आत्मा है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार के कुछ हिस्सों में इस दिन नीमड़ी माता की पूजा भी की जाती है, जिन्हें माता पार्वती के साथ पूजा जाता है।
कजरी तीज की पूजा विधि क्या है?
कजरी तीज की पूजा संध्या के समय की जाती है और व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है। महिलाएं सुबह स्नान करके निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं, दिन भर उपवास रखती हैं, शाम को नीमड़ी माता और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं, कजरी तीज की व्रत कथा सुनती हैं और चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर पारण करती हैं।
- स्नान और संकल्प — सुबह जल्दी स्नान करके नए या साफ वस्त्र पहनें और निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- नीमड़ी माता की स्थापना — आँगन में मिट्टी से एक छोटा तालाबनुमा घेरा बनाया जाता है, उसमें जल और दूध भरा जाता है, और पास में नीम की टहनी लगाकर उसे नीमड़ी माता के रूप में पूजा जाता है।
- पूजन सामग्री — रोली, अक्षत, फूल, मेहंदी, काजल, चूड़ी, सिंदूर, फल, सत्तू के लड्डू, नींबू, ककड़ी और दीपक अर्पित करें।
- सत्तू की परंपरा — चने के सत्तू में घी और शक्कर मिलाकर पिंड या लड्डू बनाया जाता है। परंपरा में यह सत्तू मायके से आता है।
- गौ पूजा — इसी दिन बहुला चतुर्थी भी होती है, इसलिए गाय को घी लगी रोटी खिलाने की परंपरा है।
- व्रत कथा — कजरी तीज की व्रत कथा सुने बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
- चंद्र अर्घ्य — चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल और दूध से अर्घ्य दें।
- पारण — अर्घ्य के बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके या परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत खोलें। सत्तू और फल से पारण किया जाता है।
कजरी तीज पर नीम की पूजा क्यों की जाती है?
कजरी तीज पर नीम की टहनी को नीमड़ी माता के रूप में पूजा जाता है। लोक-परंपरा में नीम को शीतलता, आरोग्य और रक्षा का प्रतीक माना गया है — वर्षा ऋतु में जब बीमारियाँ फैलती हैं, तब नीम की औषधीय महत्ता और बढ़ जाती है। महिलाएं नीम के पास दीपक जलाकर परिवार की आरोग्य और सुरक्षा की प्रार्थना करती हैं।
राजस्थान में कजरी तीज कैसे मनाई जाती है — बूंदी की कजली तीज
राजस्थान के बूंदी की कजली तीज सवारी सबसे प्रसिद्ध है। माता पार्वती की प्रतिमा को सजाकर पूरे शहर में शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें लोक नर्तक, बैंड, ऊँट और हाथी शामिल होते हैं। बूंदी की हवेलियों और बावड़ियों के बीच से गुज़रती यह सवारी जयपुर की तीज सवारी से छोटी, पर वातावरण के लिहाज़ से बेहद खास मानी जाती है। इसी कारण कजरी तीज को कहीं-कहीं बूंदी तीज भी कहा जाता है।
बूंदी कजली तीज मेले का कार्यक्रम हर साल प्रशासन तय करता है — यात्रा से पहले Rajasthan Tourism से आधिकारिक तिथि और मार्ग देख लें।
कजरी तीज पर खाटू श्याम जी दर्शन
31 अगस्त 2026 सोमवार है और उसी दिन कजरी तीज, बहुला चतुर्थी और हेरंब संकष्टी चतुर्थी तीनों पड़ रहे हैं। खाटू श्याम जी में दर्शन का समय सामान्य दिनों में 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।
ध्यान रहे कि 28 अगस्त को रक्षाबंधन है और उसके बाद का पूरा सप्ताह सीकर-शेखावाटी क्षेत्र में त्योहारों वाला रहेगा। यदि आप इस दौरान खाटू जा रहे हैं तो होटल या धर्मशाला पहले से बुक कर लें। नज़दीकी रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
तीज पर खाटू यात्रा की तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — कजरी तीज 2026 / Kajari Teej 2026
Q: कजरी तीज 2026 में कब है?
कजरी तीज सोमवार, 31 अगस्त 2026 को है। यह भाद्रपद कृष्ण तृतीया का दिन है।
Q: When is Kajari Teej 2026?
Kajari Teej 2026 falls on Monday, 31 August 2026, on Bhadrapada Krishna Tritiya. The tritiya tithi runs from 9:35 AM on 30 August to 8:50 AM on 31 August.
Q: कजरी तीज का व्रत कैसे खोला जाता है?
व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है। चंद्रोदय के बाद जल और दूध से अर्घ्य देकर, कथा सुनकर, सत्तू और फल से पारण किया जाता है।
Q: कजरी तीज को बड़ी तीज क्यों कहते हैं?
हरियाली तीज को छोटी तीज और कजरी तीज को बड़ी तीज कहा जाता है, क्योंकि इसका व्रत अधिक कठोर होता है — निर्जला उपवास और रात में चंद्र अर्घ्य के बाद ही पारण।
Q: कजरी तीज पर सत्तू का क्या महत्व है?
चने के सत्तू में घी और शक्कर मिलाकर पिंड या लड्डू बनाया जाता है, जो पूजा में अर्पित होता है और पारण में खाया जाता है। परंपरा में यह सत्तू मायके से आता है — इसीलिए इसे सातूड़ी तीज भी कहा जाता है।
Q: कजरी तीज पर नीम की पूजा क्यों होती है?
नीम की टहनी को नीमड़ी माता के रूप में पूजा जाता है। लोक-परंपरा में नीम शीतलता, आरोग्य और रक्षा का प्रतीक है — वर्षा ऋतु में इसका महत्व और बढ़ जाता है।
Q: What is the Bundi Kajali Teej procession?
Bundi in Rajasthan holds the best-known Kajari Teej procession, carrying an idol of Goddess Parvati through the old town with folk dancers, musicians, camels and elephants. It is smaller than the Jaipur Teej Sawari but considered more atmospheric. Confirm the official schedule with Rajasthan Tourism before travelling.
Q: क्या कुंवारी लड़कियां कजरी तीज का व्रत रख सकती हैं?
हाँ। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए और कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Kajari Teej date and time
- Prokerala — Kajari Teej
- Rajasthan Tourism — official fairs and festivals
- Shri Shyam Mandir — official temple site
सभी तिथियाँ भारत (IST) के अनुसार, एक से अधिक पंचांग स्रोतों से cross-verified. चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार बदलता है — स्थानीय पंचांग देखें। Updated July 2026.