हरतालिका तीज 2027 कब है? | Hartalika Teej 2027 Date, Puja Muhurat, Vrat Katha

✍️ लेखक: Team Khatuwalebaba.in📅 प्रकाशित: 1 अगस्त 2026🔄 अपडेट: 24 सितंबर 2026पंचांग स्रोतों से सत्यापित

सीधा जवाब — अगला हरतालिका तीज

हरतालिका तीज 2027 कब है?

📅 शुक्रवार, 3 सितंबर 2027   ⏳

  • 🕉️ भाद्रपद शुक्ल तृतीया — प्रारंभ: 2 सितंबर, 4:51 PM · समाप्त: 3 सितंबर, 2:20 PM

2026 में हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026 को था — नीचे की विस्तृत जानकारी (पूजा विधि, कथा) हर वर्ष उपयोगी है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से।

📿 घर पर पूजा कैसे करें: हरतालिका तीज पूजा विधि →

हरतालिका तीज 2026

Hartalika Teej 2026 — तिथि, प्रातःकाल पूजा मुहूर्त, निर्जला व्रत नियम, पूजा विधि और व्रत कथा

सीधा जवाब / QUICK ANSWER

हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह 7:08 बजे शुरू होकर 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे समाप्त होती है — इसलिए प्रातःकाल पूजा सुबह लगभग 6:12 से 7:06 बजे के बीच पूरी कर लें। यह तीनों तीज में सबसे कठिन निर्जला व्रत है।

📅 14 सितंबर 2026  |  🗓️ सोमवार  |  🕐 पूजा 7:06 AM से पहले  |  💧 निर्जला व्रत  |  🌸 भाद्रपद शुक्ल तृतीया

हरतालिका तीज 2026 कब है?

हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। यह पर्व हर साल भाद्रपद शुक्ल तृतीया को आता है। 2026 में तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होती है और 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे समाप्त हो जाती है। सूर्योदय के समय तिथि 14 सितंबर को सक्रिय है, इसलिए व्रत उसी दिन रखा जाएगा।

विवरण तिथि / समय
हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त सुबह लगभग 6:12 – 7:06 बजे
तृतीया तिथि प्रारंभ 13 सितंबर 2026, सुबह 7:08 बजे
तृतीया तिथि समाप्त 14 सितंबर 2026, सुबह 7:06 बजे
ऋषि पंचमी 15 सितंबर 2026, मंगलवार
हिंदू तिथि भाद्रपद शुक्ल तृतीया, विक्रम संवत 2083
⏰ समय को लेकर ज़रूरी बात: कुछ पंचांग प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 8:43 बजे तक बताते हैं, पर 2026 में तृतीया तिथि 7:06 बजे ही समाप्त हो जाती है। इसलिए सुरक्षित रहने के लिए मुख्य पूजा 7:06 बजे से पहले पूरी कर लेना उत्तम है। कई परिवार संध्या को प्रदोष काल में भी पूजा करते हैं — अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।

हरतालिका तीज क्यों मनाई जाती है?

हरतालिका तीज माता पार्वती की उस कठोर तपस्या की स्मृति है जिससे उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। इसका नाम दो शब्दों से बना है — “हरत” यानी हरण करना और “आलिका” यानी सखी। यानी वह तीज जिसमें सखी ने हरण किया।

कथा के अनुसार पार्वती जी के पिता हिमालय राज उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे, जबकि पार्वती जी ने मन ही मन शिवजी को वर मान लिया था। यह जानकर उनकी सखी उन्हें घने वन में ले गई, जहाँ पार्वती जी ने रेत से शिवलिंग बनाकर निर्जल रहकर कठोर तप किया।

उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी प्रकट हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसी कारण सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए और कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं।

तीनों तीज में क्या अंतर है?

साल में तीन तीज आती हैं और तीनों का स्वरूप अलग है। हरतालिका तीज इन तीनों में सबसे कठिन मानी जाती है।

तीज 2026 तिथि पहचान
हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 छोटी तीज — झूला, मेहंदी, उत्सव
कजरी तीज 31 अगस्त 2026 बड़ी तीज — निर्जला, चंद्र अर्घ्य
हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026 सबसे कठिन निर्जला व्रत, रात्रि जागरण

हरतालिका तीज की पूजा विधि क्या है?

हरतालिका तीज की पूजा में रेत या मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर स्थापित की जाती है। महिलाएं निर्जला व्रत का संकल्प लेकर सोलह श्रृंगार करती हैं, विधिवत पूजा करके कथा सुनती हैं और रात भर जागरण करती हैं।

  1. स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके हरे या लाल वस्त्र पहनें और निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  2. सोलह श्रृंगार — मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, काजल सहित सोलह श्रृंगार करें।
  3. प्रतिमा निर्माण — रेत या शुद्ध मिट्टी से शिवजी, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर चौकी पर स्थापित करें। केले के पत्तों से मंडप सजाएं।
  4. पूजन — बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल शिवजी को और श्रृंगार सामग्री माता पार्वती को अर्पित करें।
  5. सुहाग सामग्री — चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, काजल और लाल चुनरी अर्पित करके बाद में किसी सुहागिन को दान करें।
  6. व्रत कथा — हरतालिका तीज व्रत कथा सुनें — कथा सुने बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
  7. रात्रि जागरण — रात भर भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें। हर प्रहर में आरती की परंपरा है।
  8. पारण — अगली सुबह पूजा और आरती के बाद व्रत खोलें।

क्या हरतालिका तीज का व्रत निर्जला ही रखना पड़ता है?

परंपरा में हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है — यानी लगभग 24 घंटे तक न अन्न और न जल। इसीलिए इसे तीनों तीज में सबसे कठिन माना जाता है। कुछ परंपराओं में इसे निराहार रखकर जल की छूट भी दी जाती है।

🙏 स्वास्थ्य को लेकर ज़रूरी बात: 24 घंटे बिना जल के रहना हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, मधुमेह या रक्तचाप की रोगी, और वृद्धजन निर्जला व्रत न रखें — विशेषकर सितंबर की गर्मी में निर्जलीकरण का खतरा रहता है। परंपरा में भी स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार व्रत की पूरी छूट है, और श्रद्धा को ही मुख्य माना गया है। किसी भी असहजता पर तुरंत जल लें।

हरतालिका तीज पर कौन-सी बातें ध्यान रखें?

✅ करें

प्रातःकाल पूजा 7:06 बजे से पहले, सोलह श्रृंगार, मिट्टी की प्रतिमा, कथा श्रवण, रात्रि जागरण, सुहाग सामग्री का दान।

❌ न करें

शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी या केतकी का फूल न चढ़ाएं। व्रत के दौरान क्रोध और वाद-विवाद से बचें। स्वास्थ्य ठीक न हो तो कठोर व्रत का हठ न करें।

हरतालिका तीज पर खाटू श्याम जी दर्शन

14 सितंबर 2026 सोमवार है और उसी दिन गणेश चतुर्थी भी शुरू हो रही है — यानी दोहरा पर्व। खाटू श्याम जी में दर्शन का समय सामान्य रहेगा — 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद)।

तीज मुख्यतः घर में मनाया जाने वाला व्रत है, पर खाटू के आसपास के देवी स्थल — जीण माता और शाकंभरी देवी, सीकर — इस अवसर पर यात्रा में जोड़े जा सकते हैं। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →

तीज पर खाटू यात्रा की तैयारी

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FAQ — हरतालिका तीज 2026 / Hartalika Teej 2026

Q: हरतालिका तीज 2026 में कब है?

हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। यह भाद्रपद शुक्ल तृतीया का दिन है।

Q: When is Hartalika Teej 2026?

Hartalika Teej 2026 falls on Monday, 14 September. The tritiya tithi runs from 7:08 AM on 13 September to 7:06 AM on 14 September, so the morning puja should be completed before that.

Q: हरतालिका तीज की पूजा किस समय करें?

प्रातःकाल मुहूर्त सुबह लगभग 6:12 से 7:06 बजे तक है। चूंकि तृतीया तिथि 7:06 बजे समाप्त हो रही है, मुख्य पूजा उससे पहले पूरी कर लेना उत्तम है।

Q: “हरतालिका” नाम का अर्थ क्या है?

“हरत” यानी हरण और “आलिका” यानी सखी। कथा के अनुसार पार्वती जी की सखी उन्हें वन में ले गई थी ताकि वे शिवजी के लिए तप कर सकें — इसी से यह नाम पड़ा।

Q: क्या कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?

हाँ। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए और कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं — कथा में स्वयं माता पार्वती ने विवाह से पहले तप किया था।

Q: क्या निर्जला व्रत रखना अनिवार्य है?

परंपरा में यह निर्जला रखा जाता है, पर स्वास्थ्य सर्वोपरि है। गर्भवती, स्तनपान कराने वाली, मधुमेह या रक्तचाप की रोगी और वृद्धजन फलाहार व्रत रखें। परंपरा में भी छूट का पूरा विधान है।

Q: हरतालिका तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर है?

हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को आती है (15 अगस्त 2026) और उत्सव-प्रधान है। हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को आती है (14 सितंबर 2026) और कठोर निर्जला व्रत के लिए जानी जाती है।

Q: हरतालिका तीज का व्रत कब खोलें?

व्रत अगली सुबह पूजा और आरती के बाद खोला जाता है। रात्रि जागरण के बाद प्रातःकाल पारण की परंपरा है।

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References

  1. Drik Panchang — Hartalika Teej date and puja vidhi
  2. Prokerala — Hartalika Teej muhurat and tithi timings
  3. Shri Shyam Mandir — official temple site

सभी तिथियाँ और मुहूर्त भारत (IST) के अनुसार, एक से अधिक पंचांग स्रोतों से cross-verified. सूर्योदय-आधारित समय शहर के हिसाब से 10–25 मिनट बदल सकता है। Updated July 2026.

॥ जय श्री श्याम ॥


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