जन्माष्टमी 2027 कब है? 25 अगस्त (बुधवार) | Krishna Janmashtami 2027 Date, Nishita Puja

✍️ लेखक: Team Khatuwalebaba.in📅 प्रकाशित: 1 अगस्त 2026🔄 अपडेट: 24 सितंबर 2026पंचांग स्रोतों से सत्यापित

सीधा जवाब — अगला जन्माष्टमी

जन्माष्टमी 2027 कब है?

📅 बुधवार, 25 अगस्त 2027 — भाद्रपद कृष्ण अष्टमी   ⏳

  • 🕉️ भाद्रपद कृष्ण अष्टमी — प्रारंभ: 24 अगस्त, 8:24 PM · समाप्त: 25 अगस्त, 7:19 PM
  • 🌙 निशीथ पूजा: 25 अगस्त की रात 12:07 से 12:51 बजे (26 अगस्त) — मध्यरात्रि क्षण 12:29 बजे
  • ⭐ रोहिणी नक्षत्र: 25 अगस्त दोपहर 12:27 से 26 अगस्त सुबह 11:42 बजे तक · दही हांडी 26 अगस्त

📌 24 या 25 अगस्त? अष्टमी तिथि 24 अगस्त की रात 8:24 बजे शुरू होती है, इसलिए कुछ कैलेंडर में 24 अगस्त भी दिख सकती है। जयपुर पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार जन्माष्टमी व्रत और निशीथ पूजा 25 अगस्त को है, क्योंकि उसी रात की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र भी रहेगा। पारण 26 अगस्त को।

2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को था — नीचे की विस्तृत जानकारी (पूजा विधि, कथा) हर वर्ष उपयोगी है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से।

📿 घर पर पूजा कैसे करें: जन्माष्टमी पूजा विधि → · श्री कृष्ण पूजा विधि →

कृष्ण जन्माष्टमी 2026

Krishna Janmashtami 2026 — तिथि, निशीथ काल पूजा, व्रत विधि, पारण समय, दही हांडी और स्मार्त-वैष्णव तिथि का अंतर

सीधा जवाब / QUICK ANSWER

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को है। मुख्य पूजा निशीथ काल — रात 11:55 से 12:42 बजे (4–5 सितंबर की मध्यरात्रि) में होती है। व्रत का पारण 5 सितंबर को सुबह 11:23 बजे के बाद। ISKCON और वैष्णव परंपरा इसे 5 सितंबर को मनाएगी।

📅 4 सितंबर 2026  |  🗓️ शुक्रवार  |  🌜 निशीथ 11:55 PM–12:42 AM  |  ⭐ रोहिणी नक्षत्र  |  🍶 दही हांडी 5 सितंबर

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कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है — 4 या 5 सितंबर?

गृहस्थ परिवार जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाएंगे, और ISKCON तथा वैष्णव मंदिर 5 सितंबर को। दोनों तिथियाँ शास्त्रसम्मत हैं — अंतर केवल गणना की पद्धति का है।

भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों के संयोग में आधी रात को हुआ माना जाता है। स्मार्त परंपरा उस दिन को चुनती है जब निशीथ काल यानी आधी रात में अष्टमी चल रही हो — 2026 में वह 4 सितंबर है। वैष्णव परंपरा उस दिन को चुनती है जब सूर्योदय के समय अष्टमी और रोहिणी दोनों का संयोग हो — वह 5 सितंबर बनता है।

विवरण तिथि / समय
जन्माष्टमी (स्मार्त / गृहस्थ) शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
जन्माष्टमी (वैष्णव / ISKCON) शनिवार, 5 सितंबर 2026
निशीथ काल पूजा रात 11:55 – 12:42 बजे (5 सितंबर)
अष्टमी तिथि प्रारंभ 4 सितंबर 2026, रात 2:25 बजे
पारण (व्रत खोलना) 5 सितंबर, सुबह 11:23 बजे के बाद
दही हांडी 5 सितंबर 2026, शनिवार
हिंदू तिथि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, विक्रम संवत 2083

समय दिल्ली के अनुसार है। निशीथ काल सूर्यास्त-सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए शहर के हिसाब से कुछ मिनट बदल सकता है।

निशीथ काल पूजा का समय क्या है?

निशीथ काल पूजा का समय 4 सितंबर की रात 11:55 बजे से 12:42 बजे तक है — लगभग 47 मिनट। यही वह क्षण माना जाता है जब मथुरा के कारागार में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। पूरे व्रत का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान इसी खिड़की में किया जाता है।

इस दौरान बाल गोपाल की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया जाता है, उन्हें नए वस्त्र पहनाकर पालने में झुलाया जाता है, शंख बजाया जाता है और आरती होती है। 2026 में अष्टमी के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है, जिसे विशेष शुभ माना जाता है।

जन्माष्टमी का पारण कब करें?

जन्माष्टमी का पारण 5 सितंबर 2026 को सुबह 11:23 बजे के बाद किया जाएगा। शास्त्रीय नियम यह है कि व्रत तब खोला जाए जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों समाप्त हो जाएँ — 2026 में यह क्षण 5 सितंबर की सुबह 11:23 बजे बनता है।

व्यवहार में बहुत से परिवार निशीथ काल की पूजा के बाद ही प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं — यह आधुनिक और व्यापक रूप से स्वीकृत परंपरा है। दोनों में से कौन-सा नियम मानना है, यह अपने परिवार या संप्रदाय की परंपरा पर निर्भर करता है।

कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?

जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है। कथा के अनुसार मथुरा के अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और बहनोई वसुदेव को कारागार में डाल दिया था, क्योंकि आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की आठवीं संतान उसका वध करेगी।

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की आधी रात को, घोर वर्षा के बीच, कृष्ण का जन्म हुआ। कथा में कहा गया है कि कारागार के पहरेदार निद्रा में चले गए, बेड़ियाँ स्वतः खुल गईं, और वसुदेव शिशु कृष्ण को टोकरी में लेकर उफनती यमुना पार कर गोकुल पहुँचे, जहाँ नंद और यशोदा ने उनका पालन किया। शेषनाग ने वर्षा से उनकी रक्षा की।

इसी कारण जन्माष्टमी की पूजा आधी रात को होती है — जन्म के ठीक उसी क्षण पर। यह पर्व अन्याय पर धर्म की विजय और भक्ति की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

जन्माष्टमी की पूजा विधि क्या है?

जन्माष्टमी की पूजा दिन भर के उपवास के बाद आधी रात को की जाती है। व्रती सुबह संकल्प लेते हैं, दिन में फलाहार रखते हैं, संध्या को पूजा स्थल सजाते हैं और निशीथ काल में बाल गोपाल का अभिषेक करके जन्मोत्सव मनाते हैं।

  1. स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर फलाहार रखें।
  2. सजावट — पूजा स्थल पर झूला या पालना सजाएं। बाल गोपाल की प्रतिमा, मोर पंख, बांसुरी और फूलों से सजावट करें।
  3. अभिषेक — निशीथ काल में बाल गोपाल की प्रतिमा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से।
  4. श्रृंगार — नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और आभूषण पहनाकर पालने में विराजमान करें।
  5. भोग — माखन-मिश्री, पंजीरी, धनिया पंजीरी, खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं। तुलसी पत्र अवश्य अर्पित करें।
  6. मंत्र जाप — “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
  7. झूला और आरती — पालने को झुलाएं, शंख बजाएं और आरती करें।
  8. पारण — परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा के बाद या 5 सितंबर सुबह 11:23 बजे के बाद व्रत खोलें।

जन्माष्टमी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं?

✅ ले सकते हैं (फलाहार)

फल, दूध, दही, माखन, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा, आलू, मखाना, मूंगफली, सेंधा नमक।

❌ वर्जित

चावल, गेहूँ, दालें, सामान्य नमक, लहसुन-प्याज, माँस-मदिरा। निशीथ पूजा से पहले मुख्य भोजन न करें।

🙏 ध्यान दें: जन्माष्टमी का व्रत आधी रात तक चलता है। मधुमेह, रक्तचाप या किसी रोग से ग्रस्त व्यक्ति, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएं निर्जल व्रत न रखें — फलाहार व्रत परंपरा में पूर्णतः मान्य है।

दही हांडी 2026 कब है?

दही हांडी 2026 शनिवार, 5 सितंबर को है — जन्माष्टमी के अगले दिन। यह परंपरा बाल कृष्ण की माखन चुराने की लीला से जुड़ी है। ऊँचाई पर बँधी दही और माखन से भरी हांडी को युवाओं की टोलियाँ मानव-पिरामिड बनाकर फोड़ती हैं।

महाराष्ट्र, विशेषकर मुंबई और पुणे में यह सबसे भव्य रूप में मनाया जाता है, जहाँ “गोविंदा” मंडल बड़े आयोजनों में भाग लेते हैं। सुरक्षा को लेकर कई राज्यों में पिरामिड की ऊँचाई और प्रतिभागियों की न्यूनतम आयु पर नियम लागू हैं — आयोजन से पहले स्थानीय दिशानिर्देश अवश्य देख लें।

जन्माष्टमी और खाटू श्याम जी का क्या संबंध है?

खाटू श्याम जी (बर्बरीक) भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र हैं — यानी वे भगवान कृष्ण के वंशज नहीं, बल्कि पांडव वंश से हैं। महाभारत युद्ध से पहले बर्बरीक ने अपना शीश दान किया था, और उनकी इस अद्वितीय त्याग-भावना से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने ही उन्हें अपना नाम “श्याम” दिया और कलियुग में अपने नाम से पूजित होने का वरदान दिया।

इसी वरदान के कारण जन्माष्टमी का खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए विशेष महत्व है — यह उस देवता का जन्मदिवस है जिनकी कृपा से श्याम बाबा को उनका नाम और स्थान मिला। पूरी कथा: बर्बरीक कथा →

जन्माष्टमी पर खाटू श्याम जी दर्शन

4 सितंबर 2026 शुक्रवार है और अगला दिन शनिवार — यानी weekend के साथ जुड़ा लंबा अवसर। इस कारण खाटू श्याम जी में इन दिनों सामान्य से अधिक भीड़ रहने की संभावना है। दर्शन का समय सामान्य दिनों में 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।

ध्यान रहे कि 7 सितंबर को अजा एकादशी भी है, जब खाटू में सबसे अधिक भीड़ रहती है — यानी 4 से 7 सितंबर तक लगातार भीड़भाड़ रहेगी। होटल या धर्मशाला पहले से बुक कर लें। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →

जन्माष्टमी पर खाटू यात्रा की तैयारी

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FAQ — कृष्ण जन्माष्टमी 2026 / Krishna Janmashtami 2026

Q: जन्माष्टमी 2026 में कब है — 4 या 5 सितंबर?

गृहस्थ परिवार 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाएंगे। ISKCON और वैष्णव मंदिर 5 सितंबर को मनाएंगे। दोनों तिथियाँ शास्त्रसम्मत हैं।

Q: When is Krishna Janmashtami 2026?

Janmashtami 2026 falls on Friday, 4 September for the Smarta tradition and Saturday, 5 September for ISKCON and Vaishnava temples. The Nishita Kaal puja runs 11:55 PM to 12:42 AM.

Q: जन्माष्टमी की दो तिथियाँ क्यों होती हैं?

कृष्ण जन्म के लिए अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों का संयोग चाहिए, जो हमेशा एक ही मध्यरात्रि पर नहीं मिलता। स्मार्त परंपरा आधी रात की अष्टमी देखती है, वैष्णव परंपरा सूर्योदय पर अष्टमी और रोहिणी का संयोग।

Q: जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें?

शास्त्रीय नियम से पारण 5 सितंबर को सुबह 11:23 बजे के बाद, जब अष्टमी और रोहिणी दोनों समाप्त हो जाएँ। बहुत से परिवार निशीथ पूजा के बाद ही प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं — दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं।

Q: निशीथ काल पूजा का समय क्या है?

निशीथ काल रात 11:55 से 12:42 बजे तक है — लगभग 47 मिनट। यही कृष्ण जन्म का क्षण माना जाता है और पूरे व्रत की सबसे महत्वपूर्ण पूजा इसी समय होती है।

Q: दही हांडी 2026 कब है?

दही हांडी शनिवार, 5 सितंबर 2026 को है — जन्माष्टमी के अगले दिन।

Q: क्या खाटू श्याम जी भगवान कृष्ण के वंशज हैं?

नहीं। खाटू श्याम जी (बर्बरीक) भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र हैं। भगवान कृष्ण ने उनके त्याग से प्रसन्न होकर उन्हें अपना नाम “श्याम” दिया और कलियुग में पूजित होने का वरदान दिया।

Q: जन्माष्टमी पर क्या भोग लगाएं?

माखन-मिश्री कृष्ण जी का सबसे प्रिय भोग है। इसके अलावा धनिया पंजीरी, खीर, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं।

संबंधित पेज

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References

  1. Drik Panchang — Krishna Janmashtami date and Nishita Kaal
  2. Prokerala — Krishna Janmashtami timings and parana
  3. Shri Shyam Mandir — official temple site

सभी तिथियाँ और मुहूर्त भारत (IST), दिल्ली के अनुसार, एक से अधिक पंचांग स्रोतों से cross-verified. निशीथ काल शहर के हिसाब से कुछ मिनट बदल सकता है। Updated July 2026.

॥ जय श्री श्याम ॥


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