सीधा जवाब — अगला मंगला गौरी व्रत
मंगला गौरी व्रत 2027 कब है?
📅 मंगलवार, 20 जुलाई 2027 (पहला मंगलवार) ⏳
- 🔱 सावन 2027: 19 जुलाई – 17 अगस्त
- 🌸 मंगला गौरी व्रत: 20 जुलाई, 27 जुलाई, 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त
2026 में मंगला गौरी व्रत अगस्त 2026 को था — नीचे की विस्तृत जानकारी (पूजा विधि, कथा) हर वर्ष उपयोगी है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से।
मंगला गौरी व्रत 2026
Mangala Gauri Vrat 2026 — चारों मंगलवार की तिथि, पूजा विधि, सामग्री, व्रत कथा और उद्यापन
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
मंगला गौरी व्रत 2026 में चार बार पड़ रहा है — 4, 11, 18 और 25 अगस्त। यह व्रत सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है। मुख्य रूप से नवविवाहित महिलाएं इसे पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखती हैं।
📅 4, 11, 18, 25 अगस्त | 🗓️ सावन के मंगलवार | 🌺 माता गौरी | 💍 नवविवाहिताओं का व्रत | 🕐 प्रातःकाल पूजा
मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियाँ क्या हैं?
मंगला गौरी व्रत 2026 में चार मंगलवार को पड़ रहा है — 4, 11, 18 और 25 अगस्त 2026। यह व्रत श्रावण मास के हर मंगलवार को रखा जाता है। 2026 में सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक है, और इस अवधि में चार मंगलवार आते हैं।
| व्रत | तिथि | साथ में |
|---|---|---|
| पहला व्रत | 4 अगस्त 2026 | श्रावण कृष्ण षष्ठी |
| दूसरा व्रत | 11 अगस्त 2026 | सावन शिवरात्रि |
| तीसरा व्रत | 18 अगस्त 2026 | स्कंद षष्ठी |
| चौथा (अंतिम) व्रत | 25 अगस्त 2026 | भौम प्रदोष व्रत |
मंगला गौरी व्रत क्यों रखा जाता है?
मंगला गौरी व्रत माता पार्वती के गौरी स्वरूप को समर्पित है और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि माता गौरी की कृपा से पति की आयु बढ़ती है, वैवाहिक जीवन में सामंजस्य रहता है और संतान सुख प्राप्त होता है।
व्रत का नाम दो शब्दों से बना है — “मंगल” यानी मंगलवार तथा शुभता, और “गौरी” यानी माता पार्वती। सावन का महीना स्वयं शिव-पार्वती से जुड़ा है, क्योंकि इसी मास में माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसीलिए सावन के मंगलवार का यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
परंपरा के अनुसार यह व्रत विवाह के बाद लगातार पाँच वर्ष तक रखा जाता है, और पाँचवें वर्ष उद्यापन करके इसे पूर्ण किया जाता है। कुंवारी कन्याएं भी योग्य वर की कामना से यह व्रत रख सकती हैं।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि क्या है?
मंगला गौरी व्रत की पूजा प्रातःकाल स्नान के बाद की जाती है। माता गौरी की प्रतिमा स्थापित करके सोलह प्रकार की सामग्री सोलह-सोलह की संख्या में अर्पित की जाती है, फिर व्रत कथा सुनकर आरती की जाती है और संध्या के समय व्रत खोला जाता है।
- स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके लाल या हरे वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- स्थापना — चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माता गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। कई परिवार आटे से गौरी की प्रतिमा भी बनाते हैं।
- आटे का दीपक — गेहूँ के आटे से दीपक बनाकर उसमें सोलह बत्तियाँ लगाकर जलाएं — यह इस व्रत की विशेष परंपरा है।
- सोलह की संख्या — सोलह प्रकार की सामग्री सोलह-सोलह की संख्या में अर्पित करें — लौंग, इलायची, सुपारी, फल, फूल, पान के पत्ते, मेवा और मिठाई।
- श्रृंगार अर्पण — माता को चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, काजल और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करें।
- मंत्र जाप — “ॐ गौर्यै नमः” अथवा गौरी मंत्र का जाप करें।
- व्रत कथा — मंगला गौरी व्रत कथा सुनें या पढ़ें — कथा सुने बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
- आरती और प्रसाद — आरती करके प्रसाद बाँटें। सोलह सुहागिन स्त्रियों को श्रृंगार सामग्री देने की परंपरा है।
- पारण — संध्या पूजा के बाद फलाहार या सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
मंगला गौरी व्रत की सामग्री लिस्ट
🪔 पूजा सामग्री
गेहूँ का आटा (दीपक हेतु), सोलह बत्तियाँ, घी, रोली, अक्षत, कलावा, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल, फल, मिठाई, मेवा।
💄 सुहाग सामग्री
चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, काजल, बिछिया, कंघी, दर्पण, लाल चुनरी — परंपरा में सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं।
मंगला गौरी व्रत की कथा क्या है?
मंगला गौरी व्रत की कथा एक धनी व्यापारी धर्मपाल और उनकी पत्नी की है। दोनों संपन्न थे पर नि:संतान थे। लंबी प्रार्थना और तप के बाद उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ, किंतु उसे यह श्राप भी मिला कि वह सोलह वर्ष की आयु में सर्पदंश से मृत्यु को प्राप्त होगा।
कथा के अनुसार उस बालक का विवाह एक ऐसी कन्या से हुआ जिसकी माता वर्षों से नियमपूर्वक मंगला गौरी व्रत रखती आई थीं। माता गौरी की कृपा से उस कन्या को यह वरदान प्राप्त था कि वह कभी वैधव्य का दुख नहीं देखेगी। विवाह के बाद जब श्राप की अवधि आई, तब माता गौरी की कृपा से बालक की रक्षा हुई और उसे दीर्घायु प्राप्त हुई।
इसी कथा के कारण मान्यता बनी कि जो स्त्री श्रद्धापूर्वक मंगला गौरी व्रत रखती है, उसके परिवार पर माता गौरी की रक्षा बनी रहती है और दांपत्य जीवन सुखी रहता है।
मंगला गौरी व्रत का उद्यापन कैसे करें?
परंपरा के अनुसार मंगला गौरी व्रत लगातार पाँच वर्ष तक रखने के बाद उद्यापन किया जाता है। उद्यापन में सोलह सुहागिन स्त्रियों को भोजन कराया जाता है और उन्हें श्रृंगार सामग्री, वस्त्र तथा दक्षिणा दी जाती है। इसके बाद व्रत पूर्ण माना जाता है।
उद्यापन सावन के अंतिम मंगलवार को — 2026 में 25 अगस्त को — किया जाता है। यदि किसी वर्ष व्रत छूट जाए तो परंपरा में उसे अगले वर्ष पूरा करने का विधान है।
सावन 2026 के अन्य व्रत
| व्रत / त्योहार | तिथि |
|---|---|
| सावन सोमवार व्रत | 3, 10, 17, 24 अगस्त 2026 |
| कामिका एकादशी | 9 अगस्त 2026 |
| हरियाली अमावस्या | 12 अगस्त 2026 |
| हरियाली तीज | 15 अगस्त 2026 |
| रक्षाबंधन | 28 अगस्त 2026 |
मंगला गौरी व्रत पर खाटू श्याम जी दर्शन
सावन के मंगलवार खाटू श्याम जी यात्रा के लिए अपेक्षाकृत शांत दिन होते हैं — भीड़ मुख्य रूप से सोमवार और एकादशी पर रहती है। दर्शन का समय सामान्य दिनों में 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) है।
अपवाद 11 अगस्त है, जब दूसरा मंगला गौरी व्रत और सावन शिवरात्रि एक साथ पड़ रहे हैं — उस दिन शिव मंदिरों में विशेष भीड़ रहेगी। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
सावन में खाटू यात्रा की तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — मंगला गौरी व्रत 2026 / Mangala Gauri Vrat 2026
Q: मंगला गौरी व्रत 2026 में कब-कब है?
मंगला गौरी व्रत 2026 में चार बार है — 4, 11, 18 और 25 अगस्त। यह सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है।
Q: When is Mangala Gauri Vrat 2026?
Mangala Gauri Vrat 2026 falls on 4, 11, 18 and 25 August — every Tuesday within the Shravana month, which runs 30 July to 28 August in North India.
Q: मंगला गौरी व्रत कौन रख सकता है?
मुख्य रूप से नवविवाहित महिलाएं यह व्रत रखती हैं — परंपरा में विवाह के बाद लगातार पाँच वर्ष तक। कुंवारी कन्याएं भी योग्य वर की कामना से यह व्रत रख सकती हैं।
Q: मंगला गौरी व्रत में आटे का दीपक क्यों बनाया जाता है?
गेहूँ के आटे से दीपक बनाकर उसमें सोलह बत्तियाँ जलाना इस व्रत की विशेष परंपरा है। सोलह की संख्या सोलह श्रृंगार और अखंड सौभाग्य से जोड़ी जाती है।
Q: मंगला गौरी व्रत का उद्यापन कब करें?
परंपरा के अनुसार पाँच वर्ष व्रत पूरा करने के बाद, सावन के अंतिम मंगलवार को उद्यापन किया जाता है — 2026 में 25 अगस्त। उद्यापन में सोलह सुहागिन स्त्रियों को भोजन और श्रृंगार सामग्री दी जाती है।
Q: क्या यह व्रत निर्जला रखना ज़रूरी है?
नहीं। ज़्यादातर महिलाएं फलाहार व्रत रखती हैं और संध्या पूजा के बाद व्रत खोलती हैं। गर्भवती, स्तनपान कराने वाली और बीमार महिलाओं को कठोर व्रत नहीं रखना चाहिए।
Q: मंगला गौरी व्रत और सावन सोमवार व्रत में क्या अंतर है?
सावन सोमवार व्रत सोमवार को भगवान शिव के लिए रखा जाता है (3, 10, 17, 24 अगस्त)। मंगला गौरी व्रत मंगलवार को माता गौरी के लिए रखा जाता है (4, 11, 18, 25 अगस्त)। कई परिवार दोनों व्रत रखते हैं।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Mangala Gauri Vrat dates
- Prokerala — Hindu Calendar with daily panchang
- Drik Panchang — Shravana month vrat dates
- Shri Shyam Mandir — official temple site
सभी तिथियाँ भारत (IST) के अनुसार, एक से अधिक पंचांग स्रोतों से cross-verified. यह पेज हर साल update किया जाता है। Updated July 2026.
