सीधा जवाब — अगला सावन शिवरात्रि
सावन शिवरात्रि 2027 कब है?
📅 शनिवार, 31 जुलाई 2027 ⏳
- 🕉️ श्रावण कृष्ण चतुर्दशी — प्रारंभ: 31 जुलाई, 10:58 PM · समाप्त: 1 अगस्त, 7:21 PM
- 🌙 पूजा निशीथ काल (31 जुलाई की आधी रात) में
📌 निशीथ काल की गणना से; स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।
2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को था — नीचे की विस्तृत जानकारी (पूजा विधि, कथा) हर वर्ष उपयोगी है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से।
📿 घर पर पूजा कैसे करें: भगवान शिव पूजा विधि →
सावन शिवरात्रि 2026
Sawan Shivratri 2026 — तिथि, निशीथ काल, चार प्रहर पूजा, जलाभिषेक मुहूर्त, व्रत विधि और पारण समय
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
सावन शिवरात्रि 2026 मंगलवार, 11 अगस्त 2026 की रात को है। मुख्य पूजा निशीथ काल — रात 12:05 से 12:48 बजे (11–12 अगस्त की मध्यरात्रि) में की जाती है। व्रत का पारण 12 अगस्त की सुबह लगभग 5:32 बजे के बाद किया जाएगा।
📅 11 अगस्त 2026 | 🗓️ मंगलवार | 🔱 निशीथ काल 12:05–12:48 AM | 🌙 श्रावण कृष्ण चतुर्दशी | 🍽️ पारण 12 अगस्त
सावन शिवरात्रि 2026 कब है?
सावन शिवरात्रि 2026 मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को है। यह श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को आती है और सावन मास की सबसे बड़ी रात मानी जाती है। पूजा रात में होती है, इसलिए मुख्य अनुष्ठान 11 अगस्त की रात से 12 अगस्त की सुबह तक चलता है। इसी रात सावन की कांवड़ यात्रा भी समाप्त होती है।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| सावन शिवरात्रि 2026 | मंगलवार, 11 अगस्त 2026 |
| निशीथ काल पूजा | रात 12:05 – 12:48 बजे (12 अगस्त) |
| जलाभिषेक प्रारंभ | 11 अगस्त, सुबह 4:54 बजे से |
| पारण (व्रत खोलना) | 12 अगस्त, सुबह लगभग 5:32 बजे के बाद |
| हिंदू तिथि | श्रावण कृष्ण चतुर्दशी, विक्रम संवत 2083 |
| अगले दिन | हरियाली अमावस्या — 12 अगस्त |
समय दिल्ली के अनुसार है। सूर्योदय-आधारित समय शहर के हिसाब से 10–25 मिनट बदल सकता है।
चार प्रहर पूजा का समय क्या है?
शिवरात्रि की रात को चार बराबर भागों में बाँटा जाता है, जिन्हें प्रहर कहते हैं। श्रद्धालु चारों प्रहर में अलग-अलग सामग्री से शिवजी का अभिषेक करते हैं — यह सबसे पूर्ण विधि मानी जाती है। जो चारों प्रहर न कर सकें, वे केवल निशीथ काल में पूजा करके भी पूरा फल पाते हैं।
| प्रहर | समय | परंपरागत अभिषेक |
|---|---|---|
| प्रथम प्रहर | शाम 7:22 – रात 9:53 (11 अगस्त) | जल |
| द्वितीय प्रहर | रात 9:53 – 12:24 (12 अगस्त) | दही |
| तृतीय प्रहर | रात 12:24 – 2:56 (12 अगस्त) | घी |
| चतुर्थ प्रहर | रात 2:56 – सुबह 5:27 (12 अगस्त) | शहद |
सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?
महाशिवरात्रि साल में एक बार फाल्गुन मास में आती है, जबकि सावन शिवरात्रि श्रावण मास की मासिक शिवरात्रि है। मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण चतुर्दशी को आती है — साल में बारह बार। लेकिन सावन शिवजी का अपना महीना माना जाता है, इसलिए इस महीने की शिवरात्रि का महत्व बाकी ग्यारह से कहीं अधिक है।
महाशिवरात्रि को शिव-पार्वती विवाह और शिवलिंग प्राकट्य की रात माना जाता है। सावन शिवरात्रि को समुद्र मंथन और कांवड़ यात्रा की परंपरा से जोड़ा जाता है — कांवड़िए इसी रात गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं।
सावन शिवरात्रि की पूजा विधि क्या है?
सावन शिवरात्रि की पूजा में दिन भर उपवास रखकर रात में शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। व्रती सुबह स्नान करके संकल्प लेते हैं, दिन में फलाहार लेते हैं, रात में जागरण करते हैं और निशीथ काल में मुख्य पूजा करके अगली सुबह पारण करते हैं।
- स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- जलाभिषेक — तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। गंगाजल हो तो उससे अभिषेक करें।
- पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करके दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं।
- बेलपत्र अर्पण — तीन पत्तों वाला साबुत बेलपत्र, चिकनी सतह नीचे की ओर करके चढ़ाएं।
- अन्य सामग्री — धतूरा, भांग, आक का फूल, सफेद चंदन, अक्षत, भस्म और सफेद फूल अर्पित करें।
- मंत्र जाप — “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें। महामृत्युंजय मंत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
- रात्रि जागरण — चारों प्रहर में अभिषेक करें, या केवल निशीथ काल (12:05–12:48) में मुख्य पूजा करें।
- आरती — “ॐ जय शिव ओंकारा” आरती करके घी का दीपक जलाएं।
- पारण — 12 अगस्त की सुबह स्नान और दर्शन के बाद, लगभग 5:32 बजे के बाद व्रत खोलें।
सावन शिवरात्रि का मंत्र क्या है?
निशीथ काल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप सबसे फलदायी माना जाता है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
इसके साथ “ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षरी मंत्र का जाप भी किया जाता है।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं?
✅ चढ़ाएं
जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक का फूल, सफेद चंदन, अक्षत, भस्म, सफेद फूल।
❌ न चढ़ाएं
तुलसी, केतकी का फूल, हल्दी, कुमकुम, शंख से जल, नारियल का पानी, टूटा बेलपत्र और लाल फूल।
कांवड़ यात्रा 2026 कब समाप्त होती है?
कांवड़ यात्रा 2026 सावन शिवरात्रि यानी 11 अगस्त को समाप्त होती है। यात्रा सावन के आरंभ, 30 जुलाई से शुरू होती है। कांवड़िए हरिद्वार, गंगोत्री, वाराणसी और सुल्तानगंज जैसे स्थानों से गंगाजल लाकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में शिवरात्रि की रात जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान उत्तर भारत के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहता है — यात्रा की योजना बनाते समय यह ध्यान रखें।
सावन शिवरात्रि पर खाटू श्याम जी दर्शन
11 अगस्त 2026 को खाटू श्याम जी में दर्शन का समय सामान्य रहेगा — 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद)। शिवरात्रि मुख्य रूप से शिव मंदिरों का पर्व है, इसलिए खाटू के पास हर्षनाथ मंदिर, सीकर — एक प्राचीन शिव स्थल — इस रात दर्शन के लिए उपयुक्त है।
अगले दिन 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या है, और उसके तीन दिन बाद हरियाली तीज — यानी 11 से 15 अगस्त तक लगातार पर्व हैं। खाटू यात्रा इसी दौरान करनी हो तो होटल पहले से बुक कर लें। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
सावन में खाटू यात्रा की तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
📅 यह भी देखें
FAQ — सावन शिवरात्रि 2026 / Sawan Shivratri 2026
Q: सावन शिवरात्रि 2026 में कब है?
सावन शिवरात्रि मंगलवार, 11 अगस्त 2026 की रात को है। यह श्रावण कृष्ण चतुर्दशी का दिन है।
Q: When is Sawan Shivratri 2026 and what is the Nishita Kaal?
Sawan Shivratri 2026 falls on Tuesday, 11 August 2026. The Nishita Kaal puja window is 12:05 AM to 12:48 AM on the night of 11–12 August, and parana is after about 5:32 AM on 12 August.
Q: निशीथ काल पूजा का समय क्या है?
निशीथ काल रात 12:05 से 12:48 बजे तक है — लगभग 43 मिनट। यही रात का सबसे शुभ समय माना जाता है, जब मान्यता के अनुसार शिवजी लिंग रूप में प्रकट हुए थे।
Q: सावन शिवरात्रि का पारण कब करें?
पारण 12 अगस्त की सुबह लगभग 5:32 बजे के बाद करें। परंपरा के अनुसार स्नान और दर्शन के बाद, चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले व्रत खोलना उत्तम माना जाता है।
Q: सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या फर्क है?
महाशिवरात्रि साल में एक बार फाल्गुन मास में आती है। सावन शिवरात्रि श्रावण मास की मासिक शिवरात्रि है — मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है, पर सावन शिवजी का महीना होने से इसका महत्व सबसे अधिक है।
Q: क्या महिलाएं सावन शिवरात्रि का व्रत रख सकती हैं?
हाँ। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए और कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं। पुरुष भी समान रूप से यह व्रत रखते हैं।
Q: कांवड़ यात्रा 2026 कब से कब तक है?
कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से 11 अगस्त 2026 तक है, और सावन शिवरात्रि की रात जलाभिषेक के साथ समाप्त होती है।
Q: क्या चारों प्रहर की पूजा करना ज़रूरी है?
नहीं। चारों प्रहर की पूजा सबसे पूर्ण विधि मानी जाती है, पर केवल निशीथ काल में पूजा करके भी व्रत का पूरा फल मिलता है।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Sawan Shivaratri date and time
- Drik Panchang — Masik Shivaratri dates
- Prokerala — Hindu Calendar with daily panchang
- Shri Shyam Mandir — official temple site
सभी तिथियाँ और मुहूर्त भारत (IST), दिल्ली के अनुसार, एक से अधिक पंचांग स्रोतों से cross-verified. प्रहर और पारण समय शहर के हिसाब से बदलते हैं। Updated July 2026.