सीधा जवाब
महाशिवरात्रि 2027 कब है?
📅 शनिवार, 6 मार्च 2027 — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी ⏳
- 🔱 निशीथ काल पूजा: रात 12:13 से 1:02 बजे (7 मार्च) — 49 मिनट
- 🌙 चतुर्दशी तिथि: 6 मार्च दोपहर 12:03 बजे से 7 मार्च दोपहर 1:46 बजे तक
- 🙏 व्रत पारण: 7 मार्च, सुबह 6:45 से दोपहर 1:46 बजे
समय जयपुर (IST) के अनुसार; आपके शहर में मुहूर्त कुछ मिनट अलग हो सकता है।
महाशिवरात्रि 2027 कब है? तारीख, निशीथ काल, चार प्रहर पूजा और पारण समय
महाशिवरात्रि 2027 — जयपुर/राजस्थान पंचांग के अनुसार शनिवार, 6 मार्च 2027 को है। मुख्य पूजा का समय निशीथ काल है — 6 मार्च की रात 12:13 से 1:02 बजे तक — और व्रत का पारण 7 मार्च की सुबह किया जाएगा। खाटू श्याम जी का फाल्गुन मेला (18–20 मार्च) इसके लगभग दो सप्ताह बाद है।
महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना की सबसे बड़ी रात है। लोक-परंपरा में इसे शिव और पार्वती के विवाह की रात के रूप में मनाया जाता है। शिव पुराण की कथा के अनुसार इसी रात भगवान शिव एक अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे, जिसका आदि और अंत ब्रह्मा और विष्णु भी नहीं खोज पाए — इसी कारण इस रात शिवलिंग की विशेष पूजा होती है।
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि आती है, पर उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) कैलेंडर के फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा जाता है। दक्षिण भारतीय (अमांत) कैलेंडर में यही तिथि माघ मास में गिनी जाती है — महीने का नाम अलग है, तारीख वही रहती है।
चार प्रहर की पूजा — 6–7 मार्च 2027
महाशिवरात्रि की रात को चार भागों (प्रहरों) में बाँटकर हर प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक और पूजा करने की परंपरा है। जो भक्त पूरी रात जागरण करते हैं, वे चारों प्रहर की पूजा करते हैं; बाकी भक्त निशीथ काल में मुख्य पूजा करते हैं।
| प्रहर | समय (जयपुर) | परंपरागत अभिषेक |
|---|---|---|
| पहला प्रहर | 6 मार्च, शाम 6:30 – 9:34 | जल / दूध |
| दूसरा प्रहर | रात 9:34 – 12:38 | दही |
| निशीथ काल | रात 12:13 – 1:02 (7 मार्च) | मुख्य पूजा |
| तीसरा प्रहर | रात 12:38 – 3:42 (7 मार्च) | घी |
| चौथा प्रहर | सुबह 3:42 – 6:45 (7 मार्च) | शहद |
प्रहर के समय Drik Panchang (जयपुर) से; हर प्रहर का अभिषेक-द्रव्य परंपरा के अनुसार है और परिवार/क्षेत्र के हिसाब से बदल सकता है।
महाशिवरात्रि की सरल पूजा विधि
- व्रत का संकल्प: सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर या घर में शिवलिंग के सामने व्रत का संकल्प लें।
- अभिषेक: शिवलिंग पर जल, फिर कच्चा दूध, और इच्छा अनुसार पंचामृत से अभिषेक करें। अंत में फिर शुद्ध जल चढ़ाएँ।
- अर्पण: तीन पत्तों वाले बेल पत्र (उल्टी ओर से), धतूरा, आक के फूल, भस्म या चंदन, अक्षत और शमी पत्र चढ़ाएँ।
- मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें; महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी शुभ माना जाता है।
- रात्रि जागरण: संभव हो तो रात भर भजन-कीर्तन करें और निशीथ काल (12:13–1:02) में मुख्य पूजा करें।
- पारण: 7 मार्च को सुबह 6:45 से दोपहर 1:46 बजे के बीच व्रत खोलें।
क्या न चढ़ाएँ: परंपरा में शिवलिंग पर केतकी का फूल, तुलसी दल और सिंदूर नहीं चढ़ाए जाते। विस्तृत विधि व सामग्री: महाशिवरात्रि पूजा विधि · शिव पूजा विधि।
व्रत के नियम
- व्रत निराहार, केवल जल, या फलाहारी — अपनी सेहत के अनुसार रखा जाता है। फलाहार में फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू/सिंघाड़ा और सेंधा नमक लिया जाता है।
- अनाज, प्याज़-लहसुन और मांसाहार से परहेज़ किया जाता है।
- गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग, मधुमेह के रोगी और दवा लेने वाले लोग निर्जल व्रत के बजाय फलाहार चुनें।
- पारण चतुर्दशी तिथि समाप्त होने (7 मार्च, 1:46 PM) से पहले करना उत्तम माना जाता है।
महाशिवरात्रि और खाटू श्याम यात्रा
महाशिवरात्रि (6 मार्च) के लगभग दो सप्ताह बाद खाटू श्याम जी का फाल्गुन मेला आता है — 2027 में मुख्य दिन 18–20 मार्च हैं, और आमलकी एकादशी 18 मार्च को है। इसलिए मार्च की शुरुआत से ही खाटू मार्ग पर भीड़ बढ़ने लगती है। मेले में जाने की योजना है तो ठहरने की बुकिंग महाशिवरात्रि से पहले ही कर लें।
खाटू के आसपास शिव दर्शन के लिए: सीकर के पास अरावली पहाड़ी पर स्थित प्राचीन हर्षनाथ मंदिर (खाटू से लगभग 45 km) और खाटू नगर का गौरीशंकर मंदिर।
संबंधित उपयोगी जानकारी
महाशिवरात्रि 2027 — सामान्य प्रश्न
महाशिवरात्रि 2027 कब है? (Maha Shivratri 2027 date)
महाशिवरात्रि 2027 शनिवार, 6 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 6 मार्च दोपहर 12:03 बजे से 7 मार्च दोपहर 1:46 बजे तक रहेगी (जयपुर पंचांग)।
महाशिवरात्रि पर निशीथ काल पूजा का समय क्या है? (Nishita Kaal)
निशीथ काल पूजा 6 मार्च की रात 12:13 बजे से 1:02 बजे (7 मार्च) तक है — कुल 49 मिनट। महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा इसी समय मानी जाती है।
महाशिवरात्रि का व्रत कब खोलें? (Parana time)
व्रत का पारण 7 मार्च 2027 को सुबह 6:45 बजे से दोपहर 1:46 बजे के बीच किया जाता है।
चार प्रहर की पूजा का समय क्या है? (Four prahar timings)
पहला प्रहर शाम 6:30–9:34, दूसरा रात 9:34–12:38, तीसरा रात 12:38–3:42 और चौथा प्रहर सुबह 3:42–6:45 बजे (7 मार्च) तक है।
महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि में क्या अंतर है? (Maha vs Masik Shivratri)
मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण चतुर्दशी को आती है; फाल्गुन मास (उत्तर भारतीय पूर्णिमांत कैलेंडर) की कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जो वर्ष की सबसे बड़ी शिवरात्रि है।
शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए? (What not to offer)
परंपरा के अनुसार शिवलिंग पर केतकी का फूल, तुलसी दल और सिंदूर नहीं चढ़ाए जाते; बेल पत्र, जल, दूध, धतूरा और आक के फूल चढ़ाए जाते हैं।
पंचांग संदर्भ
- Drik Panchang — Maha Shivaratri 2027, Jaipur (तिथि, निशीथ काल, चार प्रहर, पारण)
- Drik Panchang — Amavasya Dates 2027, Jaipur
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