सीधा जवाब — अगला नाग पंचमी
नाग पंचमी 2027 कब है?
📅 शुक्रवार, 6 अगस्त 2027 ⏳
- 🕉️ श्रावण शुक्ल पंचमी — प्रारंभ: 6 अगस्त, 2:28 AM · समाप्त: 7 अगस्त, 12:23 AM
2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 को था — नीचे की विस्तृत जानकारी (पूजा विधि, कथा) हर वर्ष उपयोगी है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से।
📿 घर पर पूजा कैसे करें: नाग पंचमी पूजा विधि →
नाग पंचमी 2026
Nag Panchami 2026 — तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि, नाग मंत्र, 12 नाग देवता और कालसर्प दोष के उपाय
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
नाग पंचमी 2026 सोमवार, 17 अगस्त 2026 को है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:04 बजे से 8:39 बजे तक है। पंचमी तिथि 16 अगस्त शाम 4:52 बजे शुरू होकर 17 अगस्त शाम 5:00 बजे समाप्त होती है। इसी दिन तीसरा सावन सोमवार और सिंह संक्रांति भी है।
📅 17 अगस्त 2026 | 🗓️ सोमवार | 🕐 6:04–8:39 AM | 🐍 श्रावण शुक्ल पंचमी | 🕉️ सावन सोमवार भी


नाग पंचमी 2026 कब है — 16 या 17 अगस्त?
नाग पंचमी 2026 सोमवार, 17 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। भ्रम इसलिए होता है क्योंकि पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम 4:52 बजे ही शुरू हो जाती है। लेकिन पूजा सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो उसी दिन की जाती है — और 17 अगस्त की सुबह पंचमी सक्रिय है। इसलिए पूरे उत्तर भारत में नाग पंचमी 17 अगस्त को ही मनाई जाएगी।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| नाग पंचमी 2026 | सोमवार, 17 अगस्त 2026 |
| पूजा शुभ मुहूर्त | सुबह 6:04 – 8:39 बजे (लगभग 2 घंटे 35 मिनट) |
| पंचमी तिथि प्रारंभ | 16 अगस्त 2026, शाम 4:52 बजे |
| पंचमी तिथि समाप्त | 17 अगस्त 2026, शाम 5:00 बजे |
| साथ में | तीसरा सावन सोमवार व्रत, सिंह संक्रांति |
| गुजरात (अमांत परंपरा) | लगभग 1 सितंबर 2026 |
मुहूर्त दिल्ली/राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार है। सूर्योदय-आधारित समय शहर के हिसाब से 10–25 मिनट बदल सकता है।
गुजरात में नाग पंचमी अलग दिन क्यों होती है?
गुजरात और अमांत पंचांग मानने वाले क्षेत्रों में नाग पंचमी लगभग 15 दिन बाद, करीब 1 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इसका कारण महीने की गणना है — उत्तर भारत में पूर्णिमांत प्रणाली चलती है जिसमें महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है, जबकि गुजरात में अमांत प्रणाली चलती है जिसमें महीना अमावस्या पर खत्म होता है। इसी अंतर से श्रावण मास की गिनती खिसक जाती है।
नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?
नाग पंचमी नाग देवताओं की पूजा का पर्व है। हिंदू परंपरा में सर्प को केवल जीव नहीं, बल्कि देव-स्वरूप माना गया है — भगवान शिव नागराज वासुकि को गले में धारण करते हैं और भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं। मान्यता है कि इस दिन नागों की पूजा करने से सर्प-भय दूर होता है और परिवार की रक्षा होती है।
सावन मास वर्षा का समय है, जब बिल में पानी भर जाने के कारण साँप बाहर निकल आते हैं और खेतों-घरों के आसपास दिखाई देते हैं। इसी व्यावहारिक कारण से भी इस ऋतु में नाग-पूजा और सर्पों के प्रति सम्मान की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। नाग को खेतों का रक्षक भी माना गया है, क्योंकि वह फसल नष्ट करने वाले चूहों को नियंत्रित रखता है।
2026 में नाग पंचमी सोमवार को पड़ रही है — शिवजी का दिन और तीसरा सावन सोमवार भी। इसलिए इस दिन शिव मंदिरों में विशेष भीड़ रहेगी और बहुत से भक्त सावन सोमवार व्रत और नाग पूजा दोनों एक साथ करेंगे।
नाग पंचमी पर किन नाग देवताओं की पूजा होती है?
नाग पंचमी पर परंपरागत रूप से बारह नाग देवताओं की पूजा की जाती है। इनके नाम पूजा के समय लिए जाते हैं और घर के द्वार पर इनकी आकृति बनाई जाती है।
नाग पंचमी की पूजा विधि क्या है?
नाग पंचमी की पूजा सुबह स्नान के बाद की जाती है। घर के मुख्य द्वार पर गोबर या हल्दी से नाग की आकृति बनाकर उस पर दूध, जल, हल्दी, रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित की जाती है, दीपक जलाकर आरती की जाती है और नाग पंचमी की कथा सुनी जाती है।
- स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा का संकल्प लें।
- नाग आकृति — घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर गोबर, हल्दी या चंदन से नाग की आकृति बनाएं। कई परिवार चाँदी या मिट्टी की नाग प्रतिमा भी रखते हैं।
- अभिषेक — नाग देवता को दूध, जल और पंचामृत अर्पित करें।
- पूजन सामग्री — हल्दी, रोली, अक्षत (साबुत चावल), फूल, दूर्वा और मिठाई चढ़ाएं।
- मंत्र जाप — नाग मंत्र का जाप करें और बारह नाग देवताओं के नाम लें।
- दीप और आरती — घी का दीपक जलाकर आरती करें।
- कथा — नाग पंचमी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- क्षमा याचना — जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा माँगकर पूजा पूरी करें।
नाग पंचमी का मंत्र क्या है?
नाग पंचमी पर यह पारंपरिक नाग गायत्री मंत्र बोला जाता है:
ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि।
तन्नो नागः प्रचोदयात्॥
नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
परंपरा के अनुसार नाग पंचमी पर लोहे के तवे पर रोटी नहीं बनाई जाती और तली हुई चीज़ें नहीं पकाई जातीं। मान्यता है कि गर्म तवा नाग देवता की शय्या के तपने का प्रतीक है। इस दिन उबला या भाप में बना भोजन बनाया जाता है।
✅ करें
सुबह स्नान करके पूजा, नाग देवता को दूध-जल अर्पण, मंत्र जाप, कथा श्रवण, गरीबों को दान, सर्पों के प्रति दया का भाव।
❌ न करें
लोहे के तवे का प्रयोग, तली हुई चीज़ें, ज़मीन की खुदाई, पेड़ काटना, सर्पों को कष्ट देना, और असली साँप को ज़बरदस्ती दूध पिलाना।
कालसर्प दोष और नाग पंचमी का क्या संबंध है?
ज्योतिष में मान्यता है कि नाग पंचमी कालसर्प दोष की शांति के लिए सबसे उपयुक्त दिन है। इस दिन नाग देवता की पूजा, रुद्राभिषेक, नाग गायत्री मंत्र का जाप और चाँदी के नाग-नागिन जोड़े का दान करके शांति कराई जाती है। 2026 में यह दिन सोमवार को पड़ रहा है, जो शिवजी का दिन है — इसलिए इसे और अधिक फलदायी माना जा रहा है।
यह ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित जानकारी है। कोई भी विशेष अनुष्ठान कराने से पहले अपने पंडित जी से परामर्श लें।
नाग पंचमी पर खाटू श्याम जी दर्शन
17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी, तीसरा सावन सोमवार और सिंह संक्रांति — तीनों एक साथ हैं। सोमवार शिवजी का दिन होने के कारण खाटू श्याम जी और आसपास के शिव मंदिरों में इस दिन अच्छी-खासी भीड़ रहेगी। दर्शन का समय सामान्य दिनों में 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।
खाटू के पास हर्षनाथ मंदिर, सीकर एक प्राचीन शिव स्थल है — सावन सोमवार पर वहाँ भी दर्शन किया जा सकता है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km है; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
सावन में खाटू यात्रा की तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — नाग पंचमी 2026 / Nag Panchami 2026
Q: नाग पंचमी 2026 में कब है?
नाग पंचमी सोमवार, 17 अगस्त 2026 को है। यह श्रावण शुक्ल पंचमी का दिन है और इसी दिन तीसरा सावन सोमवार तथा सिंह संक्रांति भी है।
Q: When is Nag Panchami 2026?
Nag Panchami 2026 falls on Monday, 17 August 2026. The puja muhurat runs from about 6:04 AM to 8:39 AM. Panchami tithi begins 4:52 PM on 16 August and ends 5:00 PM on 17 August.
Q: नाग पंचमी 16 अगस्त को है या 17 अगस्त को?
17 अगस्त को। पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम शुरू ज़रूर होती है, लेकिन पूजा उसी दिन होती है जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि चल रही हो — और वह 17 अगस्त है।
Q: नाग पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:04 बजे से 8:39 बजे तक है — लगभग 2 घंटे 35 मिनट। अपने शहर का सूर्योदय समय देखकर थोड़ा समायोजन कर लें।
Q: क्या नाग पंचमी पर साँप को दूध पिलाना चाहिए?
नहीं। साँप दूध नहीं पीते और यह उनके लिए हानिकारक हो सकता है। परंपरा में दूध नाग प्रतिमा या द्वार पर बनी आकृति पर प्रतीकात्मक रूप से अर्पित किया जाता है। जीवित साँप को पकड़ना या प्रदर्शित करना वन्यजीव कानून के तहत भी अपराध है।
Q: Why is Nag Panchami on a different date in Gujarat?
Gujarat follows the Amanta system, where the lunar month ends on Amavasya, while North India follows Purnimanta, where it ends on Purnima. This shifts the reckoning of Shravana, so Amanta regions observe Nag Panchami roughly a fortnight later — around 1 September 2026.
Q: नाग पंचमी पर तवे पर रोटी क्यों नहीं बनाई जाती?
मान्यता है कि गर्म लोहे का तवा नाग देवता की शय्या के तपने का प्रतीक है। इसलिए इस दिन तवे का प्रयोग और तली हुई चीज़ें बनाना वर्जित माना जाता है — उबला या भाप में बना भोजन बनाया जाता है।
Q: नाग पंचमी पर कितने नाग देवताओं की पूजा होती है?
परंपरागत रूप से बारह नाग देवताओं की पूजा होती है — अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कम्बल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिंगल।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Nag Panchami date and puja time
- Prokerala — Nag Panchami
- Astroyogi — Nag Panchami 2026 puja muhurat
- Shri Shyam Mandir — official temple site
सभी तिथियाँ और मुहूर्त भारत (IST) के अनुसार, एक से अधिक पंचांग स्रोतों से cross-verified. सूर्योदय-आधारित समय शहर के हिसाब से 10–25 मिनट बदल सकता है। Updated July 2026.
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