मकर संक्रांति 2027 | Makar Sankranti 2027 Date, Punya Kaal & Puja Vidhi

✍️ लेखक: Team Khatuwalebaba.in📅 प्रकाशित: 16 अगस्त 2026पंचांग स्रोतों से सत्यापित
जयपुर / राजस्थान · सूर्य संक्रांति · जनवरी 2027

मकर संक्रांति 2027 | Makar Sankranti 2027 Date, Punya Kaal & Puja Vidhi

मकर संक्रांति 2027 (Makar Sankranti 2027) जयपुर और राजस्थान में शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। Jaipur-specific Drik Panchang के अनुसार सूर्य का मकर राशि में संक्रमण 14 जनवरी की रात 9:14 बजे है।

इस कारण पुण्यकाल से जुड़े कर्म 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद रखे गए हैं। नीचे तारीख, पुण्य काल, महापुण्य काल, पूजा का प्रचलित क्रम, दान-संबंधी परंपराएँ और संबंधित कैलेंडर जानकारी सरल रूप में दी गई है।

Makar Sankranti 2027 Uttarayan kite festival celebration in India
उत्तरायण के अवसर पर पतंग और रोशनी का दृश्य, अहमदाबाद। फोटो: Bhavishya Goel /
Wikimedia Commons,
CC BY 2.0. चित्र सांकेतिक है।
पंचांग सत्यापन:
इस पेज पर मुहूर्त के लिए Jaipur, Rajasthan location वाला Drik Panchang प्राथमिक स्रोत है। Prokerala भी Makar Sankranti 2027 की तारीख 15 जनवरी बताता है, लेकिन उसके default displayed timings Ujjain के लिए हैं। इसलिए Jaipur के समय को Ujjain के समय से मिलाकर उपयोग नहीं किया गया है।

तारीख

15 जनवरी 2027, शुक्रवार

सबसे उपयोगी समय

महापुण्य काल: 7:17 AM–9:04 AM

मकर संक्रांति 2027
15 जनवरी, शुक्रवार
संक्रांति क्षण — Jaipur
14 जनवरी, 9:14 PM
पुण्य काल — Jaipur
7:17 AM–5:55 PM
महापुण्य काल — Jaipur
7:17 AM–9:04 AM

इस पेज पर क्या मिलेगा

मकर संक्रांति 2027 की तारीख और पुण्य काल — Jaipur

जयपुर के लिए 2027 में मकर संक्रांति 15 जनवरी, शुक्रवार को है। Drik Panchang की Jaipur calculation में सूर्य का मकर राशि में संक्रमण 14 जनवरी 2027 को रात 9:14 बजे होता है।

15 जनवरी का पुण्य काल सुबह 7:17 बजे से शाम 5:55 बजे तक है। महापुण्य काल सुबह 7:17 बजे से 9:04 बजे तक दिया गया है।

विवरण Jaipur / Rajasthan नोट
मकर संक्रांति 2027 शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 Jaipur observation date
सूर्य का मकर राशि में संक्रमण 14 जनवरी, 9:14 PM संक्रांति क्षण
पुण्य काल 15 जनवरी, 7:17 AM–5:55 PM कुल 10 घंटे 38 मिनट
महापुण्य काल 15 जनवरी, 7:17 AM–9:04 AM कुल 1 घंटा 46 मिनट
स्थान बदलने पर समय क्यों बदलता है?
सूर्योदय और स्थान-आधारित गणना के कारण Sankranti Punya Kaal अलग-अलग शहरों में अलग हो सकता है। इसलिए Jaipur का समय Delhi, Ujjain, Mumbai या किसी विदेशी शहर के लिए सीधे उपयोग नहीं करना चाहिए।

2027 में मकर संक्रांति 15 जनवरी को क्यों है?

मकर संक्रांति चंद्र तिथि के बजाय सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण से जुड़ा पर्व है। 2027 में Jaipur calculation के अनुसार सूर्य 14 जनवरी को रात 9:14 बजे मकर राशि में प्रवेश करता है।

यह संक्रमण सूर्यास्त के बाद होता है। इसी कारण Drik Panchang पुण्यकाल से जुड़े दिन के कर्म अगले दिन सूर्योदय के बाद रखता है और Jaipur में मुख्य पर्व 15 जनवरी 2027 को माना गया है।

यही वजह है कि “मकर संक्रांति हमेशा 14 जनवरी को होती है” कहना हर वर्ष के लिए सही नहीं है। कई वर्षों में 14 जनवरी तारीख रहती है, जबकि कुछ वर्षों में संक्रांति क्षण और गणना के कारण 15 जनवरी को observance होता है। Prokerala की 2027 festival listing भी 15 जनवरी को Makar Sankranti दिखाती है।

पूरे जनवरी महीने की अन्य तिथियों के लिए जनवरी 2027 हिंदू कैलेंडर देखें।

Makar Sankranti क्या है? मकर संक्रांति का पंचांग आधार

“संक्रांति” सूर्य के एक राशि-खंड से दूसरे राशि-खंड में प्रवेश के लिए प्रयुक्त पंचांग शब्द है। मकर संक्रांति में सूर्य का संक्रमण धनु से मकर राशि की ओर माना जाता है।

इसलिए इसकी तारीख का निर्धारण एकादशी, चतुर्थी या पूर्णिमा जैसे चंद्र-आधारित व्रतों की तरह नहीं किया जाता।

धार्मिक परंपरा में मकर संक्रांति सूर्योपासना, स्नान, नैवेद्य और दान-दक्षिणा जैसी प्रथाओं से जुड़ी है। Drik Panchang पुण्य काल के दौरान इन कर्मों का उल्लेख करता है।

परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार इनका पालन अलग-अलग रूप में हो सकता है। किसी एक स्थानीय विधि को पूरे भारत की अनिवार्य विधि नहीं माना जाना चाहिए।

पंचांग-आधारित तत्व

संक्रांति क्षण, स्थानीय सूर्योदय, पुण्य काल और महापुण्य काल स्थान-आधारित गणना से तय किए जाते हैं। 2027 के Jaipur timings ऊपर दिए गए हैं।

लोक और पारिवारिक परंपराएँ

तिल-गुड़, खिचड़ी, पतंगबाजी, विशेष भोजन या सामुदायिक आयोजन अलग-अलग राज्यों और परिवारों में अलग रूप में मिलते हैं। इन्हें पूरे भारत के लिए एक अनिवार्य पूजा-विधान नहीं माना जाना चाहिए।

उत्तरायण और मकर संक्रांति — दोनों को कैसे समझें?

धार्मिक और पारंपरिक पंचांग भाषा में मकर संक्रांति को उत्तरायण से जोड़ा जाता है। Drik Panchang गुजरात और राजस्थान में Makar Sankranti के लिए “Uttarayana” नाम के प्रयोग का उल्लेख करता है। इसी अवधि में गुजरात और राजस्थान सहित पश्चिमी भारत के कई क्षेत्रों में पतंग उड़ाने की परंपरा भी लोकप्रिय है।

आधुनिक खगोल विज्ञान में December Solstice और sidereal राशि-प्रवेश अलग गणनात्मक अवधारणाएँ हैं। इसलिए “खगोलीय रूप से सूर्य ठीक इसी दिन उत्तर की ओर चलना शुरू करता है” जैसी सरल व्याख्या को वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं लिखना चाहिए। धार्मिक पंचांग की “उत्तरायण” परंपरा को उसके पारंपरिक संदर्भ में समझना अधिक स्पष्ट है।

मकर संक्रांति पूजा विधि — घर पर प्रचलित सरल क्रम

परंपरा संबंधी नोट:
नीचे दिया गया क्रम सामान्य और प्रचलित गृह-पूजा का एक सरल रूप है। अलग परिवारों में मंत्र, नैवेद्य, दान और पूजा-विधि अलग हो सकती है। इसे किसी एक शास्त्रीय संप्रदाय की अनिवार्य विधि के रूप में न लें।
  1. स्नान और पूजा-स्थान की तैयारी:
    पुण्य काल में स्नान की परंपरा का उल्लेख पंचांग स्रोतों में मिलता है। घर में पूजा करने वाले लोग स्वच्छ होकर पूजा-स्थान तैयार कर सकते हैं।
  2. सूर्य स्मरण और अर्घ्य:
    कई परिवारों में सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा है। यदि आपके परिवार में कोई निश्चित मंत्र या विधि है तो उसी का पालन करें।
  3. नैवेद्य:
    Panchang tradition में सूर्य को नैवेद्य अर्पित करने का उल्लेख मिलता है। घर में उपलब्ध सात्त्विक भोजन या परिवार में प्रचलित नैवेद्य रखा जा सकता है।
  4. दान-दक्षिणा:
    दान या दक्षिणा मकर संक्रांति के पुण्यकाल से जुड़ी प्रचलित धार्मिक गतिविधियों में शामिल है। वस्तु और मात्रा व्यक्ति की क्षमता तथा स्थानीय परंपरा पर निर्भर है।
  5. पारिवारिक भोजन और परंपरा:
    राजस्थान तथा उत्तर भारत के कई परिवारों में तिल, गुड़, खिचड़ी या मौसम के अनुकूल व्यंजन बनाए जाते हैं। यह भोजन-परंपरा क्षेत्र के अनुसार बदलती है।

अन्य पूजा-विधियों के लिए पूजा विधि संग्रह भी देख सकते हैं।

मकर संक्रांति पूजा सामग्री — सामान्य सूची

मकर संक्रांति के लिए पूरे भारत में एक समान अनिवार्य सामग्री-सूची नहीं है। घर की परंपरा के अनुसार सामग्री बदल सकती है। एक सामान्य गृह-पूजा के लिए निम्न वस्तुएँ उपयोग में लाई जा सकती हैं:

पूजा के लिए

  • स्वच्छ जल और अर्घ्य पात्र
  • दीपक और पूजा के लिए उपलब्ध सामान्य सामग्री
  • परिवार में प्रचलित नैवेद्य
  • बैठने के लिए स्वच्छ आसन

स्थानीय परंपरा के अनुसार

  • तिल और गुड़ से बने खाद्य पदार्थ
  • खिचड़ी या अन्य मौसमी भोजन
  • दान के लिए अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री
  • परिवार की परंपरा के अनुसार अतिरिक्त सामग्री

सामग्री की उपलब्धता या संख्या को पूजा की “सफलता” से जोड़ना उचित नहीं है। परिवार की परंपरा, सुविधा और श्रद्धा के अनुसार सरल पूजा भी की जा सकती है।

मकर संक्रांति में स्नान, दान और नैवेद्य की परंपरा

Jaipur-specific Drik Panchang मकर संक्रांति के पुण्य काल में स्नान, सूर्य को नैवेद्य, दान-दक्षिणा, श्राद्ध से जुड़े कर्म और पारण जैसे कार्यों का उल्लेख करता है। इनमें से कौन-सी परंपरा आपके परिवार में अपनाई जाती है, यह स्थानीय रीति और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करेगा।

दान के विषय में किसी वस्तु को निश्चित परिणाम, धन-लाभ, रोग-निवारण या इच्छा-पूर्ति से जोड़ना इस पेज का उद्देश्य नहीं है। यदि आपके परिवार या गुरु-परंपरा में विशेष दान-विधान है तो उसी संदर्भ को प्राथमिकता दें।

राजस्थान और भारत में मकर संक्रांति के अलग-अलग नाम और परंपराएँ

क्षेत्र प्रचलित नाम / संबंध नोट
राजस्थान और गुजरात मकर संक्रांति / उत्तरायण पतंग उड़ाने की परंपरा कई स्थानों पर लोकप्रिय है।
तमिलनाडु Pongal Drik Panchang Makar Sankranti / Sankranthi को Tamil Nadu में Pongal नाम से जोड़ता है।
हरियाणा और पंजाब Maghi स्थानीय धार्मिक और भोजन परंपराएँ अलग हो सकती हैं।
उत्तर भारत के कई क्षेत्र मकर संक्रांति स्नान, दान और मौसमी भोजन से जुड़ी पारिवारिक परंपराएँ मिलती हैं।
लोहड़ी और मकर संक्रांति एक ही पर्व हैं?
नहीं। दोनों एक-दूसरे के आसपास पड़ते हैं और कुछ क्षेत्रों में seasonal festival sequence का हिस्सा समझे जाते हैं, लेकिन उनके नाम, रीति और सांस्कृतिक संदर्भ अलग हैं। 2027 में लोहड़ी 14 जनवरी और मकर संक्रांति 15 जनवरी है।

जनवरी 2027 में मकर संक्रांति के आसपास की प्रमुख तिथियाँ

तारीख पर्व / व्रत आगे पढ़ें
14 जनवरी लोहड़ी लोहड़ी
15 जनवरी मकर संक्रांति यह पेज
18 जनवरी पौष पुत्रदा एकादशी एकादशी कैलेंडर
22 जनवरी पौष पूर्णिमा पौष पूर्णिमा
25 जनवरी सकट चौथ सकट चौथ

पूरे महीने की सूची के लिए जनवरी 2027 व्रत-त्योहार कैलेंडर और पूरे वर्ष के लिए हिंदू कैलेंडर देखें।

Makar Sankranti 2027 — Jaipur Date & Punya Kaal Summary

Makar Sankranti 2027 will be observed in Jaipur, Rajasthan on Friday, January 15, 2027. According to the Jaipur-specific Drik Panchang calculation, the Sankranti moment occurs at 9:14 PM on January 14. The Punya Kaal on January 15 is 7:17 AM to 5:55 PM, while the Maha Punya Kaal is 7:17 AM to 9:04 AM.

Festival timings are location-sensitive. Do not use the Jaipur muhurta unchanged for another city; check a Panchang set to your location.

मकर संक्रांति 2027 — सामान्य प्रश्न

मकर संक्रांति 2027 कब है?

Jaipur/Rajasthan के लिए मकर संक्रांति शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को है।

मकर संक्रांति 2027 का पुण्य काल Jaipur में कब है?

Jaipur-specific Drik Panchang के अनुसार 15 जनवरी 2027 को पुण्य काल सुबह 7:17 बजे से शाम 5:55 बजे तक है।

महापुण्य काल 2027 का समय क्या है?

Jaipur में मकर संक्रांति महापुण्य काल 15 जनवरी को सुबह 7:17 बजे से 9:04 बजे तक है।

2027 में मकर संक्रांति 14 जनवरी की जगह 15 जनवरी क्यों है?

Jaipur calculation में सूर्य का मकर राशि में संक्रमण 14 जनवरी को रात 9:14 बजे, यानी सूर्यास्त के बाद होता है। इसलिए पुण्यकाल से जुड़े दिन के कर्म अगले दिन सूर्योदय के बाद रखे जाते हैं।

क्या मकर संक्रांति और उत्तरायण एक ही हैं?

राजस्थान और गुजरात में मकर संक्रांति के लिए उत्तरायण नाम का प्रयोग भी मिलता है। स्थानीय सांस्कृतिक परंपराएँ क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती हैं।

क्या मकर संक्रांति की पूजा सामग्री पूरे भारत में एक जैसी होती है?

नहीं। पूजा और भोजन की सामग्री परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदल सकती है। किसी एक सामग्री-सूची को सार्वभौमिक अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए।

पंचांग स्रोत और सत्यापन


  1. Drik Panchang — 2027 Makar Sankranti, Jaipur, Rajasthan

    — Jaipur date, Sankranti moment, Punya Kaal और Maha Punya Kaal के लिए प्राथमिक स्रोत।

  2. Prokerala — January 2027 Hindu Calendar

    — 15 January 2027 festival date cross-check के लिए।

  3. Prokerala — Makar Sankranti 2027

    — date cross-check; page पर displayed default muhurta Ujjain के लिए है, इसलिए Jaipur timings के लिए उपयोग नहीं किया गया।