पौष पूर्णिमा 2027 कब है? Paush Purnima 2027 Date, मुहूर्त व पूजा विधि

✍️ लेखक: Team Khatuwalebaba.in📅 प्रकाशित: 16 अगस्त 2026🔄 अपडेट: 24 सितंबर 2026पंचांग स्रोतों से सत्यापित

सीधा जवाब

पौष पूर्णिमा 2027 कब है?

📅 शुक्रवार, 22 जनवरी 2027   ⏳

  • 🕉️ पौष शुक्ल पूर्णिमा — प्रारंभ: 21 जनवरी, 9:30 PM · समाप्त: 22 जनवरी, 5:47 PM
  • 🌅 सूर्योदय 7:16 AM · सूर्यास्त 6:00 PM

📌 21 जनवरी या 22 जनवरी? पूर्णिमा तिथि 21 जनवरी, 9:30 PM से 22 जनवरी, 5:47 PM तक रहेगी, इसलिए दोनों तारीखों को लेकर भ्रम रहता है। पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा शुक्रवार, 22 जनवरी 2027 को मनाया जाएगा।

समय जयपुर (IST) के अनुसार; तिथि का समय खगोलीय गणना से। आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

पौष पूर्णिमा

पौष पूर्णिमा 2027 कब है? Paush Purnima 2027 Date, मुहूर्त व पूजा विधि

पौष पूर्णिमा 2027 (Paush Purnima 2027) 22 जनवरी 2027, शुक्रवार को है। पौष पूर्णिमा उत्तर भारतीय पंचांग परंपरा में माघ-स्नान की शुरुआत से भी जोड़ी जाती है; स्थानीय पालन-पद्धति अलग हो सकती है।

पौष पूर्णिमा 2027 | Paush Purnima 2027
जयपुर में पूर्णिमा की रात का दृश्य। फोटो: Pranavkoowal / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. चित्र सांकेतिक है।
पर्वपौष पूर्णिमा
तारीख22 जनवरी 2027
पंचांग आधारपौष पूर्णिमा
स्थान referenceJaipur / Rajasthan

इस पेज पर क्या मिलेगा

पौष पूर्णिमा 2027 कब है? तारीख और पंचांग आधार

पौष पूर्णिमा 2027 22 जनवरी 2027, शुक्रवार को है। इसका पंचांग आधार पौष पूर्णिमा है।

हिंदू पर्वों की तारीख और पूजा-काल में स्थानीय सूर्योदय, चंद्रोदय, तिथि-प्रवेश, प्रदोष या पर्व-विशेष नियमों के कारण शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए Jaipur/Rajasthan reference स्पष्ट रूप से अलग रखा गया है।

विवरण जानकारी ध्यान रखें
पौष पूर्णिमा 2027 22 जनवरी 2027, शुक्रवार Jaipur/Rajasthan reference
पंचांग आधार पौष पूर्णिमा क्षेत्रानुसार पालन बदल सकता है
पूजा समय अपने शहर के Panchang से देखें जयपुर के अनुसार

पौष पूर्णिमा क्या है? परंपरा को सही संदर्भ में समझें

पूर्णिमा से जुड़े व्रत और पूजा-पद्धतियाँ क्षेत्र, परिवार और उपास्य देवता के अनुसार बदलती हैं। चंद्र-दर्शन, स्नान, दान या सत्यनारायण पूजा कुछ घरों में प्रचलित हैं, लेकिन सभी स्थानों पर एक जैसी विधि नहीं है।

पौष पूर्णिमा उत्तर भारतीय पंचांग परंपरा में माघ-स्नान की शुरुआत से भी जोड़ी जाती है; स्थानीय पालन-पद्धति अलग हो सकती है। इस पेज का उद्देश्य किसी स्थानीय रीति को पूरे भारत के लिए अनिवार्य बताना नहीं है। शास्त्रीय उल्लेख, मंदिर-परंपरा, पारिवारिक विधि और लोक-परंपरा को एक-दूसरे के स्थान पर नहीं रखा गया है।

पंचांग से क्या तय होता है?

तिथि, वार और जहाँ आवश्यक हो वहाँ पूजा-काल। ये गणनाएँ स्थान-आधारित हो सकती हैं, इसलिए सटीक समय के लिए सही शहर चुनना महत्वपूर्ण है।

परिवार की परंपरा क्या तय करती है?

मंत्र, कथा, नैवेद्य, व्रत की कठोरता, दान और विस्तृत पूजा क्रम परिवार, क्षेत्र या संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकता है।

पौष पूर्णिमा पूजा विधि / पालन — सरल और प्रचलित क्रम

परंपरा संबंधी नोट: नीचे दिया गया क्रम सामान्य गृह-पालन के लिए सरल रूपरेखा है। इसे किसी एक शास्त्रीय संप्रदाय की सार्वभौमिक अनिवार्य विधि न मानें।
  1. स्नान के बाद पूजा-स्थान तैयार करें।
  2. अपने इष्टदेव या परिवार में प्रचलित पूर्णिमा पूजा करें।
  3. दीप, पुष्प और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।
  4. चंद्र-दर्शन की परंपरा हो तो स्थानीय चंद्रोदय समय देखें।
  5. दान या व्रत-पारण परिवार की परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार करें।

विस्तृत पूजा-विधियों के लिए पूजा विधि संग्रह देखें। यदि आपके परिवार में पुरोहित, गुरु या परंपरागत विधि है तो उसी को प्राथमिकता देना उचित है।

पौष पूर्णिमा पूजा सामग्री — सामान्य सूची

इस पर्व के लिए पूरे भारत में एक जैसी अनिवार्य सामग्री-सूची मानना उचित नहीं है। नीचे सामान्य और उपयोगी सामग्री दी गई है; परिवार की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।

सामान्य सामग्री

  • दीपक
  • पुष्प
  • जल
  • फल या सात्त्विक नैवेद्य
  • परिवार में प्रचलित पूजा सामग्री

क्या अनिवार्य नहीं मानना चाहिए?

  • किसी निश्चित संख्या में वस्तु रखना, जब तक आपकी परंपरा में स्पष्ट नियम न हो
  • महँगी सामग्री खरीदना
  • किसी वस्तु को निश्चित धन-लाभ या इच्छा-पूर्ति से जोड़ना
  • दूसरे क्षेत्र की सामग्री-सूची को अपने परिवार पर अनिवार्य रूप से लागू करना

पौष पूर्णिमा की परंपराएँ — क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर

भारत में एक ही पर्व का पालन अलग-अलग भाषाई, क्षेत्रीय और संप्रदायिक परंपराओं में अलग रूप से हो सकता है। पौष पूर्णिमा के मामले में भी भोजन, व्रत, पूजा-सामग्री, कथा और मंदिर-आयोजन में अंतर मिल सकता है।

“यही एक सही विधि है” जैसी भाषा से बचना बेहतर है। यदि किसी किसी विशेष क्षेत्र की परंपरा बताई जाए तो उस region का नाम स्पष्ट करना चाहिए।

स्वास्थ्य संबंधी सावधानी: लंबा, निर्जला या कठोर उपवास हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। दवा लेने वाले, गर्भवती महिलाएँ, बच्चे, वृद्ध या किसी स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति चिकित्सकीय सलाह और अपनी क्षमता को प्राथमिकता दें।

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Paush Purnima 2027 — Date & Panchang Summary

Paush Purnima 2027 falls on January 22, 2027 for the Jaipur/Rajasthan reference used on this page. The traditional calendar basis is पौष पूर्णिमा. Rituals, fasting practices and exact timings may vary by location and family tradition.

Location-specific timings should be checked for the city where the पालन is taking place. This page avoids using an unverified muhurta from another city.

पौष पूर्णिमा 2027 — सामान्य प्रश्न

पौष पूर्णिमा 2027 कब है?

पौष पूर्णिमा 2027 22 जनवरी 2027, शुक्रवार को है। इस page में Jaipur/Rajasthan reference को प्राथमिक रखा गया है।

पौष पूर्णिमा किस तिथि से जुड़ा है?

यह पौष पूर्णिमा से जुड़ा पालन है। स्थान और परंपरा के अनुसार पूजा समय या पालन में अंतर हो सकता है।

क्या पौष पूर्णिमा की पूजा-विधि पूरे भारत में एक जैसी है?

नहीं। परिवार, क्षेत्र, मंदिर और संप्रदाय के अनुसार पूजा-विधि, नैवेद्य और व्रत की पद्धति बदल सकती है।

क्या Jaipur का मुहूर्त दूसरे शहर में उपयोग किया जा सकता है?

स्थान-आधारित पंचांग समय सीधे दूसरे शहर पर लागू नहीं करना चाहिए। सूर्योदय, चंद्रोदय और अन्य गणनाएँ शहर के अनुसार बदल सकती हैं।

पौष पूर्णिमा से जुड़े अन्य पेज कहाँ देखें?

इस page के संबंधित उपयोगी पेज section में मासिक कैलेंडर, पूजा-विधि और संबंधित festival pages के links दिए गए हैं।

पंचांग स्रोत और सत्यापन

  1. Drik Panchang — Jaipur Hindu Calendar 2027 — Jaipur/Rajasthan date cross-check के लिए।
  2. Prokerala — संबंधित मासिक Hindu Calendar — festival-date cross-check के लिए। Exact timings default location के हो सकते हैं, इसलिए Jaipur मुहूर्त के रूप में सीधे उपयोग नहीं किए गए।

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