संकष्टी चतुर्थी व्रत
Sankashti Chaturthi — कब आती है, चंद्रोदय का नियम, पूजा विधि, व्रत कथा, अंगारकी चतुर्थी और गणेश मंत्र
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है — साल में 12 से 13 बार। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि व्रत चंद्रोदय के बाद ही खोला जाता है, सूर्यास्त पर नहीं — इसलिए चंद्रोदय का समय जानना ज़रूरी है।
🐘 भगवान गणेश | 🌘 कृष्ण चतुर्थी | 📅 महीने में एक बार | 🌙 पारण चंद्रोदय के बाद
संकष्टी चतुर्थी कब आती है?
संकष्टी चतुर्थी हर चांद्र मास के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को आती है — यानी पूर्णिमा के चार दिन बाद। चूंकि यह चांद्र तिथि पर आधारित है, अंग्रेज़ी तारीख हर महीने बदलती रहती है। साल में सामान्यतः 12 और अधिक मास वाले वर्ष में 13 संकष्टी चतुर्थी होती हैं।
हर महीने की संकष्टी चतुर्थी का अलग नाम होता है, जो उस मास से जुड़ा रहता है — जैसे श्रावण मास की गजानन संकष्टी और भाद्रपद मास की हेरंब संकष्टी। नाम भले बदलें, व्रत की विधि और भाव एक ही रहता है।
संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?
संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष में आती है और विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष में। दोनों भगवान गणेश को समर्पित हैं, पर नियम अलग हैं। संकष्टी का व्रत चंद्रोदय के बाद खोला जाता है और चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। विनायक चतुर्थी की पूजा मध्याह्न काल यानी दोपहर में होती है, और उस दिन चंद्र दर्शन से बचा जाता है।
| अंतर | संकष्टी चतुर्थी | विनायक चतुर्थी |
|---|---|---|
| पक्ष | कृष्ण पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| पूजा का समय | संध्या, चंद्रोदय पर | मध्याह्न (दोपहर) |
| चंद्रमा | दर्शन और अर्घ्य ज़रूरी | दर्शन से बचें |
| व्रत खोलना | चंद्रोदय के बाद | पूजा के बाद |
अंगारकी चतुर्थी क्या होती है?
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है। “अंगारक” मंगल ग्रह का नाम है। परंपरा में इसे सबसे फलदायी संकष्टी माना जाता है — मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पूरे वर्ष की संकष्टी चतुर्थियों का फल मिल जाता है। महाराष्ट्र में अंगारकी चतुर्थी पर गणेश मंदिरों में विशेष भीड़ रहती है।
संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि क्या है?
संकष्टी चतुर्थी की पूजा संध्या के समय की जाती है और व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है। व्रती दिन भर उपवास रखते हैं, शाम को गणेश जी की पूजा करते हैं, कथा सुनते हैं और चंद्रोदय के बाद पारण करते हैं।
- स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर निराहार या फलाहार रहें।
- स्थापना — संध्या को स्नान करके चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- अर्पण — दूर्वा (21 गाँठ), सिंदूर, अक्षत, लाल फूल, धूप और घी का दीपक अर्पित करें। दूर्वा गणेश जी को सबसे प्रिय मानी जाती है।
- भोग — मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। तिल के लड्डू भी परंपरा में शुभ माने जाते हैं।
- मंत्र जाप — “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें।
- व्रत कथा — संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- चंद्र अर्घ्य — चंद्रोदय होने पर जल, दूध और अक्षत से चंद्रमा को अर्घ्य दें।
- पारण — अर्घ्य के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।
संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा क्या है?
संकष्टी चतुर्थी की सबसे प्रचलित कथा भगवान गणेश के प्रथम पूज्य बनने की है। कथा के अनुसार एक बार देवताओं में विवाद हुआ कि सर्वप्रथम पूजा का अधिकार किसे मिले। भगवान शिव ने निर्णय दिया कि जो सबसे पहले पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करके लौटेगा, वही प्रथम पूज्य होगा।
सभी देवता अपने-अपने वाहनों पर निकल पड़े। गणेश जी का वाहन मूषक था, इसलिए वे प्रतियोगिता में पीछे रह जाते। तब उन्होंने अपने माता-पिता — शिव और पार्वती — की सात बार परिक्रमा की और कहा कि माता-पिता में ही सारा ब्रह्मांड समाया है। उनकी इस बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया — तभी से हर शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।
एक अन्य कथा के अनुसार संकष्टी का व्रत रखने से संकट दूर होते हैं — “संकष्टी” शब्द का अर्थ ही है संकट हरने वाली। इसीलिए गणेश जी को इस दिन “संकटहरण” रूप में पूजा जाता है।
संकष्टी चतुर्थी का मंत्र क्या है?
ॐ गं गणपतये नमः
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
चंद्रमा को अर्घ्य देते समय भी गणेश मंत्र का जाप किया जाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियम
✅ करें
दिन भर उपवास या फलाहार, संध्या को गणेश पूजा, 21 दूर्वा अर्पण, मोदक का भोग, कथा श्रवण, चंद्रमा को अर्घ्य, दान।
❌ न करें
अन्न और चावल, माँस-मदिरा, लहसुन-प्याज। गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएं। चंद्र अर्घ्य से पहले व्रत न खोलें।
गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती — परंपरा में इसका कारण तुलसी और गणेश जी से जुड़ी एक पौराणिक कथा बताई जाती है।
संकष्टी चतुर्थी पर खाटू श्याम जी दर्शन
संकष्टी मुख्य रूप से घर या गणेश मंदिर में मनाया जाने वाला व्रत है, इसलिए इस दिन खाटू श्याम जी में सामान्य से अधिक भीड़ नहीं रहती — दर्शन का समय 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।
परंपरा में खाटू दर्शन से पहले गणेश पूजन शुभ माना जाता है, इसलिए बहुत से भक्त यात्रा की शुरुआत गणेश वंदना से करते हैं। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
खाटू यात्रा की पूरी तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — संकष्टी चतुर्थी / Sankashti Chaturthi
Q: संकष्टी चतुर्थी कब आती है?
संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है — साल में 12 से 13 बार। इस महीने की सही तारीख हिंदू त्योहार कैलेंडर पर देखें।
Q: When is Sankashti Chaturthi observed?
Sankashti Chaturthi falls on the Chaturthi tithi of Krishna Paksha every month, dedicated to Lord Ganesha. The fast is broken only after moonrise, so the exact timing depends on your city.
Q: संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब खोलते हैं?
व्रत चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है — सूर्यास्त पर नहीं। चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखें।
Q: अंगारकी चतुर्थी क्या है?
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़े तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं। इसे सबसे फलदायी संकष्टी माना जाता है।
Q: संकष्टी और विनायक चतुर्थी में क्या फर्क है?
संकष्टी कृष्ण पक्ष में आती है, पूजा संध्या को होती है और चंद्र दर्शन ज़रूरी है। विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष में आती है, पूजा मध्याह्न में होती है और उस दिन चंद्र दर्शन से बचा जाता है।
Q: गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?
परंपरा में गणेश जी को तुलसी अर्पित करना वर्जित माना गया है। उनकी पूजा में दूर्वा सबसे प्रिय मानी जाती है — आमतौर पर 21 गाँठ वाली दूर्वा अर्पित की जाती है।
Q: संकष्टी चतुर्थी पर क्या भोग लगाएं?
मोदक गणेश जी का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। इसके अलावा लड्डू, तिल के लड्डू, केला और गुड़ भी अर्पित किए जाते हैं।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Sankashti Chaturthi dates and moonrise timings
- Prokerala — Sankashti Chaturthi
- Shri Shyam Mandir — official temple site
चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार बदलता है — पारण से पहले स्थानीय पंचांग अवश्य देखें। मासिक तिथियाँ महीने वाले पेज पर दी गई हैं। Updated July 2026.