प्रदोष व्रत 2026 | Pradosh Vrat 2026 Dates, Pradosh Kaal, Puja Vidhi

✍️ लेखक: Team Khatuwalebaba.in📅 प्रकाशित: 3 अगस्त 2026🔄 अपडेट: 13 सितंबर 2026पंचांग स्रोतों से सत्यापित

प्रदोष व्रत 2026

Pradosh Vrat 2026 — तिथियाँ, प्रदोष काल, सातों प्रकार, पूजा विधि, व्रत कथा और शिव मंत्र

सीधा जवाब / QUICK ANSWER

प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है — कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को। पूजा दिन में नहीं, सूर्यास्त के बाद के लगभग डेढ़ घंटे यानी प्रदोष काल में की जाती है। 2026 की अगली तिथियाँ — 10 अगस्त (सोम प्रदोष) और 25 अगस्त (भौम प्रदोष)

🔱 महीने में 2 बार  |  🌘 त्रयोदशी तिथि  |  🌇 सूर्यास्त के बाद पूजा  |  📿 7 प्रकार

⏳ अगला व्रत/त्योहार लोड हो रहा है…

प्रदोष व्रत क्या है और कब रखा जाता है?

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है और हर महीने की दोनों त्रयोदशी तिथियों को रखा जाता है। “प्रदोष” का अर्थ है सूर्यास्त के तुरंत बाद का समय — दिन और रात के मिलन का क्षण। मान्यता है कि इसी समय शिवजी कैलाश पर आनंद-नृत्य करते हैं, इसलिए यही समय उनकी पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

एक साल में सामान्यतः 24 प्रदोष व्रत आते हैं — हर चांद्र मास में दो। पूजा का समय सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे का होता है, इसलिए यह हर शहर में अलग होता है।

प्रदोष व्रत 2026 की आगे आने वाली तिथियाँ

नीचे 2026 की शेष प्रदोष तिथियाँ दी गई हैं। हर तिथि के आगे 🔔 button से आप उसे Google Calendar में जोड़ सकते हैं या .ics reminder download कर सकते हैं।

तिथि वार प्रकार पक्ष
10 अगस्त 2026 सोमवार सोम प्रदोष श्रावण कृष्ण
25 अगस्त 2026 मंगलवार भौम प्रदोष श्रावण शुक्ल
8 सितंबर 2026 मंगलवार भौम प्रदोष भाद्रपद कृष्ण
24 सितंबर 2026 बृहस्पतिवार गुरु प्रदोष भाद्रपद शुक्ल
8 अक्टूबर 2026 बृहस्पतिवार गुरु प्रदोष आश्विन कृष्ण
23 अक्टूबर 2026 शुक्रवार शुक्र प्रदोष आश्विन शुक्ल
6 नवंबर 2026 शुक्रवार शुक्र प्रदोष कार्तिक कृष्ण
22 नवंबर 2026 रविवार रवि प्रदोष कार्तिक शुक्ल
📌 तिथि पर एक ज़रूरी बात: प्रदोष व्रत की तिथि सूर्यास्त पर निर्भर करती है — व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्यास्त के समय त्रयोदशी तिथि चल रही हो। इसी कारण एक ही राज्य के दो शहरों में भी प्रदोष की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। ऊपर दी गई तिथियाँ दिल्ली/उत्तर भारत के अनुसार हैं — अपने शहर का पंचांग ज़रूर देख लें।

प्रदोष काल का समय क्या होता है?

प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होकर लगभग डेढ़ घंटे तक रहता है। यही वह समय है जब शिव पूजा की जाती है — दिन में नहीं। उदाहरण के लिए, जुलाई के अंत में उत्तर भारत में यह समय लगभग शाम 7:07 से 9:18 बजे तक रहता है; सर्दियों में सूर्यास्त जल्दी होने से यह खिसककर शाम 5:30 के आसपास शुरू हो जाता है।

चूंकि सूर्यास्त हर शहर और हर मौसम में बदलता है, प्रदोष काल का कोई एक निश्चित समय नहीं बताया जा सकता। सामान्य नियम यही है — सूर्यास्त के तुरंत बाद पूजा शुरू करें

प्रदोष व्रत के सात प्रकार कौन से हैं?

प्रदोष व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के अनुसार उसका नाम और फल बदल जाता है। परंपरा में सात प्रकार बताए गए हैं।

वार नाम परंपरागत फल
रविवार रवि / भानु प्रदोष आरोग्य और दीर्घायु
सोमवार सोम / चंद्र प्रदोष मनोकामना पूर्ति, मानसिक शांति
मंगलवार भौम प्रदोष ऋण-मुक्ति और रोग से राहत
बुधवार सौम्य / बुध प्रदोष शिक्षा और बुद्धि
बृहस्पतिवार गुरु प्रदोष शत्रु-बाधा शांति, ज्ञान
शुक्रवार शुक्र / भृगु प्रदोष दांपत्य सुख और सौभाग्य
शनिवार शनि प्रदोष संतान सुख, शनि दोष शांति

इनमें सोम, भौम और शनि प्रदोष को विशेष फलदायी माना जाता है। 2026 में सावन का सोम प्रदोष 10 अगस्त को पड़ रहा है — सावन और सोमवार दोनों शिवजी से जुड़े होने के कारण इसे और शुभ माना जाता है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि क्या है?

प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त से ठीक पहले स्नान करके शुरू की जाती है। व्रती दिन भर उपवास रखते हैं, संध्या को स्नान करके शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, प्रदोष व्रत कथा सुनते हैं और आरती के बाद व्रत खोलते हैं।

  1. सुबह स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर निराहार या फलाहार रहें।
  2. संध्या स्नान — सूर्यास्त से लगभग एक घंटे पहले दोबारा स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। यह इस व्रत की विशेष परंपरा है।
  3. पूजा स्थल — उत्तर-पूर्व दिशा में गंगाजल छिड़ककर शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें।
  4. जलाभिषेक — सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल शुरू होते ही शिवलिंग पर जल और पंचामृत चढ़ाएं।
  5. अर्पण — बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, सफेद चंदन, अक्षत और भस्म अर्पित करें।
  6. मंत्र जाप — “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें।
  7. व्रत कथा — प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें। जिस वार का प्रदोष हो, उसी की कथा सुनने की परंपरा है।
  8. आरती और पारण — “ॐ जय शिव ओंकारा” आरती करके प्रसाद बाँटें और व्रत खोलें।

प्रदोष व्रत की कथा क्या है?

प्रदोष व्रत की कथा समुद्र मंथन और देवताओं की प्रार्थना से जुड़ी है। परंपरागत कथा के अनुसार जब असुरों के भय से देवता व्याकुल हो गए, तब वे भगवान शिव की शरण में पहुँचे। उन्होंने जिस समय शिवजी की स्तुति की, वह सूर्यास्त के बाद का समय था — प्रदोष काल।

शिवजी उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें अभय का वरदान दिया। कथा में कहा गया है कि उसी दिन से प्रदोष काल शिव आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाने लगा। एक अन्य मान्यता के अनुसार इसी समय शिवजी कैलाश पर्वत पर आनंद-तांडव करते हैं और समस्त देवगण उनकी स्तुति करते हैं।

प्रदोष व्रत का मंत्र क्या है?

ॐ नमः शिवाय

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

प्रदोष काल में पंचाक्षरी मंत्र के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।

प्रदोष व्रत के नियम क्या हैं?

✅ करें

दिन भर उपवास या फलाहार, संध्या को दोबारा स्नान, प्रदोष काल में शिव पूजा, बेलपत्र अर्पण, कथा श्रवण, दान।

❌ न करें

अन्न, चावल, माँस-मदिरा, लहसुन-प्याज। शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी, केतकी का फूल और शंख से जल न चढ़ाएं।

🙏 ध्यान दें: मधुमेह, रक्तचाप या किसी रोग से ग्रस्त व्यक्ति, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएं और वृद्धजन निराहार व्रत न रखें। फलाहार व्रत भी परंपरा में पूर्णतः मान्य है।

प्रदोष व्रत पर खाटू श्याम जी दर्शन

प्रदोष मुख्य रूप से शिव मंदिरों का व्रत है, इसलिए इस दिन खाटू श्याम जी में असामान्य भीड़ नहीं रहती — दर्शन का समय सामान्य 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है। खाटू के पास हर्षनाथ मंदिर, सीकर एक प्राचीन शिव स्थल है, जहाँ प्रदोष काल में अभिषेक किया जा सकता है।

अपवाद 10 अगस्त है — उस दिन सोम प्रदोष के साथ दूसरा सावन सोमवार भी है, इसलिए पूरे क्षेत्र के शिव मंदिरों में भीड़ रहेगी। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →

खाटू यात्रा की पूरी तैयारी

🏨 Hotels
🛕 Dharamshala
🅿️ Parking
⭐ VIP Darshan
🚕 Taxi
🚆 Trains
🔴 Live Darshan
📅 Ekadashi

🙏 इस कैलेंडर को शेयर करें / Share this calendar

📅 कैलेंडर सेव करें / Save & get reminders

.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।

FAQ — प्रदोष व्रत 2026 / Pradosh Vrat 2026

Q: प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?

प्रदोष व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है — कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। साल में कुल 24 प्रदोष व्रत आते हैं।

Q: When is the next Pradosh Vrat in 2026?

The next Pradosh Vrat dates are 10 August (Som Pradosh) and 25 August (Bhauma Pradosh), followed by 8 and 24 September. Puja is performed after sunset, during Pradosh Kaal.

Q: प्रदोष काल कितने बजे शुरू होता है?

प्रदोष काल सूर्यास्त के तुरंत बाद शुरू होकर लगभग डेढ़ घंटे तक रहता है। चूंकि सूर्यास्त हर शहर और मौसम में बदलता है, इसका कोई एक निश्चित समय नहीं होता — अपने शहर का सूर्यास्त देख लें।

Q: क्या प्रदोष व्रत की तारीख हर शहर में एक ही होती है?

ज़रूरी नहीं। व्रत उसी दिन रखा जाता है जब सूर्यास्त के समय त्रयोदशी चल रही हो — इसलिए एक ही राज्य के दो शहरों में भी तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

Q: शनि प्रदोष और सोम प्रदोष में क्या अंतर है?

प्रदोष जिस वार को पड़े, उसी के नाम से जाना जाता है। सोम प्रदोष (सोमवार) मनोकामना पूर्ति के लिए और शनि प्रदोष (शनिवार) संतान सुख तथा शनि दोष शांति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

Q: प्रदोष व्रत में संध्या को दोबारा स्नान क्यों करते हैं?

क्योंकि मुख्य पूजा प्रदोष काल में होती है, दिन में नहीं। परंपरा के अनुसार सूर्यास्त से लगभग एक घंटे पहले स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी की जाती है।

Q: प्रदोष व्रत में क्या खा सकते हैं?

दिन भर निराहार या फलाहार — फल, दूध, दही, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक। अन्न, चावल, दालें, लहसुन-प्याज और माँस-मदिरा वर्जित हैं। व्रत आरती के बाद खोला जाता है।

संबंधित पेज

🔱 सावन सोमवार व्रत 2026
🌙 सावन शिवरात्रि 2026
🕉️ एकादशी कैलेंडर 2026
📅 हिंदू त्योहार कैलेंडर

References

  1. Drik Panchang — Pradosh Vrat dates and Pradosh Kaal timings
  2. Prokerala — Pradosh Vrat dates and puja time
  3. Shri Shyam Mandir — official temple site

तिथियाँ भारत (IST), दिल्ली/उत्तर भारत के अनुसार, एकादशी तिथि-क्रम से cross-verified. प्रदोष सूर्यास्त-आधारित व्रत है — अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें। यह पेज हर साल update किया जाता है। Updated July 2026.

॥ जय श्री श्याम ॥