मासिक दुर्गाष्टमी व्रत
Masik Durgashtami — कब आती है, माता दुर्गा की पूजा विधि, कन्या पूजन, व्रत नियम और मंत्र
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
मासिक दुर्गाष्टमी हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है — साल में 12 बार। यह व्रत माता दुर्गा को समर्पित है और पूजा मुख्यतः प्रातःकाल की जाती है। इनमें आश्विन मास की अष्टमी महाअष्टमी कहलाती है, जो नवरात्रि का सबसे बड़ा दिन है।
🔥 माता दुर्गा | 🌔 शुक्ल अष्टमी | 📅 महीने में एक बार | 👧 कन्या पूजन
मासिक दुर्गाष्टमी कब आती है?
मासिक दुर्गाष्टमी हर चांद्र मास के शुक्ल पक्ष की आठवीं तिथि को आती है — यानी अमावस्या के आठ दिन बाद। यह वर्ष में बारह बार आती है। इनमें आश्विन मास की दुर्गाष्टमी शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी होती है और चैत्र मास की दुर्गाष्टमी चैत्र नवरात्रि की।
मासिक दुर्गाष्टमी और महाअष्टमी में क्या अंतर है?
तिथि दोनों की एक है — शुक्ल पक्ष की अष्टमी — पर महाअष्टमी साल में दो बार नवरात्रि के भीतर आती है। बाकी दस अष्टमी मासिक दुर्गाष्टमी कहलाती हैं और घर में सादगी से मनाई जाती हैं।
| अंतर | मासिक दुर्गाष्टमी | महाअष्टमी |
|---|---|---|
| कब | हर महीने — साल में 12 बार | चैत्र और आश्विन नवरात्रि में |
| आयोजन | घर और स्थानीय मंदिर | देशव्यापी, पंडाल और दुर्गा पूजा |
| विशेष कर्म | दुर्गा पूजा, कन्या पूजन | संधि पूजा, हवन, महागौरी पूजन |
मासिक दुर्गाष्टमी की पूजा विधि क्या है?
मासिक दुर्गाष्टमी की पूजा प्रातःकाल स्नान के बाद की जाती है। माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करके लाल वस्त्र, लाल फूल और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ होता है और कन्या पूजन करके व्रत पूरा किया जाता है।
- स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके लाल या पीले वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- स्थापना — चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना भी की जा सकती है।
- अर्पण — लाल फूल (विशेषकर गुड़हल), अक्षत, रोली, धूप और घी का दीपक अर्पित करें।
- श्रृंगार — माता को चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, लाल चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
- भोग — हलवा, पूरी, चना और नारियल का भोग लगाएं।
- पाठ — दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या “या देवी सर्वभूतेषु” स्तुति का पाठ करें।
- कन्या पूजन — नौ कन्याओं (या सामर्थ्य अनुसार कम) को भोजन कराकर उपहार और दक्षिणा दें। यह इस व्रत का सबसे विशिष्ट कर्म है।
- आरती और पारण — आरती करके प्रसाद बाँटें और व्रत खोलें।
कन्या पूजन कैसे करें?
कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को माता दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। परंपरा में नौ कन्याएं और एक बालक (जिसे लांगुर या भैरव माना जाता है) बुलाए जाते हैं, पर सामर्थ्य के अनुसार संख्या कम भी की जा सकती है।
कन्याओं के पैर धोकर, तिलक लगाकर, कलावा बाँधकर भोजन कराया जाता है — आमतौर पर हलवा, पूरी और चना। भोजन के बाद उपहार, वस्त्र या दक्षिणा देकर उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लिया जाता है।
दुर्गाष्टमी का मंत्र क्या है?
ॐ दुं दुर्गायै नमः
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ भी इस दिन किया जाता है।
मासिक दुर्गाष्टमी व्रत के नियम
✅ करें
प्रातः स्नान और पूजा, लाल फूल अर्पण, अखंड दीप, दुर्गा चालीसा पाठ, कन्या पूजन, दान, सात्विक आहार।
❌ न करें
माँस-मदिरा, लहसुन-प्याज, अन्न (व्रत रखने पर)। परंपरा में इस दिन बाल-नाखून काटना और वाद-विवाद वर्जित माना जाता है।
मासिक दुर्गाष्टमी पर खाटू श्याम जी दर्शन
मासिक दुर्गाष्टमी मुख्यतः घर और देवी मंदिरों में मनाई जाती है, इसलिए इस दिन खाटू श्याम जी में असामान्य भीड़ नहीं रहती — दर्शन का समय 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।
खाटू के आसपास कई प्रसिद्ध देवी स्थल हैं जिन्हें यात्रा में जोड़ा जा सकता है — जीण माता, शाकंभरी देवी, सीकर और करणी माता। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
खाटू यात्रा की पूरी तैयारी
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FAQ — मासिक दुर्गाष्टमी / Masik Durgashtami
Q: मासिक दुर्गाष्टमी कब आती है?
मासिक दुर्गाष्टमी हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है — साल में बारह बार। इस महीने की तारीख हिंदू त्योहार कैलेंडर पर देखें।
Q: When is Masik Durgashtami observed?
Masik Durgashtami falls on the Ashtami tithi of Shukla Paksha every month and is dedicated to Goddess Durga. The puja is usually performed in the morning, followed by Kanya Pujan.
Q: कन्या पूजन में कितनी कन्याएं बुलाई जाती हैं?
परंपरा में नौ कन्याएं और एक बालक बुलाए जाते हैं, पर सामर्थ्य के अनुसार संख्या कम भी की जा सकती है। कन्याओं की आयु आमतौर पर 2 से 10 वर्ष के बीच होती है।
Q: मासिक दुर्गाष्टमी और महाअष्टमी में क्या अंतर है?
तिथि दोनों की एक है, पर महाअष्टमी साल में दो बार नवरात्रि के भीतर आती है — चैत्र और आश्विन में — और उसका आयोजन देशव्यापी होता है। बाकी दस मासिक दुर्गाष्टमी कहलाती हैं।
Q: दुर्गाष्टमी पर क्या भोग लगाएं?
हलवा, पूरी और चना पारंपरिक भोग है — यही कन्या पूजन में भी कराया जाता है। नारियल और लाल फूल भी अर्पित किए जाते हैं।
Q: कालाष्टमी और दुर्गाष्टमी में क्या फर्क है?
कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है और काल भैरव को समर्पित है। मासिक दुर्गाष्टमी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है और माता दुर्गा को।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Masik Durgashtami dates
- Prokerala — Durga Ashtami Vrat
- Shri Shyam Mandir — official temple site
तिथि का आरंभ-समाप्ति समय शहर के अनुसार बदल सकता है — स्थानीय पंचांग देखें। मासिक तिथियाँ महीने वाले पेज पर दी गई हैं। Updated July 2026.