कालाष्टमी व्रत
Kalashtami — कब आती है, भगवान काल भैरव की पूजा विधि, व्रत कथा, मंत्र और नियम
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है — साल में 12 बार। यह व्रत भगवान काल भैरव को समर्पित है, जो भगवान शिव का उग्र स्वरूप माने जाते हैं। पूजा मुख्यतः रात्रि में की जाती है।
🗡️ काल भैरव | 🌘 कृष्ण अष्टमी | 📅 महीने में एक बार | 🌃 रात्रि पूजा
कालाष्टमी 2026–27 की तिथियाँ
नीचे अगले 12 महीनों की तिथियाँ हैं। हर तिथि के आगे 🔔 button से आप उसे Google Calendar में जोड़ सकते हैं।
| तारीख | वार | तिथि प्रारंभ → समाप्त | विशेष |
|---|---|---|---|
| 3 अक्टूबर 2026 | शनिवार | 3 अक्, 8:00 AM → 4 अक्, 5:52 AM | — |
| 1 नवंबर 2026 | रविवार | 1 नवं, 2:52 PM → 2 नवं, 1:11 PM | — |
| 1 दिसंबर 2026 | मंगलवार | 1 दिस, 12:12 AM → 1 दिस, 11:14 PM | काल भैरव जयंती |
| 30 दिसंबर 2026 | बुधवार | 30 दिस, 12:37 PM → 31 दिस, 12:33 PM | — |
| 29 जनवरी 2027 | शुक्रवार | 29 जनव, 4:03 AM → 30 जनव, 4:59 AM | — |
| 27 फरवरी 2027 | शनिवार | 27 फरव, 9:55 PM → 28 फरव, 11:47 PM | — |
| 29 मार्च 2027 | सोमवार | 29 मार, 5:12 PM → 30 मार, 7:40 PM | — |
| 28 अप्रैल 2027 | बुधवार | 28 अप्, 12:31 PM → 29 अप्, 3:02 PM | — |
| 28 मई 2027 | शुक्रवार | 28 मई, 6:27 AM → 29 मई, 8:21 AM | — |
| 26 जून 2027 | शनिवार | 26 जून, 9:52 PM → 27 जून, 10:45 PM | — |
| 26 जुलाई 2027 | सोमवार | 26 जुल, 10:25 AM → 27 जुल, 10:13 AM | — |
| 24 अगस्त 2027 | मंगलवार | 24 अगस, 8:25 PM → 25 अगस, 7:20 PM | — |
| 23 सितंबर 2027 | गुरुवार | 23 सित, 4:37 AM → 24 सित, 2:58 AM | — |
नियम: रात्रि (निशीथ काल) में कृष्ण अष्टमी जिस दिन पड़ती है, वही दिन लिया गया है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से। * वाली तिथियों पर तिथि नियम-काल के बहुत पास है या दो दिन पड़ रही है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
कालाष्टमी कब आती है?
कालाष्टमी हर चांद्र मास के कृष्ण पक्ष की आठवीं तिथि को आती है — यानी पूर्णिमा के आठ दिन बाद। यह वर्ष में बारह बार आती है। इनमें मार्गशीर्ष मास की कालाष्टमी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है और उसे काल भैरव जयंती कहा जाता है।
काल भैरव कौन हैं?
काल भैरव भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप हैं। “भैरव” शब्द का अर्थ है भय का हरण करने वाला। परंपरा में उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है — मान्यता है कि काशी में उनकी अनुमति के बिना कोई प्रवेश या निवास नहीं कर सकता।
उनका वाहन कुत्ता है, इसलिए कालाष्टमी पर कुत्तों को भोजन कराने की परंपरा है। हाथ में दंड धारण करने के कारण उन्हें दंडपाणि भी कहा जाता है। भक्त उन्हें भय, शत्रु-बाधा, नकारात्मक शक्तियों और अकाल मृत्यु से रक्षा करने वाला मानते हैं।
कालाष्टमी और दुर्गा अष्टमी में क्या अंतर है?
दोनों अष्टमी तिथि को आती हैं, पर पक्ष और देवता अलग हैं। कालाष्टमी कृष्ण पक्ष में आती है और काल भैरव को समर्पित है; मासिक दुर्गाष्टमी शुक्ल पक्ष में आती है और माता दुर्गा को।
| अंतर | कालाष्टमी | मासिक दुर्गाष्टमी |
|---|---|---|
| पक्ष | कृष्ण पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| देवता | भगवान काल भैरव | माता दुर्गा |
| पूजा का समय | मुख्यतः रात्रि | मुख्यतः प्रातःकाल |
| विशेष परंपरा | कुत्तों को भोजन | कन्या पूजन |
कालाष्टमी की पूजा विधि क्या है?
कालाष्टमी की पूजा मुख्य रूप से रात्रि में की जाती है। व्रती दिन भर उपवास रखते हैं, संध्या को काल भैरव की पूजा करते हैं, सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं, कथा सुनते हैं और कुत्तों को भोजन कराते हैं।
- स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर निराहार या फलाहार रहें।
- स्थापना — संध्या को स्नान करके काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। शिवजी की पूजा भी साथ की जाती है।
- दीपक — सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं — यह काल भैरव पूजा की विशेष परंपरा है।
- अर्पण — काले तिल, उड़द, नारियल, इमरती या जलेबी और गुड़ अर्पित करें।
- मंत्र जाप — काल भैरव मंत्र का जाप करें।
- व्रत कथा — कालाष्टमी व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- श्वान सेवा — कुत्तों को रोटी, दूध या मीठा खिलाएं — यह इस व्रत का सबसे विशिष्ट कर्म माना जाता है।
- पारण — रात्रि पूजा के बाद या अगली सुबह, परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत खोलें।
कालाष्टमी का मंत्र क्या है?
ॐ कालभैरवाय नमः
ॐ भयहरणं च भैरव:।
भैरव अष्टक और भैरव चालीसा का पाठ भी इस दिन किया जाता है।
कालाष्टमी की व्रत कथा क्या है?
काल भैरव के प्राकट्य की कथा शिव पुराण में मिलती है। कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश में यह विवाद हुआ कि तीनों में सर्वश्रेष्ठ कौन है। विवाद बढ़ने पर ब्रह्मा जी ने अहंकारवश शिवजी के प्रति अनुचित वचन कह दिए।
शिवजी के क्रोध से एक उग्र स्वरूप प्रकट हुआ — काल भैरव। उन्होंने ब्रह्मा जी के अहंकार का शमन किया, जिसके बाद ब्रह्मा जी को अपनी भूल का बोध हुआ और उन्होंने क्षमा माँगी। इसके बाद भैरव जी काशी पहुँचे, जहाँ उन्हें नगर के कोतवाल का पद मिला।
इसी कारण मान्यता है कि काशी यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक काल भैरव के दर्शन न कर लिए जाएँ। कथा का भाव यही है कि अहंकार का नाश और भय से रक्षा — दोनों भैरव जी की कृपा से मिलते हैं।
कालाष्टमी व्रत के नियम
✅ करें
रात्रि पूजा, सरसों के तेल का दीपक, काले तिल और उड़द अर्पण, कुत्तों को भोजन, भैरव मंत्र जाप, कथा श्रवण, दान।
❌ न करें
अन्न और चावल, माँस-मदिरा, लहसुन-प्याज। किसी जीव, विशेषकर कुत्ते को कष्ट देना इस दिन विशेष रूप से वर्जित माना जाता है।
कालाष्टमी पर खाटू श्याम जी दर्शन
कालाष्टमी भैरव मंदिरों का व्रत है, इसलिए इस दिन खाटू श्याम जी में असामान्य भीड़ नहीं रहती — दर्शन का समय 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।
राजस्थान में भैरव जी की पूजा लोक-परंपरा का हिस्सा है और शेखावाटी क्षेत्र के कई गाँवों में भैरव स्थान मिलते हैं। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
खाटू यात्रा की पूरी तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — कालाष्टमी / Kalashtami
Q: कालाष्टमी कब आती है?
कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है — साल में बारह बार। इस महीने की तारीख हिंदू त्योहार कैलेंडर पर देखें।
Q: When is Kalashtami observed?
Kalashtami falls on the Ashtami tithi of Krishna Paksha every month and is dedicated to Lord Kaal Bhairav, the fierce form of Shiva. The puja is performed mainly at night.
Q: काल भैरव कौन हैं?
काल भैरव भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप हैं। उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है और भय, शत्रु-बाधा तथा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाला माना जाता है।
Q: कालाष्टमी पर कुत्तों को खाना क्यों खिलाते हैं?
कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। इसलिए इस दिन कुत्तों को रोटी, दूध या मीठा खिलाना पूजा का अभिन्न अंग माना जाता है।
Q: कालाष्टमी और दुर्गाष्टमी में क्या अंतर है?
कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है और काल भैरव को समर्पित है। मासिक दुर्गाष्टमी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है और माता दुर्गा को।
Q: काल भैरव जयंती कब होती है?
मार्गशीर्ष मास की कालाष्टमी को काल भैरव जयंती कहा जाता है — यह साल की सबसे महत्वपूर्ण कालाष्टमी मानी जाती है।
Q: कालाष्टमी पर कौन सा दीपक जलाएं?
सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। काले तिल, उड़द और गुड़ अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Masik Kalashtami dates
- Prokerala — Kalashtami
- Shri Shyam Mandir — official temple site
तिथि का आरंभ-समाप्ति समय शहर के अनुसार बदल सकता है — स्थानीय पंचांग देखें। मासिक तिथियाँ महीने वाले पेज पर दी गई हैं। Updated July 2026.
इसके आसपास के अन्य व्रत-त्योहार
📅 और त्योहारों की तारीख देखें — कौन-सा व्रत-त्योहार कब है? 2026-27 की पूरी सूची →