भाद्रपद पूर्णिमा 2026
सत्यनारायण व्रत, पूजा विधि, कथा, चंद्र अर्घ्य और पूर्णिमा श्राद्ध


📿 घर पर पूजा कैसे करें: सत्यनारायण पूजा विधि →
भाद्रपद पूर्णिमा 2026 कब है
26 सितंबर, शनिवार
श्री सत्यनारायण पूजा और कथा
पूर्णिमा श्राद्ध, दान और चंद्र अर्घ्य
पूर्णिमा व्रत और सत्यनारायण पूजा तिथि के आरंभ समय के अनुसार कभी एक दिन पहले भी मानी जा सकती है। शहर-आधारित पंचांग देखें।
भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व
भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा, स्नान-दान और चंद्र उपासना से जुड़ी है। 2026 में इसी दिन पूर्णिमा श्राद्ध है और अगले दिन पितृ पक्ष की प्रतिपदा शुरू होती है।
सत्यनारायण पूजा की सरल विधि
- चौकी पर पीला/लाल वस्त्र और सत्यनारायण चित्र रखें।
- कलश स्थापित कर गणेश, नवग्रह और कुलदेवता का स्मरण करें।
- पंचामृत, चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसी, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
- सत्यनारायण कथा के पाँच अध्याय श्रद्धा से सुनें।
- आरती कर प्रसाद बाँटें और दान करें।
पूजा सामग्री और प्रसाद
चौकी, वस्त्र, चित्र, कलश, नारियल, आम पत्ते।
रोली, चंदन, अक्षत, मौली, पुष्प, तुलसी, धूप, दीप।
सूजी/आटे का शिरा, केला, पंचमेवा या सात्विक भोग।
सत्यनारायण कथा का संदेश
कथा सत्य बोलने, संकल्प पूरा करने, प्रसाद का सम्मान और सफलता में अहंकार न करने का संदेश देती है। इसे “तुरंत धन” की गारंटी के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं।
चंद्र अर्घ्य और पारण
शाम चंद्र दर्शन पर जल या दूध-मिश्रित जल से अर्घ्य दिया जाता है। बादल में चंद्रमा न दिखे तो स्थानीय चंद्रोदय समय के बाद प्रार्थना कर सकते हैं। व्रत का पारण परिवार की परंपरा अनुसार करें।
पूर्णिमा श्राद्ध और पितृ पक्ष
पूर्णिमा तिथि पर दिवंगत पूर्वजों का श्राद्ध 26 सितंबर को है। अगले दिन 27 सितंबर से पितृ पक्ष 2026 का मुख्य क्रम शुरू होगा।
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FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाद्रपद पूर्णिमा 2026 कब है?
शनिवार, 26 सितंबर 2026।
क्या सत्यनारायण पूजा कर सकते हैं?
हाँ; स्थानीय पूर्णिमा तिथि समय जाँचें।
कथा में कितने अध्याय होते हैं?
लोकप्रिय पूजा-पद्धति में पाँच अध्याय।
पूर्णिमा श्राद्ध किसके लिए है?
पूर्णिमा तिथि पर दिवंगत पूर्वजों के लिए।
व्रत पारण कब करें?
पूजा और चंद्र दर्शन/स्थानीय चंद्रोदय के बाद, परिवार की परंपरा अनुसार।
References
तिथि और मुहूर्त शहर, सूर्योदय और स्थानीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। यहाँ समय नई दिल्ली पंचांग संदर्भ का है; राजस्थान के लिए स्थानीय पंचांग से पुनः जाँच करें। Updated August 2026.
॥ जय श्री श्याम ॥
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