Home एकादशी कैलेंडर परिवर्तिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

परिवर्तिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक सितम्बर 22, 2026 (मंगलवार)
🗓️ तिथि भाद्रपद, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ सित॰ 21, 08:00 PM
⏰ समाप्त सित॰ 22, 09:43 PM

1. दशमी तिथि से तैयारी

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें तथा स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं परिवर्तिनी एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु एवं वामन भगवान की पूजा करें

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, अक्षत, पुष्प एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप और दीप प्रज्वलित करें।
  • पीले पुष्प एवं नैवेद्य अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

या

ॐ वामनाय नमः॥

6. कथा एवं भजन

  • परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भगवान विष्णु और वामन भगवान के भजन गाएं।

7. दान-पुण्य करें

इस दिन अन्न, वस्त्र, छाता, फल और दक्षिणा का दान विशेष फलदायी माना जाता है।

8. द्वादशी को पारण

द्वादशी तिथि में शुभ समय पर व्रत का पारण करें।


परिवर्तिनी एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु और वामन भगवान की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ चातुर्मास के नियमों का पालन करें।
✅ भजन, कीर्तन एवं सत्संग करें।


परिवर्तिनी एकादशी पर क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन न करें।
❌ झूठ, निंदा और अपशब्दों से बचें।
❌ क्रोध एवं विवाद न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिवर्तिनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?
इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में अपनी करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी को और किन नामों से जाना जाता है?
पार्श्व एकादशी, वामन एकादशी और जलझूलनी एकादशी।
परिवर्तिनी एकादशी का संबंध किस अवतार से है?
यह भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि की कथा से जुड़ी हुई है।
क्या महिलाएं परिवर्तिनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
परिवर्तिनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
भगवान विष्णु की कृपा, मनोकामना पूर्ति, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति।
चातुर्मास में परिवर्तिनी एकादशी का क्या महत्व है?
यह चातुर्मास की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक है और इस दिन पूजा-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है।
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