आमलकी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में वैदिशा नगरी में राजा चैत्ररथ नामक एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। उनकी प्रजा भी अत्यंत धार्मिक और भगवान विष्णु की भक्त थी।
एक बार फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन पूरे राज्य में आमलकी एकादशी का व्रत रखा गया। राजा और प्रजा ने मिलकर भगवान विष्णु तथा आंवला वृक्ष की पूजा की और रात्रि जागरण किया।
उसी रात एक शिकारी, जो जीवन भर हिंसा और पाप कर्मों में लिप्त रहा था, वहां पहुंच गया। भूख और थकान के कारण वह मंदिर के पास बैठ गया और अनजाने में पूरी रात भगवान विष्णु की कथा सुनता रहा तथा जागरण करता रहा।
उससे अनजाने में आमलकी एकादशी का व्रत हो गया।
जब उसकी मृत्यु हुई तो भगवान विष्णु की कृपा से उसे श्रेष्ठ लोकों की प्राप्ति हुई। अगले जन्म में वह एक धर्मपरायण और पराक्रमी राजा बना। अंततः उसे मोक्ष प्राप्त हुआ।
इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि भगवान विष्णु की भक्ति और आमलकी एकादशी का व्रत अनजाने में भी किया जाए तो उसका महान पुण्य प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history