Home एकादशी कैलेंडर परिवर्तिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

परिवर्तिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

संक्षेप में: परिवर्तिनी एकादशी 2026 — मंगलवार, 22 सितंबर 2026 (8 दिन बाद)। इस दिन खाटू श्याम जी मंदिर 24 घंटे खुला रहता है और भारी भीड़ रहती है। अगली एकादशी: इन्दिरा एकादशी — मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026। दर्शन समय →
📅 दिनांक सितम्बर 22, 2026 (मंगलवार)
🗓️ तिथि भाद्रपद, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ सित॰ 21, 08:00 PM
⏰ समाप्त सित॰ 22, 09:43 PM

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में राजा बलि अत्यंत पराक्रमी, दानी और धर्मात्मा राजा थे। उनके प्रभाव से तीनों लोकों में उनका यश फैल गया था। देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की।

तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और एक ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे।

भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बलि ने सहर्ष दान देने का वचन दे दिया।

इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। एक पग में पृथ्वी, दूसरे पग में स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा।

तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। भगवान विष्णु उनकी भक्ति और दानशीलता से अत्यंत प्रसन्न हुए।

भगवान ने राजा बलि को सुतल लोक का स्वामी बनाया और वरदान दिया कि वे चातुर्मास के दौरान उनके साथ निवास करेंगे। परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु राजा बलि के यहां से करवट बदलते हैं, इसलिए यह एकादशी विशेष महत्व रखती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिवर्तिनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?
इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में अपनी करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी को और किन नामों से जाना जाता है?
पार्श्व एकादशी, वामन एकादशी और जलझूलनी एकादशी।
परिवर्तिनी एकादशी का संबंध किस अवतार से है?
यह भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि की कथा से जुड़ी हुई है।
क्या महिलाएं परिवर्तिनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
परिवर्तिनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
भगवान विष्णु की कृपा, मनोकामना पूर्ति, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति।
चातुर्मास में परिवर्तिनी एकादशी का क्या महत्व है?
यह चातुर्मास की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक है और इस दिन पूजा-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है।
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