दुर्गा अष्टमी 2026 कब है? Durga Ashtami (Maha Ashtami) 2026 Date, मुहूर्त व पूजा विधि

✍️ लेखक: Team Khatuwalebaba.in📅 प्रकाशित: 17 अगस्त 2026🔄 अपडेट: 22 अक्टूबर 2026पंचांग स्रोतों से सत्यापित

सीधा जवाब

दुर्गा अष्टमी 2026 कब है?

📅 सोमवार, 19 अक्टूबर 2026   ✅ इस वर्ष यह पर्व बीत चुका है — अगले वर्ष की तिथि जल्द अपडेट होगी

  • 🕉️ आश्विन शुक्ल अष्टमी — प्रारंभ: 18 अक्टूबर, 8:29 AM · समाप्त: 19 अक्टूबर, 10:52 AM
  • 🌅 सूर्योदय 6:28 AM · सूर्यास्त 5:54 PM
  • 🔔 संधि पूजा मुहूर्त: 10:27 AM – 11:15 AM (19 अक्टूबर, जयपुर) · कन्या पूजन: 19 अक्टूबर सुबह, अष्टमी तिथि 10:52 AM तक

📌 18 अक्टूबर या 19 अक्टूबर? अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर, 8:29 AM से 19 अक्टूबर, 10:52 AM तक रहेगी, इसलिए दोनों तारीखों को लेकर भ्रम रहता है। पंचांग के अनुसार दुर्गा अष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।

समय जयपुर (IST) के अनुसार; तिथि का समय खगोलीय गणना से। आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

आश्विन शुक्ल अष्टमी

दुर्गा अष्टमी 2026 कब है? Durga Ashtami (Maha Ashtami) 2026 Date, मुहूर्त व पूजा विधि

दुर्गा अष्टमी 2026 — शारदीय नवरात्रि 2026 में जयपुर/राजस्थान संदर्भ के अनुसार दुर्गा अष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर को है। इस वर्ष अष्टमी और महानवमी की पूजा-प्रविष्टियाँ एक ही ग्रेगोरियन दिन पर दिखाई दे सकती हैं क्योंकि तिथि दिन के बीच बदलती है।

तारीख19 अक्टूबर 2026, सोमवार
पंचांग आधारआश्विन शुक्ल अष्टमी
पूरे महीने की सूचीमासिक हिंदू कैलेंडर देखें

अन्य नाम: दुर्गा अष्टमी को महाअष्टमी, अष्टमी और कई क्षेत्रों में आठें भी कहते हैं। इसके अगले दिन महानवमी होती है।

📿 घर पर पूजा कैसे करें: महागौरी पूजा व कन्या पूजन विधि →

📅 अगले वर्ष

दुर्गा अष्टमी (शारदीय) 2027 कब है? — गुरुवार, 7 अक्टूबर 2027

आश्विन शुक्ल अष्टमी

स्रोत: Drik Panchang — 2027 Hindu Festivals Calendar, जयपुर। 2027 के सभी व्रत-त्योहार →

दुर्गा अष्टमी 2026 कब है?

19 अक्टूबर 2026, सोमवार को दुर्गा अष्टमी का संबंधित पालन है। हिंदू तिथि और ग्रेगोरियन तारीख हमेशा रात 12 बजे एक साथ नहीं बदलतीं। इसलिए सटीक घड़ी-समय वाले अनुष्ठान के लिए उसी शहर का पंचांग देखना उपयोगी है जहाँ पूजा या यात्रा की जा रही है।

यदि किसी दूसरे शहर या वेबसाइट पर तारीख एक दिन अलग दिखाई दे, तो सबसे पहले देखें कि वहाँ कौन-सा स्थान चुना गया है और पर्व के लिए सूर्योदय, तिथि-व्याप्ति, प्रदोषकाल या किसी अन्य नियम का उपयोग किया गया है। केवल कैलेंडर तारीख की तुलना करके किसी एक सूची को गलत मानना उचित नहीं होता।

दुर्गा अष्टमी का धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ

दुर्गा अष्टमी को महाष्टमी भी कहा जाता है और यह शारदीय नवरात्रि की प्रमुख तिथियों में से एक है। कई परंपराओं में महागौरी पूजन, दुर्गा पाठ, कुमारी पूजन या संधि पूजा का विधान मिलता है। सभी क्षेत्रों में इन अनुष्ठानों का क्रम एक जैसा नहीं होता।

जयपुर पंचांग में 19 अक्टूबर 2026 को अष्टमी तिथि का प्रमुख पालन आता है। बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा, उत्तर भारतीय नवरात्रि और पारिवारिक व्रत-पद्धति में पूजा के नाम और समय अलग हो सकते हैं।

दुर्गा अष्टमी की सरल पूजा / पालन विधि

  1. प्रातः स्नान के बाद देवी पूजा स्थान तैयार करें।
  2. माँ दुर्गा या महागौरी के चित्र/विग्रह के समक्ष दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
  3. दुर्गा सप्तशती, देवी स्तोत्र या परिवार में प्रचलित पाठ का चयन किया जा सकता है।
  4. कुमारी पूजन करने वाले परिवार बच्चों की सुविधा और सम्मान को प्राथमिकता दें।
  5. संधि पूजा का समय स्थान-विशिष्ट होता है; इसे किसी दूसरे शहर के समय से न मिलाएँ।
पूजा, व्रत, तर्पण या उत्सव की विधि क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार बदल सकती है। स्वास्थ्य से संबंधित परिस्थिति में कठोर उपवास को आवश्यक न मानें।

दुर्गा अष्टमी पूजा सामग्री

  • माँ दुर्गा का चित्र या विग्रह
  • लाल या सफेद पुष्प
  • दीपक
  • धूप
  • फल या नैवेद्य
  • कुमारी पूजन सामग्री जहाँ परंपरा में हो
  • स्वच्छ आसन

यह सामग्री-सूची सामान्य संदर्भ के लिए है। जिस वस्तु का उपयोग आपके परिवार या संप्रदाय में न होता हो, उसे केवल सूची में होने के कारण शामिल करना आवश्यक नहीं है। स्थानीय उपलब्धता के अनुसार सरल पूजा भी की जा सकती है।

2026 में अष्टमी और नवमी एक ही दिन क्यों दिखती हैं?

हिंदू तिथि रात 12 बजे से शुरू होना आवश्यक नहीं है। 2026 में जयपुर संदर्भ में अष्टमी 19 अक्टूबर को समाप्त होकर नवमी उसी दिन आगे बढ़ती है, इसलिए दुर्गा अष्टमी और महानवमी से जुड़ी पूजा-प्रविष्टियाँ 19 अक्टूबर पर दिखाई देती हैं।

व्रत, भोजन और स्वास्थ्य

किसी पर्व पर उपवास रखने की परंपरा होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी श्रद्धालुओं के लिए एक ही प्रकार का निर्जल या कठोर व्रत आवश्यक है। आयु, गर्भावस्था, दवाइयों, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में भोजन और पानी से जुड़े निर्णय स्वास्थ्य की आवश्यकता के अनुसार रखने चाहिए।

फलाहार, एक समय भोजन, सामान्य सात्त्विक भोजन या केवल पूजा-स्मरण जैसी पद्धतियाँ अलग परिवारों में मिल सकती हैं। अपने परिवार की परंपरा और स्वास्थ्य को साथ देखकर व्यवहारिक तरीका चुनना बेहतर है।

अलग-अलग परंपराओं में क्या बदल सकता है?

  • उत्तर भारतीय नवरात्रि में महागौरी और कुमारी पूजन प्रमुख हो सकते हैं।
  • बंगाल की दुर्गा पूजा में महाष्टमी और संधि पूजा का अलग अनुष्ठान क्रम होता है।
  • कुछ परिवार अष्टमी को और कुछ नवमी को कन्या पूजन करते हैं।

एक ही पर्व की तिथि, उपवास-पद्धति, पूजन सामग्री या अनुष्ठान का समय अलग स्थानों और परंपराओं में थोड़ा भिन्न हो सकता है। ऐसी भिन्नता को अपने-आप सही या गलत का प्रश्न मानना आवश्यक नहीं है।

यात्रा, पूजा और तिथि से जुड़ी जरूरी बातें

  • सटीक मुहूर्त शहर-विशिष्ट हो सकता है; दूसरे शहर का समय सीधे उपयोग न करें।
  • मंदिर, जुलूस, घाट, पार्किंग या सार्वजनिक कार्यक्रम की व्यवस्था वर्ष के अनुसार बदल सकती है। यात्रा से पहले नवीनतम स्थानीय सूचना देखें।
  • धार्मिक मान्यता और लोकपरंपरा को निश्चित भौतिक परिणाम की गारंटी के रूप में न लें।
  • व्रत या उपवास में स्वास्थ्य, आयु और चिकित्सकीय आवश्यकता को प्राथमिकता दें।

संबंधित उपयोगी जानकारी

🙏 नवरात्रि में खाटू श्याम जी के दर्शन का प्लान बना रहे हैं?

WhatsApp चैनल से जुड़ें — त्योहार व एकादशी अपडेट

आगे पढ़ें

दुर्गा अष्टमी 2026 — सामान्य प्रश्न

दुर्गा अष्टमी 2026 कब है?

जयपुर/राजस्थान संदर्भ में दुर्गा अष्टमी 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को है।

क्या दुर्गा अष्टमी और महानवमी 2026 एक ही दिन हैं?

उनकी प्रमुख पूजा-प्रविष्टियाँ 19 अक्टूबर को overlap करती हैं; तिथि क्रम उसी दिन बदलता है।

दुर्गा अष्टमी पर कौन-सी देवी की पूजा होती है?

नवरात्रि की दिन-वार परंपरा में महागौरी पूजा से इसका संबंध मिलता है, जबकि व्यापक रूप से माँ दुर्गा का पूजन किया जाता है।

क्या संधि पूजा का समय हर शहर में समान है?

नहीं। सटीक समय स्थान और पंचांग के अनुसार बदलता है।

पंचांग संदर्भ

  1. Drik Panchang — Jaipur Mahashtami 2026
  2. mPanchang — अक्टूबर 2026 पर्व सूची


🙏 इस जानकारी को परिवार व मित्रों से शेयर करें / Share

इसके आसपास के अन्य व्रत-त्योहार