मुखपृष्ठ पूजा विधि नवरात्रि पूजा विधि | Navratri Puja Vidhi — Durga Devi Guide 2026

नवरात्रि पूजा विधि | Navratri Puja Vidhi — Durga Devi Guide 2026

📅 13 अगस्त 2026 ⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय
🔱 श्रेणी: नवरात्रि पूजा  |  📅 अवधि: 9 दिन  |  📿 तारीखें 2026-2028: यहां देखें →

नवरात्रि पूजा विधि — Navratri Puja Vidhi | घटस्थापना से विसर्जन तक (Durga Puja Navratri)

नवरात्रि माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक की जाने वाली उपासना है — शारदीय नवरात्रि (अक्टूबर के आसपास) और चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) वर्ष में दो बार आती हैं, और दोनों की पूजा विधि एक समान रहती है। यह पृष्ठ नवरात्रि से जुड़ी हर आवश्यक जानकारी को एक ही स्थान पर लाता है — पहले दिन की घटस्थापना से लेकर नौ देवियों की क्रमिक पूजा, कन्या पूजन, हवन, और अंत में विसर्जन तक। हर चरण की पूर्ण विधि, सामग्री सूची और कथा अलग समर्पित पृष्ठों पर उपलब्ध है, जिनके लिंक नीचे दिए गए हैं।

पृष्ठ में क्या है

  1. नौ दिनों की पूर्ण यात्रा — हर देवी की विधि, कथा और लिंक
  2. सामान्य सामग्री सूची
  3. कन्या पूजन और विसर्जन
  4. नवरात्रि तारीखें
  5. FAQ

नवरात्रि की नौ दिनों की पूर्ण यात्रा

दिन 1 — घटस्थापना (माँ शैलपुत्री)

नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना (कलश स्थापना) से होती है — मिट्टी के पात्र में जौ बोना, कलश में जल-सुपारी-सिक्का-आम पत्ते रखकर स्थापित करना, अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करना, और माँ दुर्गा का विधिवत आवाहन। यह पूजा प्रतिपदा तिथि के प्रातःकाल की जाती है — चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के समय वर्जित मानी जाती है, ऐसी स्थिति में अभिजित मुहूर्त लिया जाता है। इसी दिन दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की भी पूजा होती है — पर्वतराज हिमालय की पुत्री, जिनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल पुष्प है, वृषभ पर सवार। इन्हें गाय के शुद्ध घी का भोग विशेष प्रिय माना जाता है।

पूर्ण विधि, 16-सामग्री सूची व मंत्र →

दिन 2 — माँ ब्रह्मचारिणी

तप और संयम की देवी — जपमाला व कमंडल धारण किए, श्वेत वस्त्रों में विराजमान। भोग: शक्कर/मिश्री।

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दिन 3 — माँ चंद्रघंटा

शौर्य और साहस की प्रतीक — मस्तक पर अर्धचंद्र, सिंह पर सवार। भोग: दूध/खीर।

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दिन 4 — माँ कूष्मांडा

सृष्टि की आदि-शक्ति — अपनी मुस्कान मात्र से ब्रह्मांड की रचना करने वाली। भोग: मालपुआ।

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दिन 5 — माँ स्कंदमाता

भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता — मातृत्व और वात्सल्य का प्रतीक। भोग: केला।

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दिन 6 — माँ कात्यायनी

शक्ति और न्याय की प्रतीक — महर्षि कात्यायन के आश्रम से जुड़ी, विवाह-बाधा निवारण हेतु पूजित। भोग: शहद।

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दिन 7 — माँ कालरात्रि

अंधकार और भय का नाश करने वाली, फिर भी “शुभंकरी” — कल्याणकारी स्वरूप। भोग: गुड़।

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दिन 8 (अष्टमी) — माँ महागौरी + कन्या पूजन

शांति और करुणा की प्रतीक। इसी दिन अधिकांश परिवार कन्या पूजन करते हैं — नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर भोजन व उपहार अर्पित करना। भोग: नारियल।

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दिन 9 (नवमी) — माँ सिद्धिदात्री + हवन

समस्त सिद्धियां प्रदान करने वाली, नवरात्रि यात्रा का पूर्णता बिंदु। इसी दिन नवमी हवन कर पूजा का औपचारिक समापन किया जाता है। भोग: तिल।

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समापन — कलश विसर्जन

नवमी या दशमी को कलश, जौ के अंकुर और अखंड ज्योति को विधिपूर्वक विसर्जित करने की प्रक्रिया — नौ दिनों की पूजा का औपचारिक अंत।

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सामान्य सामग्री जो पूरे नवरात्रि में काम आती है

घटस्थापना पर एकत्र की गई अधिकांश सामग्री (कलश, अखंड ज्योति, जौ का पात्र) पूरे नौ दिनों तक उपयोग होती है। इसके अलावा रोज़ाना ताज़े फूल, रोली-अक्षत, धूप-अगरबत्ती और उस दिन की देवी के अनुसार विशेष भोग चाहिए — पूरी दिन-वार सामग्री सूची ऊपर हर देवी के पृष्ठ पर दी गई है। अष्टमी पर कन्या पूजन हेतु अतिरिक्त सामग्री (चुनरी, चूड़ी, टीका, हलवा-पूरी-चना) पहले से तैयार रखना उचित रहता है।

नवरात्रि तारीखें 2026-2028

चैत्र और शारदीय नवरात्रि की सटीक तारीखें व घटस्थापना मुहूर्त हर वर्ष बदलते हैं। पूरी तालिका के लिए नवरात्रि तारीखें पृष्ठ देखें — यह पृष्ठ केवल विधि पर केंद्रित है।

नवरात्रि से जुड़े प्रश्न

Q: नवरात्रि 2026 कब है?

नवरात्रि की सटीक तारीख हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है। इस वर्ष की तारीख और घटस्थापना मुहूर्त के लिए हमारा Navratri Dates पृष्ठ देखें।

Q: Do Shardiya and Chaitra Navratri follow the same puja vidhi?

Yes — the method, from Ghatasthapana through the nine forms of Devi to visarjan, stays the same for both. Only the calendar date changes each time; the ritual sequence itself doesn’t.

Q: क्या नौ दिन पूजा करना अनिवार्य है, या कम दिनों में भी की जा सकती है?

पारंपरिक रूप से नवरात्रि पूजा पूरे नौ दिनों तक चलती है, लेकिन जो लोग समयाभाव के कारण पूरे नौ दिन नहीं कर पाते, वे पहले दिन घटस्थापना और अंतिम दिन (अष्टमी/नवमी पूजन और विसर्जन) अवश्य करते हैं — यह भी शास्त्र-सम्मत माना जाता है।

Q: What is Kanya Pujan and when is it performed?

Kanya Pujan is the ritual worship of young girls as living representations of the goddess — typically performed on Ashtami (day 8), the day of Maa Mahagauri’s worship. It involves washing their feet, applying tilak, offering food, and giving small gifts. Full method is on the Mahagauri page.

Q: क्या हर देवी की पूजा विधि अलग है?

हां, हर देवी की पूजा में उनके प्रिय भोग, रंग और मंत्र अलग होते हैं, लेकिन समग्र पूजा-क्रम (संकल्प-आवाहन-उपचार-मंत्र-आरती) सभी नौ दिनों में समान रहता है — केवल विवरण बदलते हैं, संरचना नहीं।

Q: नवरात्रि की आरती और कथा कहां मिलेगी?

प्रत्येक देवी के पृष्ठ पर उनकी पौराणिक कथा और महत्व हमारी अपनी भाषा में समझाया गया है। पूर्ण आरती के बोल के लिए हम प्रकाशित भक्ति-साहित्य स्रोतों की ओर संकेत करते हैं, क्योंकि आरती के मूल बोल यहां पुनः प्रकाशित नहीं किए जाते।

पूजा विधि सेक्शन में और जानकारी

॥ जय माता दी ॥

Source: Traditional Navratri puja-vidhi practice, Drik Panchang, Prokerala | Updated August 2026

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