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नवरात्रि पूजा विधि 2026 | Navratri Puja Vidhi — घटस्थापना से विसर्जन तक

📅 13 अगस्त 2026 ⏱️ 10 मिनट पढ़ने का समय
🔱 श्रेणी: नवरात्रि पूजा  |  📅 अवधि: 9 दिन  |  📿 तारीखें 2026-2028: नवरात्रि 2026 कब है

आज — शारदीय नवरात्रि 2026, दिन 4 (Navratri Day 4)

📅 बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 — माँ कूष्मांडा

घटस्थापना 11 अक्टूबर को हो चुकी है; पूरे 9 दिन की तालिका: नवरात्रि 2026 कब है →

स्रोत: Drik Panchang (शारदीय नवरात्रि 2026)।

📘 नवरात्रि पूजा विधि 2026 — ई-बुक (PDF)
घटस्थापना से विसर्जन तक 9 दिनों की क्रमवार विधि व मंत्र — मोबाइल पर खोलकर पूजा करें।

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नवरात्रि पूजा विधि — घटस्थापना से विसर्जन तक पूरी जानकारी

नवरात्रि माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक की जाने वाली उपासना है — शारदीय नवरात्रि (अक्टूबर के आसपास) और चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) वर्ष में दो बार आती हैं, और दोनों की पूजा विधि एक समान रहती है। यह पृष्ठ नवरात्रि से जुड़ी हर आवश्यक जानकारी को एक ही स्थान पर लाता है — पहले दिन की घटस्थापना से लेकर नौ देवियों की क्रमिक पूजा, कन्या पूजन, हवन, और अंत में विसर्जन तक। हर चरण की पूर्ण विधि, सामग्री सूची और कथा अलग समर्पित पृष्ठों पर उपलब्ध है, जिनके लिंक नीचे दिए गए हैं।

📅 शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर (घटस्थापना) से — ✅ इस वर्ष यह पर्व बीत चुका है — अगले वर्ष की तिथि जल्द अपडेट होगी · तिथियाँ व घटस्थापना मुहूर्त →

🔗 दुर्गा अष्टमी 2026 · महानवमी · दशहरा 20 अक्टूबर · दुर्गा पूजा विधि

🪔 नौ दिन की पूजा विधि: घटस्थापना (दिन 1) · ब्रह्मचारिणी (दिन 2) · चंद्रघंटा (दिन 3) · कूष्मांडा (दिन 4) · स्कंदमाता (दिन 5) · कात्यायनी (दिन 6) · कालरात्रि (दिन 7) · महागौरी व कन्या पूजन (दिन 8) · सिद्धिदात्री (दिन 9) · कलश विसर्जन

पृष्ठ में क्या है

  1. नौ दिनों की पूर्ण यात्रा — हर देवी की विधि, कथा और लिंक
  2. सामान्य सामग्री सूची
  3. कन्या पूजन और विसर्जन
  4. नवरात्रि तारीखें
  5. FAQ

नवरात्रि की नौ दिनों की पूर्ण यात्रा

दिन 1 — घटस्थापना (माँ शैलपुत्री)

नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना (कलश स्थापना) से होती है — मिट्टी के पात्र में जौ बोना, कलश में जल-सुपारी-सिक्का-आम पत्ते रखकर स्थापित करना, अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करना, और माँ दुर्गा का विधिवत आवाहन। यह पूजा प्रतिपदा तिथि के प्रातःकाल की जाती है — चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के समय वर्जित मानी जाती है, ऐसी स्थिति में अभिजित मुहूर्त लिया जाता है। इसी दिन दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की भी पूजा होती है — पर्वतराज हिमालय की पुत्री, जिनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल पुष्प है, वृषभ पर सवार। इन्हें गाय के शुद्ध घी का भोग विशेष प्रिय माना जाता है।

पूर्ण विधि, 16-सामग्री सूची व मंत्र →

दिन 2 — माँ ब्रह्मचारिणी

तप और संयम की देवी — जपमाला व कमंडल धारण किए, श्वेत वस्त्रों में विराजमान। भोग: शक्कर/मिश्री।

पूर्ण विधि, कथा व मंत्र →

दिन 3 — माँ चंद्रघंटा

शौर्य और साहस की प्रतीक — मस्तक पर अर्धचंद्र, सिंह पर सवार। भोग: दूध/खीर।

पूर्ण विधि, कथा व मंत्र →

दिन 4 — माँ कूष्मांडा

सृष्टि की आदि-शक्ति — अपनी मुस्कान मात्र से ब्रह्मांड की रचना करने वाली। भोग: मालपुआ।

पूर्ण विधि, कथा व मंत्र →

दिन 5 — माँ स्कंदमाता

भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता — मातृत्व और वात्सल्य का प्रतीक। भोग: केला।

पूर्ण विधि, कथा व मंत्र →

दिन 6 — माँ कात्यायनी

शक्ति और न्याय की प्रतीक — महर्षि कात्यायन के आश्रम से जुड़ी, विवाह-बाधा निवारण हेतु पूजित। भोग: शहद।

पूर्ण विधि, कथा व मंत्र →

दिन 7 — माँ कालरात्रि

अंधकार और भय का नाश करने वाली, फिर भी “शुभंकरी” — कल्याणकारी स्वरूप। भोग: गुड़।

पूर्ण विधि, कथा व मंत्र →

दिन 8 (अष्टमी) — माँ महागौरी + कन्या पूजन

शांति और करुणा की प्रतीक। इसी दिन अधिकांश परिवार कन्या पूजन करते हैं — नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर भोजन व उपहार अर्पित करना। भोग: नारियल।

पूर्ण विधि, कन्या पूजन व मंत्र →

दिन 9 (नवमी) — माँ सिद्धिदात्री + हवन

समस्त सिद्धियां प्रदान करने वाली, नवरात्रि यात्रा का पूर्णता बिंदु। इसी दिन नवमी हवन कर पूजा का औपचारिक समापन किया जाता है। भोग: तिल।

पूर्ण विधि, हवन व मंत्र →

समापन — कलश विसर्जन

नवमी या दशमी को कलश, जौ के अंकुर और अखंड ज्योति को विधिपूर्वक विसर्जित करने की प्रक्रिया — नौ दिनों की पूजा का औपचारिक अंत।

पूर्ण विसर्जन विधि →

घटस्थापना की सामग्री — एक नज़र में

पहले दिन की पूजा के लिए यह सामग्री पहले से जुटा लें। दिन-वार भोग और फूल हर देवी के पृष्ठ पर अलग से दिए गए हैं; पूरी सूची व विधि: घटस्थापना विधि।

सामग्री किस काम में
चौड़ा मिट्टी का पात्र, साफ़ मिट्टी और जौ जौ बोने के लिए — नौ दिनों में अंकुर निकलते हैं
ताँबे या मिट्टी का कलश, गंगाजल/शुद्ध जल कलश स्थापना के लिए
सुपारी, सिक्का, अक्षत, दूर्वा कलश के भीतर रखने के लिए
आम या अशोक के 5 पत्ते, नारियल, लाल चुनरी व मौली कलश के मुख पर पत्ते, ऊपर चुनरी में लिपटा नारियल
रोली, चंदन, हल्दी, फूल-माला तिलक और अर्पण के लिए
घी का दीपक और रुई की बत्ती अखंड ज्योति के लिए
माँ दुर्गा का चित्र या मूर्ति, लाल आसन व चौकी पूजा स्थान के लिए (अनिवार्य नहीं — कलश ही मुख्य आसन है)
धूप-अगरबत्ती, कपूर, नैवेद्य, फल दैनिक पूजा और आरती के लिए

अखंड ज्योति के नियम

अखंड ज्योति का संकल्प लिया हो तो दीपक नौ दिन लगातार जलना चाहिए। इसके लिए बड़ा दीपक या काँच की चिमनी वाला दीया लें, बत्ती लंबी रखें और घी समय पर भरते रहें। दीपक को हवा से बचाकर कलश के पास रखें, और घर पूरी तरह खाली न छोड़ें। किसी कारण ज्योति बुझ जाए तो क्षमा-प्रार्थना करके उसे फिर से जला लें — भाव ही मुख्य है।

सामान्य सामग्री जो पूरे नवरात्रि में काम आती है

घटस्थापना पर एकत्र की गई अधिकांश सामग्री (कलश, अखंड ज्योति, जौ का पात्र) पूरे नौ दिनों तक उपयोग होती है। इसके अलावा रोज़ाना ताज़े फूल, रोली-अक्षत, धूप-अगरबत्ती और उस दिन की देवी के अनुसार विशेष भोग चाहिए — पूरी दिन-वार सामग्री सूची ऊपर हर देवी के पृष्ठ पर दी गई है। अष्टमी पर कन्या पूजन हेतु अतिरिक्त सामग्री (चुनरी, चूड़ी, टीका, हलवा-पूरी-चना) पहले से तैयार रखना उचित रहता है।

नवरात्रि तारीखें 2026-2028

शारदीय नवरात्रि 2026 — दिन-वार तालिका (जयपुर पंचांग):

तारीख तिथि पूजा रंग भोग
11 अक्टूबर (रवि) प्रतिपदा घटस्थापना, शैलपुत्री नारंगी गाय का घी
12 अक्टूबर (सोम) द्वितीया ब्रह्मचारिणी सफ़ेद शक्कर/मिश्री
13 अक्टूबर (मंगल) तृतीया चंद्रघंटा लाल दूध/खीर
14 अक्टूबर (बुध) चतुर्थी कूष्मांडा रॉयल ब्लू मालपुआ
15 अक्टूबर (गुरु) पंचमी स्कंदमाता पीला केला
16 अक्टूबर (शुक्र) षष्ठी कात्यायनी हरा शहद
17 अक्टूबर (शनि) सप्तमी कालरात्रि स्लेटी गुड़
18 अक्टूबर (रवि) सप्तमी (बढ़ी हुई) — बैंगनी —
19 अक्टूबर (सोम) अष्टमी → नवमी दुर्गा अष्टमी (महागौरी), कन्या पूजन, संधि पूजा 10:27–11:15 AM, महानवमी (सिद्धिदात्री) मोरपंखी हरा नारियल / तिल
20 अक्टूबर (मंगल) दशमी नवमी हवन, पारण, दुर्गा विसर्जन, दशहरा — —

स्रोत: Drik Panchang, जयपुर (2026 शारदीय नवरात्रि कैलेंडर)। दिन के रंग वार के अनुसार तय होते हैं और हर वर्ष बदलते हैं; भोग परंपरागत हैं।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि की सटीक तारीखें व घटस्थापना मुहूर्त हर वर्ष बदलते हैं। पूरी तालिका के लिए नवरात्रि तारीखें पृष्ठ देखें — यह पृष्ठ केवल विधि पर केंद्रित है।

चैत्र नवरात्रि 2027 (जयपुर पंचांग):

तारीख तिथि पूजा
7 अप्रैल (बुध) प्रतिपदा घटस्थापना, शैलपुत्री
8 अप्रैल (गुरु) द्वितीया ब्रह्मचारिणी
9 अप्रैल (शुक्र) तृतीया चंद्रघंटा, गौरी पूजा
10 अप्रैल (शनि) चतुर्थी कूष्मांडा
11 अप्रैल (रवि) पंचमी स्कंदमाता
12 अप्रैल (सोम) षष्ठी कात्यायनी
13 अप्रैल (मंगल) सप्तमी कालरात्रि
14 अप्रैल (बुध) अष्टमी दुर्गा अष्टमी (महागौरी), संधि पूजा 2:59–3:47 PM
15 अप्रैल (गुरु) नवमी राम नवमी (सिद्धिदात्री), नवरात्रि पारण

स्रोत: Drik Panchang, जयपुर (2027 चैत्र नवरात्रि कैलेंडर)।

कन्या पूजन — संक्षिप्त विधि

अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन किया जाता है — 2026 की शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं।

  1. 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं और एक बालक (लांगुर/भैरव रूप) को आमंत्रित करें; नौ न हों तो जितनी कन्याएँ उपलब्ध हों।
  2. उनके पैर धोकर साफ़ आसन पर बैठाएँ, माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएँ और हाथ में मौली बाँधें।
  3. हलवा, पूरी और काले चने का भोग परोसें।
  4. चुनरी, चूड़ी या कोई छोटा उपहार और दक्षिणा दें।
  5. पैर छूकर आशीर्वाद लें और आदर से विदा करें।

पूरी विधि: महागौरी पूजा व कन्या पूजन।

नवरात्रि व्रत के नियम

  • व्रत में अनाज (गेहूँ, चावल, दालें), प्याज़-लहसुन और मांसाहार नहीं लिया जाता; सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक प्रयोग होता है।
  • फलाहार में कुट्टू, सिंघाड़ा व राजगिरा का आटा, साबूदाना, समा के चावल, आलू, फल, दूध और दही लिए जाते हैं।
  • कुछ लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, तो कुछ केवल पहला और अंतिम दिन (प्रतिपदा और अष्टमी/नवमी) — दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं।
  • व्रत का पारण नवमी की पूजा/हवन या दशमी को किया जाता है; 2026 में पारण और विसर्जन 20 अक्टूबर को है।
  • गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग और दवा लेने वाले लोग कठोर व्रत के बजाय फलाहार या एक समय भोजन चुनें।

नवरात्रि से जुड़े प्रश्न

Q: नवरात्रि 2026 कब है?

शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना से शुरू होगी। जयपुर पंचांग के अनुसार इस बार सप्तमी तिथि दो दिन (17–18 अक्टूबर) रहेगी, इसलिए दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं, और दशहरा (विजयादशमी) 20 अक्टूबर को है। घटस्थापना मुहूर्त और हर दिन की तारीख: नवरात्रि 2026 कब है — पूरी तारीखें।

Q: क्या शारदीय और चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि एक ही है? (Shardiya vs Chaitra puja vidhi)

हाँ — घटस्थापना से लेकर नौ देवियों की पूजा और विसर्जन तक की विधि दोनों में एक समान रहती है। केवल कैलेंडर की तारीख बदलती है, पूजा का क्रम नहीं।

Q: क्या नौ दिन पूजा करना अनिवार्य है, या कम दिनों में भी की जा सकती है?

पारंपरिक रूप से नवरात्रि पूजा पूरे नौ दिनों तक चलती है, लेकिन जो लोग समयाभाव के कारण पूरे नौ दिन नहीं कर पाते, वे पहले दिन घटस्थापना और अंतिम दिन (अष्टमी/नवमी पूजन और विसर्जन) अवश्य करते हैं — यह भी शास्त्र-सम्मत माना जाता है।

Q: कन्या पूजन क्या है और कब किया जाता है? (What is Kanya Pujan)

कन्या पूजन में छोटी कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है — यह सामान्यतः अष्टमी (दिन 8) को, माँ महागौरी की पूजा के दिन किया जाता है। इसमें कन्याओं के पैर धोना, तिलक लगाना, भोजन कराना और छोटे उपहार देना शामिल है। पूरी विधि महागौरी पृष्ठ पर है।

Q: क्या हर देवी की पूजा विधि अलग है?

हां, हर देवी की पूजा में उनके प्रिय भोग, रंग और मंत्र अलग होते हैं, लेकिन समग्र पूजा-क्रम (संकल्प-आवाहन-उपचार-मंत्र-आरती) सभी नौ दिनों में समान रहता है — केवल विवरण बदलते हैं, संरचना नहीं।

Q: नवरात्रि की आरती और कथा कहां मिलेगी?

प्रत्येक देवी के पृष्ठ पर उनकी पौराणिक कथा और महत्व हमारी अपनी भाषा में समझाया गया है। पूर्ण आरती के बोल के लिए हम प्रकाशित भक्ति-साहित्य स्रोतों की ओर संकेत करते हैं, क्योंकि आरती के मूल बोल यहां पुनः प्रकाशित नहीं किए जाते।

Q: चैत्र नवरात्रि 2027 कब है? (Chaitra Navratri 2027 dates)

चैत्र नवरात्रि 2027 बुधवार, 7 अप्रैल को घटस्थापना से शुरू होगी; दुर्गा अष्टमी 14 अप्रैल और राम नवमी 15 अप्रैल को है (जयपुर पंचांग)।

Q: नवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं? (What to eat in Navratri fast)

कुट्टू, सिंघाड़ा और राजगिरा का आटा, साबूदाना, समा के चावल, आलू, फल, दूध-दही और सेंधा नमक; अनाज, प्याज़-लहसुन और सामान्य नमक नहीं लिया जाता।

पूजा विधि सेक्शन में और जानकारी

॥ जय माता दी ॥

Source: Traditional Navratri puja-vidhi practice, Drik Panchang, Prokerala | Updated August 2026

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