विधि, व्रत कथा, मंत्र, नियम और कालाष्टमी तथा दुर्गाष्टमी में अंतर

✍️ लेखक: Team Khatuwalebaba.in📅 प्रकाशित: 3 अगस्त 2026🔄 अपडेट: 2 अक्टूबर 2026पंचांग स्रोतों से सत्यापित

कालाष्टमी व्रत

Kalashtami — कब आती है, भगवान काल भैरव की पूजा विधि, व्रत कथा, मंत्र और नियम

सीधा जवाब / QUICK ANSWER

कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है — साल में 12 बार। यह व्रत भगवान काल भैरव को समर्पित है, जो भगवान शिव का उग्र स्वरूप माने जाते हैं। पूजा मुख्यतः रात्रि में की जाती है।

🗡️ काल भैरव  |  🌘 कृष्ण अष्टमी  |  📅 महीने में एक बार  |  🌃 रात्रि पूजा

📅 अगली कालाष्टमी: रविवार, 1 नवंबर 2026 (⏳ 2 दिन बाकी)

कालाष्टमी 2026–27 की तिथियाँ

नीचे अगले 12 महीनों की तिथियाँ हैं। हर तिथि के आगे 🔔 button से आप उसे Google Calendar में जोड़ सकते हैं।

तारीख वार तिथि प्रारंभ → समाप्त विशेष
3 अक्टूबर 2026 शनिवार 3 अक्, 8:00 AM → 4 अक्, 5:52 AM —
1 नवंबर 2026 रविवार 1 नवं, 2:52 PM → 2 नवं, 1:11 PM —
1 दिसंबर 2026 मंगलवार 1 दिस, 12:12 AM → 1 दिस, 11:14 PM काल भैरव जयंती
30 दिसंबर 2026 बुधवार 30 दिस, 12:37 PM → 31 दिस, 12:33 PM —
29 जनवरी 2027 शुक्रवार 29 जनव, 4:03 AM → 30 जनव, 4:59 AM —
27 फरवरी 2027 शनिवार 27 फरव, 9:55 PM → 28 फरव, 11:47 PM —
29 मार्च 2027 सोमवार 29 मार, 5:12 PM → 30 मार, 7:40 PM —
28 अप्रैल 2027 बुधवार 28 अप्, 12:31 PM → 29 अप्, 3:02 PM —
28 मई 2027 शुक्रवार 28 मई, 6:27 AM → 29 मई, 8:21 AM —
26 जून 2027 शनिवार 26 जून, 9:52 PM → 27 जून, 10:45 PM —
26 जुलाई 2027 सोमवार 26 जुल, 10:25 AM → 27 जुल, 10:13 AM —
24 अगस्त 2027 मंगलवार 24 अगस, 8:25 PM → 25 अगस, 7:20 PM —
23 सितंबर 2027 गुरुवार 23 सित, 4:37 AM → 24 सित, 2:58 AM —

नियम: रात्रि (निशीथ काल) में कृष्ण अष्टमी जिस दिन पड़ती है, वही दिन लिया गया है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से। * वाली तिथियों पर तिथि नियम-काल के बहुत पास है या दो दिन पड़ रही है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

कालाष्टमी कब आती है?

कालाष्टमी हर चांद्र मास के कृष्ण पक्ष की आठवीं तिथि को आती है — यानी पूर्णिमा के आठ दिन बाद। यह वर्ष में बारह बार आती है। इनमें मार्गशीर्ष मास की कालाष्टमी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है और उसे काल भैरव जयंती कहा जाता है।

📅 इस महीने की तिथि कहाँ देखें: हर महीने की सही तारीख और तिथि-समय हिंदू त्योहार कैलेंडर के महीने वाले पेज पर है। उदाहरण के लिए अगस्त 2026 में यह 5 अगस्त को है।

काल भैरव कौन हैं?

काल भैरव भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप हैं। “भैरव” शब्द का अर्थ है भय का हरण करने वाला। परंपरा में उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है — मान्यता है कि काशी में उनकी अनुमति के बिना कोई प्रवेश या निवास नहीं कर सकता।

उनका वाहन कुत्ता है, इसलिए कालाष्टमी पर कुत्तों को भोजन कराने की परंपरा है। हाथ में दंड धारण करने के कारण उन्हें दंडपाणि भी कहा जाता है। भक्त उन्हें भय, शत्रु-बाधा, नकारात्मक शक्तियों और अकाल मृत्यु से रक्षा करने वाला मानते हैं।

कालाष्टमी और दुर्गा अष्टमी में क्या अंतर है?

दोनों अष्टमी तिथि को आती हैं, पर पक्ष और देवता अलग हैं। कालाष्टमी कृष्ण पक्ष में आती है और काल भैरव को समर्पित है; मासिक दुर्गाष्टमी शुक्ल पक्ष में आती है और माता दुर्गा को।

अंतर कालाष्टमी मासिक दुर्गाष्टमी
पक्ष कृष्ण पक्ष शुक्ल पक्ष
देवता भगवान काल भैरव माता दुर्गा
पूजा का समय मुख्यतः रात्रि मुख्यतः प्रातःकाल
विशेष परंपरा कुत्तों को भोजन कन्या पूजन

कालाष्टमी की पूजा विधि क्या है?

कालाष्टमी की पूजा मुख्य रूप से रात्रि में की जाती है। व्रती दिन भर उपवास रखते हैं, संध्या को काल भैरव की पूजा करते हैं, सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं, कथा सुनते हैं और कुत्तों को भोजन कराते हैं।

  1. स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर निराहार या फलाहार रहें।
  2. स्थापना — संध्या को स्नान करके काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। शिवजी की पूजा भी साथ की जाती है।
  3. दीपक — सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं — यह काल भैरव पूजा की विशेष परंपरा है।
  4. अर्पण — काले तिल, उड़द, नारियल, इमरती या जलेबी और गुड़ अर्पित करें।
  5. मंत्र जाप — काल भैरव मंत्र का जाप करें।
  6. व्रत कथा — कालाष्टमी व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  7. श्वान सेवा — कुत्तों को रोटी, दूध या मीठा खिलाएं — यह इस व्रत का सबसे विशिष्ट कर्म माना जाता है।
  8. पारण — रात्रि पूजा के बाद या अगली सुबह, परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत खोलें।

कालाष्टमी का मंत्र क्या है?

ॐ कालभैरवाय नमः

ॐ भयहरणं च भैरव:।

भैरव अष्टक और भैरव चालीसा का पाठ भी इस दिन किया जाता है।

कालाष्टमी की व्रत कथा क्या है?

काल भैरव के प्राकट्य की कथा शिव पुराण में मिलती है। कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश में यह विवाद हुआ कि तीनों में सर्वश्रेष्ठ कौन है। विवाद बढ़ने पर ब्रह्मा जी ने अहंकारवश शिवजी के प्रति अनुचित वचन कह दिए।

शिवजी के क्रोध से एक उग्र स्वरूप प्रकट हुआ — काल भैरव। उन्होंने ब्रह्मा जी के अहंकार का शमन किया, जिसके बाद ब्रह्मा जी को अपनी भूल का बोध हुआ और उन्होंने क्षमा माँगी। इसके बाद भैरव जी काशी पहुँचे, जहाँ उन्हें नगर के कोतवाल का पद मिला।

इसी कारण मान्यता है कि काशी यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक काल भैरव के दर्शन न कर लिए जाएँ। कथा का भाव यही है कि अहंकार का नाश और भय से रक्षा — दोनों भैरव जी की कृपा से मिलते हैं।

कालाष्टमी व्रत के नियम

✅ करें

रात्रि पूजा, सरसों के तेल का दीपक, काले तिल और उड़द अर्पण, कुत्तों को भोजन, भैरव मंत्र जाप, कथा श्रवण, दान।

❌ न करें

अन्न और चावल, माँस-मदिरा, लहसुन-प्याज। किसी जीव, विशेषकर कुत्ते को कष्ट देना इस दिन विशेष रूप से वर्जित माना जाता है।

🙏 ध्यान दें: काल भैरव की पूजा से जुड़ी कई तांत्रिक विधियाँ प्रचलित हैं। सामान्य गृहस्थ भक्तों के लिए सात्विक पूजा — दीपक, मंत्र जाप, कथा और श्वान सेवा — पर्याप्त मानी गई है। किसी विशेष अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित जी से परामर्श अवश्य लें। बीमार, गर्भवती और वृद्धजन निराहार व्रत न रखें।

कालाष्टमी पर खाटू श्याम जी दर्शन

कालाष्टमी भैरव मंदिरों का व्रत है, इसलिए इस दिन खाटू श्याम जी में असामान्य भीड़ नहीं रहती — दर्शन का समय 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।

राजस्थान में भैरव जी की पूजा लोक-परंपरा का हिस्सा है और शेखावाटी क्षेत्र के कई गाँवों में भैरव स्थान मिलते हैं। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →

खाटू यात्रा की पूरी तैयारी

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FAQ — कालाष्टमी / Kalashtami

Q: कालाष्टमी कब आती है?

कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है — साल में बारह बार। इस महीने की तारीख हिंदू त्योहार कैलेंडर पर देखें।

Q: When is Kalashtami observed?

Kalashtami falls on the Ashtami tithi of Krishna Paksha every month and is dedicated to Lord Kaal Bhairav, the fierce form of Shiva. The puja is performed mainly at night.

Q: काल भैरव कौन हैं?

काल भैरव भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप हैं। उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है और भय, शत्रु-बाधा तथा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाला माना जाता है।

Q: कालाष्टमी पर कुत्तों को खाना क्यों खिलाते हैं?

कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। इसलिए इस दिन कुत्तों को रोटी, दूध या मीठा खिलाना पूजा का अभिन्न अंग माना जाता है।

Q: कालाष्टमी और दुर्गाष्टमी में क्या अंतर है?

कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है और काल भैरव को समर्पित है। मासिक दुर्गाष्टमी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है और माता दुर्गा को।

Q: काल भैरव जयंती कब होती है?

मार्गशीर्ष मास की कालाष्टमी को काल भैरव जयंती कहा जाता है — यह साल की सबसे महत्वपूर्ण कालाष्टमी मानी जाती है।

Q: कालाष्टमी पर कौन सा दीपक जलाएं?

सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। काले तिल, उड़द और गुड़ अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

संबंधित पेज

🔥 मासिक दुर्गाष्टमी
🔱 मासिक शिवरात्रि
🌑 प्रदोष व्रत
📅 हिंदू त्योहार कैलेंडर

References

  1. Drik Panchang — Masik Kalashtami dates
  2. Prokerala — Kalashtami
  3. Shri Shyam Mandir — official temple site

तिथि का आरंभ-समाप्ति समय शहर के अनुसार बदल सकता है — स्थानीय पंचांग देखें। मासिक तिथियाँ महीने वाले पेज पर दी गई हैं। Updated July 2026.

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