मासिक शिवरात्रि व्रत
Masik Shivratri — कब आती है, निशीथ काल, चार प्रहर पूजा, व्रत विधि, कथा और महाशिवरात्रि से अंतर
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात को आती है — साल में 12 बार। मुख्य पूजा निशीथ काल यानी आधी रात के आसपास की जाती है, दिन में नहीं। इनमें फाल्गुन की शिवरात्रि महाशिवरात्रि कहलाती है और श्रावण की सावन शिवरात्रि।
🔱 भगवान शिव | 🌘 कृष्ण चतुर्दशी | 📅 महीने में एक बार | 🌜 निशीथ काल पूजा
📿 घर पर पूजा कैसे करें: भगवान शिव पूजा विधि → · महाशिवरात्रि पूजा विधि →
मासिक शिवरात्रि 2026–27 की तिथियाँ
नीचे अगले 12 महीनों की तिथियाँ हैं। हर तिथि के आगे 🔔 button से आप उसे Google Calendar में जोड़ सकते हैं।
| तारीख | वार | तिथि प्रारंभ → समाप्त | विशेष |
|---|---|---|---|
| 8 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | 8 अक्, 10:16 PM → 9 अक्, 9:36 PM | — |
| 7 नवंबर 2026 | शनिवार | 7 नवं, 10:48 AM → 8 नवं, 11:28 AM | काली चौदस / नरक चतुर्दशी |
| 7 दिसंबर 2026 | सोमवार | 7 दिस, 2:23 AM → 8 दिस, 4:13 AM | — |
| 5 जनवरी 2027 | मंगलवार | 5 जनव, 8:40 PM → 6 जनव, 11:15 PM | — |
| 4 फरवरी 2027 | गुरुवार | 4 फरव, 4:32 PM → 5 फरव, 7:06 PM | — |
| 6 मार्च 2027 | शनिवार | 6 मार, 12:04 PM → 7 मार, 1:47 PM | महाशिवरात्रि |
| 5 अप्रैल 2027 | सोमवार | 5 अप्, 5:24 AM → 6 अप्, 5:41 AM | — |
| 4 मई 2027 | मंगलवार | 4 मई, 7:31 PM → 5 मई, 6:17 PM | — |
| 3 जून 2027 | गुरुवार | 3 जून, 6:35 AM → 4 जून, 4:06 AM | — |
| 2 जुलाई 2027 | शुक्रवार | 2 जुल, 3:24 PM → 3 जुल, 12:06 PM | — |
| 31 जुलाई 2027 | शनिवार | 31 जुल, 10:58 PM → 1 अगस, 7:21 PM | — |
| 30 अगस्त 2027 | सोमवार | 30 अगस, 6:13 AM → 31 अगस, 2:42 AM | — |
| 28 सितंबर 2027 | मंगलवार | 28 सित, 1:55 PM → 29 सित, 10:56 AM | — |
नियम: निशीथ काल (आधी रात) में कृष्ण चतुर्दशी जिस दिन पड़ती है, वही दिन लिया गया है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से। * वाली तिथियों पर तिथि नियम-काल के बहुत पास है या दो दिन पड़ रही है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
मासिक शिवरात्रि कब आती है?
मासिक शिवरात्रि हर चांद्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है — यानी अमावस्या से ठीक एक दिन पहले। यह वर्ष में बारह बार आती है और हर बार पूजा रात में की जाती है, क्योंकि “शिवरात्रि” का अर्थ ही है शिव की रात।
चूंकि यह चांद्र तिथि पर आधारित है, अंग्रेज़ी तारीख हर महीने बदलती है। साथ ही व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन निशीथ काल में चतुर्दशी तिथि मौजूद हो — इसलिए कभी-कभी तिथि और तारीख में एक दिन का अंतर दिखता है।
मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?
महाशिवरात्रि साल में एक बार फाल्गुन मास में आती है, जबकि मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है। दोनों की तिथि एक ही है — कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी — और पूजा विधि भी लगभग समान है। अंतर महत्व और आयोजन के पैमाने का है।
| अंतर | मासिक शिवरात्रि | महाशिवरात्रि |
|---|---|---|
| कब | हर महीने — साल में 12 बार | फाल्गुन मास — साल में एक बार |
| तिथि | कृष्ण चतुर्दशी | फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी |
| मान्यता | मासिक शिव आराधना | शिव-पार्वती विवाह और शिवलिंग प्राकट्य की रात |
| आयोजन | घर और स्थानीय मंदिर | देशव्यापी, ज्योतिर्लिंगों पर विशाल भीड़ |
श्रावण मास की मासिक शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि कहा जाता है और सावन शिवजी का महीना होने के कारण इसका महत्व बाकी दस से अधिक माना जाता है। कांवड़ यात्रा का समापन भी इसी रात होता है।
निशीथ काल क्या होता है?
निशीथ काल रात का मध्य भाग होता है — सूर्यास्त और अगले सूर्योदय के ठीक बीच का समय। पूरी रात को बराबर भागों में बाँटकर उसका केंद्रबिंदु निकाला जाता है, और उसके आसपास लगभग 45 मिनट का समय निशीथ काल कहलाता है।
मान्यता है कि इसी क्षण भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए शिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण पूजा इसी समय की जाती है। निशीथ काल सूर्यास्त और सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए यह हर शहर और हर महीने अलग होता है — सामान्यतः यह रात 12 बजे के आसपास पड़ता है।
चार प्रहर पूजा क्या है?
शिवरात्रि की रात को चार बराबर भागों में बाँटा जाता है, जिन्हें प्रहर कहते हैं। पूर्ण विधि में चारों प्रहर में अलग-अलग सामग्री से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।
जो भक्त चारों प्रहर न कर सकें, वे केवल निशीथ काल में पूजा करके भी व्रत का पूरा फल पाते हैं। मासिक शिवरात्रि पर आमतौर पर एक ही बार पूजा की जाती है; चार प्रहर की विधि मुख्यतः महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि पर निभाई जाती है।
मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि क्या है?
मासिक शिवरात्रि की पूजा रात में की जाती है और अगली सुबह व्रत खोला जाता है। व्रती दिन भर उपवास रखते हैं, संध्या को स्नान करके शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और सुबह पारण करते हैं।
- स्नान और संकल्प — सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर निराहार या फलाहार रहें।
- संध्या स्नान — रात्रि पूजा से पहले दोबारा स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- जलाभिषेक — तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। गंगाजल हो तो उससे अभिषेक करें।
- पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करके दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं।
- अर्पण — बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक का फूल, सफेद चंदन, अक्षत और भस्म अर्पित करें।
- मंत्र जाप — “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें।
- निशीथ काल पूजा — आधी रात के आसपास मुख्य अभिषेक और आरती करें।
- पारण — अगली सुबह स्नान और दर्शन के बाद, चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले व्रत खोलें।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं?
✅ चढ़ाएं
जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक का फूल, सफेद चंदन, अक्षत, भस्म, सफेद फूल।
❌ न चढ़ाएं
तुलसी, केतकी का फूल, हल्दी, कुमकुम, शंख से जल, नारियल का पानी, टूटा बेलपत्र और लाल फूल।
मासिक शिवरात्रि का मंत्र क्या है?
ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
निशीथ काल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा
शिवरात्रि की सबसे प्रचलित कथा एक शिकारी की है। कथा के अनुसार एक शिकारी जंगल में शिकार की तलाश में एक बेल के वृक्ष पर चढ़कर रात भर बैठा रहा। नींद न आए इसलिए वह अनजाने में बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे गिराता रहा। संयोग से वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग था, और रात भर उस पर बेलपत्र चढ़ते रहे।
वह पूरी रात भूखा-प्यासा जागता रहा — यानी अनजाने में ही उसने उपवास, जागरण और बेलपत्र अर्पण — तीनों कर लिए। कथा के अनुसार इस अनजाने व्रत से भी शिवजी प्रसन्न हुए और शिकारी का उद्धार हुआ। इसी कथा से यह भाव जुड़ा कि शिव आराधना में श्रद्धा और सरलता सबसे बड़ी है, विधि का आडंबर नहीं।
मासिक शिवरात्रि पर खाटू श्याम जी दर्शन
मासिक शिवरात्रि मुख्य रूप से शिव मंदिरों का व्रत है, इसलिए खाटू श्याम जी में इस दिन असामान्य भीड़ नहीं रहती — दर्शन का समय 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद) रहता है।
खाटू के पास हर्षनाथ मंदिर, सीकर एक प्राचीन शिव स्थल है, जहाँ शिवरात्रि की रात अभिषेक किया जा सकता है। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
खाटू यात्रा की पूरी तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — मासिक शिवरात्रि / Masik Shivratri
Q: मासिक शिवरात्रि कब आती है?
मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात को आती है — साल में 12 बार। इस महीने की तारीख हिंदू त्योहार कैलेंडर पर देखें।
Q: When is Masik Shivratri observed?
Masik Shivratri falls on the Chaturdashi tithi of Krishna Paksha every month — twelve times a year. The main puja is performed during Nishita Kaal, around midnight.
Q: निशीथ काल कब होता है?
निशीथ काल रात का मध्य भाग है — सूर्यास्त और अगले सूर्योदय के ठीक बीच का लगभग 45 मिनट। यह आमतौर पर रात 12 बजे के आसपास पड़ता है, पर हर शहर और महीने में बदलता है।
Q: मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि एक ही हैं?
नहीं। तिथि दोनों की एक है — कृष्ण चतुर्दशी — पर महाशिवरात्रि साल में एक बार फाल्गुन मास में आती है और उसे शिव-पार्वती विवाह की रात माना जाता है। बाकी ग्यारह मासिक शिवरात्रि कहलाती हैं।
Q: क्या चारों प्रहर की पूजा ज़रूरी है?
नहीं। मासिक शिवरात्रि पर आमतौर पर केवल निशीथ काल में एक बार पूजा की जाती है। चार प्रहर की विधि मुख्यतः महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि पर निभाई जाती है।
Q: शिवलिंग पर तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?
परंपरा में तुलसी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है और शिव पूजा में उसका प्रयोग वर्जित है। शिवलिंग पर बेलपत्र सबसे प्रिय माना जाता है।
Q: मासिक शिवरात्रि का व्रत कब खोलें?
व्रत अगली सुबह स्नान और दर्शन के बाद खोला जाता है। परंपरा में चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण करना उत्तम माना जाता है।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Masik Shivaratri dates and Nishita Kaal
- Drik Panchang — Shivaratri prahar and parana rules
- Shri Shyam Mandir — official temple site
निशीथ काल सूर्यास्त-सूर्योदय पर निर्भर करता है और शहर के अनुसार बदलता है — स्थानीय पंचांग अवश्य देखें। मासिक तिथियाँ महीने वाले पेज पर दी गई हैं। Updated July 2026.
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