Home एकादशी कैलेंडर कामदा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

कामदा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक अप्रैल 24, 2026 (शुक्रवार)
🗓️ तिथि चैत्र, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ अप्रैल 23, 05:29 PM
⏰ समाप्त अप्रैल 24, 03:52 PM

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में भोगीपुर नामक नगरी में पुण्डरीक राजा का शासन था। उस राज्य में अनेक गंधर्व, किन्नर और अप्सराएं निवास करती थीं।

वहीं एक गंधर्व था जिसका नाम ललित और उसकी पत्नी का नाम ललिता था। दोनों एक-दूसरे से अत्यंत प्रेम करते थे।

एक दिन राजा की सभा में ललित गायन प्रस्तुत कर रहा था, लेकिन पत्नी के प्रेम में डूबे होने के कारण उसका ध्यान भटक गया और वह सही ढंग से गायन नहीं कर सका। सभा में उपस्थित नाग कर्कोटक ने राजा से इसकी शिकायत कर दी।

राजा पुण्डरीक क्रोधित हो गए और उन्होंने ललित को भयंकर राक्षस बनने का शाप दे दिया।

शाप के प्रभाव से ललित विकराल राक्षस बन गया और जंगलों में भटकने लगा। अपनी पत्नी के प्रेम और दुःख को देखकर ललिता अत्यंत व्याकुल हो गई। वह अपने पति को शाप से मुक्त कराने के उपाय खोजने लगी।

भ्रमण करते हुए वह एक आश्रम में पहुंची जहां ऋषि श्रृंगी निवास करते थे। ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

ललिता ने पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक कामदा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य अपने पति को समर्पित कर दिया। व्रत के प्रभाव से ललित राक्षस योनि से मुक्त होकर पुनः अपने दिव्य गंधर्व स्वरूप में लौट आया।

इस प्रकार कामदा एकादशी ने शापग्रस्त ललित को मुक्ति प्रदान की। इसलिए इस एकादशी को सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली तथा शाप से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी कहा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कामदा एकादशी किस महीने में आती है?
कामदा एकादशी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
कामदा एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी मनोकामनाओं की पूर्ति, शाप से मुक्ति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।
कामदा एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा गंधर्व ललित और उसकी पत्नी ललिता से संबंधित है।
क्या महिलाएं कामदा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या कामदा एकादशी पर चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
कामदा एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
मनोकामनाओं की पूर्ति, पापों से मुक्ति, भगवान विष्णु की कृपा और सुख-समृद्धि।
क्या कामदा एकादशी वैवाहिक जीवन के लिए लाभकारी है?
हाँ, यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सुख-शांति बढ़ाने वाला माना जाता है।
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