Home एकादशी कैलेंडर श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक अगस्त 23, 2026 (रविवार)
🗓️ तिथि श्रावण, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ अगस्त 23, 02:00 AM
⏰ समाप्त अगस्त 24, 04:18 AM

भविष्य पुराण के अनुसार प्राचीन काल में महिष्मती नगरी में राजा महीजित नामक एक प्रतापी और धर्मपरायण राजा राज्य करते थे। उनके राज्य में धन, वैभव और समृद्धि की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं था।

संतान न होने के कारण राजा और रानी अत्यंत दुखी रहते थे। एक दिन राजा ने अपने मंत्रियों और प्रजाजनों के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की और इसका समाधान पूछा।

राजा की चिंता देखकर राज्य के विद्वान ब्राह्मण और ऋषि-मुनि महर्षि लोमश के आश्रम पहुंचे और उनसे उपाय पूछा।

महर्षि लोमश ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि पूर्व जन्म में राजा से अनजाने में एक ऐसा कर्म हुआ था जिसके कारण उन्हें संतान सुख नहीं मिल रहा था। उन्होंने राजा को श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

राजा महीजित ने अपनी रानी सहित श्रद्धापूर्वक पुत्रदा एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना की।

व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और कुछ समय बाद राजा को एक तेजस्वी और गुणवान पुत्र की प्राप्ति हुई।

इस प्रकार श्रावण पुत्रदा एकादशी के प्रभाव से राजा को संतान सुख प्राप्त हुआ और उनका जीवन आनंदमय हो गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावण पुत्रदा एकादशी किसके लिए की जाती है?
यह व्रत संतान प्राप्ति, संतान सुख और संतान की उन्नति के लिए किया जाता है।
वर्ष में पुत्रदा एकादशी कितनी बार आती है?
वर्ष में दो बार—पौष शुक्ल पक्ष और श्रावण शुक्ल पक्ष में।
श्रावण पुत्रदा एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा महीजित और महर्षि लोमश से संबंधित है।
क्या महिलाएं पुत्रदा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
पुत्रदा एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
संतान सुख, परिवार की समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा।
क्या अविवाहित व्यक्ति भी यह व्रत कर सकते हैं?
हाँ, भगवान विष्णु की कृपा और जीवन की मंगल कामनाओं के लिए कोई भी भक्त यह व्रत कर सकता है।
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