रमा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी
पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में मुचुकुन्द नामक एक प्रतापी और धर्मनिष्ठ राजा राज्य करते थे। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे। उनकी पुत्री का नाम चन्द्रभागा था, जिसका विवाह शोभन नामक राजकुमार से हुआ था।
राजा मुचुकुन्द के राज्य में एकादशी व्रत का अत्यंत कठोर पालन किया जाता था। एक बार रमा एकादशी के दिन शोभन अपने ससुराल में थे। वे शारीरिक रूप से कमजोर थे और कठोर उपवास करने में सक्षम नहीं थे।
फिर भी राज्य के नियमों का पालन करते हुए उन्होंने रमा एकादशी का व्रत किया। दुर्बल शरीर होने के कारण व्रत के प्रभाव से उनकी मृत्यु हो गई।
व्रत के पुण्य प्रभाव से शोभन को दिव्य लोक में एक अद्भुत नगर और वैभव प्राप्त हुआ। बाद में चन्द्रभागा को इस बात का पता चला। उसने भी रमा एकादशी का पुण्य अपने पति को समर्पित किया।
माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा से शोभन का दिव्य लोक स्थायी हो गया और दोनों को दिव्य सुख प्राप्त हुआ।
यह कथा बताती है कि रमा एकादशी का व्रत श्रद्धा और भक्ति से करने पर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?
पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।
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📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history