Home एकादशी कैलेंडर मोक्षदा / वैकुण्ठ एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, वैकुण्ठ द्वार, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

मोक्षदा / वैकुण्ठ एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, वैकुण्ठ द्वार, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक दिसम्बर 20, 2026 (रविवार)
🗓️ तिथि मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ दिस॰ 19, 10:09 PM
⏰ समाप्त दिस॰ 20, 08:14 PM

पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में गोकुल नगर में राजा वैखानस राज्य करते थे। वे धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक थे।

एक रात राजा ने स्वप्न में अपने दिवंगत पिता को नरक में कष्ट भोगते हुए देखा। यह देखकर वे अत्यंत व्याकुल हो गए। अगले दिन उन्होंने ऋषियों और विद्वानों से इसका कारण और समाधान पूछा।

ऋषियों ने उन्हें महर्षि पर्वत के आश्रम में जाने की सलाह दी। महर्षि पर्वत ने अपनी दिव्य दृष्टि से ज्ञात किया कि राजा के पिता ने पूर्व जन्म में कुछ अनुचित कर्म किए थे, जिसके कारण उन्हें कष्ट भोगना पड़ रहा था।

महर्षि ने राजा वैखानस को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य अपने पिता को समर्पित करने का निर्देश दिया।

राजा ने श्रद्धा और भक्ति के साथ मोक्षदा एकादशी का व्रत किया और व्रत का समस्त पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दिया।

व्रत के प्रभाव से उनके पिता को नरक से मुक्ति मिली और उन्हें दिव्य लोक की प्राप्ति हुई।

इसी कारण इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोक्षदा एकादशी और वैकुण्ठ एकादशी क्या एक ही हैं?
हाँ, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को उत्तर भारत में मोक्षदा एकादशी तथा दक्षिण भारत में वैकुण्ठ एकादशी कहा जाता है।
मोक्षदा एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी मोक्ष प्राप्ति, पितरों की सद्गति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।
मोक्षदा एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा वैखानस और उनके पिता की मुक्ति से संबंधित है।
वैकुण्ठ द्वार क्या होता है?
दक्षिण भारत के विष्णु मंदिरों में इस दिन विशेष द्वार खोला जाता है जिसे वैकुण्ठ द्वार कहा जाता है। इसके दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है।
गीता जयंती का संबंध मोक्षदा एकादशी से कैसे है?
इसी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
क्या महिलाएं मोक्षदा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
मोक्षदा एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
पितरों की सद्गति, भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति।
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