Home एकादशी कैलेंडर उत्पन्ना एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

उत्पन्ना एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक दिसम्बर 4, 2026 (शुक्रवार)
🗓️ तिथि मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ दिस॰ 03, 11:03 PM
⏰ समाप्त दिस॰ 04, 11:44 PM

भविष्य पुराण के अनुसार प्राचीन काल में मुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य था। उसने देवताओं को पराजित कर स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया था। सभी देवता भयभीत होकर भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे।

भगवान विष्णु ने दैत्य मुर से लंबे समय तक युद्ध किया, लेकिन वह अत्यंत बलशाली था। युद्ध के दौरान भगवान विष्णु विश्राम करने के लिए बदरिकाश्रम के समीप एक गुफा में चले गए।

मुर दैत्य भगवान विष्णु पर आक्रमण करने के उद्देश्य से गुफा में पहुंचा। उसी समय भगवान विष्णु के दिव्य तेज से एक अद्भुत देवी प्रकट हुईं। उस तेजस्विनी देवी ने मुर दैत्य से युद्ध किया और उसका वध कर दिया।

जब भगवान विष्णु जागे तो उन्होंने उस देवी से प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा। देवी ने इच्छा व्यक्त की कि जो भी भक्त एकादशी के दिन व्रत करेगा, उसे पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त हो।

भगवान विष्णु ने यह वरदान प्रदान किया और कहा कि चूंकि देवी एकादशी तिथि को उत्पन्न हुई हैं, इसलिए उनका नाम एकादशी देवी होगा।

तभी से मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाने लगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्पन्ना एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी देवी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है और सभी एकादशी व्रतों की आधारभूत एकादशी मानी जाती है।
उत्पन्ना एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा भगवान विष्णु, मुर दैत्य और एकादशी देवी के प्राकट्य से संबंधित है।
उत्पन्ना एकादशी किस महीने में आती है?
यह मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
एकादशी देवी कौन हैं?
एकादशी देवी भगवान विष्णु के दिव्य तेज से उत्पन्न हुईं और उन्होंने मुर दैत्य का वध किया था।
क्या महिलाएं उत्पन्ना एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
उत्पन्ना एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
पापों से मुक्ति, भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति।
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