Home एकादशी कैलेंडर मोक्षदा / वैकुण्ठ एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, वैकुण्ठ द्वार, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

मोक्षदा / वैकुण्ठ एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, वैकुण्ठ द्वार, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक दिसम्बर 20, 2026 (रविवार)
🗓️ तिथि मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ दिस॰ 19, 10:09 PM
⏰ समाप्त दिस॰ 20, 08:14 PM

दक्षिण भारत के वैष्णव संप्रदाय में मोक्षदा एकादशी को वैकुण्ठ एकादशी कहा जाता है।

इस दिन:

  • भगवान विष्णु के मंदिरों में विशेष उत्सव आयोजित होते हैं।
  • वैकुण्ठ द्वार खोला जाता है।
  • हजारों श्रद्धालु विशेष दर्शन करते हैं।
  • विष्णु सहस्रनाम एवं गीता पाठ किया जाता है।
  • भगवान नारायण की विशेष आराधना की जाती है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति करने वाला भक्त वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति करता है।


मोक्षदा एकादशी व्रत विधि

1. दशमी तिथि से तैयारी

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • ब्रह्मचर्य एवं संयम का पालन करें।
  • तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक पितृमोक्षप्राप्त्यर्थं श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं मोक्षदा एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु की पूजा करें

  • भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, अक्षत, पुष्प एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।
  • फल एवं नैवेद्य अर्पित करें।

5. गीता पाठ करें

मोक्षदा एकादशी पर श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

6. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

ॐ नारायणाय नमः॥

7. कथा एवं भजन

  • मोक्षदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • हरिनाम संकीर्तन करें।

8. पितरों के लिए प्रार्थना

पितरों की शांति और मोक्ष के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना करें।

9. द्वादशी को पारण

द्वादशी तिथि में शुभ समय पर व्रत का पारण करें।


मोक्षदा एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु की पूजा करें।
✅ श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ पितरों के लिए प्रार्थना करें।
✅ दान-पुण्य एवं दीपदान करें।


मोक्षदा एकादशी पर क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन न करें।
❌ झूठ, निंदा और अपशब्दों से बचें।
❌ क्रोध एवं विवाद न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोक्षदा एकादशी और वैकुण्ठ एकादशी क्या एक ही हैं?
हाँ, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को उत्तर भारत में मोक्षदा एकादशी तथा दक्षिण भारत में वैकुण्ठ एकादशी कहा जाता है।
मोक्षदा एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी मोक्ष प्राप्ति, पितरों की सद्गति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।
मोक्षदा एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा वैखानस और उनके पिता की मुक्ति से संबंधित है।
वैकुण्ठ द्वार क्या होता है?
दक्षिण भारत के विष्णु मंदिरों में इस दिन विशेष द्वार खोला जाता है जिसे वैकुण्ठ द्वार कहा जाता है। इसके दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है।
गीता जयंती का संबंध मोक्षदा एकादशी से कैसे है?
इसी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
क्या महिलाएं मोक्षदा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
मोक्षदा एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
पितरों की सद्गति, भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति।
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