मुखपृष्ठ पूजा विधि श्री गणेश पूजा विधि

श्री गणेश पूजा विधि

📅 21 अगस्त 2026 ⏱️ 14 मिनट पढ़ने का समय
श्री गणेश पूजा विधि

गणेश पूजा (Ganesh Puja) में भगवान गणेश को सनातन परम्परा में प्रथम पूज्य, बुद्धि के दाता और विघ्नहर्ता माना गया है। विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा अथवा किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत गणेश स्मरण से करने की परम्परा है। घर पर श्री गणेश पूजा करते समय बहुत अधिक सामग्री या कठिन संस्कृत मंत्र आवश्यक नहीं हैं। स्वच्छता, सही क्रम, श्रद्धा और उपलब्ध सामग्री का सम्मानपूर्वक उपयोग अधिक महत्वपूर्ण है।

यह श्री गणेश पूजा विधि (Ganesh Puja) घर में पहले से स्थापित गणेश प्रतिमा या चित्र की सामान्य पूजा के लिए है। नई प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा, गणेश चतुर्थी की अस्थायी स्थापना और विसर्जन अलग अनुष्ठान हैं। इसलिए इस पृष्ठ में घरेलू पूजन का विस्तृत क्रम, सामग्री का उपयोग, दूर्वा और भोग के नियम, मंत्र, आरती, सामान्य गलतियाँ तथा पूजा के बाद की प्रक्रिया अलग-अलग समझाई गई है।

श्री गणेश पूजा का धार्मिक महत्त्व

“गणपति” का अर्थ गणों के अधिपति और “विघ्नहर्ता” का अर्थ बाधाओं को दूर करने वाला है। गणेश जी का विशाल मस्तक विवेक, बड़े कान ध्यानपूर्वक सुनने की क्षमता, छोटी आँखें एकाग्रता और सूँड़ परिस्थिति के अनुसार सूक्ष्म तथा विशाल कार्य करने की योग्यता का प्रतीक मानी जाती है। उनका वाहन मूषक चंचल इच्छाओं पर नियंत्रण का संकेत देता है। इस प्रकार गणेश पूजा केवल किसी इच्छा की पूर्ति का कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि विवेक, अनुशासन, धैर्य और उचित आरम्भ का आध्यात्मिक अभ्यास भी है।

पूजा का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं है। पूजा के दौरान घर के सदस्य अपने कार्यों में स्पष्टता, विनम्रता और जिम्मेदारी का संकल्प लेते हैं। बच्चे भी पुष्प अर्पित करने, दीप के सामने प्रार्थना करने और प्रसाद बाँटने में सम्मिलित हो सकते हैं।

पूजा से पहले आवश्यक तैयारी

  • पूजा-स्थान, चौकी, पात्र और अपने हाथ अच्छी तरह स्वच्छ करें।
  • गणेश जी का चित्र या पहले से स्थापित प्रतिमा साफ और स्थिर स्थान पर रखें।
  • पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना सुविधाजनक माना जाता है; घर की व्यवस्था अलग हो तो स्वच्छ और शांत स्थान को प्राथमिकता दें।
  • दीपक को पर्दे, कागज, बच्चों और ज्वलनशील वस्तुओं से सुरक्षित दूरी पर रखें।
  • भोग उतना ही तैयार करें जितना बाद में प्रसाद के रूप में उपयोग किया जा सके।
  • मोबाइल को शांत रखें और पूजा के लिए कुछ समय बिना व्यवधान के निर्धारित करें।
महत्वपूर्ण: घर में स्थायी रूप से स्थापित प्रतिमा की दैनिक पूजा में बार-बार प्राण-प्रतिष्ठा, आवाहन या विसर्जन नहीं किया जाता। ध्यान, उपचार, मंत्र, आरती और क्षमा-प्रार्थना पर्याप्त हैं।

श्री गणेश पूजा सामग्री और उसका उपयोग

सामग्री पूजा में उपयोग उपलब्ध न होने पर
गणेश प्रतिमा या चित्र पूजा और ध्यान का केन्द्र स्वच्छ मुद्रित चित्र भी पर्याप्त है
चौकी और लाल/पीला वस्त्र प्रतिमा के लिए स्वच्छ आसन स्वच्छ मेज या लकड़ी का पट्टा
रोली और चन्दन तिलक और गन्ध अर्पण केवल चन्दन अथवा मानसिक अर्पण
अक्षत पूर्णता और मंगल का प्रतीक स्वच्छ पुष्प अर्पित करें
दूर्वा गणेश जी को प्रिय पारम्परिक अर्पण स्वच्छ पुष्प या मानसिक अर्पण
लाल पुष्प पुष्पांजलि और सज्जा उपलब्ध स्वच्छ मौसमी पुष्प
धूप और दीप सुगन्ध, प्रकाश और पूजा का वातावरण केवल सुरक्षित दीप भी पर्याप्त
मोदक या लड्डू मुख्य नैवेद्य फल, गुड़ या घर का सात्त्विक मिष्ठान
फल और जल नैवेद्य तथा आचमन हेतु प्रतीकात्मक अर्पण केवल स्वच्छ जल
कपूर अन्तिम आरती घी या तेल के दीप से आरती
पान-सुपारी और दक्षिणा विशेष पूजा में ताम्बूल एवं समर्पण सामान्य घरेलू पूजा में ऐच्छिक

पूजा सामग्री की प्रत्येक वस्तु उपयोग करना अनिवार्य नहीं है। किसी वस्तु के अभाव में पूजा अधूरी मानने की आवश्यकता नहीं। हमारे पूजा सामग्री और उसके महत्त्व पृष्ठ पर कलश, अक्षत, रोली, दीप, नैवेद्य और अन्य वस्तुओं का विस्तृत उपयोग समझाया गया है।

श्री गणेश पूजा विधि—चरणबद्ध सम्पूर्ण क्रम

1. आसन ग्रहण और दीप प्रज्वलन
स्वच्छ आसन पर बैठें। पूजा शुरू करने से पहले घी या तेल का दीपक जलाएँ। दीपक जलाते समय मन को स्थिर करें और पूजा के दौरान अग्नि-सुरक्षा का ध्यान रखें।
2. आचमन और आत्म-शुद्धि
स्वच्छ जल से परम्परा अनुसार आचमन करें। यदि विधिवत आचमन का अभ्यास न हो तो हाथ जोड़कर शरीर, वाणी और मन की शुद्धि की प्रार्थना करें। पूजा केवल बाहरी क्रिया नहीं; क्रोध, जल्दबाजी और अनावश्यक बातचीत से बचना भी आन्तरिक शुद्धि का भाग है।
3. संकल्प
दाहिने हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और पुष्प लें। अपना नाम, परिवार और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें—“मैं श्रद्धापूर्वक भगवान श्री गणेश का पूजन कर रहा/रही हूँ। मेरे कार्यों में विवेक, सद्बुद्धि और बाधाओं का सामना करने की शक्ति प्राप्त हो।” इसके बाद जल पात्र में छोड़ दें।
4. गणेश ध्यान
गणेश जी के स्वरूप का ध्यान करें। उनके शांत मुख, विशाल मस्तक, एकदन्त और करुणामयी दृष्टि को मन में रखें। ध्यान के समय “ॐ श्री गणेशाय नमः” तीन बार बोल सकते हैं।
5. आसन और स्वागत
प्रतिमा के सामने पुष्प रखकर भगवान को आसन अर्पित करने की भावना करें। घर में पहले से स्थापित प्रतिमा हो तो औपचारिक आवाहन के बजाय विनम्र स्वागत और ध्यान पर्याप्त है।
6. पाद्य, अर्घ्य और आचमनीय जल
एक छोटे पात्र में स्वच्छ जल रखें। प्रतिमा पर अत्यधिक जल न डालें, विशेषकर यदि वह मिट्टी, लकड़ी, रंग या धातु की सजावटी प्रतिमा हो। प्रतीकात्मक रूप से चम्मच से थोड़ा जल सामने रखकर पाद्य, अर्घ्य और आचमन समर्पित करें।
7. स्नान या प्रतीकात्मक शुद्धि
धातु या पत्थर की छोटी पूजा-प्रतिमा हो और परिवार में अभिषेक की परम्परा हो तो सीमित स्वच्छ जल से स्नान करा सकते हैं। चित्र या रंगीन प्रतिमा पर जल न डालें; स्वच्छ कपड़े से स्थान साफ कर मानसिक स्नान अर्पित करें।
8. वस्त्र और यज्ञोपवीत
विशेष पूजा में छोटा लाल या पीला वस्त्र और मौली अर्पित की जा सकती है। सामान्य पूजा में प्रतिमा के पास स्वच्छ वस्त्र रखकर प्रतीकात्मक समर्पण करें। प्रतिमा पर ऐसी वस्तु न बाँधें जिससे उसका संतुलन बिगड़े।
9. चन्दन, रोली और अक्षत
गणेश जी को चन्दन या रोली का छोटा तिलक लगाएँ। फिर अक्षत अर्पित करें। चित्र पर सीधे गीला तिलक लगाने से नुकसान हो सकता है; ऐसी स्थिति में तिलक और अक्षत सामने रखें।
10. दूर्वा अर्पण
दूर्वा को स्वच्छ जल से धोकर अतिरिक्त जल झाड़ दें। कोमल दूर्वा श्रद्धा से गणेश जी के चरणों या सामने की थाली में रखें। संख्या को लेकर अलग-अलग पारिवारिक परम्पराएँ हैं; स्वच्छता और श्रद्धा को संख्या से अधिक महत्व दें।
11. पुष्प और पुष्पमाला
लाल पुष्प प्रचलित हैं, पर उपलब्ध स्वच्छ मौसमी पुष्प भी चढ़ाए जा सकते हैं। सूखे, दुर्गन्धयुक्त या प्लास्टिक के फूल अर्पित करने से बचें। पुष्प चढ़ाते समय परिवार की मंगलकामना करें।
12. धूप और दीप
धूप को सुरक्षित पात्र में जलाकर गणेश जी के सामने घड़ी की दिशा में धीरे दिखाएँ। इसके बाद दीप अर्पित करें। धुएँ से किसी को एलर्जी या श्वास की समस्या हो तो धूप छोड़कर केवल दीप का उपयोग करें।
13. नैवेद्य और भोग
मोदक, लड्डू, फल, गुड़ या घर में बना सात्त्विक मिष्ठान अर्पित करें। भोग ढककर रखें और मन में भगवान को ग्रहण करने की प्रार्थना करें। प्याज-लहसुन या बासी भोजन पूजा के नैवेद्य में न रखें।
14. मंत्र-जप
“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र 11, 21 या अपनी सुविधा अनुसार जपें। संख्या पूरी करने की जल्दबाजी न करें। प्रत्येक उच्चारण स्पष्ट रखें और “गं” को सहज रूप से बोलें।
15. गणेश आरती
दीप या कपूर से आरती करें। आरती को बहुत तेज घुमाने के बजाय सुरक्षित दूरी पर छोटे गोलाकार क्रम में दिखाएँ। परिवार के सदस्य श्रद्धापूर्वक साथ गा सकते हैं।
16. पुष्पांजलि और क्षमा-प्रार्थना
दोनों हाथों में पुष्प लेकर पूजा में हुई ज्ञात-अज्ञात त्रुटियों के लिए क्षमा माँगें। पुष्प अर्पित कर परिवार, समाज और अपने कर्मों में सद्बुद्धि की प्रार्थना करें। अंत में सभी को प्रसाद दें।

गणेश पूजा का संकल्प कैसे लें?

संकल्प पूजा का उद्देश्य स्पष्ट करने की प्रक्रिया है। घरेलू पूजा में कठिन संस्कृत वाक्य बोलना आवश्यक नहीं। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर सरल हिन्दी में कहें:

सरल संकल्प:
“हे भगवान श्री गणेश, मैं श्रद्धा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार आपका पूजन कर रहा/रही हूँ। मेरे मन को सद्बुद्धि दें, मेरे कर्मों को उचित दिशा दें और मुझे कठिनाइयों का धैर्यपूर्वक सामना करने की शक्ति प्रदान करें। मेरे परिवार में प्रेम, स्वास्थ्य और मंगल बना रहे।”

किसी परीक्षा, नए व्यवसाय या विशेष कार्य के लिए पूजा कर रहे हों तो संकल्प में उस कार्य का नाम जोड़ सकते हैं। संकल्प का अर्थ किसी निश्चित परिणाम की गारंटी लेना नहीं, बल्कि उचित प्रयास और विवेक के साथ कार्य प्रारम्भ करना है।

गणेश पूजा के मुख्य मंत्र और अर्थ

सरल गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः।
अर्थ: भगवान गणपति को नमस्कार है। यह छोटा मंत्र ध्यान, सामान्य पूजा और दैनिक जप में प्रयोग किया जा सकता है।

वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

भावार्थ: वक्र सूँड़ और विशाल स्वरूप वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी प्रभु! मेरे शुभ कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने की शक्ति और सद्बुद्धि प्रदान करें।

गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

भावार्थ: हम एकदन्त को जानते हैं, वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं; वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।

मंत्र का गलत या बहुत तेज उच्चारण करने के बजाय धीरे और स्पष्ट बोलें। यदि संस्कृत कठिन लगे तो “ॐ श्री गणेशाय नमः” का जप करें और अर्थ समझते हुए प्रार्थना करें।

गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने के नियम

  • दूर्वा ताजी, कोमल और स्वच्छ होनी चाहिए।
  • चढ़ाने से पहले उसे साफ पानी से धोकर अतिरिक्त जल हटा दें।
  • परिवार की परम्परा में निर्धारित संख्या हो तो उसका पालन करें; अन्यथा संख्या को लेकर भय न रखें।
  • दूर्वा सीधे चित्र पर चिपकाने के बजाय सामने रखी थाली या चरण-स्थान पर रखें।
  • अगले दिन सूखी दूर्वा को सम्मानपूर्वक पौधों की मिट्टी या जैविक स्थान पर रखें।

गणेश जी को कौन-सा भोग लगाएँ?

मोदक गणेश जी का सर्वाधिक प्रसिद्ध भोग है। इसके अतिरिक्त बेसन या बूंदी के लड्डू, फल, गुड़, नारियल और घर का सात्त्विक मिष्ठान अर्पित किया जा सकता है। मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले परिवारों में बहुत अधिक मिठाई बनाना आवश्यक नहीं; एक फल या थोड़ी मात्रा में गुड़ भी पर्याप्त है। भोग दिखावे के लिए नहीं, प्रसाद के रूप में सम्मानपूर्वक बाँटने के लिए रखें।

गणेश आरती

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी॥

अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा॥

दीनन की लाज रखो, शम्भु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊँ बलिहारी॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

आरती के बाद हाथों से उसकी ऊष्मा ग्रहण करें और परिवार के सदस्यों को आरती दें। बच्चों को दीपक स्वयं पकड़ाने के बजाय किसी वयस्क की देखरेख में सम्मिलित करें।

स्थायी गणेश प्रतिमा और गणेश चतुर्थी की प्रतिमा में अन्तर

विषय घर में स्थायी प्रतिमा गणेश चतुर्थी की अस्थायी प्रतिमा
स्थापना पूजा-स्थान में नियमित रूप से स्थापित पर्व के संकल्प के साथ सीमित अवधि के लिए
आवाहन दैनिक पूजा में बार-बार आवश्यक नहीं स्थापना के समय विशेष आवाहन किया जा सकता है
पूजा संक्षिप्त दैनिक अथवा अवसर-विशेष पूजा पर्वानुसार दैनिक उपचार और आरती
समापन आरती और क्षमा-प्रार्थना उत्तर-पूजा और पर्यावरण-सम्मत विसर्जन
विसर्जन नहीं किया जाता परम्परा और स्थानीय नियम के अनुसार

गणेश चतुर्थी की तिथि, स्थापना से जुड़े वार्षिक विवरण और पर्व की अलग प्रक्रिया के लिए गणेश चतुर्थी गाइड देखें। अस्थायी प्रतिमा के समापन हेतु गणेश विसर्जन की जानकारी अलग दी गई है।

गणेश पूजा में होने वाली सामान्य गलतियाँ

  1. पूजा को सामग्री की प्रतियोगिता बनाना: अधिक वस्तुएँ पूजा की गुणवत्ता का प्रमाण नहीं हैं। उपलब्ध सामग्री का सम्मानपूर्वक उपयोग करें।
  2. चित्र या रंगीन प्रतिमा पर जल डालना: इससे चित्र, रंग और प्रतिमा खराब हो सकती है। प्रतीकात्मक जल अर्पण करें।
  3. दीपक बिना निगरानी छोड़ना: पूजा के बाद दीप सुरक्षित स्थान पर रखें और बच्चों से दूर रखें।
  4. मंत्र संख्या की जल्दबाजी: अस्पष्ट उच्चारण से अच्छा है कम बार लेकिन ध्यानपूर्वक जप करना।
  5. भोग की बर्बादी: उतना ही भोग रखें जितना परिवार और जरूरतमन्दों में बाँटा जा सके।
  6. स्थायी प्रतिमा का विसर्जन करना: घर में नियमित पूजित प्रतिमा का पर्व की अस्थायी प्रतिमा की तरह विसर्जन नहीं किया जाता।
  7. प्लास्टिक सामग्री जल में डालना: पुष्प, कपड़ा, प्लास्टिक और सजावट को नदी या तालाब में फेंकना उचित नहीं।

पूजा के बाद क्या करें?

आरती और क्षमा-प्रार्थना के बाद नैवेद्य को प्रसाद के रूप में बाँटें। पूजा में रखा स्वच्छ जल पौधों में दिया जा सकता है। अगले दिन सूखे पुष्प और दूर्वा को पौधों की मिट्टी या कम्पोस्ट में सम्मानपूर्वक रखें। प्लास्टिक, मौली, पैकेट या सजावटी वस्तु को अलग करके उचित कचरा-प्रबंधन में दें। पूजा-स्थान साफ रखें और स्थायी प्रतिमा को उसी स्थान पर रहने दें।

गणेश जी के जन्म और प्रथम पूज्य होने की परम्परा

लोकप्रिय पौराणिक परम्परा के अनुसार माता पार्वती ने अपने उबटन से बालक गणेश की रचना कर उन्हें द्वार की रक्षा का दायित्व दिया। भगवान शिव के आगमन पर बालक गणेश ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें रोका। इसके बाद हुई घटना में गणेश का मस्तक अलग हो गया। माता पार्वती के दुःख और क्रोध को शांत करने के लिए हाथी का मस्तक लगाकर बालक को पुनर्जीवित किया गया। उन्हें गणों का अधिपति और किसी भी शुभ कार्य से पहले पूजित होने का वर मिला।

इस कथा का व्यावहारिक संदेश आज्ञा, कर्तव्य, अहंकार, करुणा और भूल के सुधार से जुड़ा है। गणेश जी का प्रथम पूजन हमें याद दिलाता है कि नया कार्य केवल उत्साह से नहीं, बल्कि तैयारी, विवेक और संभावित बाधाओं की समझ से शुरू करना चाहिए। अलग पुराणों और क्षेत्रों में कथा के विवरण भिन्न मिल सकते हैं; इसलिए इसे श्रद्धा और सांस्कृतिक परम्परा के रूप में समझना उचित है।

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श्री गणेश पूजा से जुड़े सामान्य प्रश्न

क्या घर पर गणेश पूजा स्वयं कर सकते हैं?

हाँ। सामान्य घरेलू गणेश पूजा चित्र या पहले से स्थापित प्रतिमा के सामने सरल उपचार, मंत्र और आरती से की जा सकती है। नई प्रतिमा की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा या विशेष अनुष्ठान के लिए योग्य आचार्य का मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

गणेश पूजा के लिए नई प्रतिमा जरूरी है?

नहीं। नियमित पूजा के लिए घर में पहले से स्थापित प्रतिमा या स्वच्छ चित्र पर्याप्त है। नई प्रतिमा मुख्यतः गणेश चतुर्थी की अस्थायी स्थापना या किसी विशेष धार्मिक संकल्प से जुड़ी हो सकती है।

गणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ानी चाहिए?

दूर्वा की संख्या को लेकर क्षेत्रीय और पारिवारिक परम्पराएँ अलग हैं। अपनी स्थापित परम्परा का पालन करें। सामान्य पूजा में स्वच्छ दूर्वा श्रद्धा से अर्पित करना पर्याप्त है; संख्या को भय या पूजा की सफलता का आधार न बनाएँ।

दूर्वा उपलब्ध न हो तो क्या पूजा अधूरी रहेगी?

नहीं। उपलब्ध स्वच्छ पुष्प, अक्षत या मानसिक अर्पण से पूजा की जा सकती है। श्रद्धा और सही भाव सामग्री की उपलब्धता से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

गणेश पूजा में तुलसी चढ़ानी चाहिए?

सामान्य गणेश पूजन में दूर्वा और लाल पुष्प प्रमुख माने जाते हैं। तुलसी अर्पण के विषय में परम्परागत मत अलग हैं, इसलिए परिवार या सम्प्रदाय की स्थापित रीति को प्राथमिकता दें।

गणेश जी को कौन-सा भोग सबसे अच्छा है?

मोदक और लड्डू सबसे लोकप्रिय हैं। इनके अतिरिक्त फल, गुड़, नारियल या घर में उपलब्ध सात्त्विक मिष्ठान अर्पित किया जा सकता है। भोग ताजा और बाद में प्रसाद के रूप में उपयोग योग्य होना चाहिए।

गणेश पूजा में कौन-सा मंत्र जपें?

“ॐ गं गणपतये नमः” सरल और प्रचलित मंत्र है। उच्चारण कठिन लगे तो “ॐ श्री गणेशाय नमः” जप सकते हैं। मंत्र का अर्थ समझकर धीरे और स्पष्ट बोलना बेहतर है।

क्या प्रतिदिन गणेश पूजा की जा सकती है?

हाँ। दैनिक पूजा में दीप, पुष्प, दूर्वा उपलब्ध हो तो अर्पण, छोटा मंत्र-जप और प्रार्थना पर्याप्त है। हर दिन विस्तृत षोडशोपचार करना आवश्यक नहीं।

पूजा में मंत्र गलत हो जाए तो क्या करें?

घबराएँ नहीं। मंत्र दोबारा धीरे बोलें या अपने शब्दों में प्रार्थना करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना करें। पूजा को भय के बजाय श्रद्धा और सीखने की प्रक्रिया के रूप में करें।

घर की स्थायी गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना चाहिए?

नहीं। नियमित रूप से स्थापित प्रतिमा को पूजा-स्थान पर रखा जाता है। विसर्जन गणेश चतुर्थी के लिए स्थापित अस्थायी और विसर्जन-योग्य प्रतिमा की परम्परा है।

॥ श्री गणेशाय नमः ॥

शोध-सन्दर्भ: गणेश षोडशोपचार पूजन परम्परा; Drik Panchang—Ganesha Puja Vidhi। स्थानीय कुल-परम्परा या विशेष अनुष्ठान के लिए अपने आचार्य से मार्गदर्शन लें। अद्यतन: अगस्त 2026।

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