परिवर्तिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में राजा बलि अत्यंत पराक्रमी, दानी और धर्मात्मा राजा थे। उनके प्रभाव से तीनों लोकों में उनका यश फैल गया था। देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की।
तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और एक ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे।
भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बलि ने सहर्ष दान देने का वचन दे दिया।
इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। एक पग में पृथ्वी, दूसरे पग में स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा।
तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। भगवान विष्णु उनकी भक्ति और दानशीलता से अत्यंत प्रसन्न हुए।
भगवान ने राजा बलि को सुतल लोक का स्वामी बनाया और वरदान दिया कि वे चातुर्मास के दौरान उनके साथ निवास करेंगे। परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु राजा बलि के यहां से करवट बदलते हैं, इसलिए यह एकादशी विशेष महत्व रखती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?
पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।
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📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history