रक्षाबंधन पूजा विधि


रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को भाई-बहन के स्नेह का पर्व है। बहन भाई की कलाई पर राखी (रक्षा सूत्र) बाँधकर उसकी मंगलकामना करती है और भाई रक्षा का वचन देता है। शास्त्रीय परंपरा में राखी भद्रा रहित काल में, और अपराह्न (दोपहर बाद) को श्रेष्ठ मानकर बाँधी जाती है। इसी दिन ब्राह्मण यजमानों को रक्षा सूत्र बाँधते हैं और कई समुदाय श्रावणी उपाकर्म (जनेऊ बदलना) करते हैं।
📅 रक्षाबंधन 2027 कब है? मंगलवार, 17 अगस्त 2027 ⏳ 292 दिन बाकी
इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: रक्षाबंधन 2027 कब है? →
रक्षाबंधन 2027 की तारीख रक्षाबंधन पेज पर देखें; राखी बाँधने से पहले उस वर्ष का भद्रा समय अवश्य जाँच लें।
राखी की थाली — सामग्री
- राखी (रेशमी धागा, मौली या रक्षा सूत्र)
- रोली / कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), हल्दी
- घी का दीपक, मिठाई, कुछ सूखे मेवे
- जल से भरा छोटा कलश या लोटा, नारियल (कई परिवारों में)
- भाई के सिर पर रखने के लिए रूमाल
रक्षाबंधन पूजा विधि — चरणबद्ध
- सुबह की पूजा: स्नान करके घर के मंदिर में इष्टदेव और श्री गणेश को पहली राखी अर्पित करें। कई घरों में श्रीकृष्ण या हनुमान जी को भी राखी बाँधी जाती है।
- थाली सजाना: राखी, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई थाली में रखें। थाली पर रोली से स्वास्तिक बनाएँ।
- शुभ समय: भद्रा समाप्त होने के बाद राखी बाँधें — भद्रा काल में राखी बाँधना परंपरा में वर्जित है।
- भाई को बैठाना: भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठाएँ और सिर पर रूमाल रखें। बहन का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर रहे।
- तिलक: भाई के माथे पर रोली का तिलक और उस पर अक्षत लगाएँ।
- राखी बाँधना: भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बाँधते हुए रक्षा-सूत्र मंत्र बोलें: “येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥” (भाव: जिस रक्षा सूत्र से महाबली राजा बलि बाँधे गए थे, उसी से मैं तुम्हें बाँधती हूँ — हे रक्षा सूत्र, तुम स्थिर रहना।)
- आरती और मिठाई: दीपक से भाई की आरती उतारें और मिठाई खिलाएँ।
- उपहार और आशीर्वाद: भाई बहन को उपहार या शगुन देकर रक्षा का वचन देता है; छोटे बड़ों के पैर छूते हैं।
रक्षाबंधन की कथाएँ (संक्षेप में)
- राजा बलि और माता लक्ष्मी: वामन अवतार के बाद भगवान विष्णु राजा बलि के पाताल लोक में द्वारपाल बनकर रहने लगे। माता लक्ष्मी ने ब्राह्मणी के वेश में बलि को राखी बाँधकर भाई बनाया और उपहार में भगवान विष्णु को वापस माँग लिया — इसी से “येन बद्धो बली राजा” मंत्र जुड़ा है।
- श्रीकृष्ण और द्रौपदी: शिशुपाल वध के समय श्रीकृष्ण की उँगली कटने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर बाँधा; श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर यह ऋण चुकाया।
- इंद्र और इंद्राणी: देवासुर संग्राम में इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बाँधा, जिससे इंद्र विजयी हुए — इसलिए यह केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं, रक्षा का पर्व है।
ध्यान रखें
- ✅ भाई दूर हो तो राखी डाक से भेजें और वीडियो कॉल पर तिलक-आरती करें; बहन न हो तो भाई भी मंदिर में भगवान को राखी अर्पित कर सकता है।
- ✅ प्लास्टिक की जगह सूती/रेशमी राखी और बीज-राखी पर्यावरण के लिए बेहतर है।
- ❌ भद्रा काल में राखी न बाँधें।
भाई दूज से अंतर जानने के लिए भाई दूज पूजा विधि देखें।
इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राखी किस हाथ में बाँधें? (Which hand to tie rakhi?)
भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बाँधी जाती है।
राखी बाँधने का मंत्र क्या है? (What is the rakhi mantra?)
“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
भद्रा में राखी क्यों नहीं बाँधते? (Why not during Bhadra?)
परंपरा में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, इसलिए राखी भद्रा समाप्त होने के बाद बाँधी जाती है।
राखी बाँधते समय भाई किस दिशा में बैठे? (Which direction should the brother face?)
भाई पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठे।
राखी कब तक पहनें? (How long to wear rakhi?)
कई परिवार जन्माष्टमी तक या कम से कम कुछ दिन राखी पहनते हैं; उतारने पर उसे बहते जल या पेड़ के पास रख देते हैं।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।