Home Temple Guide खाटू श्याम जी का इतिहास — बर्बरीक की कथा और मंदिर का इतिहास

खाटू श्याम जी का इतिहास — बर्बरीक की कथा और मंदिर का इतिहास

📍 Khatu Shyam Temple

🕐 Darshan Timings

सत्रखुलताबंद
🌅 सुबह4:30 AM2:00 PM
🌇 शाम4:00 PM10:00 PM
📅 एकादशी / मेलाभारी भीड़; समय बदल सकता है — मंदिर कमेटी की सूचना देखें

दोपहर 2:00–4:00 PM मंदिर बंद रहता है। मौसम व त्योहारों पर समय बदल सकता है। Source: श्री श्याम मंदिर कमेटी कार्यालय बोर्ड (सितंबर 2026)

🪔 Aarti Schedule

सामान्य दिन — श्री श्याम मंदिर कमेटी बोर्ड अनुसार (सितंबर 2026)

मंगला आरती सूर्योदय से पहले — पहली आरती
4:45 AM
श्रृंगार आरती विशेष श्रृंगार दर्शन
7:15 AM
भोग आरती दोपहर भोग आरती
12:30 PM
संध्या आरती सायंकाल दर्शन
7:15 PM
शयन आरती अंतिम आरती — मंदिर बंद से पूर्व
9:45 PM

🙏 Darshan Types

TypeTimingFee
Samanya DarshanTemple open hoursFree
VIP (Protocol) DarshanOnly on official government recommendation (QR); closed during melaNo paid pass

📋 Rules & Facilities

  • 👔 Dress Code: Modest, traditional clothing preferred
  • 📸 Photography: limited
  • 📱 Mobile Phone: फ़ोन साइलेंट रखें; गर्भगृह में फ़ोटो-वीडियो नहीं — प्रवेश पर लगे निर्देश मानें
  • 🏛️ Facilities: Prasad counter, cloakroom, drinking water, seating

🔄 अंतिम अपडेट: 22 अक्टूबर 2026 · Team Khatuwalebaba.in

📖 बर्बरीक कथा · अध्याय 5

सीधा जवाब

खाटू श्याम जी का इतिहास संक्षेप में

खाटू श्याम जी महाभारत के वीर बर्बरीक हैं — घटोत्कच और मौरवी के पुत्र तथा भीम के पौत्र। परंपरा के अनुसार उन्होंने श्रीकृष्ण के माँगने पर अपना शीश दान कर दिया, और श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे उनके नाम “श्याम” से पूजे जाएँगे। मान्यता है कि उनका शीश राजस्थान के सीकर ज़िले के खाटू गाँव में प्रकट हुआ, जहाँ आज श्याम कुंड है। मंदिर की स्थापना की परंपरागत तिथि 1027 ई. मानी जाती है, और वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण 1720 ई. में दीवान अभय सिंह ने करवाया।

आराध्य बर्बरीक — “श्याम” रूप में
स्थान खाटू (खाटूश्यामजी), ज़िला सीकर, राजस्थान
स्थापना (परंपरा) 1027 ई. — राजा रूप सिंह चौहान
वर्तमान मंदिर 1720 ई. — दीवान अभय सिंह द्वारा पुनर्निर्माण
निर्माण सामग्री सफ़ेद मकराना संगमरमर
मुख्य मेला फाल्गुन मेला (फाल्गुन शुक्ल पक्ष) — फाल्गुन मेला 2027
जन्मोत्सव कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) — श्याम जन्मोत्सव

बर्बरीक कौन थे?

बर्बरीक पांडव भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच के बेटे थे। उनकी माता का नाम मौरवी मिलता है; कुछ कथाओं में उन्हें कामकंटकटा भी कहा गया है, जो दैत्य मुर की पुत्री थीं। इसी कारण बर्बरीक को मोरवीनंदन (मौरवी के पुत्र) भी कहा जाता है।

कथा के अनुसार बर्बरीक ने युद्ध-कला अपनी माता से सीखी और बचपन से ही असाधारण वीर थे। उन्होंने माता को वचन दिया था कि युद्ध में वे सदा हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। यही वचन आगे चलकर उनकी पूरी कथा का केंद्र बना, और इसी से उन्हें आज “हारे का सहारा” कहा जाता है।

एक ज़रूरी बात: बर्बरीक की कथा मूल महाभारत ग्रंथ में नहीं मिलती। यह कथा लोक-परंपरा और पुराण-परंपरा से आई है, और राजस्थान, हरियाणा, गुजरात तथा नेपाल में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है। गुजरात में उन्हें बलियादेव के रूप में और नेपाल की काठमांडू घाटी में आकाश भैरव के रूप में भी पूजा जाता है।

तीन बाणों का वरदान

मान्यता है कि बर्बरीक की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी (माँ दुर्गा) ने उन्हें तीन अचूक बाण दिए। कथाओं के अनुसार पहला बाण उन सभी लक्ष्यों को चिह्नित कर देता जिन्हें नष्ट करना हो, दूसरा उन्हें चिह्नित करता जिन्हें बचाना हो, और तीसरा बाण चिह्नित लक्ष्यों को नष्ट करके वापस तरकश में लौट आता। इन्हीं तीन बाणों के कारण वे “तीन बाणधारी” कहलाए, और खाटू में बाबा के श्रृंगार व निशान में तीन बाण का प्रतीक आज भी दिखाई देता है।

कथा कहती है कि इन बाणों से बर्बरीक अकेले ही कुछ ही क्षणों में पूरा महाभारत युद्ध समाप्त कर सकते थे। यही शक्ति, उनके “हारने वाले का साथ देने” के वचन के साथ मिलकर, श्रीकृष्ण के लिए चिंता का कारण बनी।

श्रीकृष्ण की परीक्षा — पीपल के पत्तों की कथा

जब बर्बरीक कुरुक्षेत्र की ओर जा रहे थे, तब श्रीकृष्ण ब्राह्मण का वेश धारण करके उनसे मिले। उन्होंने बर्बरीक की शक्ति की परीक्षा लेने के लिए कहा कि एक ही बाण से पास के पीपल के पेड़ के सारे पत्ते भेद कर दिखाओ। बर्बरीक ने बाण चलाया और वह पेड़ के हर पत्ते को भेदने लगा।

श्रीकृष्ण ने चुपचाप एक पत्ता अपने पैर के नीचे दबा लिया था। बाण सारे पत्ते भेदने के बाद श्रीकृष्ण के पैर के चारों ओर घूमने लगा। तब बर्बरीक ने कहा — “हे ब्राह्मण, अपना पैर हटा लीजिए, नहीं तो बाण आपके पैर को भी भेद देगा।” इस घटना से श्रीकृष्ण समझ गए कि बर्बरीक की शक्ति सचमुच अचूक है। (कुछ कथाओं में बाण पत्तों को भेदने के बजाय उन पर निशान लगाता है — मूल भाव दोनों में एक ही है।)

श्रीकृष्ण ने पूछा कि वे किस पक्ष से लड़ेंगे। बर्बरीक ने अपना वचन बताया — जो पक्ष हारता दिखेगा, वे उसी का साथ देंगे। श्रीकृष्ण जानते थे कि ऐसा होने पर युद्ध कभी समाप्त नहीं होगा: बर्बरीक जिस पक्ष में जाएँगे वह जीतने लगेगा, फिर उन्हें दूसरे पक्ष में जाना पड़ेगा, और अंत में दोनों ओर कोई नहीं बचेगा।

शीश का दान — “शीश के दानी”

तब ब्राह्मण-वेशधारी श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से दान माँगा। बर्बरीक ने वचन दिया कि जो माँगेंगे वही देंगे। श्रीकृष्ण ने उनका शीश माँग लिया। बर्बरीक समझ गए कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं हैं, और उन्होंने अपना वास्तविक रूप दिखाने की प्रार्थना की। श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने विराट रूप के दर्शन कराए।

बर्बरीक ने बिना संकोच अपना शीश दान कर दिया, केवल एक इच्छा रखी — वे पूरा महाभारत युद्ध अपनी आँखों से देखना चाहते थे। इसी महादान के कारण वे “शीश के दानी” कहलाए। परंपरा में यह शीश-दान फाल्गुन शुक्ल द्वादशी से जोड़ा जाता है, और इसी कारण खाटू का सबसे बड़ा मेला फाल्गुन में भरता है।

पहाड़ी से पूरा युद्ध देखा — सुदर्शन चक्र की बात

श्रीकृष्ण ने बर्बरीक का शीश युद्धभूमि के पास एक ऊँची पहाड़ी पर रख दिया, जहाँ से अठारह दिनों का पूरा युद्ध दिखाई देता था। युद्ध समाप्त होने के बाद पांडवों में यह विवाद हुआ कि विजय का श्रेय किसे जाता है। श्रीकृष्ण ने कहा कि इसका उत्तर वही दे सकता है जिसने पूरा युद्ध देखा है।

बर्बरीक के शीश ने उत्तर दिया कि उन्हें पूरे युद्ध में केवल श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र ही चलता दिखाई दिया — विजय श्रीकृष्ण की नीति और कृपा से हुई। इस उत्तर से पांडवों का अहंकार दूर हुआ।

कलियुग में “श्याम” नाम का वरदान

बर्बरीक के त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे श्रीकृष्ण के ही नाम “श्याम” से पूजे जाएँगे, और जो भक्त सच्चे मन से उनका नाम लेगा, उसकी मनोकामना पूरी होगी। इसीलिए खाटू में बर्बरीक को श्याम बाबा, खाटू श्याम जी और खाटू नरेश कहा जाता है, और भक्त मानते हैं कि हारे हुए का सहारा श्याम ही हैं।

खाटू में शीश का प्रकट होना — श्याम कुंड की कथा

परंपरा के अनुसार युद्ध के बाद बर्बरीक का शीश खाटू की धरती में समा गया। बहुत समय बाद, जिस स्थान पर शीश दबा था, वहाँ से गुज़रने वाली एक गाय के थनों से अपने आप दूध बहने लगा। गाँव वालों को आश्चर्य हुआ और उस स्थान की खुदाई की गई, जहाँ से शीश प्राप्त हुआ।

यही स्थान आज श्याम कुंड कहलाता है, जो मंदिर के पास स्थित पवित्र कुंड है। भक्त दर्शन से पहले यहाँ स्नान को शुभ मानते हैं, विशेषकर फाल्गुन मेले में। ध्यान रहे — गाय और दूध की यह कथा लोक-परंपरा है; इसका कोई लिखित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।

मंदिर की स्थापना — राजा रूप सिंह चौहान और नर्मदा कंवर

परंपरा कहती है कि खाटू के तत्कालीन शासक राजा रूप सिंह चौहान को (कुछ कथाओं में उनकी रानी नर्मदा कंवर को) स्वप्न में आदेश मिला कि प्राप्त शीश को मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाए। इसके बाद 1027 ई. में पहला मंदिर बनवाया गया और कार्तिक शुक्ल एकादशी को शीश की प्रतिष्ठा हुई — इसीलिए देवउठनी एकादशी को खाटू में श्याम जन्मोत्सव मनाया जाता है।

1027 ई. की तिथि परंपरा पर आधारित है; उस समय का कोई शिलालेख या दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है। फिर भी यह तिथि मंदिर की परंपरा और लगभग सभी स्रोतों में एक जैसी मिलती है।

मंदिर का इतिहास — समय-रेखा

वर्ष घटना आधार
महाभारत काल बर्बरीक का शीश-दान और “श्याम” नाम का वरदान लोक व पुराण-परंपरा
1027 ई. राजा रूप सिंह चौहान द्वारा पहला मंदिर; शीश की प्रतिष्ठा परंपरा
1675 ई. दुर्गादास माथुर ने ब्रजभाषा में 25 दोहों की “श्याम पच्चीसी” रची साहित्यिक उल्लेख
1720 ई. मारवाड़ के शासक के आदेश पर दीवान अभय सिंह ने पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया; गर्भगृह बना और मूर्ति स्थापित हुई — वर्तमान मंदिर यही है ऐतिहासिक स्रोत
1779 ई. खाटू श्यामजी का युद्ध — सीकर के देवी सिंह के नेतृत्व में शेखावतों ने मुग़ल सेना से क्षेत्र की रक्षा की ऐतिहासिक स्रोत
300+ वर्षों से सूरजगढ़ का सफ़ेद निशान (नीले घोड़े वाला) मंदिर के शिखर पर चढ़ाने की परंपरा परंपरा, समाचार उल्लेख
आज सफ़ेद मकराना संगमरमर का मंदिर; फाल्गुन मेले में लाखों श्रद्धालु; रींगस से 17 km की निशान यात्रा वर्तमान

1720 ई. के पुनर्निर्माण, श्याम पच्चीसी और 1779 के युद्ध का उल्लेख नीचे दिए स्रोतों में है।

बाबा के नाम और उनके अर्थ

नाम अर्थ / कारण
श्याम / खाटू श्याम श्रीकृष्ण का वरदान — कलियुग में उनके नाम से पूजा
हारे का सहारा हारने वाले पक्ष का साथ देने का वचन
शीश के दानी श्रीकृष्ण को अपना शीश दान करना
तीन बाणधारी देवी से मिले तीन अचूक बाण
मोरवीनंदन माता मौरवी के पुत्र
लखदातार लाखों भक्तों को देने वाले
खाटू नरेश खाटू के राजा

बाबा के सभी 108 नाम अर्थ सहित यहाँ पढ़ें: खाटू श्याम जी के 108 नाम।

इतिहास से जुड़े स्थान जो खाटू में ज़रूर देखें

  • श्याम कुंड — जहाँ शीश प्राप्त होने की मान्यता है; मंदिर के पास। श्याम कुंड की जानकारी
  • श्याम बगीची — बाबा के परम भक्त आलू सिंह जी की समाधि वाला उद्यान।
  • मंदिर का गर्भगृह और जगमोहन — 1720 ई. के पुनर्निर्माण वाला मकराना संगमरमर का ढाँचा। बनावट की पूरी जानकारी: खाटू श्याम मंदिर गाइड
  • रींगस से खाटू — निशान यात्रा का पारंपरिक 17 km पैदल मार्ग। निशान यात्रा

आसपास के अन्य दर्शनीय स्थलों के लिए देखें: खाटू श्याम जी के पास घूमने की जगहें।

कथा, परंपरा और इतिहास — क्या प्रमाणित है?

खाटू श्याम जी की कथा श्रद्धा का विषय है, और इसे इतिहास की तरह परखना ज़रूरी नहीं। फिर भी पाठकों की स्पष्टता के लिए:

  • लोक व पुराण-परंपरा: बर्बरीक का जीवन, तीन बाण, पीपल के पत्तों की परीक्षा, शीश-दान, युद्ध देखना और “श्याम” नाम का वरदान।
  • मंदिर की परंपरा: 1027 ई. की स्थापना, राजा रूप सिंह चौहान / रानी नर्मदा कंवर का स्वप्न, गाय के दूध से शीश मिलने की कथा।
  • ऐतिहासिक उल्लेख: 1675 ई. की श्याम पच्चीसी, 1720 ई. का पुनर्निर्माण (दीवान अभय सिंह), 1779 ई. का खाटू युद्ध, मकराना संगमरमर का वर्तमान मंदिर।

बाबा की पूरी कथा भक्ति-भाव से पढ़ने के लिए: खाटू श्याम जी की सम्पूर्ण कथा · खाटू श्याम जी की कथा · खाटू श्याम जी की आरती

दर्शन की योजना

मंदिर सुबह 4:30 बजे खुलता है, दोपहर 2 से 4 बजे बंद रहता है और रात 10 बजे बंद होता है; आरती और ताज़ा समय यहाँ देखें: आज का दर्शन समय। ठहरने के लिए धर्मशालाएँ और रास्ते के लिए खाटू श्याम जी कैसे पहुँचें देखें। “VIP दर्शन” के नाम पर पैसे माँगने वालों से सावधान रहें — VIP दर्शन का सच।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाटू श्याम जी कौन हैं?

खाटू श्याम जी महाभारत के वीर बर्बरीक हैं — घटोत्कच और मौरवी के पुत्र तथा भीम के पौत्र। श्रीकृष्ण के वरदान से कलियुग में वे “श्याम” नाम से पूजे जाते हैं।

खाटू श्याम मंदिर किसने और कब बनवाया?

परंपरा के अनुसार पहला मंदिर 1027 ई. में राजा रूप सिंह चौहान ने बनवाया। वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण 1720 ई. में मारवाड़ के शासक के आदेश पर दीवान अभय सिंह ने करवाया।

बर्बरीक ने अपना शीश क्यों दान किया?

बर्बरीक का वचन था कि वे हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। ऐसा होने पर युद्ध कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए ब्राह्मण-वेशधारी श्रीकृष्ण ने दान में उनका शीश माँगा और बर्बरीक ने बिना संकोच दे दिया।

खाटू श्याम जी को “हारे का सहारा” क्यों कहते हैं?

क्योंकि बर्बरीक ने सदा हारने वाले पक्ष का साथ देने का वचन लिया था। भक्त मानते हैं कि जीवन में हारा हुआ व्यक्ति भी श्याम की शरण में सहारा पाता है।

श्याम कुंड का क्या महत्व है?

मान्यता है कि बर्बरीक का शीश इसी स्थान से प्राप्त हुआ था, इसलिए श्याम कुंड को पवित्र माना जाता है और भक्त दर्शन से पहले यहाँ स्नान करते हैं।

खाटू श्याम जी का जन्मदिन कब मनाया जाता है?

कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को — परंपरा के अनुसार इसी दिन शीश की प्रतिष्ठा हुई थी। 2026 में यह 20 नवंबर को है।

स्रोत

  • Wikipedia — Khatu Shyam Temple (1027 ई. की परंपरा, श्याम पच्चीसी 1675, खाटू युद्ध 1779, मकराना संगमरमर, निशान यात्रा, सूरजगढ़ निशान)
  • Wikipedia — Barbarika (माता-पिता, तीन बाण, क्षेत्रीय नाम)
  • International Journal for Multidisciplinary Research — खाटू श्याम मंदिर पर शोध-पत्र (1720 ई. पुनर्निर्माण, दीवान अभय सिंह)
  • Holidify — Khatushyam Mandir (रूप सिंह चौहान व नर्मदा कंवर की परंपरा, गर्भगृह)

🙏 इस जानकारी को परिवार व मित्रों से शेयर करें / Share

How to Reach Khatu Shyam Ji Temple

🚆

By Train

Ringas Junction (17 km)

Ringas Junction is the nearest railhead, ~17 km from Khatu. Shared autos and taxis available from the station to the temple.

View Train Schedule →
✈️

By Air

Jaipur International (90 km)

Jaipur International Airport is the nearest, ~90 km from Khatu. Taxis and buses available from Jaipur to Khatu (2 hrs).

Full Guide →
🚌

By Bus

Via Reengus / Sikar

Regular RSRTC and private buses from Jaipur, Sikar and Reengus. Special buses during Phalgun Mela season.

🚕

By Taxi

Door-to-door · Transparent pricing

Verified taxis from Delhi (310 km), Jaipur (80 km), Sikar (47 km) and Ringas (17 km). Fare may vary — confirm before booking.

Book a Taxi →

Temple Location

Plan your Khatu Shyam Ji Yatra

Find hotels, dharamshalas, taxis and order prasad — all verified.

Find Stays