होली 2027 कब है? Holi 2027 Date, होलिका दहन और खाटू फाल्गुन मेला
होली 2027 — जयपुर/राजस्थान संदर्भ में होलिका दहन रविवार, 21 मार्च 2027 की शाम को और रंगों वाली होली (धुलंडी) सोमवार, 22 मार्च 2027 को है। 2027 में खाटू श्याम जी का फाल्गुन मेला ठीक इसी समय चल रहा होगा, इसलिए खाटू जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए ये दिन विशेष रूप से व्यस्त रहेंगे।
सीधा जवाब
होली 2027 कब है?
🎨 सोमवार, 22 मार्च 2027 — होली (धुलंडी) ⏳
- 🔥 होलिका दहन — रविवार, 21 मार्च 2027 की शाम, प्रदोष काल में
- 🌕 फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा — प्रारंभ: 21 मार्च, 6:21 PM · समाप्त: 22 मार्च, 4:13 PM
📌 21 या 22 मार्च? पूर्णिमा तिथि 21 मार्च की शाम शुरू होती है, इसलिए होलिका दहन 21 मार्च की शाम होगा और अगले दिन, 22 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी। पंचांग में फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत-स्नान 22 मार्च को दिखाया गया है।
समय जयपुर (IST) के अनुसार; तिथि का समय खगोलीय गणना से। होलिका दहन का सटीक मुहूर्त अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट भिन्न मिलता है — अपने शहर का पंचांग देखें।
होली 2027 कब है?
होलिका दहन 21 मार्च 2027 (रविवार) की शाम और होली / धुलंडी 22 मार्च 2027 (सोमवार) को है। होली फाल्गुन पूर्णिमा से जुड़ा पर्व है — पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है और अगली सुबह रंग खेले जाते हैं। हिंदू तिथि और ग्रेगोरियन तारीख हमेशा रात 12 बजे एक साथ नहीं बदलतीं, इसलिए कई कैलेंडर में फाल्गुन पूर्णिमा 21 और 22, दोनों तारीखों के आसपास दिखाई देती है।
होलिका दहन के लिए परंपरागत नियम यह है कि पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में हो और भद्रा का प्रभाव न हो। किसी दूसरी वेबसाइट पर मुहूर्त का समय अलग दिखे, तो देखें कि वहाँ कौन-सा शहर चुना गया है — जयपुर, दिल्ली और मथुरा के मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर सामान्य है।
होली 2027 से जुड़ी मुख्य तारीखें
| पर्व | तारीख (2027) | दिन | संदर्भ |
|---|---|---|---|
| फुलेरा दूज | 10 मार्च | बुधवार | ब्रज में फूलों की होली की परंपरा |
| आमलकी एकादशी | 18 मार्च | गुरुवार | खाटू फाल्गुन मेले का मुख्य दिन |
| होलिका दहन | 21 मार्च | रविवार | फाल्गुन पूर्णिमा की शाम |
| होली / धुलंडी | 22 मार्च | सोमवार | रंगों वाली होली; फाल्गुन पूर्णिमा व्रत-स्नान |
| भाई दूज (भ्रातृ द्वितीया) | 24 मार्च | बुधवार | होली के बाद की द्वितीया |
| रंग पंचमी | 27 मार्च | शनिवार | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में विशेष |
होलाष्टक और बरसाना-नंदगाँव की लट्ठमार होली की तारीखें ब्रज के मंदिरों के कार्यक्रम पर निर्भर करती हैं। इनके लिए यात्रा से पहले संबंधित मंदिर या स्थानीय पंचांग की नवीनतम सूचना देखें।
होलिका दहन और धुलंडी — दोनों में क्या अंतर है?
होलिका दहन — 21 मार्च 2027 की शाम
फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है। पौराणिक कथा के अनुसार भक्त प्रह्लाद को उसकी बुआ होलिका ने अग्नि में जलाने का प्रयास किया, पर प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका भस्म हो गई। इसलिए होलिका दहन को अधर्म पर धर्म और अहंकार पर भक्ति की जीत के रूप में देखा जाता है। कई परिवार इस अग्नि में नई फसल की बालियाँ भूनकर प्रसाद के रूप में बाँटते हैं।
धुलंडी / रंगों वाली होली — 22 मार्च 2027
होलिका दहन के अगले दिन रंग-गुलाल खेला जाता है। सुबह रंग खेलने के बाद दोपहर में स्नान करके लोग मित्रों और संबंधियों से मिलने जाते हैं। राजस्थान में इस दिन चंग की थाप पर फाग गीत और गैर नृत्य की परंपरा भी देखने को मिलती है।
होली 2027 और खाटू श्याम फाल्गुन मेला
फाल्गुन मास खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए वर्ष का सबसे बड़ा समय है। 2027 में खाटू फाल्गुन मेला 15 से 21 मार्च तक रहेगा, जिसके मुख्य दिन 18–20 मार्च (गुरुवार–शनिवार) हैं — आमलकी एकादशी (18 मार्च) इन्हीं दिनों में पड़ती है। मेले का अंतिम दिन (21 मार्च) और होलिका दहन एक ही दिन हैं, और अगले दिन होली है। यानी 2027 में मेला और होली लगभग लगातार पड़ रहे हैं।
मेले में बहुत-से श्रद्धालु निशान यात्रा के रूप में रिंगस से खाटू (लगभग 17 km) पैदल जाते हैं। सामान्य दिनों में खाटू श्याम जी मंदिर सुबह 4:30 बजे खुलता है, दोपहर 2 से 4 बजे बंद रहता है और रात 10 बजे बंद होता है; मेले के दिनों की व्यवस्था अलग हो सकती है, इसलिए दर्शन समय गाइड ज़रूर देखें।
होलिका दहन की सरल पूजा विधि
- होलिका दहन से पहले होलिका स्थल पर जल, रोली, अक्षत, फूल और कच्चा सूत अर्पित करें।
- होलिका के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें — परिक्रमा की संख्या परिवार की परंपरा के अनुसार रखें।
- नई फसल की बालियाँ, नारियल या गोबर के उपले परंपरा के अनुसार अर्पित करें।
- प्रदोष काल में स्थानीय मुहूर्त पर होलिका दहन करें और भगवान नरसिंह व भक्त प्रह्लाद का स्मरण करें।
- अगली सुबह होलिका की शांत राख का तिलक कई परिवारों में शुभ माना जाता है।
क्षेत्र के अनुसार होली की परंपराएँ
- ब्रज (मथुरा-वृंदावन-बरसाना): फुलेरा दूज से होली के आयोजन शुरू माने जाते हैं; बरसाना-नंदगाँव की लट्ठमार होली और वृंदावन के मंदिरों में फूलों की होली प्रसिद्ध है।
- राजस्थान: चंग, फाग गीत और गैर नृत्य होली की पहचान हैं। खाटू में फाल्गुन मेले के दौरान श्याम भजन संध्याएँ होती हैं।
- बंगाल व ओडिशा: होली को डोल जात्रा/डोल पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, जिसमें राधा-कृष्ण की पालकी झुलाई जाती है।
- मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र: होली के पाँचवें दिन रंग पंचमी पर रंग खेलने की परंपरा है।
होली पर सुरक्षा और स्वास्थ्य
- प्राकृतिक या हर्बल रंगों का प्रयोग करें; रासायनिक रंग त्वचा और आँखों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
- रंग खेलने से पहले चेहरे और बालों पर तेल लगाने से रंग आसानी से छूटता है।
- आँख में रंग जाए तो साफ़ पानी से धोएँ, रगड़ें नहीं; तकलीफ़ बनी रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।
- बच्चों, बुज़ुर्गों और पालतू पशुओं पर ज़बरदस्ती रंग न डालें।
- भाँग या मिलावटी पेय से बचें, और रंग खेलने के बाद वाहन न चलाएँ।
यात्रा, पूजा और तिथि से जुड़ी जरूरी बातें
- होलिका दहन का सटीक मुहूर्त शहर-विशिष्ट होता है; दूसरे शहर का समय सीधे उपयोग न करें।
- फाल्गुन मेले के दौरान खाटू की व्यवस्थाएँ, पार्किंग और मार्ग बदल सकते हैं — देखें पार्किंग जानकारी।
- धार्मिक मान्यता और लोकपरंपरा को निश्चित भौतिक परिणाम की गारंटी के रूप में न लें।
- व्रत या उपवास में स्वास्थ्य, आयु और चिकित्सकीय आवश्यकता को प्राथमिकता दें।
संबंधित उपयोगी जानकारी
होली 2027 — सामान्य प्रश्न
होली 2027 कब है?
जयपुर/राजस्थान संदर्भ में होली (धुलंडी) 22 मार्च 2027, सोमवार को है। होलिका दहन इससे एक दिन पहले, 21 मार्च 2027 (रविवार) की शाम है।
होलिका दहन 2027 किस समय होगा?
होलिका दहन 21 मार्च 2027 की शाम प्रदोष काल में होगा। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 21 मार्च शाम 6:21 बजे शुरू होकर 22 मार्च शाम 4:13 बजे तक रहेगी। सटीक मुहूर्त अपने शहर के पंचांग से देखें।
होलिका दहन और होली में क्या अंतर है?
होलिका दहन पूर्णिमा की रात अग्नि-पूजन का अनुष्ठान है, जबकि होली (धुलंडी) अगले दिन रंग-गुलाल खेलने का पर्व है। 2027 में ये क्रमशः 21 और 22 मार्च को हैं।
क्या 2027 में खाटू फाल्गुन मेला और होली साथ पड़ रहे हैं?
हाँ। खाटू फाल्गुन मेला 15–21 मार्च 2027 तक है और मुख्य दिन 18–20 मार्च हैं। मेले का अंतिम दिन होलिका दहन (21 मार्च) के साथ पड़ता है और होली अगले दिन (22 मार्च) है।
होली के आसपास खाटू श्याम जी जाने में क्या ध्यान रखें?
मेले और होली के दिनों में भीड़ बहुत अधिक रहती है। ठहरने की व्यवस्था पहले से करें, मंदिर के दोपहर 2 से 4 बजे बंद रहने के समय को ध्यान में रखें और यात्रा से पहले दर्शन व्यवस्था की नवीनतम सूचना देखें।
होली के बाद रंग पंचमी कब है?
रंग पंचमी 27 मार्च 2027, शनिवार को है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इस दिन भी रंग खेलने की परंपरा है।
पंचांग संदर्भ