पूर्णिमा कब है? अगली पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 व सूची

शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि · पूनम

पूर्णिमा कब है? अगली पूर्णिमा, तिथि समय और 2026-27 पूर्णिमा सूची

अगली पूर्णिमा — जयपुर/राजस्थान संदर्भ में भाद्रपद पूर्णिमा शनिवार, 26 सितंबर 2026 को है। पूर्णिमा हर हिंदू मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि है, जिसे राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में “पूनम” भी कहते हैं। व्रत, स्नान-दान और सत्यनारायण कथा के लिए यह तिथि विशेष मानी जाती है।

अगली पूर्णिमा26 सितंबर 2026, शनिवार
पंचांग आधारभाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा

सीधा जवाब

अगली पूर्णिमा कब है?

📅 शनिवार, 26 सितंबर 2026 — भाद्रपद पूर्णिमा   ⏳

  • 🌕 भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा — प्रारंभ: 25 सितंबर, 11:06 PM · समाप्त: 26 सितंबर, 10:18 PM
  • 🙏 पंचांग में पूर्णिमा व्रत और पूर्णिमा स्नान-दान, दोनों 26 सितंबर को दिखाए गए हैं।

📌 25 या 26 सितंबर? तिथि 25 सितंबर की देर रात शुरू होती है, इसलिए कुछ कैलेंडर में 25 तारीख भी दिख सकती है। जयपुर पंचांग के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा का पालन शनिवार, 26 सितंबर 2026 को है। इसी दिन पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत मानी जाती है।

समय जयपुर (IST) के अनुसार; तिथि का समय खगोलीय गणना से। आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

पूर्णिमा कब है?

पूर्णिमा हर हिंदू मास में एक बार आती है — शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि, जब चंद्रमा पूर्ण दिखाई देता है। इस तरह वर्ष में सामान्यतः 12 पूर्णिमाएँ होती हैं, और अधिक मास वाले वर्ष में 13। अगली पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 (शनिवार) को भाद्रपद पूर्णिमा है, और उसके बाद अश्विन मास की शरद पूर्णिमा आएगी।

हिंदू तिथि सूर्योदय से सूर्योदय तक नहीं, बल्कि सूर्य-चंद्र की स्थिति से तय होती है। इसलिए कोई तिथि किसी दिन दोपहर में शुरू होकर अगले दिन दोपहर तक चल सकती है। यदि किसी दूसरी वेबसाइट पर पूर्णिमा की तारीख एक दिन अलग दिखे, तो पहले देखें कि वहाँ कौन-सा शहर चुना गया है।

पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान का दिन अलग क्यों हो सकता है?

पंचांग में कई बार पूर्णिमा दो अलग प्रविष्टियों में दिखती है — यह गलती नहीं है:

  • पूर्णिमा व्रत: व्रत प्रायः उस दिन रखा जाता है जब चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि उपस्थित हो। इसलिए यह कभी-कभी पूर्णिमा से एक दिन पहले (चतुर्दशी के दिन) पड़ता है।
  • पूर्णिमा स्नान-दान: तीर्थ-स्नान और दान प्रायः उस दिन किए जाते हैं जब सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि हो।

उदाहरण के लिए 2026 की शरद पूर्णिमा में जयपुर पंचांग के अनुसार व्रत 25 अक्टूबर को और पूर्णिमा (स्नान-दान) 26 अक्टूबर को है, जबकि भाद्रपद पूर्णिमा में दोनों 26 सितंबर को ही हैं।

पूर्णिमा सूची — सितंबर 2026 से सितंबर 2027

पूर्णिमा व्रत पूर्णिमा (स्नान-दान) तिथि (जयपुर) संबंधित पर्व
भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 (शनि) 26 सितंबर 2026 (शनि) 25 सित. 11:06 PM – 26 सित. 10:18 PM पूर्णिमा श्राद्ध, पितृ पक्ष आरंभ
अश्विन (शरद) पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 (रवि) 26 अक्टूबर 2026 (सोम) 25 अक्टू. 11:55 AM – 26 अक्टू. 9:41 AM शरद पूर्णिमा, कोजागरी
कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 (मंगल) 24 नवंबर 2026 (मंगल) 23 नव. 11:42 PM – 24 नव. 8:23 PM कार्तिक पूर्णिमा, गुरु नानक जयंती
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 23 दिसंबर 2026 (बुध) 23 दिसंबर 2026 (बुध) 23 दिस. 10:47 AM – 24 दिस. 6:57 AM दत्तात्रेय जयंती की परंपरा
पौष पूर्णिमा 22 जनवरी 2027 (शुक्र) 22 जनवरी 2027 (शुक्र) 21 जन. 9:29 PM – 22 जन. 5:46 PM शाकंभरी जयंती की परंपरा
माघ पूर्णिमा 20 फरवरी 2027 (शनि) 20 फरवरी 2027 (शनि) 20 फर. 7:59 AM – 21 फर. 4:52 AM माघ स्नान का समापन
फाल्गुन पूर्णिमा 22 मार्च 2027 (सोम) 22 मार्च 2027 (सोम) 21 मार्च 6:21 PM – 22 मार्च 4:13 PM होलिका दहन 21 मार्च की शाम, होली 22 मार्च
चैत्र पूर्णिमा 20 अप्रैल 2027 (मंगल) 20 अप्रैल 2027 (मंगल) 20 अप्रैल 4:51 AM – 21 अप्रैल 3:56 AM हनुमान जयंती
वैशाख पूर्णिमा 20 मई 2027 (गुरु) 20 मई 2027 (गुरु) 19 मई 4:02 PM – 20 मई 4:28 PM बुद्ध पूर्णिमा
ज्येष्ठ पूर्णिमा 18 जून 2027 (शुक्र) 18 जून 2027 (शुक्र) 18 जून 4:34 AM – 19 जून 6:13 AM वट पूर्णिमा व्रत
आषाढ़ पूर्णिमा 18 जुलाई 2027 (रवि) 18 जुलाई 2027 (रवि) 17 जुलाई 6:48 PM – 18 जुलाई 9:14 PM गुरु पूर्णिमा
श्रावण पूर्णिमा 16 अगस्त 2027 (सोम) 17 अगस्त 2027 (मंगल) 16 अगस्त 10:28 AM – 17 अगस्त 12:58 PM रक्षाबंधन 17 अगस्त
भाद्रपद पूर्णिमा 15 सितंबर 2027 (बुध) 15 सितंबर 2027 (बुध) 15 सितंबर 2:48 AM – 16 सितंबर 4:32 AM पितृ पक्ष आरंभ

सारी तारीखें और तिथि-समय जयपुर पंचांग के अनुसार हैं। दूसरे शहर में तिथि का आरंभ-समाप्ति समय कुछ मिनट अलग हो सकता है।

प्रमुख पूर्णिमाओं का संक्षिप्त परिचय

शरद पूर्णिमा — व्रत 25 अक्टूबर 2026

अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। लोक-मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की चाँदनी में रखी खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ है। “कोजागरी” नाम “को जागर्ति” (कौन जाग रहा है?) से जोड़ा जाता है, और इस रात लक्ष्मी पूजन व जागरण की परंपरा है।

कार्तिक पूर्णिमा — 24 नवंबर 2026

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और दीपदान की परंपरा है। यह गुरु नानक देव जी की जयंती (प्रकाश पर्व) के रूप में भी मनाई जाती है, और वाराणसी में इस अवसर को देव दीपावली के नाम से जाना जाता है।

फाल्गुन पूर्णिमा — 22 मार्च 2027

फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 21 मार्च की शाम शुरू होती है, इसलिए होलिका दहन 21 मार्च 2027 की शाम और रंगों वाली होली 22 मार्च को है। खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए यह समय विशेष है, क्योंकि फाल्गुन मेला 2027 (15–21 मार्च, मुख्य दिन 18–20 मार्च) इसी के साथ पड़ता है। देखें फाल्गुन मेला 2027 गाइड।

पूर्णिमा व्रत की सरल विधि

  1. प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।
  2. भगवान विष्णु/सत्यनारायण और माँ लक्ष्मी की पूजा करें; कई परिवार इस दिन सत्यनारायण कथा करते हैं।
  3. दिन में परिवार की परंपरा के अनुसार फलाहार या एक समय सात्त्विक भोजन करें।
  4. शाम को चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें।
  5. सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें।
पूजा, व्रत और दान की विधि क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार बदल सकती है। स्वास्थ्य से संबंधित परिस्थिति में कठोर उपवास को आवश्यक न मानें।

पूर्णिमा और खाटू श्याम जी

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में “श्याम” नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था — देखें खाटू श्याम जी कौन हैं। कृष्ण-भक्ति की परंपरा में पूर्णिमा का विशेष स्थान है, इसलिए बहुत-से भक्त पूर्णिमा के आसपास खाटू दर्शन की योजना बनाते हैं।

खाटू श्याम जी मंदिर सामान्यतः सुबह 4:30 बजे खुलता है, दोपहर 2 से 4 बजे बंद रहता है और रात 10 बजे बंद होता है। मंगला आरती 4:45 AM, श्रृंगार आरती 7:15 AM, भोग आरती 12:30 PM, संध्या आरती 7:15 PM और शयन आरती 9:45 PM पर होती है (श्री श्याम मंदिर कमेटी का बोर्ड, सितंबर 2026)। पर्व और मेले के दिनों में व्यवस्था बदल सकती है — दर्शन समय गाइड देखें।

यात्रा, पूजा और तिथि से जुड़ी जरूरी बातें

  • व्रत और स्नान-दान का दिन अलग हो सकता है; अपने संकल्प के अनुसार तारीख चुनें।
  • तिथि-समय शहर-विशिष्ट होता है; दूसरे शहर का समय सीधे उपयोग न करें।
  • धार्मिक मान्यता और लोकपरंपरा को निश्चित भौतिक परिणाम की गारंटी के रूप में न लें।
  • व्रत या उपवास में स्वास्थ्य, आयु और चिकित्सकीय आवश्यकता को प्राथमिकता दें।

संबंधित उपयोगी जानकारी

पूर्णिमा — सामान्य प्रश्न

अगली पूर्णिमा कब है?

जयपुर/राजस्थान संदर्भ में अगली पूर्णिमा 26 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा है। तिथि 25 सितंबर रात 11:06 बजे शुरू होकर 26 सितंबर रात 10:18 बजे तक रहेगी।

पूनम और पूर्णिमा में क्या अंतर है?

कोई अंतर नहीं है। “पूनम” पूर्णिमा का ही लोकप्रचलित नाम है, जो राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में अधिक बोला जाता है।

शरद पूर्णिमा 2026 कब है?

जयपुर पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा का व्रत 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) को और पूर्णिमा स्नान-दान 26 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को है। तिथि 25 अक्टूबर सुबह 11:55 बजे से 26 अक्टूबर सुबह 9:41 बजे तक है।

कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?

कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026, मंगलवार को है। इसी दिन गुरु नानक जयंती भी मनाई जाती है।

फाल्गुन पूर्णिमा और होलिका दहन 2027 कब हैं?

फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 21 मार्च 2027 शाम 6:21 बजे शुरू होकर 22 मार्च शाम 4:13 बजे तक है। होलिका दहन 21 मार्च की शाम और होली 22 मार्च को है।

पूर्णिमा का व्रत कैसे रखें?

प्रातः स्नान कर संकल्प लें, विष्णु-लक्ष्मी पूजा या सत्यनारायण कथा करें, दिन में फलाहार रखें और चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य दें। स्वास्थ्य समस्या हो तो कठोर उपवास न रखें।

पंचांग संदर्भ

  1. Drik Panchang — Jaipur Purnima 2026
  2. Drik Panchang — Jaipur Purnima 2027


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