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बर्बरीक का परिवार — घटोत्कच, माता मौरवी और भीम से संबंध

खाटू श्याम जी मंदिर, सीकर राजस्थान — कहाँ है, इतिहास, दर्शन समय और यात्रा गाइड

बर्बरीक का परिवार महाभारत के सबसे वीर परिवारों में से एक था। बर्बरीक (बाबा खाटू श्याम) पांडव भीम के पौत्र, घटोत्कच के पुत्र और माता मौरवी (स्कंद पुराण में कामकंटकटा) के पुत्र थे। उनकी दादी हिडिम्बा थीं। नीचे इस परिवार का परिचय, हर सदस्य की कथा, बर्बरीक से उनका संबंध, और यह भी कि कौन-सा प्रसंग महाभारत से, कौन-सा पुराण से और कौन-सा लोक-परंपरा से आता है।

👨‍👩‍👦 बर्बरीक का परिवार — संक्षेप में

  • दादा: भीम (पाँच पांडवों में दूसरे)
  • दादी: हिडिम्बा
  • पिता: घटोत्कच
  • माता: मौरवी / कामकंटकटा (स्कंद पुराण)
  • श्रीकृष्ण से संबंध: पांडवों के सखा व मार्गदर्शक; बर्बरीक को “श्याम” नाम का वरदान दिया

वंश-क्रम एक नज़र में

पीढ़ी नाम परिचय
दादा-दादी भीम और हिडिम्बा भीम पांडवों में सबसे बलवान; हिडिम्बा वन की राक्षसी कन्या, जिनसे भीम का विवाह हुआ
माता-पिता घटोत्कच और मौरवी घटोत्कच भीम-हिडिम्बा के पुत्र, मायावी शक्तियों वाले योद्धा; मौरवी वीर और विदुषी कन्या
बर्बरीक बाबा खाटू श्याम तीन बाणधारी, शीश के दानी, कलियुग में “श्याम”

दादा भीम और दादी हिडिम्बा

महाभारत के अनुसार लाक्षागृह से बचकर वन में रहते हुए पांडवों का सामना राक्षस हिडिम्ब से हुआ। भीम ने हिडिम्ब को युद्ध में हराया, और हिडिम्ब की बहन हिडिम्बा ने भीम से विवाह की इच्छा जताई। माता कुंती की सहमति से भीम और हिडिम्बा का विवाह हुआ, और उनके पुत्र हुए घटोत्कच। यह प्रसंग महाभारत के आदि पर्व में है।

पिता घटोत्कच

घटोत्कच जन्म से ही असाधारण बलवान और मायावी शक्तियों वाले योद्धा थे। उन्होंने कई अवसरों पर पांडवों की सहायता की। महाभारत युद्ध में घटोत्कच ने रात के युद्ध में कौरव सेना में भारी तबाही मचाई। तब कर्ण को वह अमोघ शक्ति घटोत्कच पर चलानी पड़ी जो उसने अर्जुन के लिए बचाकर रखी थी, और घटोत्कच वीरगति को प्राप्त हुए। इस तरह उनके बलिदान से अर्जुन की रक्षा हुई। यह प्रसंग महाभारत के द्रोण पर्व में है।

ध्यान देने की बात: पिता घटोत्कच और पुत्र बर्बरीक, दोनों ने पांडवों के लिए अपने प्राण दिए। घटोत्कच ने युद्धभूमि में, और बर्बरीक ने युद्ध से पहले शीश दान करके। पढ़ें: बर्बरीक का शीश दान।

माता मौरवी (कामकंटकटा)

स्कंद पुराण की परंपरा में बर्बरीक की माता का नाम कामकंटकटा आता है, जिन्हें लोक-परंपरा में मौरवी कहा जाता है। कथा के अनुसार वे अत्यंत वीर और बुद्धिमान थीं, और उन्होंने शर्त रखी थी कि उनसे विवाह वही करेगा जो उन्हें शास्त्रार्थ और बल दोनों में परास्त करे। घटोत्कच ने यह चुनौती जीती और उनका विवाह हुआ। कथाओं के विवरण परंपरा के अनुसार अलग मिलते हैं।

लोक-परंपरा के अनुसार बर्बरीक ने युद्ध-कला माता मौरवी से ही सीखी, और माता ने ही उनसे हारने वाले पक्ष का साथ देने का वचन लिया था। इसी से बाबा “हारे का सहारा” कहलाए: हारे का सहारा — अर्थ व कथा। माता के नाम से ही बाबा का एक नाम “मोरवीनंदन” है। मंदिर कमेटी की वेबसाइट पर भी अभिवादन “जय श्री मोर्वीनंदन” से शुरू होता है।

बर्बरीक — परिवार का सबसे वीर पुत्र

बचपन से ही बर्बरीक असाधारण वीर थे। तप से उन्होंने तीन अमोघ बाण पाए, जिनसे वे अकेले युद्ध का परिणाम बदल सकते थे: तीन बाण की कथा। पर परिवार की परंपरा के अनुसार उनका सबसे बड़ा गुण वीरता नहीं, त्याग निकला। उन्होंने श्रीकृष्ण के माँगने पर अपना शीश दान कर दिया।

श्रीकृष्ण और यह परिवार

श्रीकृष्ण पांडवों के सखा, संबंधी और मार्गदर्शक थे। स्कंद पुराण की परंपरा में उन्होंने ही बर्बरीक को देवी-उपासना की दिशा दिखाई, और अंत में उन्हीं ने शीश का दान माँगकर बर्बरीक को कलियुग में “श्याम” नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। इसीलिए भक्त बाबा श्याम को श्रीकृष्ण का कलियुगी रूप मानते हैं: खाटू श्याम जी और कृष्ण का संबंध।

इस परिवार की कथा क्यों प्रेरित करती है

  • तीन पीढ़ियों का पराक्रम: भीम का बल, घटोत्कच की वीरता और बर्बरीक की अपार शक्ति।
  • बलिदान की परंपरा: घटोत्कच और बर्बरीक, दोनों ने धर्म के पक्ष के लिए प्राण दिए।
  • माता की भूमिका: मौरवी की शिक्षा और वचन ने ही बर्बरीक को “हारे का सहारा” बनाया।

परिवार से जुड़े बाबा के नाम

बाबा श्याम के कई नाम उनके परिवार और कथा से जुड़े हैं। भजनों और जयकारों में ये नाम बार-बार आते हैं:

नाम अर्थ
मोरवीनंदन माता मौरवी के पुत्र
तीन बाणधारी तप से मिले तीन अमोघ बाणों के धारक
हारे का सहारा माता को दिए “हारने वाले का साथ” के वचन से
शीश के दानी श्रीकृष्ण को शीश दान करने वाले
श्याम श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया नाम

सभी नाम: खाटू श्याम जी के 108 नाम।

स्रोत: महाभारत, पुराण और लोक-परंपरा

प्रसंग स्रोत
भीम-हिडिम्बा विवाह, घटोत्कच का जन्म महाभारत, आदि पर्व
घटोत्कच का युद्ध व वीरगति (कर्ण की शक्ति) महाभारत, द्रोण पर्व
बर्बरीक का जन्म, माता कामकंटकटा, शीश दान स्कंद पुराण, कौमारिका खंड की परंपरा
माता को “हारने वाले का साथ” का वचन लोक-परंपरा

विस्तार: स्कंद पुराण में बर्बरीक — क्या लिखा है, क्या नहीं · Who is Khatu Shyam Ji?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

❓ बर्बरीक के पिता कौन थे? (Who was Barbarika’s father?)

बर्बरीक के पिता घटोत्कच थे, जो भीम और हिडिम्बा के पुत्र थे। घटोत्कच महाभारत युद्ध में कर्ण की अमोघ शक्ति से वीरगति को प्राप्त हुए।

❓ बर्बरीक की माता का नाम क्या था? (Mother’s name)

लोक-परंपरा में मौरवी, और स्कंद पुराण की परंपरा में कामकंटकटा। इसी से बाबा को “मोरवीनंदन” कहा जाता है।

❓ खाटू श्याम जी का भीम से क्या संबंध है? (Relation to Bhima)

खाटू श्याम जी (बर्बरीक) भीम के पौत्र हैं: भीम के पुत्र घटोत्कच, और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक।

❓ क्या बर्बरीक पांडवों के परिवार से थे? (Was Barbarika a Pandava?)

हाँ, वे पांडव भीम के पौत्र थे, यानी पांडव वंश के ही थे। पर वे युद्ध में किसी पक्ष से लड़े नहीं; युद्ध से पहले ही उन्होंने शीश दान कर दिया।

Prakash Bengani
लेखक / Author
Prakash Bengani

Founder, KhatuWaleBaba.in — खाटू श्याम जी yatra का सम्पूर्ण portal। हर hotel, dharamshala और route की जानकारी local team द्वारा verified। WordPress.org पर 844 मंदिरों की Temple Directory plugin के developer।