पापांकुशा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी
पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार प्राचीन काल में विन्ध्य पर्वत के क्षेत्र में क्रोधन नामक एक शिकारी रहता था। वह हिंसक स्वभाव का था और अपना जीवन पशु-पक्षियों का शिकार करके व्यतीत करता था।
जीवनभर उसने अनेक पाप कर्म किए, लेकिन वृद्धावस्था में उसे अपने कर्मों पर पछतावा होने लगा। एक दिन वह कुछ ऋषियों के संपर्क में आया और उनसे अपने उद्धार का उपाय पूछा।
ऋषियों ने उसे आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की उपासना करने की सलाह दी।
शिकारी ने श्रद्धापूर्वक पापांकुशा एकादशी का व्रत किया, भगवान पद्मनाभ का पूजन किया और अपने पापों के लिए क्षमा मांगी।
व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो गए। मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के दूत उसे दिव्य लोक में ले गए और उसे श्रेष्ठ गति प्राप्त हुई।
इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि सच्चे मन से किया गया पश्चाताप और भगवान विष्णु की भक्ति बड़े से बड़े पापों का भी नाश कर सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?
पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।
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📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history