खाटू श्याम जी — मंदिर कहाँ है, इतिहास, दर्शन समय और यात्रा गाइड

खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान के सीकर ज़िले के खाटू (खाटूश्यामजी) नगर में है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन लगभग 17 km दूर है, जबकि सड़क मार्ग से जयपुर लगभग 80 km और सीकर शहर लगभग 43 km दूर है। यहाँ महाभारत के वीर बर्बरीक की “श्याम” रूप में पूजा होती है। मंदिर रोज़ सुबह 4:30 से रात 10 बजे तक खुला रहता है (दोपहर 2 से 4 बजे तक बंद) और सामान्य दर्शन निःशुल्क हैं।

Where is Khatu Shyam Temple? Khatu Shyam Ji Temple is in Khatu (Khatushyamji) town, Sikar district, Rajasthan — about 80 km from Jaipur and 17 km from Ringas Junction railway station. The temple worships Barbarik, grandson of Bhima from the Mahabharata, who offered his head to Shri Krishna and received the boon to be worshipped as “Shyam” in Kaliyuga. It is open daily from 4:30 AM to 10 PM (closed 2–4 PM); general darshan is free.

खाटू श्याम जी मंदिर, सीकर राजस्थान — कहाँ है, इतिहास, दर्शन समय और यात्रा गाइड

खाटू श्याम जी — एक नज़र में

मंदिर श्री खाटू श्याम जी मंदिर
स्थान खाटू (खाटूश्यामजी) नगर, ज़िला सीकर, राजस्थान — पिन 332602
निर्देशांक 27.3645° N, 75.4033° E
आराध्य देव बाबा श्याम — बर्बरीक (घटोत्कच के पुत्र, भीम के पौत्र)
अन्य नाम शीश के दानी, हारे का सहारा, खाटू नरेश, मोरवीनंदन श्याम
व्यवस्था श्री श्याम मंदिर कमेटी, खाटू
नज़दीकी रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन — लगभग 17 km
नज़दीकी हवाई अड्डा जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
सड़क दूरी जयपुर लगभग 80 km, सीकर शहर लगभग 43 km, दिल्ली (कनॉट प्लेस) लगभग 283 km
मंदिर समय सुबह 4:30 – रात 10:00, दोपहर 2:00–4:00 बंद
दर्शन शुल्क निःशुल्क — सशुल्क VIP पास नहीं
सबसे बड़ा उत्सव फाल्गुन मेला — 2027 में 18–20 मार्च
श्याम जन्मोत्सव कार्तिक शुक्ल (देवउठनी) एकादशी

स्रोत: Wikipedia (Khatu Shyam Temple और Khatoo, Rajasthan)। सड़क दूरी OpenStreetMap रूटिंग से ली गई है और शुरुआती स्थान के अनुसार कुछ किलोमीटर बदल सकती है। मंदिर समय: श्री श्याम मंदिर कमेटी का सूचना बोर्ड (सितंबर 2026)।

खाटू श्याम जी कौन हैं?

खाटू श्याम जी को महाभारत के वीर बर्बरीक का स्वरूप माना जाता है। उनके पिता घटोत्कच (भीम और हिडिम्बा के पुत्र) और माता मौरवी (कामकंटकटा) थीं। कथा के अनुसार उनके पास तीन अमोघ बाण थे, जिनसे वे अकेले युद्ध का परिणाम बदल सकते थे। कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे शीश का दान माँगा और बर्बरीक ने बिना संकोच अपना शीश दान कर दिया। भक्तों की मान्यता है कि इस महादान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे “श्याम” नाम से पूजे जाएँगे।

बर्बरीक ने माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे — इसी भाव से भक्त उन्हें “हारे का सहारा” कहते हैं। पूरी कथा पढ़ें: खाटू श्याम जी की कथा। शास्त्र और लोक-परंपरा में क्या अंतर है, यह जानने के लिए देखें: स्कंद पुराण में बर्बरीक।

तीन बाण और “तीन बाणधारी” नाम

लोक-परंपरा के अनुसार बर्बरीक ने युद्ध-कला अपनी माता मौरवी से सीखी और तपस्या से देवी (दुर्गा) से तीन अमोघ बाण प्राप्त किए। मान्यता है कि पहला बाण उन सभी लक्ष्यों को चिह्नित कर देता था जिन्हें नष्ट करना है, और दूसरा बाण उन्हें नष्ट कर देता था — इसलिए उन्हें पूरे युद्ध के लिए तीसरे बाण की आवश्यकता ही नहीं थी। इसी कारण भक्त बाबा को “तीन बाणधारी” भी कहते हैं, और खाटू में बिकने वाले निशानों व चित्रों में अक्सर तीन बाण दिखाए जाते हैं।

शीश का दान — “शीश के दानी”

कथा के अनुसार बर्बरीक ने माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में कमज़ोर (हारते हुए) पक्ष का साथ देंगे। श्रीकृष्ण जानते थे कि इस वचन के कारण वे बार-बार पक्ष बदलेंगे और अंत में केवल वे ही बचेंगे। इसलिए ब्राह्मण वेश में आकर श्रीकृष्ण ने उनसे दान में शीश माँगा। बर्बरीक ने शीश दान करने से पहले युद्ध देखने की इच्छा जताई — इसलिए उनका शीश एक ऊँचे स्थान पर रखा गया, जहाँ से उन्होंने पूरा महाभारत युद्ध देखा। यही कारण है कि खाटू में बाबा के शीश की पूजा होती है और भक्त उन्हें “शीश के दानी” कहते हैं।

बाबा के प्रमुख नाम और उनका अर्थ

नाम अर्थ / कारण
श्याम / खाटू श्याम श्रीकृष्ण के वरदान से कलियुग में “श्याम” नाम से पूजा; खाटू नगर में मंदिर होने से “खाटू श्याम”
शीश के दानी श्रीकृष्ण को अपना शीश दान करने के कारण
हारे का सहारा हारने वाले पक्ष का साथ देने के वचन के कारण; भक्त कठिन समय में बाबा को पुकारते हैं
तीन बाणधारी तीन अमोघ बाणों के कारण
मोरवीनंदन माता मौरवी के पुत्र होने के कारण
लखदातार भक्तों की मान्यता — “लाखों को देने वाले”
शास्त्र और लोक-परंपरा: बर्बरीक की कथा मुख्य रूप से स्कंद पुराण और लोक-परंपरा में मिलती है; महाभारत के मूल पाठ में उनका उल्लेख नहीं है। खाटू की भक्ति-परंपरा इसी लोक-कथा पर आधारित है। दोनों का अंतर यहाँ पढ़ें: स्कंद पुराण में बर्बरीक। गुजरात में इन्हीं को बलियादेव के रूप में पूजा जाता है।

खाटू श्याम मंदिर का इतिहास

समय घटना
1027 ई. (परंपरा के अनुसार) स्वप्न में मिले निर्देश के अनुसार स्थानीय शासक रूपसिंह चौहान ने श्याम कुंड स्थल से बर्बरीक का शीश-विग्रह प्राप्त किया और मूल मंदिर बनवाया
1675 ई. दुर्गादास माथुर की ब्रज भाषा में रचित 25 दोहों की “श्याम पच्चीसी” — इस तीर्थ का सबसे पुराना ज्ञात साहित्यिक उल्लेख (इसमें श्याम को श्रीकृष्ण रूप में वर्णित किया गया है)
1779 ई. “खाटू श्यामजी का युद्ध” — स्थानीय सरदारों ने क्षेत्र की रक्षा के लिए मुग़ल सेना का सामना किया
वर्तमान मकराना संगमरमर से बना राजस्थानी स्थापत्य शैली का मंदिर

मंदिर परिसर के पास स्थित श्याम कुंड वह स्थान माना जाता है जहाँ बाबा का शीश प्रकट हुआ। विस्तार से पढ़ें: मंदिर का इतिहास और मंदिर की वास्तुकला।

श्याम कुंड से शीश-विग्रह की प्राप्ति

परंपरा के अनुसार युद्ध के बाद बाबा का शीश खाटू की धरती में दब गया। सदियों बाद उस स्थान पर एक गाय अपने-आप दूध बहाने लगी। खुदाई में वहाँ से शीश-विग्रह प्रकट हुआ, और खाटू के तत्कालीन शासक रूपसिंह चौहान को स्वप्न में मिले निर्देश के अनुसार उसे मंदिर में स्थापित किया गया। जिस स्थान से विग्रह मिला, वहीं आज श्याम कुंड है — भक्त दर्शन से पहले या बाद में इस कुंड में स्नान करना पुण्यदायी मानते हैं।

सूरजगढ़ का निशान — 300 से अधिक वर्षों की परंपरा

फाल्गुन मेले में मंदिर के शिखर पर सबसे पहले सूरजगढ़ (झुंझुनूं) का सफ़ेद निशान चढ़ाया जाता है, जिस पर नीले घोड़े का चिह्न होता है। यह निशान सूरजगढ़ के प्राचीन मंदिर में तैयार होता है और लगभग 152 km की पदयात्रा से खाटू लाया जाता है। यह परंपरा 300 से अधिक वर्षों से चली आ रही बताई जाती है। इसके बाद ही लाखों भक्तों के केसरिया, नारंगी और लाल निशान चढ़ते हैं। अपना निशान चढ़ाने की पूरी विधि: निशान यात्रा।

वर्तमान मंदिर का स्थापत्य

आज का मंदिर सफ़ेद मकराना संगमरमर से बना है — वही पत्थर जो ताजमहल में लगा है — और इसकी बनावट पारंपरिक राजस्थानी शैली की है। गर्भगृह में बाबा का शीश-विग्रह विराजमान है, जिसका प्रतिदिन श्रृंगार होता है। भीड़ सँभालने के लिए रेलिंग वाले लंबे दर्शन-मार्ग बनाए गए हैं, जिनसे होकर भक्त गर्भगृह के सामने पहुँचते हैं।

दर्शन और आरती का समय

आरती समय
मंगला आरती सुबह 4:45
श्रृंगार आरती सुबह 7:15
भोग आरती दोपहर 12:30
संध्या आरती शाम 7:15
शयन आरती रात 9:45

मंदिर सुबह 4:30 खुलता है, दोपहर 2 से 4 बजे बंद रहता है और रात 10 बजे बंद होता है। विशेष तिलक-श्रृंगार या ग्रहण के समय इसमें बदलाव होता है; आज का समय जानने के लिए देखें: आज मंदिर खुला है या नहीं। सामान्य दर्शन निःशुल्क हैं। VIP दर्शन के नए नियमों के लिए देखें: VIP दर्शन 2026।

⭐ खाटू श्याम VIP दर्शन — क्या सच में होता है?

पहली बार खाटू जा रहे हैं? मंदिर के बाहर “VIP दर्शन” के नाम पर पैसे माँगने वालों से सावधान रहें — पहले जान लें कि असल व्यवस्था क्या है।

VIP दर्शन की पूरी सच्चाई पढ़ें →

प्रमुख उत्सव और भीड़ वाले दिन

  • फाल्गुन मेला — खाटू का सबसे बड़ा वार्षिक मेला, फाल्गुन शुक्ल एकादशी के आसपास; 2027 में 18–20 मार्च। पूरी जानकारी: फाल्गुन मेला गाइड।
  • हर शुक्ल एकादशी — श्याम भक्तों का विशेष दिन; इस दिन भारी भीड़ रहती है। तिथियाँ: एकादशी कैलेंडर।
  • देवउठनी एकादशी (2026 में 20 नवंबर) — इस दिन श्याम जन्मोत्सव मनाया जाता है।
  • निशान यात्रा — भक्त रींगस से लगभग 17 km पैदल निशान लेकर आते हैं; फाल्गुन बारस को सूरजगढ़ का निशान सबसे पहले शिखर पर चढ़ता है। पूरी विधि: निशान कैसे चढ़ाएँ।

कम भीड़ और अच्छे मौसम के लिए अक्टूबर–मार्च के सप्ताह के सामान्य दिन सबसे अच्छे रहते हैं। विस्तार: मौसम और जाने का सबसे अच्छा समय।

खाटू श्याम जी कैसे पहुँचें

माध्यम कैसे
🚆 ट्रेन रींगस जंक्शन (लगभग 17 km) तक दिल्ली, जयपुर, आगरा, अजमेर और रेवाड़ी की ओर से ट्रेनें आती हैं; वहाँ से जीप, बस या टैक्सी मिलती है। देखें: रींगस से खाटू और ट्रेन शेड्यूल
🚗 सड़क जयपुर से सीकर रोड (NH52) पर रींगस और फिर खाटू रोड से मंदिर। देखें: जयपुर से खाटू और दिल्ली से खाटू
🚌 बस जयपुर और आसपास के शहरों से रोडवेज़ व निजी बसें चलती हैं। देखें: बस शेड्यूल
✈️ हवाई जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग 94 km। देखें: जयपुर एयरपोर्ट से खाटू और हवाई जानकारी
🅿️ पार्किंग भीड़ के दिनों में वाहन प्रतिबंध लगते हैं और गाड़ी निर्धारित पार्किंग में खड़ी करनी होती है। देखें: पार्किंग जानकारी

अपने शहर से रास्ता देखें: खाटू श्याम जी कैसे पहुँचें (सभी शहर)।

पहली बार दर्शन — क्रम से पूरी प्रक्रिया

  1. दिन चुनें: एकादशी, द्वादशी, सप्ताहांत और फाल्गुन मेले में सबसे अधिक भीड़ होती है। आराम से दर्शन चाहते हैं तो सप्ताह के सामान्य दिन आएँ। तिथियाँ देखें: एकादशी कैलेंडर।
  2. समय चुनें: मंदिर सुबह 4:30 खुलता है और 4:45 पर मंगला आरती होती है। सुबह जल्दी पहुँचने पर कतार अपेक्षाकृत छोटी रहती है। दोपहर 2 से 4 बजे मंदिर बंद रहता है — इस समय पहुँचने की योजना न बनाएँ।
  3. श्याम कुंड: बहुत से भक्त पहले श्याम कुंड में स्नान या आचमन करते हैं।
  4. प्रसाद और निशान: मंदिर मार्ग की दुकानों से भोग-प्रसाद, गुलाब और निशान लिए जा सकते हैं। जूते-चप्पल निर्धारित स्थान पर जमा करें।
  5. दर्शन-मार्ग: रेलिंग वाली कतार से होकर गर्भगृह के सामने पहुँचें। भीड़ के दिनों में सामने रुकने का समय बहुत कम मिलता है, इसलिए धक्का-मुक्की न करें और सेवादारों के निर्देश मानें।
  6. दर्शन के बाद: श्याम बगीची, गोपीनाथ मंदिर और गौरीशंकर मंदिर के दर्शन करें।

एक दिन का यात्रा प्लान (जयपुर से)

समय क्या करें
सुबह जल्दी जयपुर से सीकर रोड (NH52) पर रींगस होते हुए खाटू — लगभग 80 km
सुबह श्याम कुंड, फिर मंदिर में दर्शन; भीड़ के अनुसार 1 से कई घंटे लग सकते हैं
दोपहर भोजन; मंदिर 2–4 बजे बंद रहता है, इस समय आसपास के मंदिर देखें
दोपहर बाद (विकल्प) जीण माता (लगभग 46 km) या हर्षनाथ (लगभग 45 km); या अगले दिन सालासर बालाजी (लगभग 110 km)
शाम 7:15 की संध्या आरती के लिए रुकें या जयपुर लौटें

दो दिन हों तो रात खाटू में रुककर अगली सुबह मंगला आरती के दर्शन करें — ठहरने के विकल्प नीचे दिए गए हैं।

फाल्गुन मेला 2027 — संक्षेप में

खाटू का सबसे बड़ा आयोजन फाल्गुन शुक्ल पक्ष में होने वाला फाल्गुन मेला है, जिसमें देश भर से लाखों भक्त आते हैं। 2027 में मेले के मुख्य दिन 18–20 मार्च हैं; मुख्य दिन आमलकी एकादशी (18 मार्च) है, और इसके कुछ दिन बाद होली (22 मार्च) आती है। इन दिनों रींगस से खाटू तक का मार्ग पैदल निशान-यात्रियों से भरा रहता है, वाहनों पर प्रतिबंध लगते हैं और होटल-धर्मशालाएँ पहले ही भर जाती हैं। मेले में जा रहे हैं तो बुकिंग महीनों पहले करें और पार्किंग व्यवस्था पहले से देख लें। पूरी जानकारी: फाल्गुन मेला गाइड।

मंदिर में क्या चढ़ाएँ और घर क्या ले जाएँ

भक्त बाबा को चूरमा, पेड़ा और मिश्री का भोग लगाते हैं तथा गुलाब और इत्र अर्पित करते हैं। मनोकामना के संकल्प के साथ निशान भी चढ़ाया जाता है। प्रसाद लेना और घर ले जाकर बाँटना शुभ माना जाता है। विस्तार से पढ़ें: खाटू श्याम का प्रसाद, भोग लगाने की विधि और श्याम बाबा की अर्जी।

मंदिर की बनावट और परिसर — क्या-क्या देखें

आज का खाटू श्याम मंदिर सफ़ेद मकराना संगमरमर से बना है — वही पत्थर जिससे ताजमहल बना — और इसकी शैली पारंपरिक राजस्थानी मंदिर-स्थापत्य की है। प्रचलित मान्यता के अनुसार पहला मंदिर सन् 1027 ई. में राजा रूपसिंह चौहान और रानी नर्मदा कँवर ने बनवाया; वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार सन् 1720 ई. (विक्रम संवत 1777) में दीवान अभय सिंह ने कराया, और इसी समय गर्भगृह बना व प्रतिमा स्थापित हुई।

रींगस की ओर से खाटू में प्रवेश करते समय बना विशाल तोरण द्वार यात्रियों के लिए पहचान का प्रमुख स्थान है — कई भक्त यहीं से पैदल निशान यात्रा के साथ मंदिर की ओर बढ़ते हैं, और इसके आसपास भोजनालय भी हैं (जैसे एमबी तोरण द्वार रेस्टोरेंट)।

  • जगमोहन (प्रार्थना-कक्ष): गर्भगृह के ठीक बाहर का बड़ा कक्ष, लगभग 12.3 m × 4.7 m, जिसकी दीवारों पर पौराणिक प्रसंगों के चित्र बने हैं।
  • गर्भगृह के द्वार: धातु की चमकदार चादर से मढ़े हुए हैं; यहीं से बाबा के शीश-स्वरूप के दर्शन होते हैं।
  • प्रवेश और निकास द्वार: संगमरमर के, जिनके ब्रैकेट पर फूलों की नक्काशी है।
  • श्याम कुंड: मंदिर के पास का पवित्र कुंड, जहाँ से बाबा का शीश प्रकट हुआ माना जाता है। फाल्गुन मेले में यहाँ स्नान की विशेष परंपरा है।
  • श्याम बगीची: मंदिर के पास का बगीचा, जहाँ से बाबा के श्रृंगार के लिए फूल लिए जाते हैं। इसी बगीची में परम श्याम भक्त आलूसिंह जी की समाधि है — “ॐ जय श्री श्याम हरे” आरती उन्हीं के नाम से प्रचलित है (आरती पढ़ें)।
  • गौरीशंकर मंदिर: परिसर के पास का प्राचीन शिव मंदिर — आसपास के दर्शनीय स्थल देखें।

स्रोत: Wikipedia — Khatu Shyam Temple; झाबरमल शर्मा, “खाटू श्यामजी का इतिहास”; प्रचलित मान्यताएँ। प्रारंभिक तिथि (1027 ई.) परंपरा पर आधारित है।

आसपास के दर्शनीय स्थल

ठहरना और भोजन

मंदिर के आसपास ट्रस्ट और समाजों की धर्मशालाएँ, होटल और भोजनालय हैं: धर्मशालाओं की सूची, होटलों की सूची और रेस्टोरेंट देखें। एकादशी और मेले के दिनों में पहले से बुकिंग करें।

भक्ति सामग्री

यात्रा से पहले ज़रूरी बातें

  • मंदिर में जूते बाहर उतारने होते हैं और भीड़ में मोबाइल व पर्स सँभालकर रखें। पूरे नियम: मंदिर के नियम।
  • “पैसे लेकर VIP दर्शन” का दावा करने वालों को भुगतान न करें।
  • गर्मी में पानी और सर्दी की सुबह के लिए गर्म कपड़े साथ रखें।
  • मंदिर बंद होने की किसी वायरल सूचना पर भरोसा करने से पहले उसकी तारीख और स्रोत जाँचें।

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आगे पढ़ें

स्रोत और सत्यापन

इस गाइड की जानकारी इन स्रोतों और हमारी टीम के खाटू दौरे पर आधारित है:

  • दर्शन व आरती समय — श्री श्याम मंदिर कमेटी, खाटूश्यामजी का कार्यालय बोर्ड (सितंबर 2026); कमेटी की वेबसाइट: shrishyammandir.com
  • मंदिर का इतिहास व बनावट — Wikipedia: Khatu Shyam Temple · Barbarika; विस्तार से: खाटू श्याम जी का इतिहास
  • दूरी — OpenStreetMap रूटिंग (OSRM) से सड़क दूरी; नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन, नज़दीकी एयरपोर्ट जयपुर
  • एकादशी व त्योहार तिथियाँ — Drik Panchang (जयपुर)
  • धर्मशाला व ठहरने की जानकारी — KhatuWaleBaba.in टीम द्वारा सितंबर 2026 में किया गया फ़ील्ड विज़िट

अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026 · Team Khatuwalebaba.in

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाटू श्याम जी का मंदिर कहाँ है? (Where is Khatu Shyam temple?)

राजस्थान के सीकर ज़िले के खाटू (खाटूश्यामजी) नगर में — रींगस से लगभग 17 km और जयपुर से सड़क मार्ग से लगभग 80 km।

खाटू श्याम किस ज़िले और राज्य में है? (Which district and state?)

सीकर ज़िला, राजस्थान।

खाटू श्याम का नज़दीकी रेलवे स्टेशन कौन-सा है? (Nearest railway station)

रींगस जंक्शन, लगभग 17 km।

खाटू श्याम जी कौन हैं? (Who is Khatu Shyam Ji?)

महाभारत के वीर बर्बरीक, घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र, जिन्हें भक्त श्रीकृष्ण के वरदान से “श्याम” रूप में पूजते हैं। English में पढ़ें: Who is Khatu Shyam Ji?

खाटू श्याम का कौन-सा दिन विशेष होता है? (Special day of Khatu Shyam)

हर शुक्ल एकादशी श्याम भक्तों का सबसे विशेष दिन है; कार्तिक शुक्ल (देवउठनी) एकादशी को जन्मोत्सव और फाल्गुन शुक्ल एकादशी के आसपास सबसे बड़ा मेला होता है।

खाटू श्याम मंदिर कब बना था? (When was the temple built?)

परंपरा के अनुसार मूल मंदिर 1027 ई. में रूपसिंह चौहान ने बनवाया; वर्तमान मंदिर मकराना संगमरमर से बना है।

दिल्ली से खाटू श्याम कितनी दूर है? (Distance from Delhi)

दिल्ली (कनॉट प्लेस) से सड़क मार्ग से लगभग 283 km; दूरी शुरुआती स्थान के अनुसार बदलती है। पूरी जानकारी: दिल्ली से खाटू।

क्या खाटू श्याम दर्शन के लिए शुल्क लगता है? (Entry fee)

नहीं, सामान्य दर्शन निःशुल्क हैं और कोई सशुल्क VIP पास नहीं है।

क्या बर्बरीक का उल्लेख महाभारत में है? (Is Barbarika in the Mahabharata?)

महाभारत के मूल पाठ में बर्बरीक का उल्लेख नहीं मिलता; उनकी कथा मुख्य रूप से स्कंद पुराण और लोक-परंपरा में है, जिस पर खाटू की भक्ति-परंपरा आधारित है।

फाल्गुन मेला 2027 कब है? (Falgun Mela 2027 dates)

2027 में फाल्गुन मेले के मुख्य दिन 18–20 मार्च हैं; आमलकी एकादशी 18 मार्च को है।

सूरजगढ़ का निशान क्या है? (What is the Surajgarh Nishan?)

फाल्गुन मेले में मंदिर के शिखर पर सबसे पहले चढ़ने वाला सफ़ेद निशान, जिस पर नीले घोड़े का चिह्न होता है; यह सूरजगढ़ (झुंझुनूं) से लगभग 152 km की पदयात्रा से लाया जाता है।

स्रोत: Wikipedia (Khatu Shyam Temple, Barbarika, Khatoo Rajasthan), OpenStreetMap रूटिंग (सड़क दूरी), श्री श्याम मंदिर कमेटी सूचना बोर्ड (मंदिर समय, सितंबर 2026), The Sootr (VIP नियम, सितंबर 2026)। अद्यतन: सितंबर 2026।



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