खाटू श्याम चालीसा अर्थ सहित (Khatu Shyam Chalisa Meaning)
हर चौपाई का सरल हिंदी अर्थ और चालीसा में आई कथाओं का परिचय।
श्री खाटू श्याम चालीसा को अर्थ सहित पढ़ने से पाठ केवल शब्दों का दोहराव नहीं रहता — हर पंक्ति का भाव मन में उतरता है। इस पेज पर चालीसा के दोनों दोहों और सभी 39 चौपाइयों का सरल हिंदी अर्थ दिया गया है, साथ ही उन कथाओं का परिचय जिनका चालीसा में उल्लेख है। मूल पाठ: सम्पूर्ण खाटू श्याम चालीसा।

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चालीसा की संरचना — एक नज़र में
| भाग | पंक्तियाँ | मुख्य भाव |
|---|---|---|
| आरंभिक दोहा | 1 दोहा | गुरु-वंदना और चालीसा का परिचय |
| चौपाई 1–5 | 5 | श्याम-नाम की महिमा, बर्बरीक का परिचय |
| चौपाई 6–14 | 9 | श्रीकृष्ण के नामों का गान — बाबा श्याम उन्हीं के स्वरूप |
| चौपाई 15–24 | 10 | प्रभु की अनंतता और नाम से तरे भक्तों के उदाहरण |
| चौपाई 25–34 | 10 | श्याम का स्वरूप और नाम-स्मरण का उपदेश |
| चौपाई 35–39 | 5 | खाटू में विराजमान श्याम और मुरली की लीला |
| अंतिम दोहा | 1 दोहा | मनोकामना पूर्ण करने की विनती |
आरंभिक दोहा — अर्थ
श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद।
श्याम चालीसा बणत है, रच चौपाई छंद॥
अर्थ: श्री गुरु के चरणों का ध्यान करके और सच्चिदानंद (सत्-चित्-आनंद स्वरूप) परमात्मा का स्मरण करके, चौपाई छंद में यह श्याम चालीसा रची जा रही है। (“बणत है” राजस्थानी बोली का रूप है — अर्थात् “बनती है / रची जाती है”।)
चौपाई 1–5 — श्याम-नाम की महिमा और बर्बरीक
| # | चौपाई | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | श्याम-श्याम भजि बारंबारा। सहज ही हो भवसागर पारा॥ | बार-बार “श्याम-श्याम” का भजन करने से मनुष्य सहज ही संसार रूपी सागर को पार कर जाता है। |
| 2 | इन सम देव न दूजा कोई। दिन दयालु न दाता होई॥ | इनके समान कोई दूसरा देवता नहीं है; न इनके जैसा दीनों पर दया करने वाला है, न ऐसा दाता। |
| 3 | भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया। कही भीम का पौत्र कहलाया॥ | भीम के पुत्र (घटोत्कच) और अहिलावती (मौरवी) से जन्मे बर्बरीक भीम के पौत्र कहलाए। |
| 4 | यह सब कथा कही कल्पांतर। तनिक न मानो इसमें अंतर॥ | यह कथा अलग-अलग कल्पों (युग-चक्रों) में कही गई है; इनमें ज़रा भी भेद न मानो — सब एक ही प्रभु की लीला है। |
| 5 | बर्बरीक विष्णु अवतारा। भक्तन हेतु मनुज तन धारा॥ | बर्बरीक भगवान विष्णु के ही स्वरूप हैं, जिन्होंने भक्तों के लिए मनुष्य शरीर धारण किया। |
चौपाई 3 में बर्बरीक की वंश-परंपरा है — वे भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र हैं; लोक-परंपरा में माता का नाम अहिलावती भी मिलता है (अन्य कथाओं में मौरवी)। चौपाई 5 का भाव है कि बाबा श्याम को भक्त विष्णु/कृष्ण का ही स्वरूप मानते हैं — इसी से आगे की चौपाइयों में कृष्ण के नाम आते हैं। पूरी कथा: खाटू श्याम जी की कथा।
चौपाई 6–14 — श्रीकृष्ण के नाम
| # | चौपाई | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 6 | बासुदेव देवकी प्यारे। जसुमति मैया नंद दुलारे॥ | वे वसुदेव-देवकी के प्यारे पुत्र और यशोदा मैया व नंद बाबा के दुलारे श्रीकृष्ण ही हैं। |
| 7 | मधुसूदन गोपाल मुरारी। वृजकिशोर गोवर्धन धारी॥ | मधु दैत्य का वध करने वाले मधुसूदन, गायों के पालक गोपाल, मुर राक्षस के शत्रु मुरारी, व्रज के किशोर और गोवर्धन पर्वत उठाने वाले। |
| 8 | सियाराम श्री हरि गोबिंदा। दिनपाल श्री बाल मुकुंदा॥ | वही सीता-राम, श्री हरि और गोविंद हैं; दीनों के पालक और बाल मुकुंद हैं। |
| 9 | दामोदर रण छोड़ बिहारी। नाथ द्वारिकाधीश खरारी॥ | ऊखल से बँधे दामोदर, रणछोड़, बिहारी, द्वारिका के नाथ द्वारिकाधीश और खर राक्षस का वध करने वाले (राम रूप) खरारी। |
| 10 | राधाबल्लभ रुक्मणि कंता। गोपी बल्लभ कंस हनंता॥ | राधा के प्रिय, रुक्मिणी के पति, गोपियों के प्रिय और कंस का संहार करने वाले। |
| 11 | मनमोहन चित चोर कहाए। माखन चोरि-चारि कर खाए॥ | मन को मोह लेने वाले, चित्त चुराने वाले कहलाए, जिन्होंने माखन चुरा-चुराकर खाया। |
| 12 | मुरलीधर यदुपति घनश्यामा। कृष्ण पतित पावन अभिरामा॥ | बाँसुरी धारण करने वाले, यदुवंश के स्वामी, बादल जैसे श्यामवर्ण; गिरे हुओं को पवित्र करने वाले सुंदर कृष्ण। |
| 13 | मायापति लक्ष्मीपति ईशा। पुरुषोत्तम केशव जगदीशा॥ | माया के स्वामी, लक्ष्मी के पति, ईश्वर, पुरुषोत्तम, केशव और जगत के स्वामी। |
| 14 | विश्वपति जय भुवन पसारा। दीनबंधु भक्तन रखवारा॥ | संसार के स्वामी, जिनका विस्तार सारे भुवनों में है — उनकी जय; वे दीनों के बंधु और भक्तों के रक्षक हैं। |
इन नौ चौपाइयों में लगभग 40 नाम आते हैं — इसलिए कई भक्त इन्हें नामावली की तरह धीरे-धीरे पढ़ते हैं। बाबा श्याम के अपने नामों के लिए देखें: 11 नाम और 108 नाम।
चौपाई 15–24 — प्रभु की अनंतता और नाम से तरे भक्त
| # | चौपाई | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 15 | प्रभु का भेद न कोई पाया। शेष महेश थके मुनिराया॥ | प्रभु का रहस्य कोई नहीं जान पाया; शेषनाग, महेश (शिव) और बड़े-बड़े मुनि भी थक गए। |
| 16 | नारद शारद ऋषि योगिंदरर। श्याम-श्याम सब रटत निरंतर॥ | नारद, सरस्वती (शारदा), ऋषि और योगीश्वर — सब निरंतर “श्याम-श्याम” रटते रहते हैं। |
| 17 | कवि कोदी करी कनन गिनंता। नाम अपार अथाह अनंता॥ | करोड़ों कवि भी उनके नाम नहीं गिन सकते — उनके नाम अपार, अथाह और अनंत हैं। |
| 18 | हर सृष्टी हर सुग में भाई। ये अवतार भक्त सुखदाई॥ | हे भाई, हर सृष्टि और हर युग में ये अवतार भक्तों को सुख देने वाले हैं। |
| 19 | ह्रदय माहि करि देखु विचारा। श्याम भजे तो हो निस्तारा॥ | अपने हृदय में विचार करके देखो — श्याम का भजन करने से ही उद्धार होता है। |
| 20 | कौर पढ़ावत गणिका तारी। भीलनी की भक्ति बलिहारी॥ | (तोते को) राम-नाम पढ़ाते हुए गणिका का उद्धार हो गया; भीलनी (शबरी) की भक्ति पर तो प्रभु बलिहारी गए। |
| 21 | सती अहिल्या गौतम नारी। भई श्रापवश शिला दुलारी॥ | गौतम ऋषि की पत्नी सती अहिल्या श्राप के कारण शिला बन गई थीं। |
| 22 | श्याम चरण रज चित लाई। पहुंची पति लोक में जाही॥ | प्रभु के चरणों की धूल को मन से स्वीकार कर (उनके स्पर्श से) वे मुक्त होकर पति-लोक पहुँच गईं। |
| 23 | अजामिल अरु सदन कसाई। नाम प्रताप परम गति पाई॥ | अजामिल और सदन कसाई ने भगवान के नाम के प्रताप से परम गति पाई। |
| 24 | जाके श्याम नाम अधारा। सुख लहहि दुःख दूर हो सारा॥ | जिसका आधार श्याम-नाम है, वह सुख पाता है और उसके सारे दुःख दूर हो जाते हैं। |
इन चौपाइयों में आई कथाएँ
- गणिका: प्रचलित भक्ति-कथा के अनुसार एक गणिका अपने पाले हुए तोते को “राम” नाम पढ़ाती थी; नाम के प्रताप से उसका उद्धार हुआ।
- भीलनी (शबरी): रामायण की भक्त शबरी, जिसके जूठे बेर प्रभु राम ने प्रेम से खाए।
- अहिल्या: गौतम ऋषि की पत्नी, जो श्राप से शिला बनीं और श्रीराम के चरण-स्पर्श से मुक्त हुईं।
- अजामिल: भागवत पुराण की कथा — मरते समय पुत्र “नारायण” को पुकारने मात्र से यमदूतों से मुक्त हुआ।
- सदन कसाई: संत सदना — कसाई का काम करते हुए भी भगवान के भक्त रहे; भक्तमाल परंपरा में उनका उल्लेख है।
इन सबका एक ही संदेश है — नाम-स्मरण जाति, कर्म या अतीत नहीं देखता, केवल भाव देखता है।
चौपाई 25–34 — श्याम का स्वरूप और नाम-स्मरण
| # | चौपाई | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 25 | श्याम सलोवन है अति सुंदर। मोर मुकुट सिर तन पीतांबर॥ | सलोने श्याम अत्यंत सुंदर हैं — सिर पर मोर-मुकुट और शरीर पर पीतांबर है। |
| 26 | गले बैजंती माल सुहाई। छवि अनूप भक्तन मान भाई॥ | गले में वैजयंती माला शोभा देती है; उनकी अनुपम छवि भक्तों के मन को भाती है। |
| 27 | श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती। श्याम दुपहरि कर परभाती॥ | दिन-रात “श्याम-श्याम” का स्मरण करो — दोपहर में भी और प्रभात में भी। |
| 28 | श्याम सारथी जिस रथ के। रोड़े दूर होए उस पथ के॥ | जिस रथ के सारथी श्याम हों (जैसे अर्जुन के), उस मार्ग की सारी बाधाएँ दूर हो जाती हैं। |
| 29 | श्याम भक्त न कही पर हारा। भीर परि तब श्याम पुकारा॥ | श्याम का भक्त कहीं नहीं हारता; जब भी संकट पड़ा, उसने श्याम को पुकारा। |
| 30 | रसना श्याम नाम रस पी ले। जी ले श्याम नाम के ही ले॥ | हे जीभ, श्याम-नाम का रस पी ले; श्याम-नाम के सहारे ही जी ले। |
| 31 | संसारी सुख भोग मिलेगा। अंत श्याम सुख योग मिलेगा॥ | (भक्त को) संसार के सुख भी मिलेंगे और अंत में श्याम के सान्निध्य का आनंद भी। |
| 32 | श्याम प्रभु हैं तन के काले। मन के गोरे भोले-भाले॥ | प्रभु श्याम शरीर से साँवले हैं, पर मन के उजले और भोले-भाले हैं। |
| 33 | श्याम संत भक्तन हितकारी। रोग-दोष अध नाशे भारी॥ | श्याम संतों और भक्तों का हित करने वाले हैं; वे रोग, दोष और भारी पापों (अघ) का नाश करते हैं। |
| 34 | प्रेम सहित जब नाम पुकारा। भक्त लगत श्याम को प्यारा॥ | जब भक्त प्रेम से नाम पुकारता है, तब वह श्याम को प्यारा लगता है। |
चौपाई 28 (“श्याम सारथी जिस रथ के”) महाभारत की ओर संकेत है, जहाँ श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने। चौपाई 29 का “श्याम भक्त न कही पर हारा” ही “हारे का सहारा” भाव का मूल है।
चौपाई 35–39 — खाटू में श्याम
| # | चौपाई | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 35 | खाटू में हैं मथुरावासी। पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी॥ | मथुरा के वासी (श्रीकृष्ण) ही खाटू में विराजमान हैं — वे पूर्ण, अविनाशी परब्रह्म हैं। |
| 36 | सुधा तान भरि मुरली बजाई। चहु दिशि जहां सुनी पाई॥ | उन्होंने अमृत-सी तान भरकर मुरली बजाई, जो चारों दिशाओं में सुनाई दी। |
| 37 | वृद्ध-बाल जेते नारि नर। मुग्ध भये सुनि बंशी स्वर॥ | बूढ़े, बच्चे, स्त्री-पुरुष — जितने भी थे, बाँसुरी का स्वर सुनकर मुग्ध हो गए। |
| 38 | हड़बड़ कर सब पहुंचे जाई। खाटू में जहां श्याम कन्हाई॥ | सब जल्दी-जल्दी वहाँ पहुँच गए, खाटू में जहाँ श्याम कन्हाई हैं। |
| 39 | जिसने श्याम स्वरूप निहारा। भव भय से पाया छुटकारा॥ | जिसने श्याम के स्वरूप के दर्शन किए, उसे संसार के भय से छुटकारा मिल गया। |
इन चौपाइयों में भाव है कि मथुरा के कन्हैया ही खाटू में विराजते हैं, और जिसने उनके दर्शन किए वह भय-मुक्त हुआ। खाटू दर्शन की योजना: दर्शन समय · आरती
अंतिम दोहा — अर्थ
श्याम सलोने संवारे, बर्बरीक तनुधार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार॥
अर्थ: हे सलोने साँवरे श्याम, जिन्होंने बर्बरीक का शरीर धारण किया — भक्त की इच्छा पूरी करो, देर मत लगाओ।
अर्थ सहित पाठ कैसे करें
- पहले दिन पूरी चालीसा अर्थ के साथ धीरे-धीरे पढ़ें।
- अगले दिनों में केवल मूल पाठ करें, पर हर खंड के बाद उसका भाव याद करें।
- चौपाई 6–14 (कृष्ण के नाम) को नामावली की तरह, हर नाम पर रुककर पढ़ें।
- नियम और समय: पाठ के नियम · कब और कैसे पढ़ें
FAQ — खाटू श्याम चालीसा अर्थ
खाटू श्याम चालीसा में कितनी चौपाइयाँ हैं? (How many chaupais?)
प्रचलित पाठ में आरंभ और अंत में एक-एक दोहा और बीच में 39 चौपाइयाँ हैं।
चालीसा में श्रीकृष्ण के नाम क्यों हैं? (Why Krishna’s names?)
क्योंकि भक्त बाबा श्याम को श्रीकृष्ण का ही स्वरूप मानते हैं — चौपाई 5 में बर्बरीक को विष्णु-अवतार और चौपाई 35 में “खाटू में हैं मथुरावासी” कहा गया है।
“बणत है” का क्या अर्थ है? (Meaning of “banat hai”)
यह राजस्थानी बोली का रूप है — “बनती है / रची जाती है”।
सदन कसाई कौन थे? (Who was Sadan Kasai?)
संत सदना — कसाई का काम करने वाले एक भक्त, जिनका नाम भक्तमाल परंपरा में नाम-भक्ति के उदाहरण के रूप में आता है।
क्या अर्थ जाने बिना पाठ करना ठीक है? (Is reading without meaning okay?)
हाँ, श्रद्धा से किया गया पाठ भी भक्ति है; पर अर्थ जानने से मन अधिक एकाग्र होता है।
अर्थ KhatuWaleBaba.in द्वारा सरल हिंदी में लिखे गए हैं; कथा-संदर्भ: रामायण, श्रीमद्भागवत पुराण (अजामिल), भक्तमाल परंपरा | अद्यतन: सितंबर 2026
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