Home एकादशी कैलेंडर रमा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

रमा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक नवम्बर 5, 2026 (बृहस्पतिवार)
🗓️ तिथि कार्तिक, कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ नव॰ 04, 11:03 AM
⏰ समाप्त नव॰ 05, 10:35 AM

1. दशमी तिथि से तैयारी

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • ब्रह्मचर्य एवं संयम का पालन करें।
  • तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें तथा स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीलक्ष्मीनारायणप्रीत्यर्थं रमा एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करें

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, अक्षत, पुष्प एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप और दीप प्रज्वलित करें।
  • फल, मिष्ठान एवं नैवेद्य अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

6. कथा एवं भजन

  • रमा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • श्रीसूक्त एवं लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
  • भजन एवं हरिनाम संकीर्तन करें।

7. दान-पुण्य करें

इस दिन अन्न, वस्त्र, दीपदान, गौसेवा और जरूरतमंदों की सहायता का विशेष महत्व है।

8. द्वादशी को पारण

द्वादशी तिथि में शुभ समय पर व्रत का पारण करें।


रमा एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम एवं श्रीसूक्त का पाठ करें।
✅ दीपदान करें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ भजन, कीर्तन एवं सत्संग करें।


रमा एकादशी पर क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन न करें।
❌ झूठ, निंदा और अपशब्दों से बचें।
❌ क्रोध एवं विवाद न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रमा एकादशी किस महीने में आती है?
रमा एकादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
रमा एकादशी किस देवी से संबंधित है?
यह माता महालक्ष्मी (रमा) और भगवान विष्णु को समर्पित है।
रमा एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा मुचुकुन्द, उनकी पुत्री चन्द्रभागा और राजकुमार शोभन से संबंधित है।
रमा एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
धन, सौभाग्य, पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना।
क्या महिलाएं रमा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय के भीतर पारण करना चाहिए।
रमा एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
माता लक्ष्मी की कृपा, धन-समृद्धि, पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति।
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