Home एकादशी कैलेंडर पौष पुत्रदा एकादशी 2026 | व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, मंत्र और पारण समय

पौष पुत्रदा एकादशी 2026 | व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, मंत्र और पारण समय

पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है और विशेष रूप से संतान सुख, संतान की उन्नति, स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए की जाती है।

📅 दिनांक Jan 25 (रविवार)
🗓️ तिथि पौष, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ जन॰ 25, 12:10 PM
⏰ समाप्त जन॰ 26, 09:43 AM

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

प्राचीन काल में भद्रावती नगरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी पत्नी का नाम शैव्या था। राजा और रानी अत्यंत धर्मात्मा, दानी एवं प्रजावत्सल थे, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी।

संतान न होने के कारण राजा अत्यंत दुखी रहते थे। एक दिन वे चिंतित होकर वन की ओर चले गए। घूमते-घूमते वे एक सुंदर सरोवर के पास पहुंचे, जहां अनेक ऋषि-मुनि तपस्या कर रहे थे।

राजा ने विनम्रतापूर्वक उनका अभिवादन किया और अपने दुःख का कारण बताया।

ऋषियों ने कहा—

“आज पौष शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी है। यदि आप श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करें और इसका पुण्य अपनी संतान प्राप्ति की कामना के लिए समर्पित करें, तो आपकी इच्छा अवश्य पूर्ण होगी।”

राजा ने विधिपूर्वक पुत्रदा एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से कुछ समय बाद रानी शैव्या ने एक तेजस्वी एवं गुणवान पुत्र को जन्म दिया।

इस प्रकार पुत्रदा एकादशी के प्रभाव से राजा की संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण हुई।


व्रत में क्या करें?

✅ भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ ब्राह्मण एवं जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
✅ संतान की मंगल कामना से प्रार्थना करें।


व्रत में क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ क्रोध, झूठ और अपशब्दों से बचें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन का सेवन न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।
❌ लहसुन-प्याज से परहेज करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • दूध
  • दही
  • फल
  • मखाना
  • साबूदाना
  • सिंघाड़े का आटा
  • कुट्टू का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

पुत्रदा एकादशी के मंत्र

मूल मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

श्री हरि मंत्र

ॐ विष्णवे नमः॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुत्रदा एकादशी किसके लिए की जाती है?
संतान प्राप्ति, संतान के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए।
पुत्रदा एकादशी वर्ष में कितनी बार आती है?
पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है—एक पौष शुक्ल पक्ष में और दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष में।
क्या अविवाहित व्यक्ति भी यह व्रत कर सकते हैं?
हाँ, भगवान विष्णु की कृपा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए कोई भी श्रद्धालु यह व्रत कर सकता है।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय के भीतर करना चाहिए।
क्या महिलाएं पुत्रदा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं एवं पुरुष दोनों यह व्रत कर सकते हैं।
पुत्रदा एकादशी का मुख्य फल क्या है?
संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि, भगवान विष्णु की कृपा और पापों से मुक्ति।
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