मोक्षदा / वैकुण्ठ एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, वैकुण्ठ द्वार, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी ⭐
पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में गोकुल नगर में राजा वैखानस राज्य करते थे। वे धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक थे।
एक रात राजा ने स्वप्न में अपने दिवंगत पिता को नरक में कष्ट भोगते हुए देखा। यह देखकर वे अत्यंत व्याकुल हो गए। अगले दिन उन्होंने ऋषियों और विद्वानों से इसका कारण और समाधान पूछा।
ऋषियों ने उन्हें महर्षि पर्वत के आश्रम में जाने की सलाह दी। महर्षि पर्वत ने अपनी दिव्य दृष्टि से ज्ञात किया कि राजा के पिता ने पूर्व जन्म में कुछ अनुचित कर्म किए थे, जिसके कारण उन्हें कष्ट भोगना पड़ रहा था।
महर्षि ने राजा वैखानस को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य अपने पिता को समर्पित करने का निर्देश दिया।
राजा ने श्रद्धा और भक्ति के साथ मोक्षदा एकादशी का व्रत किया और व्रत का समस्त पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दिया।
व्रत के प्रभाव से उनके पिता को नरक से मुक्ति मिली और उन्हें दिव्य लोक की प्राप्ति हुई।
इसी कारण इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?
पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।
📅 अन्य एकादशी 2026
📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history