Home एकादशी कैलेंडर योगिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

योगिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक जुलाई 10, 2026 (शुक्रवार)
🗓️ तिथि आषाढ़, कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ जुलाई 10, 08:16 AM
⏰ समाप्त जुलाई 11, 05:22 AM

पद्म पुराण के अनुसार स्वर्गलोक में भगवान कुबेर के उद्यान की देखभाल हेममाली नामक यक्ष करता था। उसका कार्य प्रतिदिन मानसरोवर से पुष्प लाकर भगवान शिव की पूजा के लिए प्रस्तुत करना था।

हेममाली अपनी पत्नी विशालाक्षी से अत्यधिक प्रेम करता था। एक दिन वह पत्नी के साथ समय बिताने में इतना व्यस्त हो गया कि भगवान शिव की पूजा के लिए पुष्प समय पर नहीं पहुंचा सका।

जब कुबेर को इस बात का पता चला तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने हेममाली को शाप दे दिया कि वह स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर कोढ़ (कुष्ठ रोग) से पीड़ित होकर कष्टमय जीवन बिताए।

शाप के प्रभाव से हेममाली पृथ्वी पर आ गया और अनेक वर्षों तक दुख भोगता रहा।

एक दिन वह हिमालय पर्वत पर तपस्या कर रहे मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसकी दुःखभरी कथा सुनी और उसे आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

हेममाली ने श्रद्धापूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से वह शाप और रोग से मुक्त हो गया तथा पुनः अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त कर स्वर्ग लौट गया।

यह कथा बताती है कि योगिनी एकादशी का व्रत गंभीर पापों और कष्टों से भी मुक्ति दिलाने की शक्ति रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगिनी एकादशी किस महीने में आती है?
योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
योगिनी एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी पापों से मुक्ति, रोगों के निवारण और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।
योगिनी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा कुबेर के सेवक हेममाली और उनकी पत्नी विशालाक्षी से संबंधित है।
योगिनी एकादशी पर किस देवता की पूजा की जाती है?
इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा की जाती है।
क्या महिलाएं योगिनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या योगिनी एकादशी पर चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
योगिनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
पापों का नाश, रोगों से मुक्ति, भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति।
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